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पुतिन से बार-बार मुलाक़ात क्यों कर रहे हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री?
- Author, शुमायला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद, पाकिस्तान से
चीन के बीजिंग में तीसरे बेल्ट एंड रोड फ़ोरम की बैठक के दौरान पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ काकड़ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलग से बैठक हुई.
फरवरी, 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद यह तीसरा मौक़ा है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की पुतिन के साथ बैठक हुई है.
अनवारुल हक़ से पहले बीते साल 15 सितंबर को एससीओ की बैठक के दौरान पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पुतिन से मुलाक़ात की थी. बीते साल 23 फरवरी को यूक्रेन के ख़िलाफ़ शुरु हुए रूस के अभियान के एक दिन बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मॉस्को में पुतिन से मुलाक़ात की थी.
सामरिक विश्लेषकों के मुताबिक़ जिस तरह से दोनों देशों के शासन प्रमुखों के बीच में बैठकें हुई हैं, उससे यह ज़ाहिर होता है कि दोनों देश आपसी रिश्ते को बढ़ाने के इच्छुक हैं, हालांकि दोनों देशों के आपसी रिश्ते कई दशकों तक ठंडे रहे हैं.
पुतिन और काकड़ की मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दफ्तर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर चर्चा हुई है.
पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में उसे रूस से सस्ती दरों पर अनाज और ऊर्जा के संसाधन मिलने की उम्मीद है.
रूस मौजूदा साल में अब तक पाकिस्तान को दस लाख टन अनाज भेज चुका है. दोनों देशों के शासानाध्यक्षों के दफ़्तर से जारी बयान के मुताबिक़, इस मुलाक़ात के दौरान पुतिन ने दोनों देशों के आपसी सहयोग को बढ़ाने पर रज़ामंदी दी है.
रूस से क्या किया अनुरोध?
पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री ने इस मुलाक़ात में पुतिन के सामने अफ़ग़ानिस्तान से बढ़ते संकट को देखते हुए आतंकवाद से लड़ने के लिए क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ाने की बात कही. काकड़ ने इस पूरे संकट में रूस से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, ताकि क्षेत्र से बाहरी ताक़तों का दख़ल ना हो.
वैसे बीजिंग में बेल्ट एंड रोड फ़ोरम की बैठक की चर्चा ज़्यादा हुई होगी और उस मौक़े पर यह एक औपचारिक मुलाक़ात थी, लेकिन पाकिस्तानी विश्लेषक इसे महत्वपूर्ण बता रहे हैं.
इस्लामाबाद स्थित थिंकटैंक इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रेटजिक स्टडीज़ के रूसी एक्सपर्ट तैमूर ख़ान इस बैठक को समय के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं.
तैमूर ख़ान मानते हैं, "पहली बात तो यही है कि इस बैठक में रूसी पक्ष ने ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई और उन्होंने पहल की थी. इससे साबित होता है कि रूस इस क्षेत्र में पाकिस्तान को महत्वपूर्ण मानता है."
तैमूर इस बैठक के बीजिंग में होने को भी अहम मानते हैं. उनके मुताबिक़ पाकिस्तान, चीन का लंबे समय से भरोसेमंद साझीदार रहा है और चीन-रूस की बढ़ती नज़दीकी से भी पाकिस्तान-रूस की नज़दीकी बढ़ रही है.
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के दस साल पूरे होने पर हुए आयोजन में हिस्सा लेने आए पुतिन का चीन में शानदार स्वागत हुआ. यूक्रेन पर हमले के बाद पुतिन, राजनीतिक तौर पर पश्चिमी देशों से अलग-थलग पड़ गए हैं. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान इस परियोजना की अहम कड़ी है.
तैमूर ख़ान इस पृष्ठभूमि में भी दोनों नेताओं की मुलाक़ात को देख रहे हैं. उनके मुताबिक़ बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपने हितों को देखते हुए देश नए साझीदार तलाश रहे हैं.
वे इसे स्पष्ट करते हुए कहते हैं, "शीत युद्ध के दौरान, रूस और पाकिस्तान दो अलग-अलग कैंपों में थे. जहां रूस की भारत से नज़दीकी थी, वहीं पाकिस्तान अमेरिका के क़रीब था. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि दोनों देश अपने संबंधों को लेकर नए तरीक़े से सोच रहे हैं और अपने नज़रिए से एक-दूसरे को ज़रूरी समझ रहे हैं."
वैसे रूस और पाकिस्तान के बीच आपसी रिश्तों में बदलाव की शुरुआत 2014 के बाद से ही दिखने लगी थी, जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान पर हथियारों की आपूर्ति को लेकर लगाई गई पाबंदी हटा ली थी. इससे दोनों देशों के आपसी रिश्तों के सुधरने की शुरुआत हुई.
इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता भी हुआ जिसके तहत रूस ने एमआई-35 एम लड़ाकू हेलिकॉप्टर पाकिस्तान को बेचे. इसके बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर आपसी संबंध लगातार मज़बूत हुए हैं.
इस्लामोफ़ोबिया पर पुतिन के रुख़ को पकिस्तान में किया गया पसंद
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना की विदाई से भी दोनों देश नज़दीक हुए हैं.
दूसरी ओर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान अमेरिका को नाराज़ नहीं करना चाहता है और उसके साथ अपने संबंधों को गंभीरता से लेता है. आईएमएफ़ और विश्व बैंक जैसे पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर पाकिस्तान की निर्भरता भी है.
विश्लेषकों के मुताबिक़ जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा हो, पाकिस्तान रूस के साथ बेहतर संबंध बनाकर, अमेरिका को नजरअंदाज़ करने का जोख़िम नहीं उठा सकता है.
हालांकि यहां यह भी देखना होगा कि पाकिस्तान ने निश्चित रूप से अपने लिए एक जगह बनाई है जहां वह अब अधिक संतुलित विदेश नीति अपनाने में सक्षम है.
इसके अलावा एक और पहलू है जो पाकिस्तान और रूस के रिश्तों को प्रभावित करता है. दरअसल, इस्लामोफ़ोबिया पर राष्ट्रपति पुतिन के नज़रिए को पाकिस्तानी जनता ने काफ़ी पसंद किया है.
2021 में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि पैगंबर मोहम्मद का अपमान करना रचनात्मक स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं देखा जा सकता बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. उनके इस बयान को पाकिस्तान में काफ़ी सराहा गया था.
'रूस और पाकिस्तान का नज़दीक आना भारत के लिए बेहतर'
राजनीतिक विश्लेषक और ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) तुगरल यामीन का मानना है कि पाकिस्तानी और रूसी नेतृत्व के बीच ताज़ा बैठक ऐसे समय में हुई है जब ग़ज़ा को लेकर संघर्ष विराम पर रूस के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों द्वारा वीटो कर दिया गया है.
प्रस्ताव में नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा और आतंकवाद की निंदा की गई लेकिन हमास का कोई उल्लेख नहीं किया गया था. हालांकि, चीन ने रूसी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था.
ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) तुगरल यामीन ने बताया, "दुनिया में ध्रुवीकरण बढ़ा है. इसराइल-फ़लस्तीन तनाव ने दुनिया के देशों को और अधिक विभाजित कर दिया है. गज़ा पर रूस और चीन का नज़रिया पाकिस्तान के साथ-साथ दूसरे मुस्लिम देशों के नज़रिए के अधिक क़रीब है."
हालांकि तुगरल यामीन का मानना है कि रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नज़दीकियों से भारत और रूस के आपसी संबंधों में कोई बदलाव नहीं होने वाला है.
उन्होंने कहा, "भारत और रूस के आपसी संबंधों की तुलना पाकिस्तान और रूस के आपसी संबंधों से बिल्कुल नहीं हो सकती. दोनों का इतिहास और आपसी संबंधों के उतार चढ़ाव अलग-अलग हैं."
हालांकि तुगरल यह भी कहते हैं कि ऐसी बैठकों पर संदेह करने की बजाय उन्हें सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए और पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ कोई गठबंधन नहीं बना रहा है.
वह कहते हैं, "इस क्षेत्र में पाकिस्तान की जितनी अधिक हिस्सेदारी होगी, यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए उतना ही फ़ायदेमंद होगा. एक कमज़ोर और अस्थिर पाकिस्तान की तुलना में एक मज़बूत और स्थिर पाकिस्तान, भारत के हितों के लिए बेहतर साबित होगा."
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