कनाडा को लेकर अब बांग्लादेश ने किया ये बड़ा दावा - प्रेस रिव्यू

भारत और कनाडा के बीच बीते कुछ दिनों से जारी कूटनीतिक तनाव को लेकर अब पड़ोसी बांग्लादेश का अहम बयान आया है.

द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने कहा है कि कनाडा "हत्यारों" की पनाहगाह बन गया है.

इंडिया टुडे टीवी नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में अब्दुल मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर्रहमान और उनके परिवार के अधिकतर सदस्यों की हत्या के मामले में मुख्य अपराधी एस.एच.एम.बी. नूर चौधरी 1996 से कनाडा में रह रहे हैं, लेकिन कनाडा उनके प्रत्यर्पण के मामले में सहयोग नहीं कर रहा है.

उन्होंने कहा, "कनाडा को हत्यारों को अपने देश में पनाह नहीं देनी चाहिए. हत्यारे कनाडा जाकर वहां शरण लेते हैं और अच्छी ज़िंदगी जीते हैं जबकि जिनकी वो हत्या करते हैं उनके परिजन मुश्किल में जीवन गुज़ारते हैं."

मुजीबुर्रहमान की हत्या के आरोप में बांग्लादेश की अदालत ने नूर चौधरी को सज़ा-ए-मौत दी है. लेकिन कनाडा ने नूर चौधरी को राजनीतिक शरण दी हुई है और वो अब तक उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की कोशिशों को ठुकराता रहा है.

मुजीबुर्रहमान की हत्या 14 अगस्त 1975 को हुई थी. कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने नूर चौधरी को मुजीबुर्रहमान पर गोलियां चलाते देखा है.

हर साल 15 अगस्त को बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस के तौर पर मनाता है और मुजीबुर्रहमान के योगदान को याद करता है. उनकी बेटी शेख़ हसीना बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री हैं.

हत्या के आरोपी करते रहे देश का प्रतिनिधित्व

द हिंदू के अनुसार इस हत्या के मामले के एक अन्य दोषी राशिद चौधरी को भी मौत की सज़ा दी गई है. वो 1990 से अमेरिका में हैं.

अब्दुल मोमेन ने कहा बांग्लादेश के मोस्ट वॉन्टेड अपराधी किसी और देश में होने के कारण सज़ा से बच जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है और सरकारी हस्तक्षेप से परे है. अगर नूर चौधरी और राशिद चौधरी बांग्लादेश आते हैं तो वो राष्ट्रपति से सज़ा माफ़ी की दरख़्वास्त कर सकते हैं."

मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद बांग्लादेश में जो सरकार बनी उसने संविधान में बदलाव किया और उनके हत्यारों को गिरफ्तारी से राहत दी. मामले के दोनों दोषियों ने क़रीब दो दशक तक राजनयिक मिशनों में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व किया.

1996 में जब शेख़ हसीना बहुमत के साथ जीतकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं और संविधान में संशोधन कर हत्यारों को सुरक्षा देने का विकल्प ख़त्म कर दिया.

इसके बाद एक कोर्ट ने नूर चौधरी और राशिद चौधरी को मौत की सज़ा सुनाई गई. बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में इस फ़ैसले पर मुहर लगाई.

इससे पहले श्रीलंका भी आया सामने

इससे पहले श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल इलम से जुड़े तत्व कनाडा में मौजूद हैं जिसका श्रीलंका विरोध करता रहा है.

उन्होंने कहा था, "कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित जगह मिल जाती है. कनाडाई प्रधानमंत्री अब खुल कर आरोप लगा रहे हैं लेकिन उसके समर्थन में उनके पास कोई सबूत नहीं हैं."

"श्रीलंका के साथ भी उन्होंने यही किया. उन्होंने कहा कि श्रीलंका में नरसंहार हुआ है. ये कोरा झूठ था. सभी को पता है कि श्रीलंका में कभी नरसंहार नहीं हुआ."

भारत का भी कहना है कि कनाडा में ख़ालिस्तान समर्थकों का गुट सक्रिय है.

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर कह चुके हैं कि कनाडा में अलगाववादी ताक़तों से संबंधित संगठित अपराध के काफ़ी मामले देखने को मिले हैं.

ट्रूडो के लगाए आरोपों पर ब्लिंकन से क्या हुई बात, जयशंकर ने बताया

शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री के भारत पर लगाए आरोपों का मुद्दा भी उठा था.

बीते सप्ताह कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि कनाडा में इसी साल जून में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी जिसमें भारतीय एजेंट शामिल थे.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन के साथ बातचीत में ट्रूडो के लगाए आरोपों का मुद्दा उठा था.

बैठक में ब्लिंकन ने भारत से "गुज़ारिश की" कि इस मामले में "कनाडा जो जांच कर रहा है" उसमें भारत सहयोग करे.

वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में चर्चा के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "हां बिल्कुल, जेक सुलिवन और एंटनी ब्लिंकन के साथ इस पर बातचीत हुई. उन्होंने इस पूरे मसले पर अमेरिका का नज़रिया बताया और मैंने उन्हें समझाया कि हमारी क्या चिंताएं हैं. मुझे लगता है कि दोनों को अब इस मामले में अधिक जानकारी है."

ट्रूडो के लगाए आरोपों पर जयशंकर ने एक बार फिर दोहराया, "उनके आरोप हमारी नीतियों के अनुरूप नहीं हैं. अगर उनके पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें साझा करना चाहिए , हम उन्हें ज़रूर देखेंगे."

कहासुनी के बाद स्टूडेन्ट प्रोग्राम बीच में ख़त्म

इंडियन एक्सप्रेस में ही छपी एक और ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश के झांसी और जम्मू कश्मीर के राजौरी में स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम उस वक्त ख़त्म हो गया जब छात्रों के बीच एक झगड़े के बाद बच्चों को वापस भेज दिया गया.

अख़बार के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय झांसी के 20 छात्र राजौरी के कोटरन्का गए थे, वहीं राजौरी के जवाहर नवोदय विद्यालय के 18 छात्र झांसी आए थे. ये कार्यक्रम एक साल का था, लेकिन दो ही महीने में ख़त्म कर दिया गया.

अख़बार के अनुसार झांसी के छात्रों ने आरोप लगाया कि राजौरी गए उनके कुछ साथियों के साथ छात्रों के बीच कहासुनी के बाद बुरा बर्ताव किया गया. इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने गुरुवार को सभी छात्रों को वापस झांसी भेज दिया.

वहीं झांसी में इसे लेकर अन्य छात्रों से विरोध प्रदर्शन किया और राजौरी से आए 18 छात्रों पर कथित हमला किया जिसके बाद इन बच्चों को भी वापस राजौरी भेजने का फ़ैसला लिया गया.

मणिपुर बीजेपी का जेपी नड्डा को ख़त

मणिपुर में तीन मई से जारी हिंसा के बीच प्रदेश की बीजेपी ईकाई ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख जेपी नड्डा को पत्र लिखा है और हिंसा न रुकने को लेकर सवाल उठाए हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार प्रदेश बीजेपी ईकाई ने जेपी नड्डा को लिखा है कि प्रदेश की बीजेपी सरकार को जातीय हिंसा रोकने में नाकाम रही है.

पहली बार इस तरह का कदम उठाते हुए प्रदेश ईकाई ने लिखा कि प्रशासन के ख़िलाफ़ लोगों की नाराज़गी बढ़ रही है और लोग सड़कों पर उतर रहे हैं.

अख़बार लिखता है शुक्रवार को ये चिट्ठी जेपी नड्डा को भेजी गई है. इसमें प्रदेश बीजेपी प्रमुख ए शारदा देवी समेत पार्टी दफ्तर के शीर्ष आठ पदाधिकारी शामिल हैं. ये नेता पीएम मोदी से मुलाक़ात करना चाहते हैं.

पत्र में लिखा है, "लोगों की नाराज़गी और गुस्सा अब बढ़ रहा है, लंबे वक्त से जारी तनाव के लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा जा रहा है कि वो मामले को सुलझाने और शांति स्थापित करने में नाकाम रही. हम जानते हैं कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है."

एक दिन पहले मणिपुर में प्रदर्शनकरियों ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के निजी आवास और एक और बीजेपी विधायक के घर पर हमला किया था.

चुनाव से पहले नितिन गडकरी का ऐलान

अख़बार जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार परिवहन मंत्री नितिन गटकरी ने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर कहा है कि चुनाव के लिए उनकी तरफ से न तो कोई बैनर लगाया जाएगा और न ही कोई पोस्टर.

वाशिम में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि, "मैंने फ़ैसला लिया है कि चुनाव के लिए न तो कई बैनर लगाया जाएगा और न ही पोस्टर, और न ही लोगों को चाय पिलाई जाएगी. जिन्हें वोट देना है देंगे, जिन्हें नहीं देना है नहीं देंगे. लेकिन न तो मैं रिश्वत लूंगा और न ही देने दूंगा. "

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