भारत के लिए विदेश में अपना एकमात्र सैन्य ठिकाना खाली करना कितना बड़ा झटका है

एक कार्यक्रम में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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इमेज कैप्शन, बीजेपी के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत ने क़रीब 25 साल बाद ताजिकिस्तान में मौजूद अपने एयरबेस को खाली कर दिया है. यह भारत का एकमात्र विदेशी सैन्य ठिकाना था.

भौगोलिक स्थिति की वजह से आयनी एयरबेस का काफ़ी ज़्यादा सामरिक महत्व था. यह एयरबेस अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और चीन, तीनों के ही नज़दीक था.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिन्दुस्तान टाइम्स' की एक ख़बर के मुताबिक़ भारत ने इस एयरबेस को विकसित करने में कथित तौर पर बीते क़रीब दो दशक में लगभग दस करोड़ डॉलर ख़र्च किए थे.

यह एयरबेस सोवियत संघ के दौर में बना था. भारत ने यहां लड़ाकू विमानों को उतार सकने वाले रनवे बनाने, फ्यूल डिपो और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल की सुविधा विकसित की थी.

आयनी एयरबेस को लेकर जानकारी सार्वजनिक होने के बाद भारत में इसपर सियासत भी तेज़ हो गई है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे भारत की रणनीतिक नाकामी बताया है. जबकि सरकार का कहना है कि समझौते की मियाद पूरी होने के बाद भारत ने इस एयरबेस से वापसी की है.

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत ने 2000 के दशक की शुरुआत में ताजिकिस्तान में अपना आयनी एयरबेस स्थापित किया था और इसके बाद, वहाँ बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया गया.

आयनी एयरबेस का महत्व

ताजिकिस्तान में वख़ान घाटी के पास मौजूद एक बौद्ध स्तूप

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इमेज कैप्शन, ताजिकिस्तान में वख़ान घाटी के पास मौजूद एक बौद्ध स्तूप के अवशेष

जयराम रमेश का कहना है कि सामरिक महत्व को देखते हुए, आयनी में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की भारत की बड़ी योजनाएँ थीं.

उन्होंने कहा, "चार साल पहले, भारत को स्पष्ट संदेश दिया गया था कि उसे धीरे-धीरे वहाँ से हटना होगा. अब ऐसा दिखता है कि भारत ने आख़िरकार उस एयरबेस को बंद कर दिया है, जो उसका एकमात्र विदेशी सैन्य ठिकाना था. बेशक यह हमारी रणनीतिक कूटनीति के लिए एक और झटका है."

"संयोग से आयनी एयरबेस राजधानी दुशान्बे से क़रीब 10 किलोमीटर दूर है, जहाँ एक शानदार म्यूज़ियम है. वहाँ की सबसे आकर्षक और उल्लेखनीय कलाकृतियों में से एक है बुद्ध की प्रतिमा, जिसके बारे में माना जाता है कि वह 1500 साल से भी ज़्यादा पुरानी है."

30 अक्तूबर को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल पर प्रतिक्रिया दी थी. उनके जवाब के बाद ही इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर जानकारी मिली है.

रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमारा ताजिकिस्तान के साथ एयरोड्रोम बनाने का एक द्विपक्षीय समझौता था. यह व्यवस्था कई साल तक चलती रही. इस समझौते के ख़त्म होने के साथ ही हमने वह ठिकाना साल 2022 में ताजिकिस्तान को सौंप दिया है."

भारत के लिए कितना बड़ा झटका

पीएम मोदी, इमोमाली रहमान

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इमेज कैप्शन, इसी साल अगस्त में पीएम मोदी की मुलाक़ात ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान से हुई थी
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रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी के मुताबिक़ इस एयरबेस को भारतीय वायुसेना और बीआरओ यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन ने मिलकर विकसित किया था.

राहुल बेदी कहते हैं, "आयनी एयरबेस को क़रीब तीन साल पहले बंद कर दिया गया था. यह एयर फ़ोर्स का मामला नहीं है, यह सरकार का मामला है. सरकार ने इस मुद्दे पर पहल नहीं की."

"इसके बंद होने से भारत के नुक़सान की बात करें तो मौजूदा जियो-पॉलिटिक्स में इसका न तो फायदा है न ही नुक़सान. लेकिन पावर प्रोजेक्शन को इन्होंने (सरकार) गंभीरता से नहीं लिया. इन्होंने सेन्ट्रल एशिया में पावर प्रोजेक्शन को गंभीरता से लेने की शुरुआत की और एयरबेस बनाया, लेकिन फिर इसे आगे नहीं ले जा सके."

राहुल बेदी मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की वजह से भारत के लिए यह एयरबेस काफ़ी अहम था और मौजूदा दौर में अफ़ग़ानिस्तान भी 25 साल पहले की तुलना में काफ़ी बदल चुका है. इसलिए एक नज़रिए से इस एयरबेस की अहमियत भी कम हो गई है.

वहीं रक्षा विशेषज्ञ संजीव श्रीवास्तव कहते हैं, "आयनी एयरबेस उस वक़्त बना था जब अफ़ग़ानिस्तान में पहली बार तालिबान सत्ता में आया था और वहां अधिक सक्रिय था. भारत और ताजिकिस्तान ने एक समझौते के तहत वहां एक एयरबेस और हॉस्पिटल तैयार किया था."

वो समझाते हैं कि 9/11 के हमलों के बाद तालिबान के ख़िलाफ़ अमेरिका ने युद्ध छेड़ा और अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान को उखाड़ फेंका, जिसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में बड़ा बदलाव आया. और 2021 में एक बार फिर यहां तालिबान ने सत्ता में वापसी की है.

वो कहते हैं, "आप देखें तो, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान दोबारा सत्ता में है और अगर भारत इस एयरबेस के तौर पर अपनी मौजूदगी बरक़रार रखता है जो तालिबान के ख़िलाफ़ बनाया गया था, तो यह ठीक नहीं होता."

संजीव श्रीवास्तव मानते हैं कि मौजूदा समय में भारत और तालिबान के रिश्ते ठीक हो रहे हैं और तालिबान के विदेश मंत्री ने हाल ही भारत की यात्रा कर इसका संदेश भी दिया है.

22 अप्रैल को जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमला हुआ, तब तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने इस हमले की निंदा की.

कुछ दिनों पहले मुत्तक़ी लगभग एक हफ़्ते के भारत दौरे पर थे. ये इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अपनी नीति में साफ़ बदलाव कर रहा है.

भारत के लिए ऐतिहासिक रहा है आयनी एयरबेस

अहमद शाह मसूद

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इमेज कैप्शन, अहमद शाह मसूद ने जिस हॉस्पिटल में दम तोड़ा था, उसे भारत ने ही एयरबेस के नज़दीक तैयार किया था (फ़ाइल फ़ोटो)

राहुल बेदी के मुताबिक़ आयनी एयरबेस को बनाना एक पावर प्रोजेक्शन का खेल था, इसका मक़सद सेंट्रल एशिया में भारत को अपनी ताक़त को दिखाना था.

वो कहते हैं कि यह वह दौर था जब भारत के अफ़ग़ानिस्तान से काफ़ी अच्छे ताल्लुकात थे और नॉर्दर्न एलायंस के अहमद शाह मसूद के साथ भारत के अच्छे संबंध थे.

9/11 के हमलों से दो दिन पहले यानी नौ सितंबर 2001 को अल-क़ायदा के चरमपंथियों ने अफ़ग़ानिस्तान के एक बड़े योद्धा और नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद शाह मसूद की एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी थी.

राहुल बेदी कहते हैं कि अहमद शाह को जब घायल अवस्था में ताजिकिस्तान के शहर फ़रखर ले जाया गया, वहां मौजूद एक भारतीय डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित किया था.

दुशान्बे से क़रीब 80 मील दूर दक्षिण की तरफ फ़रखर एयरबेस है. इसके नज़दीक भारत ने एक अस्पताल बनाया था.

वहीं आयनी एयरबेस भारत के लिए ऐतिहासक तौर पर काफ़ी अहम रहा है. इस एयरबेस के पास भारत ने एक फ़ील्ड हॉस्पिटल भी तैयार किया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित