सीरियाः असद के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद अमेरिका की असल चिंता क्या है?

    • Author, टॉम बेटमैन
    • पदनाम, विदेश विभाग संवाददाता

बशर अल-असद के "ऐतिहासिक" पतन की गति और इसकी अहमियत ने अमेरिका को हैरान करके रख दिया है. मगर, राष्ट्रपति बाइडन इसका श्रेय भी ले रहे हैं.

अपने बयान में, उन्होंने सीरिया में सत्ता के असाधारण हस्तांतरण को अमेरिकी रणनीति का परिणाम बताया.

उन्होंने कहा कि इसके ज़रिए उस क्षेत्र में रूस और ईरान की भूमिका को मौलिक तौर पर कमज़ोर किया गया और इससे बशर अल-असद के शासन का अंत करने में मदद मिली है.

लेकिन हक़ीक़त ये है कि अमेरिका ने शायद ही यह सोचा हो कि हमास के ख़िलाफ़ इसराइल को और रूस के ख़िलाफ़ यूक्रेन को दिया गया सैन्य सहयोग, सीरिया में असद के शासन का अंत करने में मददगार साबित होगा.

मगर, अब ऐसा हो गया है. और अब अमेरिका को इसके परिणामों का सामना करना होगा.

बाइडन के अनुसार, यह एक "ऐतिहासिक अवसर" है, लेकिन "जोख़िम और अनिश्चितता" का पल भी है.

अमेरिका यह पता लगाने की कोशिशों में जुटा है कि आगे क्या होगा? सीरिया पर शासन कौन करेगा? राष्ट्रपति ने रविवार सुबह व्हाइट हाउस में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मुलाक़ात भी की.

दरअसल, अक्टूबर 2023 में जब हमास ने इसराइल पर हमला किया था. तब अमेरिका ने इसराइल को सैन्य सहयोग मुहैया करवाया था.

वहीं, साल 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य सहयोग देना शुरू कर दिया था.

अमेरिका, अब क्या करेगा?

अमेरिकी प्रशासन सीरिया में असद के अंत, ईरान की कमज़ोरी या सीरिया में रूस की किरकिरी का शोक नहीं मनाएगा.

दरअसल, अमेरिका का डर उस खालीपन को लेकर है, जो असद के हटने के बाद पैदा हुआ है. क्योंकि, यह स्थिति अमेरिका के लिए नापसंद जैसी है.

क्योंकि, सीरिया में वो स्थिति भी बन सकती है, जो अमेरिका सबसे कम चाहता है. जैसे- उन इस्लामिक विद्रोहियों के हाथ में सत्ता चले जाना, जिनका नाम अमेरिका ने आतंकवादी गुटों में नामित कर रखा है.

ये स्थिति सीरिया के बड़े हिस्से में अराजकता और नए जोखिम खड़े कर सकता है.

जैसा कि दमिश्क असद के पतन की ख़ुशियों में चलाई जा रही गोलियों से गूंज रहा है, मगर अधिकांश सीरियाई नागरिक अमेरिका की बातों से पूरी तरह से सहमति नहीं जताने वाले हैं.

वहीं, अमेरिका भी कुछ समय के लिए असद के अंत की सराहना करेगा, मगर गंभीर तौर पर उसकी चिंता इसी बात को लेकर होगी कि अब सीरिया में असद की जगह कौन लेगा?

अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्या कहा?

अमेरिका ने यह बात पहले ही स्पष्ट कर दी है कि अमेरिकी सैनिक पूर्वी सीरिया में रहेंगे, कथित इस्लामिक स्टेट समूह का मुक़ाबला करने के लिए उसके पास आधिकारिक तौर पर छोटी संख्या में बल मौजूद है.

मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के उप रक्षा मंत्री डेनियल शापिरो ने सभी पक्षों से कहा है कि सभी नागरिकों की रक्षा करें, खासतौर पर अल्पसंख्यकों की, और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करें.

उन्होंने कहा, "हम सीरिया में बनी हुई ज़मीनी अराजक परिस्थितियों को लेकर सजग हैं, जो आईएसआईएस को सक्रिय होने, और बाहरी अभियानों के लिए योजना बनाने का मौका दे सकती है."

"हम उन सहयोगियों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, जो उनकी (आईएसआईएस) क्षमताओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

हम अभी नहीं जानते हैं कि सीरिया में अमेरिका की मौजूदगी को लेकर नई सत्ता की प्रतिक्रिया कैसी होगी.

मगर, ऐसा नज़र आ रहा है कि अब अमेरिका का पूरा ज़ोर उसके पसंदीदा गुटों के ज़रिए सीरिया में बातचीत के माध्यम से हालात स्थिर करने पर होगा.

क्या अमेरिका बदलेगा रुख़?

इससे पहले, सीरिया में गृह युद्ध के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन लोगों को सीमित समर्थन के लिए अनुमति दे दी थी, जो अमेरिका की नज़र में उदारवादी विद्रोही थे.

बाद में इस मामले को छोड़ दिया गया, क्योंकि चरमपंथी युद्ध में हावी होने लगे और रूस ने असद की ओर से लड़ना शुरू कर दिया था.

अमेरिका ने उस समय असद और विपक्षी ताकतों के बीच बातचीत के ज़रिए समझौता किए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रक्रिया का समर्थन किया था.

अब संभावना है कि असद के जाने के बाद जो उनके लोग बचे हैं, उनमें और विद्रोहियों के बीच समझौता कराए जाने के लिए अमेरिका के रूख़ में बदलाव आएगा.

दमिश्क पर कब्ज़ा करने वाले विद्रोहियों के समूह का नेतृत्व करने वाले हयात तहरीर अल-शाम ने बार-बार खुद की छवि को बदलने के संकेत देने की कोशिश की है.

उसने अल-क़ायदा के साथ अपने संबंधों को छोड़ दिया है. हिंसक बदले के विचार को ख़ारिज कर दिया है.

मगर, अमेरिका को इस समूह पर यकीन शायद ही हो, क्योंकि उसने इस समूह को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है.

हालांकि, इस क्षेत्र के कुछ लोग जो अमेरिकी अधिकारियों के निकट संपर्क में हैं, वो इस दृष्टिकोण को अपमानजनक मानते हैं.

उनका कहना है कि सीरियाई नागरिकों के विरोध को ध्यान में रखते हुए दमिश्क में परिवर्तन की प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए.

क्या चाहते हैं सीरिया के लोग?

मौज़ मुस्तफ़ा अमेरिका में सीरियाई इमरजेंसी टास्क फ़ोर्स का हिस्सा हैं. वो अमेरिकी सेना और सीरिया में सहयोगी सेनाओं के बीच समन्वयक के तौर पर सक्रिय हैं.

वो कहते हैं कि अब तक जो सामने आया है, वो अच्छा है, जिसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता है. लेकिन, अमेरिका को इसे एक गुट के कार्यों तक सीमित नहीं रखना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "वहां एक ऑपरेशन रूम है, जहां अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के गुट हैं. इनमें कुछ धर्मनिरपेक्ष हैं, कुछ रूढ़ीवादी हैं, लेकिन एक बात पर वो राज़ी हैं. वे सभी सीरिया को अल-कायदा, आईएसआईएस, ईरान, रूस से मुक्त कराना चाहते हैं. और वो ऐसा करेंगे."

अपने बयान में राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि सीरिया में अभी कुछ समूह सही बातें कह रहे हैं. मगर, वह उसका मूल्यांकन उनके कार्यों के आधार पर करेंगे.

इस बीच, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया पर एक पोस्ट की थी. इसमें उन्होंने सीरिया को एक "गड़बड़" बताया था और कहा था कि अमेरिका को इससे बाहर रहना चाहिए. "यह हमारी लड़ाई नहीं है."

उन्होंने अपनी टिप्पणी में ओबामा को भी ज़िम्मेदार ठहराया था. और कहा था कि रूस को भी इस देश से अब दूरी बना लेना चाहिए.

और साथ ही यह भी कहा था कि रूस को यूक्रेन से बातचीत करके युद्ध को ख़त्म करने की कोशिश करना चाहिए.

ट्रंप ने कहा था, "मैं व्लादिमीर पुतिन को अच्छे से जानता हूं. यह उनके लिए कार्रवाई करने का समय है."

साल 2019 में राष्ट्रपति रहते हुए ट्रंप ने एक हैरान कर देने वाली घोषणा की थी. वो यह थी कि उन्होंने सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को वापस लेने की घोषणा की थी.

हो सकता है कि ट्रंप की नज़र पिछली स्थिति को फिर से लागू करने पर हो.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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