इसराइल पर संभावित हमले को लेकर अमेरिका की ईरान को हिदायत

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन

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    • Author, कैथरीन आर्मस्ट्रॉन्ग और ह्यूगो बाचेगा, मध्य पूर्व संवाददाता
    • पदनाम, लंदन और यरूशलम से

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने आशंका जताई है कि ईरान देर-सवेर इसराइल पर हमला करेगा.

अप्रैल की पहली तारीख़ को सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ था. इसके लिए ईरान ने इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया था.

इस हमले में एक वरिष्ठ ईरानी कमांडर समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में ईरान की एलीट कुद्स फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर-जनरल मोहम्मद रेज़ा ज़ाहेदी और उनके डिप्टी ब्रिगेडियर-जनरल मोहम्मद हादी हाजी-रहीमी का नाम शामिल है.

इसके बाद से यह आशंका जताई जा रही है कि ईरान जल्द इसराइल पर पलटवार कर सकता है.

हालांकि इसराइल ने यह हमला करने की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला उसी ने किया है.

अमेरिकी अधिकारियों ने बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज़ को बताया कि इसराइल पर जल्द ही बड़ा हमला हो सकता है.

इसराइल का कहना है कि वह अपनी रक्षा के लिए तैयार है. वहीं जो बाइडन ने ईरान से इसराइल पर हमला न करने की बात कही है.

बाइडन ने कहा, “हम इसराइल की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम इसराइल का समर्थन करेंगे. हम इसराइल की रक्षा में मदद करेंगे और ईरान इसमें कामयाब नहीं होगा.”

ग़ज़ा में इसराइल से लड़ने वाले फलस्तीनी ग्रुप हमास का समर्थन करने के साथ-साथ ईरान ऐसे कई प्रॉक्सी संगठनों का समर्थन करता है, जो इस क्षेत्र में इसराइल पर हमला करते हैं. इसमें लेबनान का हिज़बुल्लाह संगठन भी शामिल है.

शुक्रवार को हिज़बुल्लाह ने कहा कि उसने लेबनान से इसराइल की तरफ दर्जनों रॉकेट लॉन्च किए हैं.

इसराइली सेना (आईडीएफ) के प्रवक्ता ने कहा कि करीब 40 मिसाइलें और विस्फोटक ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

एक अमेरिकी अधिकारी ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि हमला, इसराइल पर किसी भी अपेक्षित ईरानी हमले से अलग था.

ईरान क्या सोच रहा है?

सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला

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बीबीसी के सुरक्षा विषयों के संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि ईरान जानबूझकर यह चाहता है कि मध्य पूर्व और अमेरिका हमले का अनुमान लगाते रहें.

एक अप्रैल के हमले के बाद से इसराइल का मानना है कि ईरान.. लेबनान और सीरिया में अपनी प्रॉक्सी संगठनों को गुप्त तरीके से हथियारों की सप्लाई दे रहा था, वहीं दूसरी तरफ ईरान में इसराइल पर पलटवार करने को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं.

सही समय का इंतज़ार किया जा रहा है. दो तरीके हैं. पहला यह कि इसराइल पर ज़ोरदार हमला किया जाए, जिसका जवाब भी वह मज़बूती से देगा. दूसरा यह कि बड़ा हमला न किया जाए, लेकिन इससे ईरान की एक कमज़ोर छवि बनेगी.

यह एक ऐसा समय है जब पूरा मध्य पूर्व अलर्ट पर है और अमेरिका जैसा देश दुनिया को बता रहा है कि हमला हो सकता है.

ईरान में व्यावहारिक लोग संयम बरतने की मांग कर रहे हैं, जबकि उम्रदराज़ और सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई समेत कट्टरपंथी लोग इसराइल के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया की मांग कर रहे हैं.

लेकिन ईरान बड़े पैमाने पर युद्ध नहीं चाहता है और न ही वह खाड़ी के अरब हिस्से की तरफ के पड़ोसी ऐसा चाहते हैं, क्योंकि वहां की सरकारों ने ईरान से संयम बरतने के लिए कहा है.

ईरान छोड़ने की एडवाइज़री

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर

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बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने अपने नागरिकों से इसराइल की यात्रा न करने की एडवाइज़री जारी की है. इसके अलावा जर्मनी ने अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की है.

भारत ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे अगली सूचना जारी होने तक ईरान या इसराइल की यात्रा न करें.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, "जो लोग पहले से ईरान या इसराइल में रह रहे हैं, उनसे निवेदन है कि वे वहां भारतीय दूतावासों से संपर्क करें और अपना पंजीकरण करवाएं. इन दोनों देशों में रहने वालों से ये भी आग्रह है कि वे अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और कम से कम बाहर निकलें."

अमेरिकी विदेश विभाग ने इसराइल में राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को तेल अवीव, यरूशलम और बेर्शेबा शहरों के बाहर यात्रा करने से भी रोक दिया है.

इस बीच इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अपनी वॉर कैबिनेट के सदस्यों से मुलाकात की है.

वहीं कुछ इसराइलियों का कहना है कि वे संभावित ईरानी हमले के बारे में चिंतित नहीं हैं.

यरूशलम के एक बाजार में समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए डैनियल कोसमैन ने कहा, “हमें मालूम है कि हम दक्षिण, उत्तर, पूर्व और पश्चिम में दुश्मनों से घिरे हुए हैं. मैं बहुत विश्वास के साथ कहता हूं कि हमें कोई डर नहीं है. अपने आस पास देखिए, लोग बाहर घूम रहे हैं.”

इसराइल की तैयारी

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई

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हाल ही में इसराइल की सरकार ने अपने लोगों को पानी, तीन दिनों के लिए खाने का सामान और ज़रूरी दवाओं का स्टॉक रखने के लिए कहा था. इसके लिए इसराइल ने कोई नई एडवाइज़री जारी नहीं की है.

हालांकि इसराइली रेडियो के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों को संभावित ईरानी हमले के और सार्वजनिक शेल्टर्स को तैयार रखने के लिए कहा गया है.

पिछले हफ्ते इसराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने घोषणा की थी कि वह कॉम्बैट यूनिट में काम करने वाले सभी सैनिकों की सभी छुट्टियां रद्द कर रहा है. इससे एक दिन पहले वायु रक्षा यूनिट्स को मज़बूत करने के लिए रिज़र्व में रखे गए बलों को भी बुलाया गया था.

कई देशों के अधिकारी ईरान को हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर ईरान से ऐसा किया तो इससे मध्य पूर्व में एक बड़ा युद्ध छिड़ जाएगा.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से बात की है. ब्लिंकन इस कोशिश में हैं कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान को हमला न करने के लिए मनाएं.

शुक्रवार को यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर से मुलाकात के बाद इसराइली रक्षा मंत्री योआव गैलांट ने कहा कि ईरान के संभावित हमले के खतरे से दोनों देशों के बीच संबंध मज़बूत हुए हैं.

उन्होंने कहा कि हमें पता चल जाएगा कि हमले का जवाब कैसे देना है.

हिज़बुल्लाह के साथ हूती विद्रोहियों से भी मुकाबला

लेबनान में हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरुल्लाह

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हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इसराइल में घुसकर हमला किया था, जिसमें करीब 1200 लोग मारे गए थे. इनमें ज्यादातर इसराइल के नागरिक थे. इसके अलावा हमास 250 से ज़्यादा लोगों को बंधक बनाकर वापस ग़ज़ा ले गया था.

इसराइल का कहना है कि हमास के कब्ज़े में अभी भी 130 बंधक हैं और कम से कम 34 बंधकों की मौत हो चुकी है.

हमास के इस हमले के बाद इसराइल ने ग़ज़ा पर ज़मीनी और आसमानी हमले शुरू किए थे.

हमास संचालित ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इसराइल के इन हमलों में 33 हज़ार 600 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

हमास से युद्ध के बीच इसराइल ने करीब हर दिन अपनी उत्तरी सीमाओं पर ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह के साथ लड़ाई लड़ी है, जबकि इराक और यमन में ईरान समर्थित समूहों ने इसराइल के साथ साथ अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की है.

इसके अलावा यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से होकर इसराइल जाने वाले जहाज़ों को भी निशाना बनाया है. इसके जवाब में अमेरिका और यूके ने यमन में हूती विद्रोहियों पर पलटवार किया है.

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)

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