शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चिह्न, उद्धव ठाकरे के लिए कितना बड़ा झटका- प्रेस रिव्यू

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चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के धड़े वाली शिवसेना को असली शिवसेना माना है.आयोग ने कहा है पार्टी का नाम और चिह्न 'धनुष तीर' शिंदे गुट के पास रहेगा.
चुनाव आयोग के इस फ़ैसले से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को करारा झटका लगा है.
'इंडियन एक्सप्रेस' ने इस मामले की विस्तृत रिपोर्टिंग की है. अख़बार के मुताबिक़ चुनाव आयोग के इस फ़ैसले के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा, "उन्होंने (शिवसेना) हमारा धनुष और तीर चिन्ह चुरा लिया है. लेकिन लोग इस चोरी का बदला लेंगे."
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के फ़ैसले को लोकतंत्र के लिए बेहद ख़तरनाक बताया और कहा कि वो इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.
अख़बार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ शिंदे ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे बालासाहेब, आनंद दीघे की विचारधारा की जीत बताया. उन्होंने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और लाखों शिवसैनिकों की जीत कहा और कहा कि "ये लोकतंत्र की जीत है."
अख़बार लिखता है कि इस मामले पर चुनाव आयोग के 77 पेज का फ़ैसला बहुमत परीक्षण के आधार पर दिया गया. आयोग के तीन सदस्यीय पैनल ने ये फ़ैसला दिया है. महाराष्ट्र में शिवसेना के कुल 67 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों में से 40 शिंदे गुट के पक्ष में थे. संसद के दोनों सदनों के 22 सांसदों में से 13 शिंदे गुट के पक्ष में थे.
चुनाव आयोग ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में जीत कर आए 55 शिवसेना विधायकों के वोटों में से 76 फ़ीसदी वोट शिंदे गुट को मिले, जबकि उद्दव ठाकरे के गुट को सिर्फ 23.5 फीसदी वोट मिले.
अख़बार के मुताबिक़ आयोग ने कहा "पार्टी संविधान के परीक्षण" के आधार पर फ़ैसला नहीं किया जा सकता था क्योंकि पार्टी ने 2018 में संशोधित अपने संविधान की प्रति जमा नहीं कराई थी.
आयोग संगठन में बहुमत परीक्षण के आधार पर भी फ़ैसला नहीं दे सकता था क्योंकि दोनों गुट इसमें अपने-अपने संख्याबल का दावा कर रहे थे जो संतोषजनक नहीं लग रहा था.
आयोग ने कहा कि पार्टी का चिह्न 'धनुष और तीर' शिंदे गुट के पास रहेगा. लेकिन पिछले साल बालासाहेबबांची शिवसेना के नाम और इसे दिए गए चिह्न 'दो तलवार और एक ढाल' का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा.
आयोग ने शिंदे गुट को जन प्रतिनिधित्व क़ानून 1951 के आधार पर पार्टी के 2018 के संविधान में संशोधन करने को कहा है.
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आयोग के फ़ैसले पर उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
उद्धव ठाकरे ने आयोग के इस फ़ैसले को तमाशा करार दिया है.
'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि पार्टी इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएगी. फ़ैसले से नाराज ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब औपचारिक रूप से भारत में तानशाही की शुरुआत और लोकतंत्र के अंत की घोषणा कर देनी चाहिए.
उन्होंने कहा "चुनाव आयोग ने तमाशा किया. उन्होंने कई सारे दस्तावेज़ मांगे. हमने वो सब दिए. इसके बाद ये फ़ैसला दिया. आख़िर ये तमाशा क्यों?"
'इंडियन एक्सप्रेस' ने इस मामले में अपनी एक छोटी टिप्पणी में कहा है आयोग ने ये फ़ैसला ऐसे समय में किया है, जब सुप्रीम कोर्ट में बाग़ी शिवसेना विधायकों को अयोग्य करार देने के डिप्टी स्पीकर के अधिकार पर फ़ैसला होना है. ख़ास कर तब जब डिप्टी स्पीकर को ही हटाने का नोटिस दिया जा चुका है.

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राज्यों को विशेष दर्जा देने के मामले में क्या है केंद्र का रुख़?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि केंद्र राज्यों की ओर से विशेष दर्जा देने की मांग पर विचार नहीं करेगा. केंद्र का ये रुख़ बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो खुद के लिए विशेष दर्ज की मांग कर रहे हैं.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' में इस मामले पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "जब वित्त मंत्री से ये पूछा गया क्या वो ओडिशा की ओर से विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग पर बात आगे बढ़ाएंगीं तो उन्होंने कहा कि 14 वें वित्त आयोग साफ़ कहा है कि विशेष दर्जा किसी राज्य को नहीं दिया जाए."
केंद्रीय बजट के बारे में मीडिया से बातचीत के दौरान जब वित्त मंत्री के सामने विभाजन के तुरंत बाद आंध्र प्रदेश औैर तेलंगाना को विशेष दर्जा दिए जाने का हवाला दिया गया तो उन्होंने कहा, "लेकिन अब वित्त आयोग की राय है कि किसी राज्य को अब स्पेशल स्टेटस न दिया जाए."
ओडिशा और बिहार खुद के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रहे ताकि केंद्र की वित्त पोषित स्कीमों का 90 फ़ीसदी फंड के साथ उन्हें दूसरी सहूलियतें मिल सकें. फिलहाल उन्हें इसका 60 फ़ीसदी फंड मिलता है. ओडिशा का कहना है उसे प्राकृतिक आपदाओं का ख़तरा रहता है लिहाज़ा केंद्र को इस प्रक्रिया में बदलाव करना चाहिए.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के बाद बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने राज्यसभा में ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई थी.
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र बिहार और दूसरे पिछड़े राज्यों को स्पेशल स्टेटस नहीं दे रहा है.

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अमेरिकी संसद में अरुणाचल पर ख़ास प्रस्ताव, चीन की आलोचना
अमेरिकी संसद में अरुणाचल को भारत का अभिन्न अंग करार देते एक खास प्रस्ताव पेश किया गया है. पार्टी लाइन से ऊपर उठ कर इस प्रस्ताव को तीन ताकतवर सिनेटरों ने पेश किया है.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' में छपी ख़बर में कहा गया है कि गुरुवार को पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि अरुणाचल प्रदेश 'भारत का अभिन्न हिस्सा' है और वह भारत की 'संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता' का समर्थन करता है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका चीन वास्तविक नियंत्रण की यथास्थिति बदलने के लिए "सैन्य बलों के इस्तेमाल" और भड़काने वाली दूसरी कार्रवाइयों के लिए चीन की निंदा करता है.
प्रस्ताव में 'हमलावर तेवरों और सुरक्षा चुनौती' का सामना करने लिए भारत ने जो कदम उठाए हैं उनकी तारीफ़ की गई है.
प्रस्ताव को जैफ़ मर्कले और बिल हेगार्टी ने पेश किया और इसे जॉन कॉरनिन ने स्पॉन्सर किया. इसने भारत की सेना में आधुनिकीकरण, डाइवर्सिफ़िकेशन और अरुणाचल में विकास स्कीमों की भी तारीफ़ की है. इनमें बॉर्डर इलाक़ै में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने जैसे कदम भी शामिल हैं.
प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपना समर्थन और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसमें भारत-अमेरिका सहयोग और बढ़ाने की बात की गई है. इसमें हाल में क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) पर हाल में सहयोग के प्रयासों की भी चर्चा की गई है.

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रूस से सस्ता तेल खरीद कर भारत हमारी नीति का समर्थन कर रहा: अमेरिका
भारत रूस से तेल खरीद रहा है लेकिन कम से कम दाम पर. इस तरह वो जी-7 के रुख़ को ही आगे बढ़ा रहा है, जिसने रूसी तेल की क़ीमतों पर प्राइस कैप लगा रखा है.
अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री (एनर्जी रिसोर्सेज) आर पियेट ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में यह बात कही है.
'द हिंदू' में इस इंटरव्यू का हवाला देते हुए लिखा है कि रुस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के रुख़ में कोई विरोधाभास नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का प्रमुख वैश्विक सहयोगी है और भारत की तरफ से कम क़ीमत पर रूस से तेल खरीदने में उसके और अमेरिका के रुख़ में कोई अंतर नहीं दिखता.

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अख़बार लिखता है कि रूस तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी मंत्री की इस टिप्पणी को पहली बार इस बारे में अमेरिकी रुख़ के सुबूत के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे ये साफ़ हो गया है कि भारत की ओर से रूस से सस्ते तेल की खरीद पर बाइडेन प्रशासन के अंदर क्या सोच है.
16-17 फरवरी को भारत दौरे पर आए पियेट ने कहा कि एनर्जी ट्रांजिशन के मामले में भारत अमेरिका का अहम सहयोगी है, दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी के मामले में सहयोग की काफी गुंजाइश है.
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