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यमन: हूती विद्रोही कौन हैं और वो लाल सागर में इसराइल के जहाजों को क्यों बना रहे हैं निशाना
यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से होकर इसराइल जाने वाले सभी जहाज़ों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है.
नवंबर में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक मालवाहक जहाज़ को हाइजैक कर लिया था.
इस जहाज़ के मालिक का संबंध इसराइल से हो सकता है. पिछले दो महीनों में हूती विद्रोहियों ने यहां रॉकेट और ड्रोन से कई व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बनाया है.
हमास के हमले के बाद सात अक्टूबर को ग़ज़ा पर इसराइल के जवाबी हमलों की शुरुआत के बाद से ही हूती विद्रोहियों ने इसराइल की ओर कई मिसाइल और ड्रोन छोड़े हैं.
अमेरिका का कहना है कि लाल सागर में मौजूद उसके युद्धपोतों ने इनमें से कुछ मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया था, जबकि कुछ लाल सागर में मिस्र की समुद्री सीमा में गिर गए.
नवंबर 2023 में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक कार्गो शिप अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. उनका कहना था कि ये इसराइल का है. वे इसे यमन के तट पर एक जगह ले गए थे.
इसराइल का कहना है कि न तो ये जहाज़ इसराइल का था और न ही इसके क्रू का कोई सदस्य इसराइली था. लेकिन अपुष्ट रिपोर्टें बताती हैं कि इस जहाज़ का मालिक एक इसराइली नागरिक हो सकता है.
तीन दिसंबर के बाद से हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में कई सारे व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बनाया है. इसके लिए उन्होंने यमन के तट पर अपने नियंत्रण वाले इलाक़े से ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है.
अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांसीसी युद्धपोतों ने हवा से मार करने वाले ऐसे कई हथियारों को मार गिराया, फिर भी बहुत से जहाज़ इनकी चपेट में आ गए.
दुनिया की सबसे बड़ी मालवाहक कंपनी, मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी, ने कहा है कि वह अपने जहाज़ों को लाल सागर से हटा रही है.
फ्रांसीसी कंपनियों सीएमए सीडीएम, डेनमार्क की कंपनी मेर्स्क, जर्मन कंपनी हैपेग-लॉयड और तेल कंपनी बीपी ने भी ऐसा ही फ़ैसला लिया है.
मध्य पूर्व में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों की देखरेख करने वाले सेंटकॉम ने कहा है, “ये हमले भले ही यमन से हूती विद्रोहियों ने किए हों, लेकिन ये पूरी तरह ईरान ने करवाए हैं.”
अमेरिका ने एक नौसैनिक टास्कफ़ोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा है ताकि व्यापारिक जहाजों को हूती विद्रोहियों से हमलों से बचाया जा सके.
कौन हैं हूती और उनका मक़सद क्या है?
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया ‘ज़ैदी’ समुदाय का एक हथियारबंद समूह है.
इस समुदाय ने 1990 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए इस समूह का गठन किया था.
उनका नाम उनके अभियान के संस्थापक हुसैन अल हूती के नाम पर पड़ा है. वे ख़ुद को 'अंसार अल्लाह' यानी ईश्वर के साथी भी कहते हैं.
2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक़ पर हुए हमले में हूती विद्रोहियों ने नारा दिया था, “ईश्वर महान है. अमेरिका का ख़ात्मा हो, इसराइल का ख़ात्मा हो. यहूदियों का विनाश हो और इस्लाम की विजय हो.”
उन्होंने ख़ुद को हमास और हिज़्बुल्लाह के साथ मिलकर इसराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ ईरान के नेतृत्व वाली ‘प्रतिरोध की धुरी’ का हिस्सा बताया था.
यूरोपियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीस के एक विशेषज्ञ हिशाम अल-ओमेसी कहते हैं कि इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हूती क्यों खाड़ी से इसराइल की ओर जा रहे जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं.
वह कहते हैं, “दरअसल वे अब औपनिवेशकों से लड़ रहे हैं. वे इस्लामिक राज्य के दुश्मनों से लड़ रहे हैं. यह विचार उनके आधार के साथ अच्छे से मेल भी खाता है.”
यमन के बड़े इलाक़े पर कैसे नियंत्रण कर पाए हूती?
यमन में 2014 की शुरुआत में हूती राजनीतिक रूप से काफ़ी मज़बूत हो गए, जब वे राष्ट्रपति के पद पर अली अब्दुल्ला सालेह के उत्तराधिकारी बने अब्दरब्बुह मंसूर हादी के ख़िलाफ़ उठ खड़े हुए.
उन्होने अपने दुश्मन रहे सालेह के साथ एक समझौता किया और उन्हें फिर से सत्ता में लाना चाहा.
यमन के उत्तर में हूती सादा प्रांत पर नियंत्रण करने में सफल रहे और साल 2015 की शुरुआत में उन्होंने राजधानी सना पर क़ब्ज़ा कर लिया. ऐसे में राष्ट्रपति हादी यमन छोड़कर विदेश भाग गए.
यमन के पड़ोसी देश सऊदी अरब ने सैन्य दख़ल दिया और हूती विद्रोहियों को हटाकर फिर से हादी को सत्ता में लाने की कोशिश की. उसे यूएई और बहरीन का भी साथ मिला हुआ था.
हूती विद्रोहियों ने इन हमलों का सामना किया और यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण बनाए रखा.
उन्होंने साल 2017 में अली अब्दुल्लाह सालेह की हत्या कर दी, जब उन्होंने पाला बदलकर सऊदी अरब के साथ जाने की कोशिश की थी.
इन विद्रोहियों की मदद कौन करता है?
हूती विद्रोही लेबनान के सशस्त्र शिया समूह हिज़बुल्लाह के मॉडल से प्रेरणा लेते हैं.
अमेरिका के रीसर्च इंस्टिट्यूट ‘कॉम्बैटिंग टेररिज़म सेंटर’ के अनुसार, हिज़्बुल्लाह ही उन्हें 2014 से बड़े पैमाने पर सैन्य विशेषज्ञता और ट्रेनिंग दे रहा है.
हूती ख़ुद को ईरान का सहयोगी भी बताते हैं क्योंकि उनका साझा दुश्मन है सऊदी अरब.
शक जताया जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान हथियार भी दे रहा है.
अमेरिका और सऊदी अरब कहते हैं कि ईरान ने हूती विद्रोहियों को बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस किया था, जिनका इस्तेमाल 2017 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हमले के लिए किया गया था. इन मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया था.
सऊदी अरब ने ईरान पर हूती विद्रोहियों को क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन देने का भी आरोप लगाया है, जिन्हें 2019 में सऊदी अरब के तेल कारखानों पर हमले के लिए इस्तेमाल किया गया था.
हूती विद्रोही सऊदी अरब पर कम रेंज वाली हज़ारों मिसाइल दाग़ चुके हैं और उन्होंने यूएई को भी निशाना बनाया है.
इस तरह के हथियारों की सप्लाई करने का मतलब है संयुक्त राष्ट्र की ओर से हथियारों पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करना. लेकिन ईरान इन सभी आरोपों को खारिज करता है.
कितने ताक़तवर हैं हूती और यमन के कितने हिस्से पर है उनका नियंत्रण?
अप्रैल 2022 में अब्दरब्बुह मंसूर हादी ने प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को अपनी शक्तियां सौंपी थीं. ये काउंसिल सऊदी अरब की राजधानी रियाद से काम करती है. उसे ही यमन की आधिकारिक सरकार माना जाता है.
हालांकि, यमन की ज़्यादा आबादी हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में रहती है. उनका संगठन देश के उत्तरी हिस्से में टैक्स वसूलता है और अपनी मुद्रा भी छापता है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हूती आंदोलन के विशेषज्ञ, अहमद अल-बाहरी के हवाले से कहा था कि 2010 तक हूती विद्रोहियों के पास 1,00,000 से 1,20,000 तक समर्थक थे. इनमें हथियारबंद लड़ाके और बिना हथियारों वाले समर्थक शामिल थे.
संयुक्त राष्ट्र यह भी कहता है कि हूती विद्रोहियों ने बच्चों को भी भर्ती किया था, जिनमें से 1500 की साल 2020 में हुई लड़ाई में मौत हो गई थी और अगले साल कुछ सौ और बच्चे मारे गए थे.
हूती लाल सागर के एक बड़ी तटीय इलाक़े पर नियंत्रण रखते हैं. यहीं से वे जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं.
यूरोपियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीस के एक विशेषज्ञ हिशाम अल-ओमेसी कहते हैं कि इन हमलों से उन्हें सऊदी अरब के साथ जारी शांति वार्ता में अपना पलड़ा भारी करने में मदद मिली है.
वह कहते हैं, “ये दिखाकर कि वे बाब अल-मंदब यानी कि लाल सागर के पतले से समुद्री रास्ते को बंद कर सकते हैं, उन्होंने सऊदी अरब पर रियायतें देने का दबाव बढ़ा दिया है.”
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