औरंगजे़ब की 'औलाद' से शुरू विवाद गोडसे को 'सपूत' बताने तक कैसे पहुंचा-किसने क्या कहा?

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महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक जयंती समारोह के दिन सांप्रदायिक तनाव के बाद मुगल बादशाह औरंगजेब पर बयानबाजी ने सियासी माहौल गर्मा दिया.
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 'औरंगजेब की औलाद' से जुड़े बयान के बाद शुरू हुए विवाद में लगातार नई कड़ियां जुड़ती जा रही हैं.
इस मामले में एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने नाथूराम गोडसे का ज़िक्र किया और जब केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गोडसे को 'भारत का सपूत' तो विवाद की आंच कुछ और तेज़ हो गई.
गोडसे को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के मामले में फांसी की सज़ा दी गई थी. महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई थी. महात्मा गांधी प्रार्थना सभा में हिस्सा लेने जा रहे थे तब गोडसे ने उन पर गोलियां चलाईं थीं.
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कैसे शुरू हुआ विवाद
मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक जयंती समारोह के दिन औरंगज़ेब और टीपू सुल्तान को महिमामंडित करने वाली सोशल पोस्ट के वायरल होने के बाद तनाव की स्थिति बन गई.
उप मुख्यमंत्री फडणवीस ने हालात की गंभीरता का जायजा लेने के दौरान कहा ,'' महाराष्ट्र में अचानक कुछ जिलों में औरंगज़ेब की औलादें पैदा हुई हैं. वे औरंगज़ब की फोटो रखते हैं और स्टेटस लगाते हैं. इस कारण समाज में दुर्भावना और तनाव पैदा हो रहा है. सवाल ये है कि अचानक औरंगजेब की इतनी औलादें कहां से पैदा हुईं. इसके पीछे कौन है. इसका असली मालिक कौन है ये भी हम ढूंढ कर निकालेंगे. ''
उन्होंने कहा, ''महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था और उसका नाम खराब करने की कोशिश करने वालों को भी हम ढूंढ निकालेंगे. ''
ओवैसी ने किया जवाबी हमला

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एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एक वर्ग को 'औरंगज़ेब की औलाद' कहे जाने को लेकर अपने अंदाज़ में आपत्ति दर्ज कराई और इसी दौरान 'नाथूराम गोडसे और आप्टे' का ज़िक्र किया.
नारायण आप्टे को भी महात्मा गांधी की हत्या के मामले में सज़ा हुई थी.
ओवैसी ने कहा,'' महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा ''औरंगज़ेब की औलाद''. क्या आपको मालूम है कि कौन किसकी औलाद है. मुझे तो नहीं मालूम किस चीज के एक्सपर्ट हैं आप. तो फिर गोडसे की औलाद कौन है बताइए हमें. आप्टे की औलाद कौन है बताइए हमें.''
औरंगजेब की औलाद वाले बयान पर सियासी गर्मागर्मी पर एनसीपी के शरद पवार ने कहा कि ऐसा करके माहौल और बिगाड़ने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने कहा,'' कोई मोबाइल फोन पर संदेश भेजता है तो इस तरह की घटना को तत्काल सड़क पर उतर कर धार्मिक रूप देना उचित नहीं है. इस तरह की बात को बढ़ावा देना सत्ताधारियों के लिए ठीक नहीं है. राज्य में शांति और व्यवस्था स्थापित करना शासकों की जिम्मेदारी है. लेकिन अगर राज्य सरकार ही इस मामले में लोगों को भड़काने लगे और दो समुदायों, दो जातियों के बीच कटुता पैदा करे तो यह शुभ संकेत नहीं है.''

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गिरिराज बोले- 'गोडसे भारत के सपूत'
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर ओवैसी को जवाब दिया लेकिन उनके बयान को लेकर विवाद और गहरा गया.
उन्होंने गोडसे को 'भारत का सपूत' बता दिया.
गिरिराज सिंह ने कहा, ''गोडसे गांधी के हत्यारे हैं तो भारत के सपूत भी हैं. गोडसे भारत में पैदा हुए थे औरंगज़ेब और बाबर की तरह आक्रांता नहीं थे. जिसको बाबर की औलाद कहलाने में खुशी महसूस होती है वो कम से कम भारत माता का सही सपूत नहीं हो सकता.''
उनका ये बयान सामने आते ही तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया. उनके बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया गया.
पूर्व कांग्रेस नेता और अब समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गिरिराज सिंह की इस टिप्पणी पर सवाल करते हुए कहा,'' गिरिराज जी केंद्र में मंत्री है. कैबिनेट की संविधान के प्रति जिम्मेदारी होती तो क्या ये माना जाए कि जो बात गिरिराज जी बोल रहे हैं वो बात नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी मानते हैं. इसलिए मैंने मांग की कि दोनों को इसका खंडन करना चाहिए. लेकिन मुझे मालूम है ऐसा नहीं होगा. ''
''बीजेपी आरएसएस से अलग कैसे हो सकती है. ये वही आरएसएस है जिसने अंग्रेजों की मदद करने का वादा किया था.''
तृणमूल सांसद सौगत राय ने भी गिरिराज सिंह की इस टिप्पणी की निंदा की.
उन्होंने कहा, ''गिरिराज सिंह ने सांप्रदायिक बयान दिया है. उन्होंने उस शख़्स का महिमामंडन किया है, जिसने राष्ट्रपिता की हत्या की है.' बाबर की औलाद' जैसे शब्द का इस्तेमाल सांप्रदायिक लोग करते हैं. हम इसे खारिज़ करते हैं. उन्होंने मुगल बादशाहों को भारत के लोगों को ख़िलाफ़ बताया है.''

गिरिराज पर जेडीयू का तंज़, कहा- वीरप्पन, दाऊद और माल्या भी देश के बेटे
जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीजेपी नेता गिरिराज सिंह के नाथूराम गोडसे को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है.
उन्होंने कहा, "गोडसे जैसे व्यक्ति के अगर भारत मां का बेटा होने का कोई दावा कर रहे हैं तो चंबल के डकैत भी भारत मां का बेटा, वीरप्पन भी, दाऊद भी और साथ ही साथ विजय माल्या जैसा आर्थिक अपराधी भी. ये तो भारत मां के कलंक हैं, जिसने राष्ट्रपिता की हत्या कर दी हो और वैसे राष्ट्रपिता जिनकी हत्या होने पर मुंह से हे राम निकलता हो."
"हम तो यह जानना चाहते हैं कि ये तो भाजपा के प्यारे हो सकते हैं, गोडसे, वीरप्पन, दाऊद, विजय माल्या. अगर भारत मां के सपूत होंगे तो शहीद-ए-आजम भगत सिंह होंगे. प्रफुल्ल चंद्र चाकी होंगे, राम प्रसाद बिस्मिल होंगे, अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ होंगे.

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संजय राउत बोले- औरंगज़ेब को 400 साल पहले दफ़नाया
उधर, महाराष्ट्र में विपक्ष ने आरोप लगया है कि राज्य सरकार औरंगज़ेब का ज़िक्र अपने फायदे के लिए कर रही है.
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने सांप्रदायिक तनाव के लिए बीजेपी नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, '' ये एक राजनीतिक साजिश थी ताकि कोल्हापुर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ा जा सके. कर्नाटक में भी ये प्रयोग करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही. कोल्हापुर के लोग जानते हैं कि दंगे फैलाने के लिए बाहर से लोग आते हैं. कोल्हापुर में जो हुआ वो पूरी तरह महाराष्ट्र के गृह मंत्री फडणवीस की नाकामी है. जिस औरंगज़ेब को शिवाजी महाराज ने 400 साल पहले दफनाया था. उसे आप बार-बार जिंदा कर रहे हैं दंगे भड़काने के लिए''.
कोल्हापुर में मंगलवार को छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक जयंती समारोह मनाया जा रहा था. उसी दिन उसी दिन, शहर के तीन संदिग्धों ने कथित तौर पर औरंगजेब और टीपू सुल्तान का महिमामंडन करते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर स्टेटस पोस्ट किए.
कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने इस स्टेटस पर आपत्ति जताई और देखते ही देखते यह स्टेटस पूरे शहर में वायरल हो गया. इसके बाद शाम के समय शहर के शाहुपुरी थाने के सामने हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ता जुटने लगे. कार्यकर्ता औरंगज़ेब और टीपू सुल्तान के वॉट्सऐप स्टेटस रखने वालों को तुरंत गिरफ्तार की मांग करने लगे.

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इस बीच उग्र भीड़ पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इस तरह के स्टेटस रखने वाले युवकों के घरों पर पहुंच गई. हालांकि पुलिस ने दखल दिया और भीड़ को वापस थाने ले आई. इस बीच, कुछ कार्यकर्ताओं ने इलाके में वाहनों में तोड़फोड़ की और पथराव करने की कोशिश की.
पुलिस ने उन्हें काबू में करने के लिए लाठियां भांजी. कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया.
अगले दिन हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कोल्हापुर बंद का आह्वान किया. इसे देखते हुए कोल्हापुर शहर
और तनाव वाले दूसरे इलाकों में भारी पुलिस तैनात कर दिया गया. बाद में फडणवीस ने औरंगज़ेब की औलाद से जुड़ा बयान दिया, जिस पर विपक्षी दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली.
कॉपी: दीपक मंडल
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