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मध्य प्रदेश: कमलनाथ के गढ़ में सुशील मोदी, बीजेपी को कितना फ़ायदा देगी दूसरे राज्यों से नेता बुलाने की रणनीति
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भोपाल
भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में अपनी 'चुनावी नैया' पार लगाने के लिए देश के तमाम राज्यों से पार्टी के शीर्ष नेताओं को मध्य प्रदेश बुलाया है.
इनमें निशिकांत दुबे, सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री भानु प्रताप वर्मा और केंद्रीय कानून राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह बघेल जैसे नेता शामिल हैं.
बीजेपी प्रवक्ता हितेश वाजपेयी के मुताबिक़, इन नेताओं में सांसद से लेकर विधायक स्तर के नेता शामिल हैं. इन नेताओं को राज्य की कुल 230 सीटों पर चुनाव पर्यवेक्षक जैसी भूमिका निभानी है.
इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश से आने वाले विधायकों की है. यूपी से योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल के 10 सदस्यों समेत कुल 143 विधायक और पार्टी नेता मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं.
कौन–कौन से नेता पहुंच रहे हैं एमपी
देश भर के अलग अलग प्रांतों में काम कर रहे संगठन के लोगों को मध्य प्रदेश बुलाया गया है. इसमें पंजाब, बिहार, झारखंड, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के विधायक और पार्टी के नेता शामिल हैं.
सबसे अहम भूमिका बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और और केंद्रीय लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री भानु प्रताप वर्मा को दी गई है. इन लोगों को मतदान से 48 घंटों पहले तक छिंदवाड़ा में ही प्रचार और चुनावी रणनीति बनाने का काम सौंपा गया है.
ये सीट पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष कमलनाथ की है. इस क्षेत्र को उनका अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है.
बीजेपी ने किस आधार पर दी जिम्मेदारी
हितेश वाजपेयी ने बीबीसी को बताया कि नेताओं को उनके अनुभव के अनुसार संभाग और ज़िलेवार ज़िम्मेदारियां सौंपी गई हैं.
वो कहते हैं कि इनके काम को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें संभाग मुख्य केंद्र है. उसके अधीन ज़ोन और ज़िले शामिल किये गए हैं. सभी सांसद, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मंत्री और विधायक केंद्रीय चुनाव समिति को समय समय पर अपनी रिपोर्ट भेजने का काम करेंगे.
वाजपेयी कहते हैं स्थानीय संगठन पूरी तरह से चुनाव प्रबंधन को लेकर व्यस्त है. दूसरे प्रदेशों से आए नेता चुनाव प्रचार और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बनाए रखने का काम करेंगे.
सत्ता विरोधी लहर की चुनौती
ये पहली बार है कि जब भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में चुनाव के दौरान इस तरह का प्रयोग किया है.
पार्टी का कहना है कि इस प्रयोग से चुनाव का बेहतर प्रबंधन होगा.
वरिष्ठ पत्रकार संजय सक्सेना मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ये प्रयोग इसलिए कर रही है ताकि सत्ता विरोधी लहर से निपटा जा सके. पार्टी ने इससे निपटने के लिए पिछले कई महीनों से प्रयास शुरू कर दिए थे. जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आता जा रहा है, भारतीय जनता पार्टी ने पूरा ज़ोर लगा दिया है. वो हर उपाय कर रही है ताकि इस लहर से निपटा जा सके और दोबारा सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएं.
यही वजह है कि इस बार मध्य प्रदेश के चुनावी दंगल में उसने तीन केंद्रीय मंत्रियों और चार सांसदों के अलावा केंद्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी चुनाव लड़ने के लिए उतारा है. इन मंत्रियों में फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रह्लाद पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं. केंद्र में मंत्री बनने के बाद से तोमर मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर रहे थे. यही हाल कमोबेश दूसरे मंत्रियों और सांसदों का भी रहा जिन्होंने टिकट मिलने पर आश्चर्य व्यक्त किया.
संजय सक्सेना कहते हैं कि इस बार मध्य प्रदेश में 'पनघट की डगर' भारतीय जनता पार्टी के लिए कठिन है, क्योंकि इस बार संगठन के अंदर भी उसे अपने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है.
वो कहते हैं, ''न सिर्फ़ संगठन बल्कि संघ से पार्टी के रिश्ते अच्छे नहीं हैं. यही वजह है कि कई पुराने नेताओं ने किनारा कर लिया है. ऐसे समय में चुनाव भी सर पर हैं इसलिए चुनौती और भी बड़ी है. हाल ही में संघ परिवार के एक क़द्दावर नेता अभय जैन ने भी अपनी नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी. इस वजह से भारतीय जनता पार्टी ने देश भर से अपने सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और नेताओं को एमपी में तैनात किया है.''
मोदी और दुबे को मिली ज़िम्मेदारी
जहां सुशील कुमार मोदी को छिंदवाड़ा क्षेत्र की ज़िम्मेदारी दी गई है, वहीं झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे को शिवपुरी के इलाके की पांच सीटों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.
ख़ास शिवपुरी शहर से भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. यशोधरा राजे सिंधिया ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ हैं.
इसी तरह भाजपा की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष अश्विनी शर्मा को ग्वालियर नगर क्षेत्र की तीन सीटों की ज़िम्मेदारी दी गई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्या को ग्रामीण क्षेत्र की तीन सीटों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामबीर सिंह बिधूड़ी को मुरैना ज़िले की छह सीटों का प्रभार दिया गया है, जबकि केंद्रीय कानून राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह बघेल मुरैना से लगे हुए भिंड जिले की पांच सीटों पर चुनावी रणनीति बनाएंगे.
वहीं, दिल्ली से भाजपा के विधायक विजेंद्र गुप्ता को अशोक नगर जिले की कमान सौंपी गई है.
योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के दो और सदस्य असीम अरुण और स्वतंत्र देव सिंह को शहडोल और रीवा जिलों का ज़िम्मा दिया गया है. उनके साथ सांसद विनोद सोनकर और सुब्रत पाठक को भी रखा गया है.
आम आदमी पार्टी की केंद्रीय समिति में संयुक्त संगठन सचिव भानु परिहार कहते हैं कि इस बार मध्य प्रदेश के चुनाव बहुत ज़्यादा दिलचस्प होंगे. इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है.
वो कहते हैं कि इस बार आम आदमी पार्टी भी इस चुनाव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है. इसलिए कड़ा संघर्ष होगा.
उनका कहना है कि दिल्ली में विपक्ष के नेता रामबीर सिंह बिधूड़ी को भाजपा ने इस लिए मुरैना की छह सीटों की ज़िम्मेदारी सौंपी है, क्योंकि ये सभी सीटें गुर्जर बहुल हैं. बिधूड़ी के वहाँ जमे रहने का असर गुर्जर मतदाताओं पर पड़ेगा. वो यह भी कहते हैं कि इस बार मतदाता ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं इसलिए राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए ये चुनाव बहुत टेढ़ी खीर साबित होंगे. इस बार चौंकाने वाले परिणाम सामने आएंगे.
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