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मणिपुर: सीएम बीरेन सिंह के घर पर क्यों हुआ हमला, किस बात पर भड़के लोग - प्रेस रिव्यू
मणिपुर में हालात फिर बिगड़ते दिख रहे हैं. जातीय हिंसा की वजह से पिछले चार महीने से अधिक वक्त से राज्य में अशांति है.
गुरुवार की रात हिंसा और उपद्रव ने उस वक़्त नया मोड़ ले लिया जब कुछ लोगों के एक समूह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के हिंगेंग स्थित घर में घुसने की कोशिश की. हालांकि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का कोई शख़्स वहां मौजूद नहीं था.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुवार को रात साढ़े दस बजे उपद्रवियों के इस हमले को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया.
एक सुरक्षा अधिकारी ने अख़बार को बताया कि लगभग 500-600 लोगों ने शुरुआत में हमले में शामिल थे. हालांकि रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने इस हमले के नाकाम कर दिया. उनका कहना है कि उपद्रवी मकान में घुस पाते इससे पहले ही उन्हें वहां से तितर-बितर कर दिया गया.
सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि हिंगेंग में ही एन बीरेन सिंह का निजी आवास है. मुख्यमंत्री हिंगेंग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
राज्य में मंगलवार को हुए प्रदर्शनों के बाद राज्य में मैतेई बहुल इलाक़ों में स्थिति तनावपूर्ण है. यहां दो मैतेई छात्रों के शव मिलने के बाद एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है.
ये दोनों छात्र, 20 साल के फिजाम हेमजी और 17 साल की हिजाम लुआनथो इनगाम्बी, जुलाई में बिष्णुपुर के पास से लापता हो गए थे लेकिन मणिपुर में मोबाइल इंटरनेट बहाल होने के बाद इन दोनों के शवों की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई.
बाद में दोनों के शव चूराचांदपुर के पास लमदान में मिले और ये आशंका जताई गई कि इन्हें अगवा कर उनकी हत्या की गई है.
इसके बाद मणिपुर में एक बार फिर हिंसा शुरू हो गई है. प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को भी मुख्यमंत्री के बंगले और राजभवन की ओर कूच करने की कोशिश की थी.
हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस छोड़ कर उन्हें तितर-बितर कर दिया था. लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को गवर्नर और मुख्यमंत्री से मिलने की इजाज़त दे दी गई थी.
सिर्फ पहाड़ी जिलों में ही अफ़स्पा क्यों?
इस बीच, कुकी, ज़ोमी और नगा जनजातियों के संगठन ने राज्य की पहाड़ी जिलों में अफ़स्पा (आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट) को और छह महीने के लिए बढ़ाने का विरोध किया है.
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन जनजातियों का कहना है कि अफ़स्पा को घाटी में लागू न करने ये साबित करता है सरकार पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रही है.
मणिपुर में मैतेई ज्यादातर घाटी में रहते हैं. वहीं कुकी और दूसरी जनजातियां पहाड़ी इलाकों में रहती हैं.
मिज़ोरम नहीं जुटाएगा म्यांमार के शरणार्थियों के बायोमैट्रिक आंकड़े
मिज़ोरम सरकार ने राज्य में म्यांमार से आए शरणार्थियों के बायोमैट्रिक आंकड़े न जुटाने का फ़ैसला किया है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को म्यांमार से आए शरणार्थियों के बायोमैट्रिक आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए थे.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने इस साल अप्रैल में मिज़ोरम और मणिपुर सरकार से कहा था कि राज्य म्यांमार से आए ‘अवैध शरणार्थियों’ के बायोमैट्रिक आंकड़े इकट्ठा करें. मिज़ोरम और मणिपुर दोनों की सीमाएं म्यांमार से मिलती हैं.
केंद्र सरकार ने जून में इस अभियान को सितंबर तक ख़त्म करने और इसके मुताबिक़ योजना बनाने का निर्देश दिया था. मिज़ोरम में इस साल के आख़िर तक चुनाव होने हैं.
म्यांमार में सेना की कार्रवाई के बाद बड़ी तादाद में शरणार्थी राज्य में घुस आए थे. उस समय केंद्र ने राज्य सरकार की सीमा बंद करने का निर्देश दिया था लेकिन उस वक्त उसने इसकी अनदेखी की थी.
दरअसल म्यांमार से आए चिन समुदाय के लोगों के मिज़ो लोगों से जातीय संबंध हैं. लिहा़ाज राज्य सरकार इस मुद्दे पर ‘नरम’ दिख रही है.
भारत में अफ़ग़ानिस्तान दूतावास का काम ‘बंद’, भारत ने क्या कहा?
भारत में अफ़ग़ानिस्तान दूतावास का कामकाज बंद होने की रिपोर्टों के बाद भारत सरकार ने कहा है कि वह इस बारे में जारी सूचना पर गौर कर रही है.
बताया जाता है कि कामकाज बंद करने की सूचना दूतावास की ओर से दी गई है.
दरअसल ये दूतावास अफ़ग़ानिस्तान की अशरफ़ ग़नी सरकार की ओर से नियुक्त राजनयिक चला रहे थे लेकिन 2021 में सत्ता पर तालिबान के कब्जे़ के बाद इसका कामकाज लगभग बंद हो गया था.
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ दूतावास की ओर से कामकाज बंद करने की सूचना सार्वजनिक होने के बाद भारत सरकार के अधिकारी ने कहा है कि वो इस सूचना की प्रामाणिकता की जांच कर रही है.
अधिकारी के मुताबिक़, "अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत पिछले कई महीनों से भारत से बाहर हैं. यहां तैनात राजनयिक लगातार किसी तीसरे देश से राजनीतिक शरण मांग रहे हैं और वहां उनका जाना लगातार जारी है. यहां काम कर रहे राजनयिकों के बीच झगड़े भी हो रहे हैं."
अख़बार ने लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत (ग़नी सरकार की ओर से नियुक्त) फरीद मामुंदजे पिछले कई महीनों किसी तीसरे देश में रह रहे हैं. हालांकि उनका दावा है कि वो दूतावास का काम देख रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के दूतावास ने कामकाज बंद करने से जुड़ी सूचना देते हुए कहा कि उसे भारत सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है.
पश्चिम बंगाल के गवर्नर को सता रहा है कि किस बात डर?
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य और केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिख कर राजभवन में जैमर समेत अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाने की मांग की है.
‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में छपी एक ख़बर के अनुसार राज्यपाल पुलिस की ओर से ‘ट्रैक’ किए जाने की आशंका जताई है.
अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यपाल ने राजभवन की पहली मंजिल से कोलकाता पुलिस के कर्मचारियों को हटाने की मांग की है. यहां आवासीय क्वार्टर और कई दफ्तर हैं. उन्होंने इनकी जगह अपने निजी सुरक्षाकर्मियों को लगाने की मांग की है, जो सीआरपीएफ़ के हैं.
राजभवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ को बताया कि कोलकाता पुलिस की तैनाती सिर्फ राजभवन की पहली मंजिल तक ही सीमित रहनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि पिछले गवर्नर के कार्यकाल में कोलकाता पुलिस सिर्फ राजभवन की पहली मंजिल पर ही तैनात रहती थी.
मौजूदा गवर्नर बोस ने कहा है कि राजभवन में सुरक्षाकर्मियों को लगातार बदला जाना चाहिए. जनवरी में बोस को जेड-प्लस सिक्योरिटी दी गई थी. इस वजह से उनकी सुरक्षा में केंद्रीय बलों के सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.
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