You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
रूस के पूर्व अधिकारी ने परमाणु हथियारों के अड्डे की सुरक्षा से जुड़े कई राज़ खोले
- Author, विल वर्नोन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर बड़ा हमला किया था, उसी वक्त रूस के परमाणु हथियारों के अड्डे पर तैनात सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया गया था.
यह दावा एंटोन ने किया है जो रूस के परमाणु हथियारों के अड्डे में काम कर चुके हैं और रूसी सेना में भूतपूर्व अधिकारी रह चुके हैं.
एंटोन ने उस समय को याद करते हुए बताया, “पहले हम केवल अभ्यास किया करते थे. मगर, जब युद्ध शुरू हुआ, तब हम सभी को परमाणु हथियारों को इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहने को कहा गया था.”
एंटोन से मेरी मुलाक़ात रूस के बाहर एक गुप्त स्थान पर हुई थी. सुरक्षा के लिहाज़ से बीबीसी उस जगह की जानकारी नहीं दे रहा है. सुरक्षा के लिहाज़ से पूर्व अधिकारी का नाम बदल दिया गया है और उनका चेहरा भी नहीं दिखाया गया है.
एंटोन ने बताया, “हमने अपनी सेनाओं को समुद्र के रास्ते और वायुमार्ग से भेजने की तैयारी कर ली थी. सैद्धांतिक तौर पर हम परमाणु हमला करने के लिए तैयार थे.”
दरअसल, एंटोन खुद रूस के एक अत्यंत गोपनीय परमाणु हथियार अड्डे पर एक अधिकारी के तौर पर तैनात थे. उन्होंने हमें कुछ दस्तावेज़ दिखाए, जो उनकी यूनिट, रैंक और उनकी तैनाती की पुष्टि करते हैं.
एंटोन ने जितनी भी बातें हमें बताईं, बीबीसी स्वतंत्र तौर पर उन सभी दावों की जांच करने में असमर्थ है. लेकिन उनके ये दावे उस समय रूस के दिए बयानों से मेल खाते हैं.
यूक्रेन की सीमा पर आक्रमण के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह घोषणा की थी कि रूस के परमाणु सुरक्षा बलों को 'विशेष प्रकार के युद्ध' के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है.
एंटोन ने क्या बताया?
एंटोन बताते हैं कि जिस दिन युद्ध शुरू हुआ था, उसी दिन परमाणु सुरक्षा में तैनात विशेष बलों को युद्ध की चेतावनी मिल चुकी थी.
उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम “परमाणु हथियारों के अड्डे के अंदर तैयार थी”.
एंटोन ने बताया, “हमारे पास रूसी सरकारी टीवी था. मैं नहीं इसका मतलब नहीं जानता था क्योंकि मैं केवल अपनी ड्यूटी कर रहा था. हम युद्ध नहीं लड़ रहे थे. हम केवल परमाणु हथियारों की सुरक्षा में जुटे थे.”
उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के दो से तीन सप्ताह बाद हम सभी को सतर्क रहने का जो आदेश दिया गया था, उसे निरस्त कर दिया गया.
वैसे एंटोन ने जो भी बातें बीबीसी को बताईं, वो रूस की परमाणु सुरक्षा की कार्यप्रणाली से जुड़ी अत्यंत गोपनीय बातें हैं. और यह बहुत ही कम होता है जब ऐसी किसी सेवा से जुड़ा व्यक्ति किसी पत्रकार से बात करे.
उन्होंने बताया, “वहां के लिए चयन प्रक्रिया बहुत कठिन है. वहां मौजूद हर व्यक्ति एक पेशेवर सैनिक है. वहां कोई भी सामान्य सैनिक नहीं है. वहां लगातार जांच होती रहती थी. हर किसी का लाई-डिटेक्टर टेस्ट होता था. वहां तनख़्वाह भी बहुत ज़्यादा होती थी. लेकिन, वहां काम करने वाले सैनिकों को युद्ध में नहीं भेजा जाता था.”
“वो वहां सभी सैनिक या तो परमाणु हमले को रोकने या फिर परमाणु हमला करने के लिए तैनात किए गए थे.”
रूसी सेना के भूतपूर्व अधिकारी एंटोन ने बताया कि वहां हमारे जीवन को सख्ती से नियंत्रित किया जाता था.
उन्होंने कहा, “यह देखना मेरी ज़िम्मेदारी थी कि मेरे साथ काम कर रहा कोई भी सैनिक परमाणु हथियारों के अड्डे पर फ़ोन लेकर न आए.”
एंटोन परमाणु हथियारों के अड्डे की सुरक्षा ईकाई में शामिल थे. दरअसल, यह एक रैपिड एक्शन फ़ोर्स थी, जो परमाणु हथियारों की सुरक्षा में तैनात थी.
उन्होंने कहा, “यह एक छोटे समुदाय में रहने जैसा था, जहां कोई भी अपरिचित नहीं था. यदि कोई सैनिक अपने माता-पिता को वहां लाना चाहता था, तो उसके लिए उसको तीन महीने पहले एफ़एसबी सुरक्षा सेवा में आवेदन करना होता था.”
एंटोन गर्व के भाव से बताते हैं, “नियमित तौर पर हमारा प्रशिक्षण होता था. हम केवल दो मिनट में हमले का जवाब देने में सक्षम थे.”
रूस के पास कितने परमाणु हथियार हैं?
फ़ेडरेशन ऑफ़ अमेरिकन साइंटिस्ट के मुताबिक, रूस के पास लगभग 4,380 परमाणु हथियार हैं.
लेकिन, इनमें से केवल 1,700 को “तैनात” किया गया है, यानी युद्ध में इस्तेमाल किए जाने के लिए तैयार स्थिति में रखा गया है. नैटो के सभी सदस्य देशों के पास लगभग समान संख्या में परमाणु हथियार हैं.
एक चिंता यह भी है कि पुतिन “नॉन-स्ट्रेटेजिक” हथियारों को युद्ध में तैनात कर सकते हैं. इन्हें टैक्टिकल हथियार भी कहा जाता है.
सामान्य तौर पर ये छोटी मिसाइलें होती हैं, जो बड़े स्तर पर नुक़सान नहीं करतीं. लेकिन, इनके इस्तेमाल से युद्ध में भयानक बढ़ोतरी हो सकती है.
दरअसल, रूस यह सब कुछ केवल इसलिए कर रहा है, क्योंकि वो पश्चिमी मुल्कों की नब्ज़ टटोलना चाहता है.
पिछले सप्ताह ही राष्ट्रपति पुतिन ने रूस के परमाणु दस्तावेज़ में संशोधन करवाया है. इस दस्तावेज़ में आधिकारिक नियमों का उल्लेख है, जिसमें यह बताया गया कि किन परिस्थितियों में रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है.
इस दस्तावेज़ के मुताबिक, यदि परमाणु शक्ति संपन्न किसी देश की मदद से कोई ऐसा देश जो परमाणु शक्ति संपन्न नहीं है, लेकिन रूस पर बड़ा हमला करता है तो रूस उस पर परमाणु हमला कर सकता है.
रूस के अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेज़ में संशोधन करने के बाद युद्ध के मैदान में रूस की हार की आशंका "लगभग ख़त्म" हो जाएगी.
क्या परमाणु हथियार अभी प्रभावी हैं?
परमाणु हथियारों के मामले में कुछ जानकार यह सवाल उठाते हैं कि क्या रूस का परमाणु हथियार भंडार अब भी पूरी तरह प्रभावी है?
कुछ पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के अधिकांश हथियार सोवियत दौर के हैं. ऐसे में हो सकता है कि वो काम भी न करें.
हालांकि, एंटोन ने इस बात का खंडन किया. उन्होंने कहा, “तथाकथित विशेषज्ञ बहुत सामान्य नज़रिये से देख रहे हैं”.
उन्होंने कहा, “हो सकता है कि वहां कुछ हथियार ऐसे हों जो पुराने समय के लगें. लेकिन देश के पास असाधारण परमाणु हथियार हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में दूसरे हथियार भी उपलब्ध हैं. साथ ही वायु, ज़मीन और समुद्र के रास्ते लगातार निगरानी भी की जाती है.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रूस के परमाणु हथियार पूरी तरह से काम कर रहे हैं और युद्ध में इस्तेमाल किए जाने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने बताया, “परमाणु हथियारों का रखरखाव नियमित तौर पर किया जाता है. एक मिनट के लिए भी इस काम को नहीं रोका जाता है.”
एंटोन ने क्यों छोड़ी रूसी सेना?
एंटोन ने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के कुछ समय बाद ही उनको आदेश मिल चुका था. एंटोन ने इसे एक “आपराधिक आदेश” बताया.
दरअसल, इस आदेश के तहत एंटोन से कहा गया था कि वो दी गई गाइडलाइन्स के अनुसार अपने सैनिकों को तैयार करें.
एंटोन ने बताया, “हमसे कहा गया था कि यूक्रेनी नागरिक भी लड़ाके हैं, उनको ख़त्म किया जाए. यह मेरे लिए ख़तरे की घंटी के समान था. यह एक ‘वॉर क्राइम’ था. मैंने कहा कि मैं यह प्रोपगेंडा आगे नहीं बढ़ाऊंगा.”
वरिष्ठ अधिकारियों ने एंटोन को प्रताड़ित करने के मकसद से उनका ट्रांसफर देश के दूसरे हिस्से में सेना की सामान्य टुकड़ी में कर दिया. एंटोन को बताया गया कि उन्हें युद्ध में भेजा जाएगा.
ये सेना की वो टुकड़ियां थीं, जिनको सबसे पहले युद्ध के मैदान में भेजा जाता है. एंटोन ने बीबीसी को बताया कि जो सैनिक युद्ध पर आपत्ति जताते, उनका इस्तेमाल “चारे की तरह” होता और उन्हें फ्रंटलाइन पर भेज दिया जाता.
लंदन में रूस के दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी करने के अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
इससे पहले कि एंटोन को फ्रंटलाइन पर भेजा जाता, उन्होंने एक बयान पर हस्ताक्षर कर दिए जिसमें लिखा था कि वो युद्ध में हिस्सा लेने से इनकार करते हैं.
इसके बाद उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया गया.
उन्होंने हमें वो दस्तावेज़ भी दिखाए, जिसमें उनको सामान्य टुकड़ी में ट्रांसफर किए जाने का ज़िक्र था और उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की जानकारी भी थी.
एंटोन ने उसके बाद देश छोड़ने का फ़ैसला किया. इस मामले में उनकी मदद रूस की सेना छोड़कर जाने वाले भूतपूर्व सैन्य कर्मियों के एक संगठन ने की थी.
उन्होंने कहा, “यदि मैं परमाणु हथियारों के अड्डे से ही भाग जाता, तो फिर एफ़एसबी अलग तरह से प्रतिक्रिया दे सकती थी. इसके बाद मैं देश छोड़कर नहीं जा पाता.”
ऐसा मानने की वजह वो ये बताते हैं कि उनको सेना की सामान्य टुकड़ी में भेज दिया गया था, ऐसे में शीर्ष स्तर पर सुरक्षा मंजूरी की प्रणाली उनके लिए काम नही करती.
एंटोन ने कहा कि वो चाहते थे कि दुनिया इस बात को जाने कि कई रूसी सैनिक युद्ध के ख़िलाफ़ थे.
वॉलंटियर ऑर्गनाइजे़शन क्या है?
वॉलंटियर ऑर्गनाइजे़शन ऐसे सैनिकों की मदद करता है, जो रूस से भागकर विदेश जाना चाहते हैं.
इस संगठन ने बीबीसी को बताया कि ऐसी मदद की उम्मीद रखने वाले सैन्य कर्मियों की संख्या एक महीने में 350 पर पहुंच चुकी है.
इस बीच, जो देश छोड़कर भाग रहे हैं, उनके लिए ख़तरा भी बढ़ रहा है.
कम से कम एक ऐसे सैनिक की मौत हो चुकी है जो विदेश भाग गए थे. ऐसे भी कई केस हैं जिनमें विदेश भाग गए सैन्य कर्मियों को न सिर्फ वापस बुलाया गया, बल्कि उनके ख़िलाफ़ मुकदमा भी शुरू किया गया.
हालांकि, एंटोन ने रूस छोड़ दिया है. मगर वह बताते हैं कि सुरक्षा एजेंसी अभी भी उनकी तलाश कर रही हैं.
उन्होंने कहा, “मैं यहां सावधानी बरतता हूं. मैं किसी भी आधिकारिक सिस्टम में नज़र नहीं आता हूं. मैंने अपने दोस्तों से बात करना बंद कर दिया है क्योंकि, ऐसा करने से उनको ख़तरा हो सकता है.”
“परमाणु हथियारों के अड्डे पर मौजूद मेरे दोस्तों का लाई डिटेक्टर टेस्ट होता ही होगा. ऐसे में यदि पाया गया कि वो किसी भी तरह से मुझसे संपर्क में हैं, तो उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जा सकता है.”
मगर, एंटोन को इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं हैं कि किसी और सैनिक की भागने में मदद करना, उनके लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकता है.
उन्होंने कहा, “मैं यह अच्छे से समझता हूं कि मैं जितनी ज़्यादा मदद करूंगा, मुझे मारने की आशंका भी उतनी ही बढ़ेगी.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.