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ग़ज़ा: इसराइली हमले में बेटे की मौत, शव को देख बोले अल जज़ीरा के पत्रकार- 'ये हैं इंसानियत के आंसू'
- Author, शाइमा ख़लील
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, यरूशलम
दक्षिणी ग़ज़ा में अल जज़ीरा के ग़ज़ा ब्यूरो प्रमुख वाएल अल-दाहदूह के बड़े बेटे और पत्रकार हमज़ा अल दाहदूह की इसराइली हमले में मौत हो गई है.
जिस समय इसराइली ड्रोन हमला हुआ, उस वक्त पत्रकार हमज़ा अल दाहदूह, अन्य पत्रकारों के साथ खान यूनिस और रफ़ाह के बीच सड़क पर खड़े थे.
पत्रकार हमज़ा अल दाहदूह अपने पिता की तरह कतर के समाचार प्रसारक अल जज़ीरा के साथ काम करते थे.
इस हमले में फ़्रीलांस पत्रकार मुस्तफ़ा थुराया की भी मौत हो गई.
इससे पहले अक्टूबर महीने में वाएल अल-दाहदूह के परिवार के चार सदस्यों की मौत इसराइली हमले में हो गई थी.
उनकी की पत्नी अमना, उनके पोते एडम, उनके 15 साल के बेटे महमूद और सात की बेटी शाम इसराइली हमले में मारे गए थे.
अल जज़ीरा संवाददाता हिशाम ज़ाकूत के अनुसार, हमज़ा समेत पत्रकारों का समूह रफ़ाह के उत्तर पूर्वी इलाक़े मोराज की ओर जा रहा था. इसराइली सेना ने इसे ह्यूमैनेटेरियन ज़ोन घोषित कर रखा है, लेकिन यहां हाल के दिनों में कई बार बमबारी हुई है.
ग़ज़ा पट्टी के कई इलाक़ों में हो रही बमबारी से बचने के लिए अधिकांश ग़ज़ा निवासी इस इलाक़े में शरण लेने के लिए आए थे.
अल जज़ीरा के अनुसार, हमज़ा इलाक़े में बमबारी के बाद पैदा हुए हालात पर एक रिपोर्ट तैयार करने वाले थे.
पिता ने क्या कहा?
अल जज़ीरा की लाइव फ़ुटेज में, हमले के बाद वो कार दिखती है, जिसमें वे सफर कर रहे थे.
कुछ वीडियोज़ में ये भी दिखता है कि हमज़ा के पिता वाएल अल दाहदूह, ख़ान यूनिस के एक मुर्दाघर में अपने बेटे के शव के सामने उनका हाथ पकड़े रो रहे हैं.
हमज़ा को ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी शहर रफ़ाह में दफ़न किया गया है.
जनाजे के वक्त उनके पिता ने कहा, “हमज़ा केवल मेरे दिल के ही क़रीब नहीं थे बल्कि वो मेरे सब कुछ थे. वे मेरी आत्मा में बसे थे. ये आंसू किसी के चले जाने के हैं, ये दुख के आंसू हैं. ये इंसानियत के आंसू हैं.”
उन्होंने कहा, “मैं दुनिया से कहता हूं कि क़रीब से देखिए कि ग़ज़ा में क्या हो रहा है?”
पिछले महीने ही एक अन्य हमले को रिकॉर्ड करते हुए खुद वाएल अल-दाहदूह घायल हो गए थे और उनका कैमरा मैन सामेर अबू दक्का की मौत हो गई थी.
आठ बच्चों के पिता अल दाहदूह गज़ा में युद्ध की रिपोर्टिंग करना जारी रखे हुए थे.
हमज़ा अल-दाहदूह के इंस्टाग्राम पर 10 लाख फॉलोअर्स थे. मारे जाने से पहले अपनी अंतिम पोस्ट में उन्होंने अपने पिता के बारे में लिखा था.
उन्होंने लिखा था, “आप हिम्मती और धैर्यवान हैं. ईश्वर की दया से निराश न हों. निश्चिंत रहें, वो ज़रूर आपकी कद्र करेगा.”
अल जज़ीरा ने क्या कहा?
अल जज़ीरा ने हत्या की निंदा करते हुए कहा कि ग़ज़ा में फलस्तीनी पत्रकारों को ‘निशाना’ बनाया जा रहा है.
कंपनी ने एक बयान में कहा, “फलस्तीनी पत्रकारों की कार को इसराइली सेना के निशाना बनाने की अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क कड़ी निंदा करता है.”
अल जज़ीरा ने इसराइल पर प्रेस की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है.
बीबीसी ने इस मामले में इसराइली सेना से संपर्क किया है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वरिष्ठ सलाहकार मार्क रेगेव ने बीबीसी वर्ल्ड दिस वीकेंड को बताया, ‘इसराइल जानबूझकर पत्रकारों को निशाना नहीं बनाता’.
उन्होंने कहा, “हम मध्य पूर्व में एकमात्र देश हैं, जहां असल में प्रेस स्वतंत्र है. हम पूरे क्षेत्र में अकेला ऐसा देश हैं, जहां प्रेस खुलकर लिख सकता है और सरकार के नेताओं की आलोचना कर सकता है.”
मार्क रेगेव ने कहा, “यह कहना हास्यास्पद है कि इसराइल जानबूझकर प्रेस को निशाना बनाता है. हम एकमात्र देश हैं जो असल में स्वतंत्र प्रेस को बढ़ावा देते हैं.”
सात अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमले के बाद से ग़ज़ा पर इसराइली बमबारी जारी है. ग़ज़ा में युद्ध शुरू होने के बाद से 75 से ज्यादा पत्रकार मारे जा चुके हैं.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ग़ज़ा में 22 हजार से ज्यादा लोग अब तक मारे गए हैं जिसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं.
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