जी20 नई दिल्ली घोषणा पत्र: पीएम मोदी ने कहा- रचा गया इतिहास, सम्मेलन में क्या-क्या हुआ?

इमेज स्रोत, ANI
नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बन गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद इसकी जानकारी दी.
पीएम मोदी ने बताया, "हमारे टीम के हार्ड वर्क से और आप सभी के सहयोग से नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बनी है."
उन्होंने कहा, "मेरा प्रस्ताव है कि इस लीडर्स डिक्लेरेशन को भी एडॉप्ट किया जाए. मैं इस डिक्लेरेशन को एडॉप्ट करने की घोषणा करता हूं."
उन्होंने कहा, "इस अवसर पर मैं हमारे मंत्रीगण, शेरपा और सभी अधिकारियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं. जिन्होंने अथाह परिश्रम करके इसे सार्थक किया है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 के सभी सदस्यों के प्रति अपना आभार जताया.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "नई दिल्ली लीडर्स डिक्लरेशन की मंजूरी के साथ ही इतिहास रचा गया है. सर्वसम्मति और मनोभाव के साथ हम एकजुट हो कर बेहतर, अधिक समृद्ध और समन्वय भविष्य के लिए सहयोग के साथ काम करने का संकल्प लेते हैं. जी20 के सभी साथी सदस्यों को उनके समर्थन और सहयोग के लिए मेरा आभार."
नई दिल्ली घोषणा पत्र में किन चीज़ों का ज़िक्र है इस पर जी20 के भारतीय शेरपा अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया. उन्होंने बताया कि नई दिल्ली घोषणा पत्र किन चीज़ों पर केंद्रित है.
- मजबूत, दीर्घकालीक, संतुलित और समावेशी विकास
- सतत विकास लक्ष्यों पर आगे बढ़ने में तेज़ी
- दीर्घकालीक भविष्य के लिए हरित विकास समझौता
- 21वीं सदी के लिए बहुपक्षीय संस्थाएं
- बहुपक्षवाद को पुर्नजीवित करना

इमेज स्रोत, ANI
विदेश मंत्री, वित्त मंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री के इस घोषणा के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि विश्व बैंक की वित्तपोषण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने पर समझौता हुआ है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबी) को मजबूत करने पर जी-20 स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह की स्थापना की गई थी जिसने अपनी रिपोर्ट पेश की है."
उन्होंने बताया, "उनकी रिपोर्ट के दो भाग हैं. पहला भाग पहले ही पेश किया जा चुका है. रिपोर्ट एक ट्रिपल एजेंडे की सिफारिश करती है जो बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी एमडीबी के आह्वान के साथ मेल खाता है. एमडीबी को मजबूत करने का तीसरा बिंदु विश्व बैंक की वित्तपोषण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने पर समझौता है."
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त घोषणा पत्र मजबूत, संतुलित और समावेशी विकास पर केंद्रित है.
इस दौरान उन्होंने बताया, "जी-20 नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की और माना कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर ख़तरों में से एक है."
घोषणा पत्र में यूक्रेन पर क्या कहा गया?
नई दिल्ली जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की घोषणा में यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बारे में बाली में हुई चर्चा को दोहराया गया है.
नई दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया, "यूक्रेन में युद्ध के संबंध में बाली में हुई चर्चा को दोहराते हुए हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्तावों पर अपने राष्ट्रीय रुख को दोहराया और इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करना चाहिए."
"संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक़, सभी देशों को किसी भी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय अधिग्रहण की धमकी या बल के उपयोग से बचना चाहिए. परमाणु हथियारों का उपयोग या उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है."
जी20 शिखर सम्मेलन में क्या क्या हुआ?

इमेज स्रोत, X @narendramodi
09 सितंबर को जब जी20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई तो सुबह साढ़े दस से दोपहर डेढ़ बजे तक पहला सत्र 'वन अर्थ' पर आयोजित किया गया.
वहीं 'वन फैमिली' पर दूसरा सत्र दोपहर 3 बजे से 4.45 बजे तक चला. अब शाम 7 बजे डिनर पर सभी राष्ट्राध्यक्ष मुलाक़ात करेंगे. जहां इनके बीच रात 8 बजे से 9.15 बजे तक बातचीत होगी.
रविवार यानी जी20 सम्मेलन के आखिरी दिन 'वन फ़्यूचर' पर तीसरा सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा. इस सत्र के बाद जी20 शिखर सम्मेलन समाप्त हो जाएगा.
जी20 सम्मेलन के इतर भारत कई देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर रहा है.
08 सितंबर यानी शुक्रवार को अमेरिका, बांग्लादेश और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई.
09 सितंबर यानी शनिवार को ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, इटली से द्विपक्षीय वार्ता हो रही है.
वहीं 10 सितंबर यानी रविवार को कनाडा, तुर्किए, यूएई और दक्षिण कोरिया से द्विपक्षीय वार्ता होगी.
वहीं इस सम्मेलन में शामिल हो रहे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सोमवार यानी 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.
पीएम मोदी के सामने लगे बोर्ड पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’

इमेज स्रोत, @narendramodi
इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित किए जा रहे जी-20 देशों के सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को जब पीएम मोदी अपना उद्घाटन भाषण दे रहे थे तो कई लोगों का ध्यान उनकी मेज़ पर रखे बोर्ड पर जा रहा था.
उनके सामने रखे बोर्ड पर 'भारत' लिखा था. अतीत में ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 'इंडिया' लिखा हुआ देखा जाता रहा है.
वहीं, बीते साल 15 नवंबर को इंडोनेशिया के बाली में जी-20 देशों का जो सम्मेलन हुआ था उसमें पीएम मोदी के सामने रखे बोर्ड पर 'इंडिया' लिखा था.
बीते दिनों जी-20 सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रम के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के निमंत्रण पत्र में 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा होने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था.
शुक्रवार को ही संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि अगर भारत उसके पास औपचारिक मांग भेजता है और सभी औपचारिकताएं पूरी कर देता है तो वह संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में ‘इंडिया’ का नाम ‘भारत’ कर देगा.
कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि मोदी सरकार देश का नाम 'इंडिया' से बदल कर 'भारत' करना चाहती है.
उनका कहना था कि विपक्षी गठबंधन ने अपना नाम 'इंडिया' रखा है जिस वजह से बीजेपी सरकार जानबूझ कर अब 'इंडिया' की जगह 'भारत' नाम का इस्तेमाल कर रही है.
मीडिया रिपोर्टों में दावा भी किया जा रहा है कि 18 सितंबर से शुरू हो रहे संसद के आगामी विशेष सत्र में इंडिया का नाम बदलकर भारत करने का प्रस्ताव भी लाया जा सकता है. हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
इस बहस में बीजेपी के नेता तर्क देते रहे हैं कि इंडिया की जगह भारत ही नाम होना चाहिए वहीं विपक्ष के नेताओं का कहना है कि भारत के संविधान में पहले से ही भारत नाम भी दर्ज है.
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने मंत्रियों से कहा था कि वो ‘भारत’ नाम पर राजनीतिक विवाद से बचने की सलाह दी थी और कहा था कि देश का प्राचीन नाम ‘भारत’ ही रहा है.
संविधान के हिंदी संस्करण में इंडिया की जगह हर जगह भारत ही लिखा है, सिर्फ़ उन उल्लेखों को छोड़कर जहां देश के नाम का ज़िक्र है. संविधान में देश का नाम है, “भारत डैट इज़ इंडिया यानी ‘भारत जो इंडिया है’.”
देश का नाम बदलकर सिर्फ़ भारत करने के लिए संवैधानिक संशोधन ज़रूरी होगा जो सदन में सिर्फ़ तो-तिहाई बहुमत से ही पारित किया जा सकता है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा

इमेज स्रोत, Getty Images
जी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री के सामने बोर्ड पर सिर्फ़ 'भारत' लिखा होने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है.
अनुजा जायसवाल ने कहा कि अपने ओपनिंग भाषण के दौरान मोदी के सामने रखे बोर्ड पर 'भारत' लिखा था.
विपक्ष पर तंज कसते हुए सुनील सेठी ने सोशल मीडिया पर लिखा विपक्ष को इससे परेशानी हो रही होगी.
हसन अकबर लिखते हैं कि अनौपचारिक तौर पर देश का नाम बदलने को इस तरह औपचारिक जामा पहनाया गया है. ये चौंकाने वाला है कि प्रधानमंत्री ने संसद के अनुमोदन के बिना ही ये करने का फ़ैसला किया.
अंकुर ने सवाल किया है कि क्या ये आधिकारिक है, क्या हम अब भारतीय हैं?
जी-20 सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम शुरू करने से पहले मोरक्को में आए विनाशकारी भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कार्यक्रम शुरू करने से पहले मैं कुछ देर पहले मोरक्को में आए भूकंप के प्रभावित लोगों के लिए संवेदना प्रकट करना चाहता हूं. मैं ये कहना चाहता हूं कि पूरा विश्व उनके साथ है और हम उन्हें हरसंभव मदद देने को तैयार हैं.”
अपने उद्घाटन भाषण के दौरान मोदी ने कहा, “जहां हम एकत्र हुए हैं, वहां से कुछ दूर ढाई हज़ार साल पुराना स्तंभ है जिस पर प्राकृत भाषा में लिखा है- मानवता का कल्याण और सुख, सवैद सुनिश्चित किया जाएगा.”
दुनिया इस समय कई संकटों का सामना कर रही है. यूक्रेन युद्ध और जलवायु परिवर्तन विश्व के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां हैं.
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भरोसा बहाल करने का समय आ गया है.
उन्होंने कहा, “भारत पूरी दुनिया से अपील कर रहा है कि हम मिलकर ग्लोबल ट्रस्ट डेफिसिट को विश्वास, भरोसे में बदलें. ये सभी के साथ मिलकर चलने का वक्त है. हम सभी के लिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास हमारे लिए पथप्रदर्शक बन सकता है.”
मोदी ने कहा, “हमें आने वाली पीढ़ी के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल, नॉर्थ और साउथ के बीच का फर्क, ईस्ट और वेस्ट के बीच का फर्क, अनाज संकट, खाद संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना ही पड़ेगा.”
अफ़्रीकी यूनियन हुआ जी-20 में शामिल

इमेज स्रोत, @narendramodi
दिल्ली में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में अफ़्रीकन यूनियन यानी अफ़्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के तौर पर जी-20 में शामिल कर लिया गया है.
इसकी जानकारी देते हुए मोदी ने कहा, “सबका साथ की भावना से ही भारत ने अफ़्रीकन यूनियन को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने की बात की थी. आप सबकी सहमति से मैं अफ्रीकन यूनियन के अध्यक्ष को जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में अपना स्थान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करता हूं.”
जी20 ग्रुप में 19 देश शामिल हैं- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ़्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका. ग्रुप का 20वां सदस्य यूरोपीय संघ है.
अफ़्रीकी यूनियन के इस संगठन में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने के बाद अब 19 देश और दो संघ इसके सदस्य हो गए हैं.
मोदी ने किया विश्व नेताओं का स्वागत

इमेज स्रोत, Getty Images
जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भारत मंडपम पहुंच चुके हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बाइडन समेत विश्व के कई नेताओं का भारत मंडपम में स्वागत किया.
मोदी ने जब बाइडन का स्वागत किया पीछे दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कोणार्क मंदिर की तस्वीर नज़र आ रही थी. मोदी कोणार्क चक्र के बारे में जो बाइडन को जानकारी देते दिखते हैं.
बाइडन के अलावा मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद का भी स्वागत किया.
शनिवार सवेरे जी-20 सम्मेलन के लिए सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के प्रगति मैदान पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद प्रगति मैदान पहुंच गए थे.
यहां बने भारत मंडपम में उन्होंने एक एक कर सभी विदेशी नेताओं का स्वागत किया.

इमेज स्रोत, Getty Images
स्वागत कार्यक्रम के लिए जो मंच तैयार किया गया है उसमें पीछे कोणार्क चक्र की प्रतिकृति लगाई गई है.
कोणार्क चक्र पहली बार 13वीं सदी में राजा नरसिंहदेव प्रथम के शासन काल में बनाया गया था.
ये चक्र भारत के प्राचीन ज्ञान, यहां की सभ्यता और स्थापत्य कला को दर्शाता है. माना जाता है कि कोणार्क चक्र के घूमने की तुलना कालचक्र से की जाती है और इसे आगे बढ़ने और बदलाव के रूप में देखा जाता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












