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सीरिया में असद का पतन रूस की साख के लिए कितना बड़ा झटका
- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, बीबीसी रूस संपादक
क़रीब एक दशक से रूस की सैन्य ताक़त की मेहरबानी से बशर अल असद सीरिया की सत्ता पर काबिज़ थे.
बीते 24 घंटों में जो कुछ हुआ है, वो हैरान करने वाला है.
सीरिया में असद की सत्ता का पतन हो चुका है. असद पद देश छोड़ चुके हैं और मॉस्को में हैं.
रूसी न्यूज़ एजेंसी और सरकारी टीवी ने क्रेमलिन के सूत्रों के हवाले से कहा है कि रूस ने असद और उनके परिवार को मानवीय आधार पर शरण दे दी है.
कुछ ही दिनों के भीतर क्रेमलिन का सीरिया प्रोजेक्ट एक नाटकीय घटनाक्रम में भरभरा कर गिर गया है. और रूस इसे रोकने में विफल साबित हुआ है.
रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वो सीरिया के नाटकीय घटनाक्रम पर नज़र रख रहा है.
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रूस के लिए झटका
असद का पतन रूस के लिए एक बड़ा झटका है.
साल 2015 में मुसीबत में पड़े असद की मदद के लिए रूस ने हज़ारों सैनिक भेजे थे.
रूस का मुख्य उद्देश्य अपने आप को एक ग्लोबल पॉवर के रूप में पेश करना था.
सोवियत दौर के बाद ये पश्चिमी देशों की ताक़त को चुनौती देने की व्लादिमीर पुतिन की पहली बड़ी कोशिश थी.
और ऐसा लगता है कि ये प्रयास सफल रहा था.
साल 2017 में राष्ट्रपति पुतिन सीरिया के हेमिम एयर बेस पर गए थे और कहा था कि वो अपने मिशन में सफल रहे हैं.
उस दौर में रूसी हवाई हमलों में आम लोगों की मौत की ख़बरों के बावजूद रूसी रक्षा मंत्रालय विदेशी मीडिया के अपनी सैन्य ताक़त दिखाने के लिए सीरिया ले जाता था.
ऐसे ही एक ट्रिप में एक अधिकारी ने मुझे बताया था कि रूस सीरिया में 'लंबे समय तक' रहने वाला है.
बात सिर्फ़ सम्मान की नहीं...
लेकिन ये बात सिर्फ़ सम्मान की ही नहीं थी.
सैन्य मदद के बदले सीरिया ने रूस को हेमिम का हवाई अड्डा और तार्तुस का नोसैनिक अड्डा 49 साल की लीज़ पर दिया था.
रूस ने भूमध्यसागर इलाक़े में अपने पैर जमा लिए थे. ये दोनों अड्डे अफ़्रीका में मिलने वाले सैन्य ठेकों के लिए अहम बन गए थे.
रूस के लिए अब एक बड़ा सवाल ये है - इन अड्डों का अब क्या होगा?
रूस ने जिस बयान में ये कहा गया है कि असद मॉस्को में आ गए हैं, उसी में इस बात का ज़िक्र भी है कि रूस सीरिया के हथियारबंद विपक्ष के संपर्क में भी है.
सरकारी टीवी के एंकर ने कहा है कि सीरिया में विपक्ष के नेताओं ने वहाँ रूस के सैन्य अड्डों और राजनयिक मिशन की सुरक्षा की गारंटी दी है.
विदेश मंत्रालय ने कहा है सीरिया में उनके अड्डे इस वक़्त हाई अलर्ट पर हैं.
मंत्रालय ने ये भी दावा किया है कि इस समय उन्हें कोई गंभीर ख़तरा नहीं है.
बशर अल-असद सीरिया में रूस के सबसे बड़े हिमायती थी.
रूस ने उन पर बहुत भरोसा किया था.
मॉस्को में अधिकारी असद के तख़्तापलट को उनकी विदेश नीति के लिए एक झटके के रूप में पेश करने से नहीं बच पाएंगे.
बलि का बकरा
इसके बावजूद अधिकारी इसके लिए बलि का बकरा तलाश रहे हैं.
रविवार की रात रूस के सरकारी टीवी ने अपने साप्ताहिक शो में सीरियाई सेना पर निशाना साधा और उसे विद्रोहियों के ख़िलाफ़ नहीं लड़ने का दोषी ठहराया.
टीवी एंकर येवगेनी किसेलेव ने कहा, "हर कोई देख सकता है कि सीरियाई अधिकारियों के लिए स्थिति नाटकीय होती जा रही है. लेकिन अलेप्पो में बिना लड़े मैदान छोड़ दिया गया. कई मज़बूत सैन्य ठिकानों में आत्मसमर्पण कर दिया गया. ये सब तब हुआ जब सरकारी सैनिकों के पास बेहतर हथियार थे और उनकी संख्या हमलावरों से कई गुना थी. यह एक रहस्य है."
एंकर ने दावा किया कि रूस को "हमेशा सीरिया में सुलह की गुंज़ाइश थी."
आख़िर में एंकर ने कहा, "बेशक सीरिया में जो हो रहा है, हम उसके प्रति उदासीन नहीं हैं. लेकिन हमारी प्राथमिकता रूस की अपनी सुरक्षा है. और वो है यूक्रेन में चल रहा हमारा विशेष सैनिक अभियान."
ये रूसी जनता के लिए एक स्पष्ट संदेश है.
रूस ने नौ साल बशर अल-असद को सत्ता में बनाए रखने के लिए संसाधन झोंके.
इसके बावजूद रूस के लोगों से ये कहा जा रहा है कि उनके पास चिंता करने के लिए और भी अहम चीज़ें हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित