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जेनिन कैंप क्या है और इसराइल ने क्यों चलाया ऑपरेशन?
इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के जेनिन कैंप में एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया गया है.
इसराइली सुरक्षाबलों का कहना था कि वो फ़लस्तीनी चरमपंथी समूहों से लड़ रहा है.
जेनिन कैंप कहां और कितना बड़ा है?
इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के उत्तर में जेनिन शहर में ये शरणार्थी शिविर है.
जॉर्डन नदी के पश्चिमी तट पर ज़मीन का बड़ा टुकड़ा है जिसको इसराइल ने 1967 में छह दिनों तक चले युद्ध (सिक्स डे वॉर) के बाद जॉर्डन से छीन लिया था.
इसराइल और फ़लस्तीन इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते हैं लेकिन कई दशकों की बातचीत के बाद भी इसकी अंतिम स्थिति पर विवाद है.
साल 1995 से जेनिन फ़लस्तीनी प्राधिकरण के नियंत्रण में है जो वेस्ट बैंक के कई हिस्सों का संचालन करता है और सीधे इसराइली शासन के अंतर्गत नहीं आता है.
हालांकि, इसराइली सुरक्षाबल लगातार सुरक्षा अभियानों के नाम पर कैंप में घुसते हैं.
इस कैंप में कई कंक्रीट की इमारतें हैं, इनमें से कई पहली बार 1970 के दशक में बनी थीं.
यूनाइटेड नेशंस रिलीफ़ एंड वर्क्स एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुताबिक़, ये कैंप 14,000 लोगों का घर है जो आधे स्क्वेयर किलोमीटर से भी कम इलाक़े में रहते हैं.
यूएनआरडब्ल्यूए का कहना है कि जेनिन कैंप में ख़ासतौर से युवाओं में सबसे अधिक ग़रीबी और बेरोज़गारी मौजूद है.
उसका कहना है कि इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर असंतोष और हताशा फैलती है. साथ ही युवा बच्चों में हायर स्कूल छोड़ने की भी दर बहुत अधिक है.
जेनिन में जंग क्यों छिड़ी हुई है?
बीते कुछ सप्ताह के दौरान जेनिन और उसके कैंप में हिंसा तेज़ी से बढ़ी है.
20 जून को जेनिन में इसराइली छापेमारी में तब सात फ़लस्तीनी मारे गए थे जब हमले के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था.
अगले ही दिन जेनिन के दक्षिण में 40 किलोमीटर दूर एली की बस्ती के पास एक रेस्टोरेंट और पेट्रोल स्टेशन पर हमास के दो बंदूक़धारियों के हमले में चार इसराइलियों की मौत हो गई थी.
इस घटना के बाद वहां बसाए गए सैकड़ों इसराइलियों ने फ़लस्तीनी शहर तुरमुसाया के नज़दीक घरों और कारों पर हमला किया था. इस हिंसा में एक फ़लस्तीनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
बीते सप्ताह इसराइली ड्रोन हमले में जेनिन के तीन फ़लस्तीनी चरमपंथियों की मौत हुई थी, इसके बाद शहर के नज़दीक चेकपॉइंट के पास कथित तौर पर गोलीबारी हुई थी.
हालिया अभियान कई सालों के अंदर वेस्ट बैंक में हुए अब तक के सबसे बड़े इसराइली सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है.
इसराइल के इस ऑपरेशन में सैकड़ों सैनिकों के साथ-साथ ड्रोन के ज़रिए हमला किया गया और हथियारबंद बुलडोज़र को शामिल किया गया था. इसराइल ने इसे ‘एक व्यापक आतंकवाद विरोधी प्रयास’ बताया था.
इस दौरान कहा गया कि यह जेनिन को ‘आतंकवाद की शरणस्थली’ बनने से रोकने के लिए किया जा रहा है.
हालांकि, फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रधानमंत्री मोहम्मद शतय्याह ने कहा है कि यह अभियान ‘कैंप को तबाह करने और लोगों को विस्थापित करने की नई कोशिश है.’
जेनिन ब्रिगेड्स क्या है?
इस कैंप को जेनिन ब्रिगेड्स का घर माना जाता है.
इसे अलग-अलग फ़लस्तीनी चरमपंथी समूहों के लड़ाकों का गुट माना जाता है जिसमें हमास से लेकर फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद के अल-क़ुद्स ब्रिगेड शामिल है.
इसराइली डिफ़ेंस फ़ॉर्सेज़ (आईडीएफ़) के अनुसार, इस कैंप में तक़रीबन 420 हथियारबंद लड़ाके हैं. स्थानीय इलाक़े में ये ऑपरेट करते हैं और इसराइल के ख़िलाफ़ ‘प्रतिरोध’ का वे हिस्सा हैं.
बीबीसी के डिप्लोमैटिक संवाददाता पॉल एडम्स कहते हैं कि जेनिन फ़लस्तीनी लड़ाकों की एक नई पीढ़ी है.
वो कहते हैं, “ये युवा बंदूक़धारी शांति प्रक्रिया के बारे में नहीं जानते हैं. उनके पास संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की कोई संभावना नहीं है.”
पॉल कहते हैं, “उनका अपने ख़ुद के राजनीतिक नेतृत्व में कोई भरोसा नहीं है. और इसी वजह से क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ वो उसी तरीके से लड़ रहे हैं जैसा वे सोचते हैं कि वो कर सकते हैं.”
जेनिन कैंप का क्या है इतिहास?
1948-49 में इसराइल और अरब बलों के बीच युद्ध में विस्थापित हुए फ़लस्तीनियों के लिए 1953 में यह कैंप बनाया गया था. इसी युद्ध के बाद इसराइल राष्ट्र अस्तित्व में आया था.
उस समय तक वेस्ट बैंक पर जॉर्डन का नियंत्रण था. जेनिन शरणार्थी शिविर में हैफ़ा, नज़ारेथ और उसके आसपास के इलाक़े से लोग आए, ये इलाक़े अब आधुनिक इसराइल का हिस्सा हैं.
1967 में सिक्स डे वॉर के बाद जेनिन और वेस्ट बैंक इसराइल के नियंत्रण में आ गए जिसके बाद जेनिन कैंप में, और शरणार्थी आने शुरू हो गए.
वेस्ट बैंक के 19 शरणार्थी शिविरों में से ये एक है. सभी शिविर तक़रीबन 2 लाख लोगों का घर है.
जेनिन कैंप दूसरे फ़लस्तीनी इंतिफ़ादा या विद्रोह के संघर्ष के दौरान चर्चा में आया था. दूसरा इंतिफ़ादा साल 2000 से लेकर 2005 के बीच हुआ था.
साल 2002 में आईडीएफ़ ने 10 दिनों की लड़ाई के बाद इस पर क़ब्ज़ा कर लिया था. इस लड़ाई को बैटल ऑफ़ जेनिन के नाम से जाना जाता है.
इस दौरान 52 फ़लस्तीनी चरमपंथी और आम लोग और 23 इसराइली जवान मारे गए थे.
400 से अधिक घर इस दौरान तबाह कर दिए गए और एक चौथाई से अधिक आबादी बेघर हो गई थी.
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