चीन क्या अरुणाचल और सिक्किम में बढ़ा रहा है भारत की मुश्किलें- प्रेस रिव्यू

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चीन और भारत के संबंधों की चर्चा पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है. शुक्रवार के अख़बारों में भी इससे जुड़ी कुछ ख़बरों को जगह दी गई है.
अंग्रेज़ी अख़बार द टेलिग्राफ़ ने एक ख़बर में लिखा है कि सुरक्षा एजेंसियों के एक आकलन में पता चला है कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ''आक्रामक'' कदम उठा रही है.
अख़बार के मुताबिक अख़बार को कई सूत्रों ने बताया है कि चीन लद्दाख में यथास्थिति बदलने की कोशिश के अलावा पूर्वी सीमा के पास गश्त बढ़ा रहा है और उसने सैन्य पोस्ट और बुनियादी ढांचा भी मजबूत करना शुरू कर दिया है.
केंद्रीय मंत्रालय से जुड़े एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा, ''ख़ुफ़िया रिपोर्ट और ज़मीनी आकलन से अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन के आक्रामक गश्त लगाने के संकेत मिलते हैं. वह सीमा के नज़दीक अपने सैन्य पोस्ट बना रहा है और तेज़ी से अपना बुनियादी ढाँचा मज़बूत कर रहा है.''
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है, ''पूर्वी सेक्टर में सीमा के नज़दीक चीनी सेना की बढ़ती तैनाती सतर्क करने वाली है. वे आक्रामक इरादे दिखाने और गश्त बढ़ाने के अलावा अतिरिक्त सैन्य सामान भी तैनात कर रहे हैं.''
अधिकारी ने कहा कि भारत भी सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है और चीन को नज़दीक आने से रोकने के लिए अतिरिक्त सेना तैनात की है.
दोनों देशों के बीच 3488 किमी. की वास्तविक नियंत्रण रेखा का 1346 किमी. का हिस्सा पूर्वी सेक्टर में आता है. अकेले तवांग सेक्टर में ही चीन के साथ 270 किलोमीटर की सीमा है.
चीन ये दावा करता है कि पूर्वी सेक्टर में 90 हज़ार वर्ग किमी. का इलाक़ा यानी पूरा अरुणाचल प्रदेश उसका है. हालांकि, भारत सरकार चीन के दावे पर आपत्ति जताती रही है.
दोनों देशों की सेनाओं का पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ़ कुछ घंटों में आमना-सामना हुआ था. करीब 200 चीनी सैनिकों ने सीमा पार की थी. वो बाद में लौट गए थे.

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रक्षा मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ''चीन की सीमा उल्लंघन की कोशिशों को रोकने के लिए भारतीय सेना भी अपनी पोस्ट मज़बूत की है.''
अधिकारी ने बताया कि भारत ने अतिरिक्त कैमरा लगाए हैं और चीनी सेना पर नज़र रखने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल भी कर रहा है.
भारत और चीन के बीच मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. गतिरोध ख़त्म करने के लिए दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है.

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विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर फिर दिया बयान
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि चीन के सीमा पर उठाए कदमों के कारण भारत-चीन संबंध बेहद मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. अगर दोनों देश साथ नहीं आते हैं तो इसे एशियाई सदी बनाना मुश्किल होगा. ये ख़बर अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में दी गई है.
एस जयशंकर इस समय थाईलैंड के दौरे पर हैं. उन्होंने थाईलैंड की चूलालॉन्गकोन यूनिवर्सिटी में संबोधित करते हुए कहा कि चीन और भारत के संबंध अधिकतर इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैसे दोनों देश अपने हितों को लेकर सहमति बनाते हैं.
उन्होंने पूर्व चीनी नेता डेंग शियाओपिंग के उस कथन को याद किया जिसमें कहा था कि जब भारत और चीन एकसाथ आएंगे तो एशियाई सदी बन सकती है.
जयशंकर ने कहा, ''लेकिन, एशियाई सदी होना मुश्किल है अगर भारत और चीन साथ नहीं आते हैं. आज बढ़ा सवाल ये भी है कि भारत-चीन संबंध किस तरफ़ जा रहे हैं.''
''चीन ने सीमाई इलाक़ों में पिछले दो सालों में जो किया है उसके चलते इस समय संबंध बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं.''
एस जयशंकर ने भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह 'क्वाड' को लेकर भी बयान दिया.
उन्होंने भारत के हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए विज़न को लेकर कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों और विकल्पों से निपटने के लिए क्वाड एक अहम बहुपक्षीय मंच है. हमें विश्वास है कि क्वाड से पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को फ़ायदा होगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इसकी बढ़ती मान्यता से ये साबित हो रहा है.
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बिलकिस बानो मामले में सज़ा सुनाने वाले जज ने क्या कहा
बिलकिस बानो मामले में साल 2008 में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाने वाले न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) यूडी साल्वी ने गुरुवार को कहा कि जिसके ऊपर बीतती है उसे बेहतर पता होता है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश यूडी साल्वी के बयान को प्रमुखता से जगह दी है.
साल 2002 में बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया गया था और उनके परिवार के सदस्यों को मार दिया गया था. इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी जिसके बाद 11 अभियुक्त दोषी पाए गए और बॉम्बे सत्र अदालत ने उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी.
बीती 15 अगस्त, 2022 को इन 11 क़ैदियों को गुजरात सरकार की सज़ा माफ़ी की नीति के तहत रिहा कर दिया गया है.
बॉम्बे सत्र अदालत में जस्टिस साल्वी ने 11 अभियुक्तों को सज़ा सुनाते हुए बिलकिस बानों के बयान को साहसिक बताया था.
उन्होंने अख़बार से कहा, ''मैं बस ये कहना चाहूंगा कि सज़ा के लिए दिशानिर्देश हैं जिन्हें राज्य ने खुद बनाया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले भी हैं.''
जस्टिस साल्वी ने कहा, ''ये फ़ैसला सुनाए लंबा वक्त हो गया है. अब ये सरकार के हाथ में है. सरकार को ही फ़ैसला लेना है. ये सही है या गलत ये न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय को देखना है.''
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