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सीरिया में बशर अल-असद सरकार के पतन पर रूस और ईरान का मीडिया क्या कह रहा है?
सीरिया के लिए 8 दिसंबर 2024 का दिन बड़ा बदलाव लेकर आया. इस्लामी चरमपंथी विद्रोहियों ने अलेप्पो, हमा और होम्स शहरों के बाद राजधानी दमिश्क पर कब्ज़ा कर लिया.
इसके बाद, विद्रोहियों ने सीरिया की आज़ादी की घोषणा की और कहा कि 'निरंकुश' राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़ कर भाग गए हैं और सीरिया अब 'आज़ाद' है.
तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़ाज़ी अल-जलाली ने कहा कि उनकी सरकार चरमपंथियों की ओर 'अपना हाथ बढ़ाने' को तैयार है.
बहरहाल, सीरिया के हालात पर उसके प्रमुख सहयोगी माने जाने वाले ईरान और रूस का रुख़ कैसा है? और उन देशों की मीडिया में सीरिया को लेकर क्या-क्या कहा जा रहा है? आइए, जानते हैं.
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ईरान ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पर विद्रोहियों का कब्ज़ा होने के बाद एक बयान जारी किया था. इसमें ईरान ने कहा था कि सीरिया के मामले में वह पड़ोसियों से बात करेगा.
प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान ने कहा है कि 'केवल सीरियाई नागरिक ही विनाशकारी विदेशी हस्तक्षेप के बिना देश की क़िस्मत का फ़ैसला कर सकते हैं.'
ईरान ने कहा, "जल्द से जल्द सैन्य संघर्ष को ख़त्म करने की ज़रूरत है. आतंकी कार्रवाइयों को रोकने और सीरियाई समुदाय के सभी पक्षों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद शुरू करने की ज़रूरत है ताकि एक ऐसी सरकार का गठन हो सके, जो सभी सीरियाई नागरिकों का प्रतिनिधित्व करे."
यह बयान ईरान के उस सैद्धांतिक रुख़ की फ़िर से पुष्टि करता है, जिसमें सीरिया की एकता, राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर जोर दिया गया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तख़्तापलट के बाद भी वह सीरिया के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है.
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "ईरान पश्चिमी एशिया में सीरिया को एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली देश मानता है. वह सीरिया में सुरक्षा और स्थिरता लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा. इसके लिए ईरान सभी महत्वपूर्ण देशों, खासकर अपने पड़ोसियों के साथ लगातार बातचीत करेगा."
ईरानी दूतावास में तोड़फोड़
प्रेस टीवी ने बताया कि सीरिया की राजधानी दमिश्क में रविवार को विद्रोहियों ने ईरानी दूतावास में तोड़फोड़ की. इस बीच, ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में चरमपंथी एक पोस्टर फाड़ते दिखे.
इन पोस्टरों पर ईरान के एंटी-टेरर कमांडर क़ासिम सुलेमानी और हिज़्बुल्लाह प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह की तस्वीरें थीं.
प्रेस टीवी की ख़बर के अनुसार, राजनयिक मिशन के बाहर हुई इस घटना में 'चरमपंथियों ने दूतावास की खिड़कियां भी तोड़ीं और कार्यालयों को लूट लिया.'
असद ने सीरिया पर 24 साल से ज़्यादा शासन किया था. सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़ाज़ी अल-जलाली ने रविवार को कहा कि देश में स्वतंत्र चुनाव होना चाहिए ताकि नागरिक उनकी लीडरशिप चुन सकें.
अल अरबिया टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री जलाली ने कहा कि उन्होंने एचटीएस नेता अबु मोहम्मद अल-जुलानी से मौजूदा संक्रमण काल के बेहतर प्रबंधन को लेकर बात की थी.
सीरिया के प्रधानमंत्री ने की अपील
तेहरान टाइम्स ने लिखा कि रविवार को सीरियाई आर्मी कमांड ने सैन्य अफ़सरों को असद सरकार के अंत की जानकारी दी.
ख़बर के अनुसार, एक अनाम अधिकारी ने रविवार को रायटर्स से कहा कि राष्ट्रपति असद दमिश्क छोड़कर किसी अज्ञात स्थान पर जा चुके हैं.
इस बीच सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़ाज़ी अल-जलाली ने कहा कि उनकी सरकार चरमपंथियों की ओर 'अपना हाथ बढ़ाने' को तैयार है.
प्रेस टीवी ने बताया कि सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़ाज़ी अल-जलाली ने एक वीडियो में जारी किए गए बयान में कहा, "मैं मेरे घर में हूं और मैं कहीं नहीं गया हूं. और ऐसा इसलिए है, क्योंकि मैं इसी देश से ताल्लुक़ रखता हूं."
उन्होंने सीरियाई नागरिकों से अपील की कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान न पहुंचाएं.
एचटीएस लीडर अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने भी चरमपंथियों से राज्य के संस्थानों को नुक़सान न पहुंचाने की अपील की.
ईरानी राजदूत क्या बोले?
ईरान इंटरनेशनल ने लिखा कि सीरिया में ईरान के राजदूत हुसैन अकबरी ने रविवार को बशर अल-असद को लेकर एक बयान दिया.
इसमें उन्होंने कहा कि 'बशर अल-असद ने केवल एक अपराध किया था. और वो यह था कि असद ईरान समर्थक एक्सिस ऑफ़ रज़िस्टेंस में शामिल थे.'
'एक्सिस ऑफ़ रज़िस्टेंस' एक राजनीतिक टर्म है, जिसका इस्तेमाल सीरिया, ईरान और अन्य समूहों के ग़ैर-आधिकारिक सैन्य सहयोग के लिए किया जाता है. हिज़्बुल्लाह भी इसका सदस्य माना जाता है.
दरअसल, हुसैन अकबरी का यह बयान उस संदर्भ में आया, जिसमें असद पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने का आरोप लगाया था.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रविवार को जारी किए गए बयान में कहा, "बशर अल-असद के शासनकाल में, और उनसे पहले उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद के शासनकाल में सीरियाई नागरिकों को मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का सामना करना पड़ा है, जिससे बड़े पैमाने पर मानवीय पीड़ा हुई है."
रूस का रुख़ कैसा है?
असद का सीरिया की सत्ता से बाहर जाना रूस की प्रतिष्ठा को एक झटका बताया जा रहा है.
2015 में रूस ने सीरिया में हज़ारों सैनिक भेजे थे और इसका मुख़्य उद्देश्य खुद के लिए वैश्विक शक्ति के रूप में बढ़त हासिल करना था.
2017 में राष्ट्रपति पुतिन ने सीरिया में रूस के हमेमिम एयरबेस का दौरा करते हुए कहा था कि 'मिशन पूरा हो गया.'
इस बीच, सीरिया के हालात पर रूस के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी किया. इसमें बताया गया कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कार्यालय छोड़ दिया है.
बयान के अनुसार, 'असद शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तानांतरण के निर्देश देने के बाद देश छोड़कर चले गए.'
हालांकि, रूस ने यह नहीं बताया कि अब वो कहां हैं या रूसी सेना ने सीरिया में रुकने की कोई योजना बनाई है.
रूस के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, "बशर अल-असद और सीरिया में सशस्त्र संघर्ष में शामिल सदस्यों के बीच हुई बातचीत के बाद असद ने राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरण के निर्देश देते हुए देश छोड़ दिया. रूस इस बातचीत में शामिल नहीं हुआ था."
रूस की प्राथमिकता क्या है?
द मॉस्को टाइम्स ने लिखा कि रूस के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि उसने सीरिया में हो रही घटनाओं पर बारिकी से नज़र बनाकर रखी है. मंत्रालय ने सभी लोगों से हिंसा से बचने और समस्याओं को बातचीत से हल करने की अपील की.
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में रूस के सैन्य अड्डे पूरी तरह से सुरक्षित हैं.
रूस के सीनेटर कोंस्टेंटिन कोसाचेव ने कहा कि 'रूस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता सीरिया में रह रहे रूसी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.'
कोसाचेव ने कहा, "अगर सीरिया के लोगों को हमारी मदद की ज़रूरत पड़ती है, तो उनको सहायता मुहैया कराई जाएगी. लेकिन, गृह युद्ध के हालात में इसकी संभावना कम है. उस स्थिति का सामना सीरिया की जनता को अकेले ही करना होगा."
कोसाचेव ने आगे कहा, "हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण काम अपने नागरिकों, राजनयिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इसके अलावा, सीरिया में रूस के सैन्य ठिकानों पर तैनात सैन्यकर्मियों की सुरक्षा भी हमारी प्राथमिकता है."
इस बीच, रूसी न्यूज़ एजेंसी तास ने क्रेमलिन के सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है कि बशर अल-असद और उनका परिवार फिलहाल रूस में है और रूस ने उन्हें शरण देने का निर्णय लिया है.
असद का पतन, सीरिया में जश्न
इधर 8 दिसंबर 2024 को सीरिया की राजधानी दमिश्क पर विद्रोहियों का कब्ज़ा हुआ. और उधर सीरिया की स्टेट मीडिया ने विद्रोहियों की जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया.
सीरिया के प्रमुख स्टेट टीवी चैनल ने विद्रोहियों की जीत से जुड़ी ख़बरों को प्रसारित करना शुरू कर दिया. चैनल पर विद्रोहियों के साक्षात्कार और जश्न से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए.
विद्रोही समूहों के लिखित संदेश में "आपराधिक असद के शासन के पतन" का जश्न मनाने के साथ सीरियाई नागरिकों से सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा करने की अपील की गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित.
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