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हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की मौत का ईरान पर क्या असर होगा?
- Author, जियार गोल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज
27 सितंबर की रात को तेहरान में स्थानीय प्रशासन ने हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के बैनर लगाए. इन बैनर में हिज़्बुल्लाह के नेता नसरल्लाह को 'प्रतिरोध का केंद्र' बताया गया.
इन बैनर को लगाए जाने से ऐसा लगा कि ईरान में अधिकारियों को पता चल गया था कि नसरल्लाह बेरुत में मारे जा चुके हैं.
हालांकि नसरल्लाह के मारे जाने की पुष्टि हिज़्बुल्लाह ने 28 सितंबर को की.
नसरल्लाह के मारे जाने की पुष्टि के बाद ईरान के मीडिया में नसरल्लाह की तस्वीरों को दिखाते हुए उन्हें 'शहीद' बताया गया.
ईरान के अधिकारियों के मुताबिक़ देश के रिवोल्यूशनरी गार्ड के डिप्टी ऑपरेशन कमांडर अब्बास निलफोरुशान भी इसराइली हमले में मारे गए हैं.
ईरान और हिज़्बुल्लाह
ईरान ने सालों से ईरानी लोगों के सामने हिज़्बुल्लाह और हसन नसरल्लाह की छवि को गौरवमयी तरीके से पेश किया है.
रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर ने दावा किया है कि हिज़्बुल्लाह वो सैन्य शक्ति है जो ईरान के बाहर दुश्मनों से लड़ने में सक्षम है.
पिछले कुछ सालों में ईरान ने यमन, इराक और सीरिया में हिज़्बुल्लाह और दूसरे शिया मिलिशिया को संगठित करने, उन्हें हथियार देने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं.
लेकिन अब कई ईरानियों की नज़र में समूह के बारे में मिथक टूट चुका है.
मात्र नौ दिनों में इसराइल ने हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह और ग्रुप के लगभग सभी हाई रैंक कमांडरों को मार दिया है.
इसके अलावा पेजर और वॉकी टॉकी फटने से हिज़्बुल्लाह के मिडिल लेवल के कई सदस्य मारे गए और हज़ारों लोग घायल हुए.
17 सितंबर को बेरुत स्थित ईरानी दूतावास में पेजर फटने से लेबनान में ईरान के राजदूत मोजतबा अमानी गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
उसी समय हिज़्बुल्लाह से सदस्यों के इस्तेमाल किए जा रहे कई पेजर फटे थे.
इसके अगले दिन हिज़्बुल्लाह के इस्तेमाल किए जा रहे वॉकी टॉकी में विस्फोट हुए.
इन दो अलग-अलग हमलों में 39 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए.
इसराइली इंटेलिजेंस
इसराइली सेना को हिज़्बुल्लाह कमांडरों को निशाना बनाने के लिए सटीक ख़ुफ़िया जानकारी मुहैया कराई गई.
यह इसराइल की ख़ुफ़िया क्षमताओं की दिखाता है, जो ईरान के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है.
शनिवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है.
बीते कुछ सालों में ईरान के दर्जनों परमाणु और मिसाइल वैज्ञानिकों की हत्या की गई है. साथ ही महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों को विस्फोट के ज़रिए निशाना बनाया गया है.
ईरान के कई पूर्व अधिकारियों ने अपने सिस्टम में इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की जासूसी को लेकर चिंता जाहिर की है.
साल 2012 में ईरान के ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व मंत्री अली युनेसी ने कहा था कि इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी ने ईरान के सिस्टम में जासूसी की है. इससे पता चलता है कि ईरानी नेतृत्व के हर एक सदस्य को अपनी सुरक्षा के बारे में चिंता करनी चाहिए.
ईरानी नेतृत्व
27 सितंबर को बेरुत में हुए हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड ऑपरेशनल कमांडर के मारे जाने के बाद ईरान का नेतृत्व एक बार फिर हिंसा में फँसता हुआ दिखाई दे रहा है.
लेकिन अभी तक ईरान ने इसराइल पर जवाबी कार्रवाई करने की सार्वजनिक तौर पर कोई धमकी नहीं दी है.
इससे उलट, जब अप्रैल में इसराइल ने दमिश्क स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था तब ईरान ने इसराइल पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए तुरंत जवाब दिया था.
इसराइल के इस हमले में आईआरजीसी कुद्स फोर्स के आठ हाई रैंकिंग कमांडर मारे गए थे.
ईरान के राजदूत के घायल होने के बावजूद ईरानी नेता इसराइल को सीधे तौर पर धमकी देने से बचते रहे हैं.
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की प्रतिक्रिया
शनिवार को ईरान के सर्वोच्च ने नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अपने संबोधन में हिज़्बुल्लाह की ताकत के बारे में बात की.
लेकिन उन्होंने इस बात का संकेत नहीं दिया कि क्या ईरान हिज़्बुल्लाह के समर्थन के लिए हस्तक्षेप करेगा.
इसके बजाय उन्होंने इस्लामिक देशों को इसराइल के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील की.
हिज़्बुल्लाह को ईरान का सक्रिय रूप से समर्थन नहीं मिलने से मध्य पूर्व के दूसरे मिलिशिया समूहों को यह संकेत जाएगा कि संकट के समय में ईरान उनके हितों के बजाय अपने अस्तित्व और हितों को प्राथमिकता दे सकता है.
बीबीसी सिक्योरिटी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर की रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई महीने में तेहरान के एक गेस्ट हाउस में हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की अपमानजनक हत्या के बाद ईरान ने अब तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है.
अब नसरल्लाह की हत्या के बाद ईरानी शासन में मौजूद कट्टरपंथी किसी तरह की प्रतिक्रिया पर विचार कर रहे होंगे.
ईरान के पास मध्य पूर्व में उसके मित्र देशों के भारी हथियारों से लैस लड़ाक़ों का एक पूरा संगठन है, जिसे ''एक्सिस ऑफ़ रेसिस्टेंस'' कहा जाता है.
हिज़्बुल्लाह के अलावा यमन में हूती और सीरिया और इराक़ में भी कई संगठन हैं. ईरान उन्हें क्षेत्र में इसराइली और अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाने के लिए कह सकता है.
लेकिन ईरान अपनी प्रतिक्रिया के लिए जो भी विकल्प चुनेगा वह संभवतः ऐसी जंग को भड़काने वाला होगा, जिसे वह जीतने की उम्मीद नहीं कर सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित