ईडी के रडार पर आए केजरीवाल के मंत्री का इस्तीफ़ा, पर 'आप' के सात सांसद कहां हैं? - प्रेस रिव्यू

राजकुमार आनंद के साथ अरविंद केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी और दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री राज कुमार आनंद ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता और अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, बुधवार को इस्तीफ़ा देने के बाद राज कुमार आनंद ने कहा कि कुछ वक्त से वो पार्टी में घुटन महसूस कर रहे थे, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले ने उन्हें आभास कराया कि कहीं पर कुछ गड़बड़ है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल की ज़मानत याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

केजरीवाल ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.

राज कुमार ने पार्टी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपना इस्तीफ़ा दिया.

उन्होंने कहा, "मैंने अरविंद केजरीवाल के साथ ही राजनीति में कदम रखा था. उस वक्त उन्होंने कहा था कि राजनीति बदलेगी तो देश भी बदलेगा. आज दुख के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि राजनीति तो नहीं बदली लेकिन राजनेता बदल गए."

अरविंद केजरीवाल और राजकुमार आनंद

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राज कुमार आनंद ईडी के रडार पर थे?

अख़बार लिखता है कि राज कुमार आनंद उत्तर भारत में रेक्सिन के बड़े व्यापारी हैं.

पार्टी के सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि सबसे पहले उनकी पत्नी वीना को पटेल नगर सीट से विधानसभा में उतारा गया था. दो साल बाद वीना को टिकट नहीं दिया गया जिसके बाद राज आनंद और पार्टी के बीच दूरी आने लगी थी.

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बाद में स्थिति बेहतर हुई और राज आनंद केजरीवाल के संपर्क में आए जिसके बाद उन्हें 2020 से पटेल नगर से टिकट दिया गया.

बीते साल नवंबर में ईडी ने राज आनंद के घर और दफ्तरों पर छापा मारा था. उन पर वित्तीय गड़बड़ी के अलावा हवाला के ज़रिए चीन में पैसे भेजने का आरोप है.

ये छापेमारी दिल्ली की रद्द हो चुकी शराब नीति से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई थी.

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा, ''बीजेपी ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके हमारे मंत्रियों और विधायकों को तोड़ने का काम कर रही है.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पत्रकारों से बताया कि ईडी ने राजकुमार को 12 अप्रैल के लिए समन जारी किया था. इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि ईडी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है.

राज कुमार जब अपने इस्तीफ़े का एलान कर रहे थे, तब उनके पास केजरीवाल और सिसोदिया के क़रीबी रहे रत्नेश गुप्ता भी बैठे हुए थे.

एक 'आप' नेता ने अखबार से कहा- रत्नेश गुप्ता की मौजूदगी चिंताजनक है. वो मनीष सिसोदिया के बेहद क़रीबी रहे लेकिन बीते कुछ वक़्त से वो पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं.

राघव चड्ढा और स्वाति मालिवाल

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विरोध प्रदर्शनों में 'आप' के सांसदों की मौजूदगी कितनी?

इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने पहले पन्ने पर आम आदमी पार्टी से ही जुड़ी दूसरी ख़बर को जगह दी है.

अख़बार लिखता है कि ईडी के निशाने पर आई आम आदमी पार्टी नेताओं के संकट के दौर में उनके कई सांसद गायब हैं.

अख़बार ने लिखा है कि केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद पार्टी ने कई विरोध प्रदर्शन किए. मगर इन प्रदर्शनों से ज़्यादातर पार्टी सांसद नदारद रहे.

ज़मानत पर बाहर आए संजय सिंह के अलावा संदीप पाठक, एनडी गुप्ता पार्टी के तीन ऐसे राज्यसभा सांसद हैं, जो बीते दिनों सक्रिय दिखे हैं.

आम आदमी पार्टी के इकलौते लोकसभा सांसद सुशील कुमार रिंकू हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए थे.

इनके अलावा पार्टी केल राज्यसभा सांसद पूरे मामले में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं.

इस बारे में जब संजय सिंह से पूछा गया तो वो बोले- पार्टी इसकी चर्चा अपने मंच पर करेगी.

आम आदमी पार्टी के जो सांसद सक्रिय नहीं दिख रहे हैं, उनमें राघव चड्ढा, स्वाति मालिवाल, हरभजन सिंह, अशोक कुमार मित्तल, संजीव अरोड़ा, बलबीर सिंह और विक्रमजीत सिंह का नाम शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस सांसदों की स्थिति जानने की कोशिश की.

हरभजन सिंह, अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान

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आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद कहां हैं?

राघव चड्ढा- आंख का ऑपरेशन करवाने लंदन गए थे. मार्च के आख़िर में लौटना था, पर नहीं लौटे. राघव सोशल मीडिया पर सक्रिय दिखे हैं. अखबार लिखता है कि सूत्रों की मानें तो डॉक्टर्स की सलाह पर राघव बाहर नहीं निकल रहे हैं ताकि सूरज की रौशनी आंख पर असर ना डाले.

स्वाति मालिवाल- वो अमेरिका में हैं और इलाज करवा रही बहन के साथ हैं. स्वाति भी सोशल मीडिया पर सक्रिय दिख रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस से मालिवाल ने कहा- मैं अपनी बीमार बहन का साथ देने के लिए यहां हूं. जैसे ही बहन की तबीयत ठीक होगी, मैं सत्ता की तानाशाही के ख़िलाफ़ फिर से मैदान में रहूंगी.

हरभजन सिंह- हरभजन सिंह आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में कम ही दिखते हैं. केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर भी हरभजन सिंह शांत दिखे. सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह की पोस्ट आईपीएल के बारे में तो दिखती हैं, मगर 'आप' पर नहीं. इंडियन एक्सप्रेस ने हरभजन सिंह से पूछा कि क्या आप पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होंगे? हरभजन सिंह ने सिर्फ़ इतना जवाब दिया- नहीं.

अशोक कुमार मित्तल- लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर अशोक मित्तल पार्टी की गतिविधियों से नदारद दिखते हैं. इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से मित्तल ने कहा- 'आप' के विरोध प्रदर्शनों पर बोलना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. पार्टी मुख्यालय हमें बताएगा कि क्या किया जाएगा. मित्तल ने दावा किया कि उनको पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में बुलाया भी नहीं गया.

संजीव अरोड़ा- संजीव ने कहा कि वो केजरीवाल की पत्नी से 24 मार्च को मिले थे. हालांकि उन्होंने इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की बात को स्वीकार किया. संजीव ने कहा- मुझे पार्टी ने लुधियाना में कुछ ज़िम्मेदारियां दी हैं. मैं लगातार एनडी गुप्ता जी के संपर्क में हूं. अगर मुझे बुलाया जाएगा, तो मैं ज़रूर जाऊंगा.

बलबीर सिंह- बलबीर सिंह पर्यावरण के मुद्दे पर भी काम करते हैं. मगर बीते दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों में वो नज़र नहीं आए हैं. वो बोले- मैं धर्म निभाने वाला इंसान हूं, अगर कोई प्लान होगा तो साझा किया जाएगा.

विक्रमजीत सिंह- केजरीवाल की गिरफ़्तारी की बात हो या फिर आम आदमी पार्टी के विरोध प्रदर्शनों की. विक्रमजीत सिंह कहीं नज़र नहीं आए हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर उन्होंने स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ बातचीत का वीडियो साझा किया है. विक्रमजीत से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वो कई बार कह चुके हैं कि वो गैर-राजनीतिक हैं और वो पंजाब के मसलों पर खुलकर बोलते रहे हैं.

मज़दूर

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नौकरी, महंगाई बड़े मुद्दे

लोकसभा चुनावों से ठीक पहले सीएसडीएस लोकनीति सर्वे में सामने आया है कि इस बार चुनावों में देश की आधी आबादी के लिए बेरोज़गारी और महंगाई मुख्य मुद्दे हैं.

अख़बार द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार चुनाव से पहले कराए गए सर्वे पर लेखों की कड़ी के पहले हिस्से में ये जानकारी सामने आई है.

अख़बार ने लिखा है कि सर्वे में शामिल लोगों में से दो तिहाई यानी क़रीब 62 फ़ीसदी (शहरों में 65 फ़ीसदी) लोगों ने कहा है कि नौकरियां मिलना पहले से मुश्किल हुआ है. जहां 65 फ़ीसदी पुरुषों ने ये बात की, वहीं 59 फ़ीसदी महिलाओं ने कहा कि नौकरियां मिलना मुश्किल हुआ है. केवल 12 फीसदी लोगों ने कहा कि नौकरियां मिलना पहले से आसान हुआ है.

नौकरी मिलने में मुश्किल की चिंता मुसलमानों, अन्य पिछड़ा वर्ग और अनूसूचित जाति और जनजाति के लोगों में अधिक पाई गई. वहीं जिन लोगों ने कहा कि नौकरी मिलना आसान हुआ है, उनमें 17 फ़ीसदी 'अगड़ी' जाति के हिंदू शामिल थे.

वहीं सर्वे में शामिल 71 फीसदी लोगों ने बीते सालों में महंगाई बढ़ने की बात की.

अमित शाह

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सीएए पर जनता को भ्रमित कर रही हैं ममता- अमित शाह

पश्चिम बंगाल के बालूरघाट पर अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने प्रदेश की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी को निशाने पर लिया.

अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार- शाह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) पर ममता जनता को गुमराह कर रही हैं.

अमित शाह ने प्रदेश की 30 सीटों पर जीत की उम्मीद जताई और कहा कि प्रदेश में टीएमसी को जड़ से उखाड़ने के लिए 30 सीटों पर बीजेपी को जीत चाहिए.

वहीं अख़बार में छपी एक और ख़बर के अनुसार लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नौ उम्मीदवारों की अपनी दसवीं लिस्ट जारी कर दी है.

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से डिंपल यादव के ख़िलाफ़ जयवीर सिंह ठाकुर को उम्मीदवार बनाया गया है.

वहीं आसनसोल से एसएस अहलूवालिया को टिकट दिया गया है. कौशाम्बी से विनोद सोनकर, फूलपुर से प्रवीण पटेल, इलाहाबाद से नीरज त्रिपाठी, बलिया से नीरज शेखर, मछलीशहर से बीपी सरोज और ग़ाज़ीपुर से पारस नाथ राय बीजेपी के उम्मीदवार होंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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