आकाश आनंद बीएसपी के बीजेपी के साथ जाने की संभावना पर क्या बोले

आकाश आनंद

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    • Author, सारिका सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बहुजन समाज पार्टी के नए चेहरे और उत्तराधिकारी के रूप में सामने आए आकाश आनंद आजकल राजनीतिक रैलियों के अलावा मीडिया साक्षात्कारों के ज़रिए भी चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर भी वो पार्टी को नया कलेवर देने की कोशिशें कर रहे हैं.

आकाश आनंद राजनीतिक रैलियों में बिना नाम लिए उत्तर प्रदेश के युवा दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद की आलोचना करते हैं. लेकिन उनसे जुड़े सवाल पर उन्हें 'छुटभैया' कहकर ख़ारिज कर देते हैं.

कभी अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी की राजनीतिक हैसियत पिछले चुनावों में काफ़ी घटी है.

बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद से बात करतीं बीबीसी संवाददाता सारिका सिंह
इमेज कैप्शन, बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद से बात करतीं बीबीसी संवाददाता सारिका सिंह

पार्टी ने पिछला लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ा और दस सीटें जीतीं, लेकिन इस बार बीएसपी अकेले चुनाव लड़ रही है.

आकाश आनंद मानते हैं कि ये पार्टी की सोची-समझी रणनीति है.

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क्या बीएसपी बीजेपी की बी टीम है?

आकाश आनंद को हाथी की प्रतिमा भेंट करते बीएसपी के नेता

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इमेज कैप्शन, आकाश आनंद को हाथी की प्रतिमा भेंट करते बीएसपी के नेता

बीबीसी से ख़ास बातचीत में आकाश आनंद ने बीएसपी को बीजेपी की बी-टीम बताए जाने के आरोपों को ख़ारिज किया, लेकिन चुनाव के बाद बीजेपी के साथ जाने की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने ये भी कहा कि बीएसपी का मक़सद राजनीतिक सत्ता में आना है. इसके लिए पार्टी जो सही होगा करेगी.

उन्होंने बीजेपी के साथ जाने की संभावना को स्पष्ट रूप से ख़ारिज नहीं किया.

चुनाव के बाद बीजेपी के साथ जाने की संभावना से जुड़े सवाल पर आनंद ने कहा, ''हमारा अंतिम लक्ष्य ये है कि हम राजनीतिक सत्ता में आ जाएं, ताकि हम अपने समाज के लिए काम कर सकें.''

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हमारा अंतिम लक्ष्य ये है कि हम राजनीतिक सत्ता में आ जाएं, ताकि हम अपने समाज के लिए काम कर सकें.
आकाश आनंद
नेशनल कोऑर्डिनेटर, बसपा

जब उनसे पूछा कि क्या आप इससे इनकार नहीं कर रहे हैं कि अगर आपको साथ जाना पड़े तो जाएंगे तो उन्होंने कहा, ''हम जाएंगे नहीं लेकिन हमें किसी का इस्तेमाल करना पड़े तो करेंगे, किसी का भी इस्तेमाल करेंगे.''

'इस्तेमाल करने' को परिभाषित करते हुए वो कहते हैं, ''इस्तेमाल करने की परिभाषा ये होती है कि हम अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे, हम अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे, हम उनका इस्तेमाल करेंगे ताकि हम अपने लोगों की सेवा कर सकें.''

परिवारवाद के आरोपों का किया बचाव

बसपा की रैली में आकाश आनंद

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बीबीसी संवाददाता सारिका सिंह ने दिल्ली में बीएसपी के दफ़्तर में आकाश आनंद से साक्षात्कार किया.

बहुजन समाज पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत आकाश आनंद की रैलियों से हुई. क्या वो मायावती की जगह बीएसपी का चेहरा बन रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा, ''ऐसा नहीं है, मायावती की कम से कम 45 रैलियों की योजना है, वो हर क्षेत्र में ख़ुद जाकर कमान संभाल रही हैं. हम तो उनके लिए वार्मअप कर रहे थे, माहौल तैयार कर रहे थे, अब वो मैदान में जाएंगी तो ख़ुद अपना मैसेज डिलिवर करेंगी.''

बहुजन समाज पार्टी एक कैडर आधारित पार्टी है. कांशीराम के बाद पार्टी की कमान मायावती के हाथ में आई. मायवती अभी भी पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं. हालांकि, आकाश आनंद को उनके उत्तराधिकारी की तरह पेश किया गया है. आकाश आनंद मायावती के भतीजे हैं.

आकाश आनंद को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के बाद वंशवाद के आरोप भी लगे हैं.

हालांकि आनंद इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं, ''हमसे पहले, और परिवार को आगे रखने से पहले बहनजी ने कम कम से चार लोगों को मौका दिया जो परिवार से नहीं थे, लेकिन वो ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाए, कुछ वक़्त बाद पार्टी के सीनियर लीडर्स ने सलाह दी कि परिवार से ही किसी को आगे बढ़ाया जाए, कस्टोडियन के रूप में, उसके बाद मुझे ज़िम्मेदारी मिली, हम कस्टोडियन की तरह हैं ना कि उत्तराधिकारी, ये विरासत नहीं है बल्कि ज़िम्मेदारी है, हम इसे ऐसे ही निभाएंगे.''

आकाश आनंद में 'एंग्री यंग मैन' की छवि?

आकाश आनंद

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आकाश आनंद ने कई भावुक भाषण दिए हैं. इस दौरान वो एक 'एंग्री यंग मैन' की भूमिका में भी नज़र आए हैं.

आकाश आनंद कहते हैं, ''रैलियों में हम जो मुद्दे उठाते हैं वो अलग है, महत्वपूर्ण हैं इसलिए इमोशनल हो जाना नैचुरल है, अगर कोई बच्चा पढ़ाई कर रहा है और उसके पेपर लीक हो जाएं तो वो जो गुस्सा है वो मेरा अकेले का गुस्सा नहीं, हम इसके ज़रिए विपक्ष और सरकार में बैठे लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं.''

आकाश आनंद सिर्फ़ मौजूदा सरकार ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेताओं पर भी निशाना साध रहे हैं.

आनंद कहते हैं, ''हमारी लड़ाई संविधान को बचाने और लोगों के हक़ के लिए है, हम किसी विपक्ष से नहीं लड़ रहे, हम अपने वोटर्स के लिए लड़ रहे हैं, हम उन्हें समझाने के लिए लड़ रहे हैं.''

राहुल गांधी, अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेताओं से तुलना से जुड़े सवाल पर आकाश कहते हैं, ''जहां तक सीनियर लीडर्स की बात है, उनका एक राजनीतिक नज़रिया है, वो उसके साथ हैं, अखिलेश यादव की पार्टी जो मुद्दे लेकर आई है उसमें जो रिप्रेजेंटेशन देने की बात है, वो हर समाज के अल्पसंख्यकों के मुद्दे को सही तरीके से सामने नहीं ला पा रहे, जहां तक राहुल गांधी की बात है, कांग्रेस पार्टी की 60 -70 साल से ज़्यादा वक़्त सरकार कई राज़्यों में रही है, वो सबसे लंबे वक़्त तक सेंटर मे भी रहे हैं, आज भी उन्हें इतना वक़्त लेने के बाद वो वक़्त मांग रहे हैं, अगर उन्हें बताना पड़ रहा है कि वो रिज़र्वेशन देने की बात कर रहे हैं, पिछड़े समाज को प्रतिनिधित्व देने की बात कर रहे हैं, मुझे लगता है उनके लिए बहुत देर हो चुकी है.''

भीम आर्मी के चंद्रशेखर का नाम क्यों नहीं लेते हैं आकाश

आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर

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आकाश आनंद भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर से जुड़े सवालों पर बात करने से बचते हैं.

चंद्रशेखर को एक राजनीतिक ख़तरे के रूप में खारिज करते हुए आकाश कहते हैं, ''जो एक पार्षद का चुनाव नहीं लड़ सकते, जीत नहीं सकते आप नेशनल पार्टी से उसकी तुलना कहां कर रही हैं, कहां से आप ख़तरा मान रही हैं, ये तो विपक्षी पार्टियां समय-समय पर छोटे-छोटे दल खड़े कर देती हैं, उनको फंड कर देती हैं, ये वो हैं.''

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वो किसी एक की नहीं सबकी बी टीम है, पता नहीं कहां-कहां जाता है, आप उनकी बात छोड़िए.
आकाश आनंद
नेशनल कोऑर्डिनेटर, बसपा

आकाश आनंद चंद्रशेखर आज़ाद को कई पार्टियों की बी-टीम बताते हुए कहते हैं, ''वो किसी एक की नहीं सबकी बी टीम है, पता नहीं कहां-कहां जाता है, आप उनकी बात छोड़िए.''

हालांकि, आकाश आनंद ने चंद्रशेखर का नाम अपनी रैलियों में नहीं लिया है. इस सवाल पर वो कहते हैं, ''उन्हें महत्व देकर क्या मिलेगा, हम अपने लोगों की बात कर रहे हैं, उनके मुद्दों की बात कर रहे हैं, ऐसे में उनकी बात करना सही नहीं है, मुझे लगता है जब आप अपने लोगों से बात कर रहे हैं तो उनके मुद्दों की बात की जाए, ना कि छुटभैया लोगों या चीज़ों की, उसके जैसे हज़ारों मिल जाएंगे आजकल समाज में या सड़कों पर घूमते हुए, जो 'जय भीम' कह कर लोगों को भटकाते हैं, उनका मकसद है बीएसपी से लोगों को किसी तरह दूर करने का.''

इंडिया गठबंधन से क्यों बनाई दूरी

आकाश आनंद

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बहुजन समाज पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह बताते हुए आनंद कहते हैं बीएसपी ने इस बार अलग संदेश देने की कोशिश की है. आनंद कहते हैं कि पार्टी के पास उसके अपने मतदाता हैं. यही पार्टी को अकेले लड़ने का आत्मविश्वास देता है.

आनंद कहते हैं, ''अगर विपक्ष को साथ लेकर आएं तो सीटें निकल आती हैं और वो अगर हमसे दूर रहें तो हमारा वोट काटते हैं, हमारी सीटें हाथ से निकल जाती हैं, तो इसलिए इस बार हम अलग मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि जो दूसरी राजनीतिक पार्टियां कह रही हैं, इंडी अलायंस कह रहा है कि हम वोट काटते हैं, हम किसी पार्टी की बी-टीम हैं, वो सही नहीं है.''

बहुजन समाज पार्टी ने इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी मुसलमान आबादी वाली सीटों पर पांच मुसलमान उम्मीदवार दिए हैं.

बीएसपी पर वोट काटने और बीजेपी की बी-टीम की तरह काम करने के आरोपों को ख़ारिज करते हुए आनंद कहते हैं, ''हमने इसलिए मज़बूत मुस्लिम कैंडिडेट खड़े किए हैं क्योंकि वहां पर उस इलाक़े में मुस्लिम कम्युनिटी की तादाद बड़ी है, और हम ऐसा कैंडिडेट खड़ा कर रहे हैं जो जीत सकता है, टक्कर दे सकता है, अगर मुसलमान और दलित समुदाय के कैंडिडेट को देखें तो वो जीतने वाले उम्मीदवार होते हैं.''

क्या मुसलमान बीएसपी को वोट करेंगे?

बसपा की रैली में आए लोग

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आनंद ये मानते हैं कि भले ही अभी मुसलमान वोटर बीएसपी के साथ मज़बूती से ना हो लेकिन पार्टी मुसलमानों को साथ लाने का प्रयास कर रही है.

आनंद कहते हैं, ''हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि मुसलमान हमारे साथ हैं, मुसलमान शायद हमारे साथ खड़ा हो सकता है, अपने प्रत्याशी के साथ खड़ा हो सकता है, ये तो मुसलमान लोगों को सम्मान देने जैसा है कि हम उन्हें विकल्प दें.''

हाल के कई चुनावों में बीएसपी राजनीतिक कामयाबी हासिल नहीं कर सकी है. ऐसे में सवाल उठा है कि क्या दलित वोट बैंक अब बीएसपी से खिसक रहा है.

आनंद कहते हैं, ''अगर आप ग्राउंड पर रिपोर्ट लेंगे, तो मुझे नहीं लगता कि अल्पसंख्यकों में किसी को नहीं लगता कि बहुजन समाज पार्टी उनके लिए नहीं लड़ रही.''

आनंद मानते हैं कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए. इसके समर्थन में तर्क देते हुए वो कहते हैं, ''कास्ट सेंसस ज़रूरी है. किस समुदाय की क्या ज़रूरत है किस पर कितना ध्यान देने की ज़रूरत है ये भी वहीं से निकल कर आएगा, तो ये ज़रूरी है.''

केंद्रीय जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल के विपक्ष के आरोपों पर आनंद कहते हैं कि पहले भी उनका इस्तेमाल होता रहा है.

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