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बिहार के आरा में बैंक को घेरकर खड़ी रही पुलिस, लुटेरे पैसे चुराकर पहले ही हो गए थे फ़रार
- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार के आरा ज़िले में बैंक लूट की एक घटना चर्चा में है.
बेख़ौफ़ लुटेरों ने 6 दिसंबर, बुधवार को दिनदहाड़े यहां शहर के बीचोंबीच स्थित ‘एक्सिस बैंक’ को निशाना बनाते हुए न सिर्फ़ साढ़े 16 लाख रुपये लूट लिए, बल्कि वे पुलिस को चकमा देकर भागने में भी सफल रहे.
मौक़े पर पहुंचे पुलिसबल को लगा लुटेरे अभी बैंक के भीतर ही हैं. बैंक को चारों तरफ़ से घेर लिया गया.
बाद में जब पुलिस बैंक के भीतर दाख़िल हुई तो उन्हें पता चला कि लुटेरे पहले ही फरार हो चुके थे.
क्या बोली पुलिस?
आरा के एसपी प्रमोद कुमार यादव ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि, "लूट की सूचना मिलने के दस मिनट के भीतर पुलिस मौक़े पर पहुंच गई थी, लेकिन लुटेरे पहले ही भाग चुके थे. बैंककर्मियों ने बताया था कि लुटेरे भीतर हैं, इसलिए बैंक की घेराबंदी कर ली गई थी. इस घटनाक्रम में पुलिस का सवा घंटा भी बर्बाद हुआ."
वो कहते हैं, "हमें साढ़े 10 बजे के आसपास सूचना मिली कि लुटेरे बैंक में घुसे हैं. यह सूचना पुलिस को बैंककर्मियों की ओर से मिली थी. सूचना के 10 मिनट के भीतर ही पुलिस की टीम वहां पहुंच गई."
"बैंक के किसी कर्मी ने पुलिस को बताया कि लुटेरे अंदर ही हैं और उसने बाहर से गेट पर ताला लगा दिया है. इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी की और वो इस कोशिश में लग गई कि लोगों को बचाया जाए और लुटेरों को पकड़ा जाए. मैं भी इस दौरान वहां पहुंचा, लेकिन ऐसा था नहीं."
पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक़ 18 से 20 साल की उम्र के पांच युवा देसी पिस्तौल (कट्टा) लहराते हुए आए और कैश काउंटर पर रखी लगभग साढ़े 16 लाख की धनराशि लेकर फ़रार हो गए. बाहर निकलते हुए उन्होंने ही बाहर से बैंक का शटर लॉक कर दिया.
क्या अभी तक कोई लुटेरा पकड़ा गया है? इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक ने कहा, "हम अपराधियों की जगह का पता करने में लगे हैं, काफ़ी दूर तक हमने उन्हें लोकेट भी किया है."
वो कहते हैं कि ये लुटेरे स्थानीय नहीं लगते. वो कहते हैं, "चूँकि ये बैंक लुटेरे हैं तो थोड़े शातिर भी हैं. हम मान रहे हैं कि ये बाहरी हैं. शुरू में हमें लगा था कि ये स्थानीय लोग हो सकते हैं लेकिन बाद में तस्वीरों से मिलान करने पर ऐसा लग रहा कि यह बाहर ये आया लुटेरा गैंग है."
"ऐसे गैंग जो वैशाली या मुज़फ़्फ़रपुर में सक्रिय हैं, ये पटना की तरफ़ से निकल गए हैं. हमारी कोशिश है कि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ लिया जाए."
क़ानून व्यवस्था पर उठे सवाल
बीबीसी से बातचीत में प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी नेता विजय सिन्हा ने आरोप लगाया, "इस सरकार में अपराधियों का मनोबल चरम पर है. शासन-प्रशासन में बैठे लोगों का ध्यान क़ानून व्यवस्था पर कम और शराब-रेत और ज़मीन माफ़ियाओं के संरक्षण पर अधिक है. इससे ये हो रहा कि कहीं डकैती हो रही तो कहीं हत्याएं. फिर से अपहरण भी शुरू हो गए हैं."
राज्य में क़ानून व्यवस्था संभालने में असफलता और बढ़ते अपराध और भाजपा के आरोप पर जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा, "राज्य के लिए अपराध की घटनाएं चिंता और चुनौती दोनों हैं. पुलिस कड़ाई से कार्रवाई भी कर रही है."
वो कहते हैं, "सरकार अपराध को रोकने के लिए पूरी तरह संजीदा है. सरकार किसी भी अपराधी को बचाने का काम नहीं करती. एनसीआरबी के आंकड़े तो भाजपा शासित उत्तर प्रदेश को ही सबसे ऊपर रख रहे हैं. सरकार तमाम चीज़ों और घटनाओं का ख़्याल रख रही है लेकिन जो हमारी आलोचना कर रहे हैं वो देखें कि जब वो शासन में थे तो क्या कहते थे."
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