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वेस्ट बैंक में हमास के लिए समर्थन बढ़ा, पर इंतिफ़ादा से कैसे बचा है ये फ़लस्तीनी क्षेत्र?
- Author, लूसी विलियम्सन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, यरूशलम
अक्टूबर में इसराइल पर हमास के हमले के पहले ही वेस्ट बैंक में एक और विद्रोह खड़ा होने की अटकलें लगाई जा रही थीं.
फ़लस्तीनियों के घातक हमले के बाद इसराइली सरकार की शह पर यहां इसराइली सेना की लगातार छापेमारी और फ़लस्तीनियों पर इसराइली बाशिंदों (सेटलर्स) के हिंसक हमलों ने फ़लस्तीनियों पर दबाव को बढ़ा दिया है.
ग़ज़ा युद्ध के साथ ही यह दबाव कई गुना बढ़ गया है. वेस्ट बैंक के कस्बों में इसराइली छापेमारी पहले से अधिक और ज़्यादा हिंसक हो गई है.
इसराइल ने कर राजस्व को रोक लिया है जिसका इस्तेमाल वेस्ट बैंक में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी के लिए किया जाता था. इससे बहुत सारे फ़लस्तीनी परिवार आर्थिक रूप से संकट का सामना कर रहे हैं.
ग़ज़ा में 20,000 के करीब फ़लस्तीनियों के मारे जाने से यहां ग़ुस्सा है और हमास के प्रति समर्थन तेज़ी से बढ़ रहा है.
लेकिन इस सब के बावजूद पिछले कुछ हमीनों में हथियारबंद ग्रुपों द्वारा वेस्ट बैंक में बग़ावत करने का आह्वान आया और गया, लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ी.
जनता का मूड
ग़ज़ा में युद्ध शुरू होने बाद से हमास और ख़ासकर हथियारबंद प्रतिरोध के प्रति समर्थन में तेजी से उभार आया है.
रमल्लाह में सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च की एक रायशुमारी में पता चला है कि वेस्ट बैंक में हमास का समर्थन तीन गुना बढ़ा है. जबकि यहां शासन में मौजूद फ़तह पार्टी का समर्थन तेजी से कम हुआ है.
सर्वे में हिस्सा लेने वाले 90% से अधिक लोगों का मानना है कि फल़स्तीनी प्रेसिडेंट महमूद अब्बास को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
लेकिन ऐसा लगता है कि हथियारबंद संघर्ष के प्रति समर्थन और राजनीति से मोहभंग ज़मीनी कार्रवाई में नहीं बदल रहा है.
युद्ध शुरू होने के साथ ही वेस्ट बैंक के शहरों में साप्ताहिक प्रदर्शन हो रहे हैं. इसराइल के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी होती है और साथ ही फ़लस्तीनी प्राधिकरण के ख़िलाफ़ भी.
लेकिन ये अधिकांश प्रदर्शन शहरों के बीच होते हैं, जहां इसराइली सैनिकों से टकराव की कम संभावना होती है, चेकप्वाइंट पर नहीं, जैसा 2000 के शुरुआती दशक में फ़लस्तीनी उभार के दौरान हुआ था.
और इस बार के साप्ताहिक प्रदर्शनों में पहले के मुकाबले कम लोग शामिल हो रहे हैं.
फ़तह पार्टी में युवा लीडर राएद डेबी का कहना है, “हमास के आह्वान पर कम लोग आते हैं क्योंकि इससे इसराइली कार्रवाई का ख़तरा होता है.”
डेबी के अनुसार, लेकिन जब फ़तह आह्वान करता है तब भी लोग नहीं आते हैं क्योंकि ‘लोगों का राजनीतिक पार्टियों से मोहभंग हो चुका है.’
हमास का प्रभाव
चूंकि वेस्ट बैंक में इसराइली सेना की कार्रवाई अधिक कड़ी हो गई है और फ़लस्तीनी सुरक्षा बल अधिक चौकस हो गए हैं, अधिकांश लोगों में यह डर है कि किसी चरमपंथी समूह का सक्रिय सदस्य बनने से वो गिरफ़्तार हो सकते हैं या हत्या हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, सात अक्टूबर को जब हमास ने हमला किया तबसे वेस्ट बैंक में 270 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 70 बच्चे हैं.
इसी दौरान फ़लस्तीनियों द्वारा चार इसराइली मारे गए जिनमें तीन सैनिक थे.
जेनिन रिफ़्यूजी कैंप में फ़लस्तीनी बंदूकधारियों को पकड़ने का अभियान कई दिनों तक चला और इस दौरान भारी गोलीबारी, रॉकेट हमले और हवाई हमले हुए.
सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जिनमें 60 लोगों से और पूछताछ करने के लिए उन्हें सेना को सौंप दिया गया.
इसराइली सेना हथियारबंद समूहों के ठिकानों को नष्ट करने की कोशिश कर रही है.
उसने दावा किया है कि कैंप के अंदर दर्जनों सुरंगों, विस्फ़ोटक बनाने वाली जगहें और इसराइली सैनिकों की आवाजाही पर नज़र रखने वाले कमरों का पता चला है.
पूछताछ के बाद छूटे, इस हफ़्ते गिरफ़्तार हुए एक युवा ने कहा कि एकजुटता में उठ खड़े होने के हमास के आह्वान को लोगों ने इसलिए नज़रअंदाज़ किया क्योंकि वेस्ट बैंक में इसराइली सेना से लड़ने के लिए उसने पर्याप्त हथियार नहीं उपलब्ध कराए.
रमल्लाह में पैलेस्टीनियन सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च के प्रमुख ख़लील शिकाकी का कहना है, “पिछले एक दशक में हमास ने वेस्ट बैंक में खुद को संगठित करने के लिए बहुत कुछ नहीं किया.”
"इसराइली सेना उनके बहुत सारे सदस्यों को गिरफ़्तार करती रही है. इस समय हमास वेस्ट बैंक में हिंसा के लिए लोगों को लामबंद और संगठित करने में बिल्कुल अक्षम है."
लेकिन पहले के जनउभार हमास पर ही निर्भर नहीं थे. दूसरा इंतिफ़ादा (जनउभार) 2000 में शुरू हुआ जिसका नेतृत्व वेस्ट बैंक में सत्तारूढ़ पार्टी फ़तह के सदस्यों ने किया.
फ़तह की भूमिका
फ़तह के मौजूदा नेता, फ़लस्तीनी प्रेसिडेंट महमूद अब्बास को इसराइल के साथ हिंसा से बचने वाले नेता के रूप में देखा जाता है.
हालांकि उनका यह स्टैंड उनके पूर्व नेता यासर अराफ़ात से बिल्कुल अलग है.
उनकी सुरक्षा सेवाएं हथियारबंद ग्रुपों के सदस्यों को गिरफ़्तार करने में इसराइल का सहयोग करती हैं. फ़लस्तीनियों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है.
हालांकि असंतोष या लड़ाई से बचने के फ़तह पर आरोप से सेंट्रल कमेटी के सदस्य साबरी सैदाम इनकार करते हैं.
उन्होंने कहा, “यह कहना कि हालात फ़तह के नियंत्रण में है और वो शांति बनाए हुए है, ऐसा लगता है कि आप का मतलब है कि ताक़त के इस्तेमाल से शांति बनाए रखी जा रही है. लेकिन कोई भी किसी पर कुछ भी करने का दबाव नहीं बना रहा है.”
"वेस्ट बैंक के लोग जानते हैं कि नेतन्याहू हर रात फ़लस्तीनी लोगों पर हमले करके चारा फेंक रहे हैं, क्योंकि वो फ़लस्तीनी लोगों को उकसाना चाहते हैं ताकि हालात को बिगाड़ने के लिए उन्हें बहाना मिल जाए."
अमेरिका इसराइल पर दबाव डाल रहा है कि युद्ध के अंत में फ़लस्तीनी प्राधिकरण को ग़ज़ा पर शासन करने दिया जाए. अभी तक इसराइल ने इसे ख़ारिज ही किया है.
लेकिन 2006 के बाद एक बार फिर से एकीकृत फ़लस्तीनी इलाक़े पर पहली बार शासन करने की संभावना ने फ़तह प्रशासित फ़लस्तीनी प्राधिकरण को अपनी विश्वसनीयता सिद्ध करने और वेस्ट बैंक में हालत बिगड़ने रोकने के लिए प्रोत्साहित किया है.
पार्टी के यूथ लीडर रायेद डेबी के अनुसार, "ये बिल्कुल साफ़ है कि फ़तह एक और इंतिफ़ादा नहीं चाहता. उनकी यथास्थिति बनाए रखने में अधिक दिलचस्पी है. लेकिन फ़तह के ज़मीनी सदस्यों को अधिक समय तक नहीं रोके रखा जा सकता."
"रोज़ाना हत्याओं, घुसपैठ, इसराइली बाशिंदों के हमलों के बीच आप कैसे शांति बनाए रख सकते हैं. ये निश्चित तौर पर विस्फ़ोट की ओर जाएगा."
संभावित चिंगारी
साल 2000 में यरूशल में विवादित धार्मिक स्थल की तत्कालीन इसराइली पीएम एरियल शेरोन की यात्रा के साथ ही दूसरा इंतिफ़ादा शुरू हुआ था. इस स्थल को मुस्लिम अल-अक़्सा के नाम से जानते हैं और यहूदी टेंपल माउंट के नाम से.
डॉ. शिकाकी कहते हैं, “शेरोन का यह दौरा ओस्लो शांति समझौता असफल होने के बाद पैदा हुई फ़लस्तीनियों की हताशा के बीच हुआ था और फ़तह के युवा नेतृत्व ने इसकी अगुवाई के मौके का फायदा उठाया.”
इस तरह की कोई छोटी घटना भी किसी बड़े टकराव को जन्म दे सकती है लेकिन हालात 2000 से बहुत बदल गए हैं.
पिछले दिनों इसराइली सरकार में एक धुर दक्षिणपंथी मंत्री ने अल-अक्सा का दौरा किया और इस जगह पर इसराइली कब्ज़े वाला भड़काऊ बयान दिया. लेकिन इससे कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं हुई, कम से कम वेस्ट बैंक में तो नहीं.
फ़तह के वरिष्ट नेता साबरी सैदाम के अनुसार, “हमने कई बार अमेरिकी प्रशासन को बताया था कि दबाव से कुछ प्रतिक्रिया तो होगी ही. लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि ये प्रतिक्रिया ग़ज़ा से आएगी.”
यहां के वेस्ट बैंक का क्या रुख़ होगा, यह बहुत कुछ गज़ा युद्ध के नतीजे से तय होगा.
यह संक्रमण वेस्ट बैंक के लिए बहुत पीड़ादाई वक्त रहने वाला है. एकीकृत फ़लस्तीनी नेतृत्व की उम्मीद के साथ ही भविष्य के फ़लस्तीनी राज्य पर वार्ता के दरवाजे हो सकता है खुलें.
हमलों के बाद जब इसराइली प्रतिबंध हटे तब हो सकता है कि टकराव बढ़े.
लेकिन दो दशक पहले के उभार की तरह लगातार लोगों के सड़क पर आने से वेस्ट बैंक की मुख्य राजनीतिक धारा की नीतियों और हो सके तो इसके नेता को बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है.
डॉ. शिकाकी ने बताया, "ऐसा लगता है कि किसी भी जनउभार के लिए फ़तह बहुत ही अहम कारक बना हुआ है और अगर फ़तह और इसकी सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के इंतिफ़ादा की तैयारी में सीधे शामिल नहीं हैं तो जनउभार की कम ही संभावना है."
"मुझे नहीं लगता कि फ़तह उस स्थिति में पहुंच रहा है, लेकिन चीजें उसी दिशा में बढ़ रही हैं."
लेकिन शांति, स्वतंत्र राज्य या महज बेहतर ज़िंदगी की फ़लस्तीनी राज्य से उम्मीद मंद पड़ रही है.
रायेद डेबी के अनुसार, "अगर राजनीति एजेंडा पर हमारे पास कुछ होता तो चीजें शांति से होती, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसराइल की दक्षिणपंथी सरकार के पास ऐसा कुछ ठोस नहीं है, इसलिए ऐसी सूरत में विस्फोट की आहट ही मैं देख पाता हूं. यह सिर्फ कुछ वक्त की बात है."
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