यमन के हूती विद्रोही अमेरिका और उसके मित्र देशों की कार्रवाई से डर जाएंगे?

    • Author, जेरमी बोवेन
    • पदनाम, बीबीसी इंटरनेशनल एडिटर

अब इस बात को कहने का कोई मतलब नहीं है कि ग़ज़ा में जारी युद्ध मध्य पूर्व के दूसरे इलाकों में फैल जाएगा. ऐसा पहले ही हो चुका है.

वहां जो कुछ हो रहा है, उस पर काबू पाने की उम्मीदें इस तथ्य पर टिकी हैं कि क्षेत्रीय युद्ध की सबसे खराब स्थिति की तुलना में यह अभी भी इसका स्तर अपेक्षाकृत कम है.

यमन में हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी और ब्रिटिश हमले उचित नहीं हैं, जैसा कि लंदन में मंत्रियों का सुझाव है, जहाज़ों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता को लेकर.

वे ग़ज़ा की घटनाओं से सीधे जुड़े हुए हैं. वे इस क्षेत्र में बढ़ते संकट का प्रतिनिधित्व करते हैं.

हूतियों का जहाज़ों पर हमला

हूतियों ने तुरंत जवाब देने की कसम खाई है. यह भी पूरी तरह से संभव है कि इराक़ और सीरिया में ईरान समर्थक मिलिशिया इलाके में अमेरिकी बलों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई तेज़ कर दें.

अगर स्थिति और तनावपूर्ण होती है और अमेरिकी सेना जवाबी कार्रवाई करती है, तो इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच युद्ध को अमेरिकी कूटनीतिक प्रयास के ज़रिए टालना कठिन होगा. हिज़बुल्लाह लेबनान की मिलिशिया और राजनीतिक आंदोलन है, जिसे ईरान का समर्थन हासिल है.

हूतियों को ईरान से उन्नत हथियार मिल रहे हैं. हूती विद्रोहियों को ईरान के प्रॉक्सी की जगह उसके सहयोगी के रूप में देखना ज़्यादा अच्छा होगा.

मैंने यमन में हूतियों के साथ काफी लंबा समय बिताया है. वे अत्यधिक स्वतंत्र विचारधारा वाले लोग हैं. उन्हें अमेरिकियों के साथ संघर्ष पसंद आएगा. वे इस युद्ध का हिस्सा बनना चाहते हैं. जो कुछ भी हो रहा है वह हूती और इस्लामिक गणतंत्र ईरान के हिसाब से ठीक है.

ईरान ने अपनी क्षमताओं और हूतियों की मारक क्षमता को बढ़ा दिया है. इसमें एंटी-शिप मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं, जो उन्होंने इसराइल पर दागी हैं. उनके पास हमलावर ड्रोन भी हैं. ये सब वैसे ही हैं, जैसा वह यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में रूस को आपूर्ति करता है. वे हथियारों से अच्छी तरह से लैस हैं.

दिसंबर में एक जहाज़ को अगवा कर हूती अपने बंदरगाह पर ले गए. उन्होंने जहाज़ों पर गोलीबारी कर उन्हें नुकसान भी पहुंचाया. लेकिन उन्होंने किसी जहाज़ को डुबोया नहीं है.

शिपिंग का नया रास्ता

वे शीपिंग कंपनियां जो लाल सागर के मुहाने पर बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के ज़रिए अपना माल ले जाना चाहती हैं, वे नहीं चाहतीं कि दुश्मन ताकतें उन पर गोलीबारी करें.

दरअसल इन जोखिमों के कारण बीमा की लागत काफी बढ़ जाएगी. यही कारण है कि बहुत सी कंपनियां अब स्वेज़ नहर का प्रयोग करने की जगह अफ्रीका के पश्चिमी तट और केप ऑफ गुड होप के आसपास से जाना पसंद कर रही हैं. यह एशिया और यूरोप के बीच का शॉर्टकट है.

हूती विद्रोहियों का 2014 से राजधानी सना और लाल सागर के तट समेत यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है.

साल 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में एक गठबंधन ने हूतियों को उखाड़ फेंकने के लिए एक युद्ध किया. इसमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल था.

सऊदी अरब का कहना था कि यमन के गृह युद्ध में हस्तक्षेप देश की वैध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को फिर से स्थापित करने के लिए था, जिसे हूतियों ने उखाड़ फेंका था.

लेकिन यह हस्तक्षेप शुरू होने के कुछ दिन बाद मैंने एक बहुत वरिष्ठ सऊदी से बात की. उन्होंने मुझे बताया कि यह ईरान का वहां काम करने से रोकने के लिए किया गया हस्तक्षेप था. यमन की सीमा सऊदी अरब से लगती है.

सऊदी अरब ने 2015 से युद्धविराम लागू होने से एक साल पहले तक हूतियों पर बमबारी की. इसलिए हमलों के नए दौर से उन्हें डरा पाने की संभावना नहीं है. वे इन हमलों के आदी हो चुके हैं.

हूतियों पर हमले से क्या होगा?

मुझे नहीं लगता कि हवाई हमलों का एक दौर भी उन्हें इससे ज्यादा सोचने पर मजबूर करेगा कि हां, हम सही रास्ते पर हैं.

वे अमेरिका और इसराइल को पसंद करने वाले उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए एक निडर प्रतिरोध के रूप में देखा जाना चाहते हैं.

हूतियों ने कहा है कि वे ग़ज़ा में युद्ध, नागरिकों की हत्या और इसराइल की ओर से खाने और जीवित रहने के लिए ज़रूरी सामान की आपूर्ति पर लगाई गई पाबंदियों की वजह से लाल सागर में ये हमले कर रहे हैं.

उनका कहना है कि अगर ग़ज़ा में युद्ध खत्म हो गया और राहत सामग्री की आपूर्ति की इजाज़त दी गई तो वे एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन के लिए खतरा नहीं बनेंगे.

इसराइल को दिए जा रहे अमेरिका और ब्रिटेन के समर्थन के कुछ आलोचकों का कहना है कि ग़ज़ा में तत्काल युद्धविराम हूती हमलों को रोकने के लिए बमबारी से कहीं बेहतर विकल्प होगा.

लेकिन अगर युद्धविराम के बाद भी हूतियों का हमला जारी रहता है तो उनके खिलाफ हवाई कार्रवाई की वैधता बढ़ जाएगी.

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका और ब्रिटेन की यह कार्रवाई हूतियों के साथ हालात को खत्म करने की जगह बढ़ा सकती है.

पिछले नवंबर में जब हूतियों ने यमन तट पर व्यापारिक जहाजों पर पहली बार हमला किया था तो मैंने उनके संगठन के प्रमुख सदस्यों में से एक मोहम्मद अली अल हूती से बातचीत की थी. उस समय वो बहुत उद्दंड थे. मुझे पूरा यकीन है कि हूती अभी भी उद्दंड बने रहेंगे.

वे यह दिखाने के लिए कि वे उद्दंड और अजेय हैं तो और हमले करेंगे.

क्या बमबारी के आदी हैं हूती?

साल 2015 से सऊदी अरब की ओर से की गई नियमित बमबारी से भी उनकी क्षमता पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है. यमन एक पहाड़ी देश है. बमबारी को लेकर उनके अनुभव को देखते हुए इस बात की संभावना है कि उन्होंने चीजों को छिपाने की कोशिश की होगी.

ईरान ने अपनी ओर से भेजे गए हथियारों को चलाने में मदद करने के लिए सलाहकारों और प्रशिक्षकों को शायद यमन भेजा है. उन्होंने भी इन हमलों से बचने के तरीकों पर गौर किया होगा.

यमन से जिस तरह के हथियार वे निकल रहे हैं, उन्हें देखकर हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ईरान ने हूतियों के शस्त्रागार को किस तरह उन्नत बनाया है. वो ज़्यादा सटीक, और ज़्यादा घातक हैं. इसलिए वो ज़्यादा खतरा हैं.

पिछले महीने जब हूतियों ने एक व्यापारिक जहाज़ पर कब्ज़ा जमाया था. इस हमले के वीडियो में अच्छी तरह से प्रशिक्षित कमांडो एक हेलीकॉप्टर से उतरते नज़र आ रहे थे. वे आमतौर पर टीवी पर नज़र आने वाली उन तस्वीरों से बिल्कुल अलग थे, जिनमें वे कलाश्निकोव लहराते हुए फटे-पुराने कपड़े पहने नज़र आते थे.

अमेरिका और ब्रिटेन जिस ताकत का उपयोग कर सकते हैं, उसकी उनसे कोई तुलना नहीं है, लेकिन इस तरह के युद्ध में मुद्दा यह नहीं है.

इस पूरे इलाके में हूतियों के समर्थक हैं, अगर वे किसी भी तरह से जहाजों को धमकी देने और उन पर गोलीबारी जारी रखने में सक्षम रहते हैं तो वे अपने समर्थकों को संकेत देंगे कि वे पश्चिम के आगे झुके नहीं हैं.

अगर हूतियों ने वैसा नहीं किया, जैसा कहा गया है तो अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से अधिक कार्रवाई तय है.

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