धनबाद: बीजेपी और कांग्रेस के दावों के बीच निर्दलीय ट्रांसजेंडर प्रत्याशी सुर्खियों में- ग्राउंड रिपोर्ट

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा, निर्दलीय प्रत्याशी सुनैना और बीजेपी प्रत्याशी ढुल्लू महतो (क्रमशः)
    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, धनबाद से

झारखंड के धनबाद की पहचान भारत के कोयले की राजधानी के रूप में रही है.

'ब्लैक डायमंड' की संपदा से भरी इस धरती ने कोयला माफियाओं और गुटीय संघर्ष का ख़ूनी दौर भी देखा है.

पूरे भारत में बिजली और इस्पात संयंत्रों को चलाने वाले इस इलाक़े के लोगों की ज़िंदगी भी इस संघर्ष और हिंसा की वजह से प्रभावित रही है.

लेकिन इस क्षेत्र का तापमान इन दिनों चुनावी घमासान ने भी बढ़ाया हुआ है.

भारतीय जनता पार्टी ने धनबाद से तीन बार सांसद रह चुके पशुपतिनाथ सिंह का टिकट काटते हुए बाघमारा से तीन बार के विधायक ढुल्लू महतो को इस सीट पर प्रत्याशी बनाया है.

हालांकि, उनके ख़िलाफ़ कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं.

कांग्रेस ने इस सीट पर महिला प्रत्याशी अनुपमा सिंह को उतारा ज़रूर है, जिनकी अपनी छवि पर कोई दाग़ तो नहीं है, मगर उनके पति और बेरमो के विधायक अनूप सिंह पर कई आपराधिक मामले हैं.

इसको लेकर एक बार फिर चुनावी मुद्दे बाहुबल और जातीय समीकरणों के इर्द गिर्द ही घूमने लगे हैं.

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इमेज कैप्शन, देश की कोयले की राजधानी के रूप में धनबाद की पहचान रही है.

सुनैना किन्रर भी मैदान में

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मगर इस बार धनबाद की सीट पर एक ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी ख़ासी चर्चा हो रही है. एक ट्रांसजेंडर ने समाज की बंदिशों से लड़कर लोकसभा चुनाव के लिए दांव लगाया है. इनका नाम है सुनैना किन्नर. सुनैना ग्रैजुएट हैं.

सुनैना प्रचार का तरीक़ा अलग तरह का है. जिसकी वजह से आम लोग उनके प्रचार में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. लेकिन सुनैना किन्नर अपने क़दम फूंक-फूंककर रख रही हैं.

वो निर्दलीय उम्मीदवार हैं, उनका आरोप है कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं. धनबाद में चुनाव लड़ने के लिए बाहुबल और धनबल को ज़रूरी माना जाता रहा है. मगर सुनैना किन्नर कुछ हटकर कर रही हैं.

मनाईटांड के कुमार पाड़ा में अपने घर पर बीबीसी से बात करते हुए वो बताती हैं कि नामांकन दाख़िल करते ही उन्हें बहुत धमकियां मिलने लगी थीं.

वो कहती हैं, “मुझे डराया जा रहा था कि आप ये चुनाव ना लड़िए. वो कह रहे थे कि आप मांगने खाने वाली हो. आशीर्वाद देती हो तो वही करती रहो.”

वो कहती हैं, जल्द ही धमकियां और बढ़ गईं और लहजा भी बदल गया ताकि वो डर जाएं. उनका आरोप था कि राजनीतिक दलों के लोगों ने हर संभव प्रयास किया कि वो मैदान से हट जाएं. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. “मैंने सोचा जो होगा वो देखा जाएगा.''

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सुनैना किन्नर मानती हैं कि धनबाद की सबसे बड़ी समस्या है- कोयले पर अपराधियों का वर्चस्व. जिसकी वजह से आम जनता पिस रही है. वो कहती हैं कि कोयले के अवैध व्यापार और वर्चस्व की लड़ाई की वजह से ही धनबाद ख़तरनाक इलाक़ा बनता चला गया.

सुनैना कहती हैं, “यहाँ कोयला की बहुत बड़ी और जटिल समस्या है. आपसी रंज़िश और कारोबार पर क़ब्ज़ा करने की वजह से आम लोगों के लिए ज़िन्दगी जीने के रास्ते मुश्किल होते चले जा रहे हैं."

सुनैना ने जियोलॉजी से ग्रैजुएशन किया है, जो उनके समाज के लिए ये एक बड़ा कीर्तिमान है.

लेकिन ये भी उनके लिए इतनी आसान राह नहीं थी. वह बताती हैं कि जब वो दसवीं क्लास में थीं तो तभी से उन्हें ‘रैगिंग’ का सामना करते रहना पड़ा था

वो कहती हैं, “पहली बार दसवीं क्लास में मुझे ऐसा लगा कि मैं कौन हूँ? क्या हूँ. मुझमे हार्मोनल चेंज हो रहे थे. तब लोगों ने मुझे अहसास करवाया कि मैं किन्नर हूँ, उन सबसे अलग हूँ.”

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इमेज कैप्शन, प्रचार करती सुनैना

बीजेपी उम्मीदवार क्या कह रहे हैं?

मनाईटांड से कुछ ही दूर मुझी शहर में राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है. भाजपा के टिकट पर तीन बार जीतने वाले पीएन सिंह की बजाय इस बार ढुल्लू महतो को टिकट दिया गया है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने अपने सभी विरोधियों को चुनौती देने वाले लहजे में कहा, “उनकी क्या हिम्मत है? क्या वो मेरी बात की चुनौती स्वीकार कर सकते हैं? अगर राहुल गांधी से ज़्यादा केस मुझ पर होंगे तो मैं चुनाव नहीं लडूंगा.''

वो कहते हैं कि वो जिस समुदाय से आते हैं, उनकी कई पीढ़ियों ने सिर्फ़ मज़दूरी ही की है.

वो कहते हैं की दबंग समाज के लोगों ने कोयले पर जो वर्चस्व बनाया है, उससे कोयला सिर्फ़ उन्ही का रहा है.

ढुल्लू महतो कहते हैं, “मेरे ख़िलाफ़ सारे के सारे चोर एक जगह पर आकर संगठित हो गए हैं. आप आपराधिक आंकड़े उठाकर देख लीजिए. हत्याएं करने वाले, मर्डर करने वाले और इस ज़मीन पर हत्या का बीज बोने वाले लोग कौन रहे हैं? कौन लोग हैं जो क्राइम को धनबाद में लेकर आए हैं? अब ये सारे लोग मेरे खिलाफ़ एक हो चुके हैं.”

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भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई महतो का बचाव कर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी महतो के पक्ष में कई जगहों पर चुनावी रैलियां कर रहे हैं.

इसी तरह की एक रैली के दौरान महतो कहते हैं कि धनबाद सीट पर ही नहीं, हर सीट पर चुनावों में अलग-अलग तरह की चुनौतियां होती हैं.

उनका मानना है कि धनबाद सीट पर ये चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर हर कार्यकर्ता ख़ुद लड़ रहा है.

मरांडी कहते हैं, “ढुल्लू महतो भी धनबाद से लड़ रहे हैं. वो ख़ूब परिश्रम कर रहे हैं. हम सब लोग भी परिश्रम कर रहे हैं. जहां तक आपराधिक मामलों की बात है तो ये जान लीजिए कि ढुल्लू महतो लड़ाकू और जुझारू नेता हैं. वो लोगों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं. जनता के हितों के लिए लड़ाई लड़ते रहे हैं. तो स्वाभाविक रूप से इन पर केस भी हैं.”

कांग्रेस उम्मीदवार क्या तर्क दे रही हैं?

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस प्रत्याशी

वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी अनुपमा सिंह के लिए ये पहला चुनावी अनुभव है. वो ढुल्लू महतो के आरोपों पर पलटवार करने का मौक़ा नहीं चूकतीं. वो पूरे क्षेत्र में घूम-घूमकर प्रचार में लगी हुई हैं.

उनका कहना है, “उनके (ढुल्लू महतो) पास काफ़ी मोटे-मोटे सर्टिफिकेट्स हैं (अदालत में चल रहे मामले) कोई बोलता है 53, कोई बोलता है 51 मामले हैं. लेकिन मैंने अभी तक उनके 40-45 मामलों का अध्ययन किया है.”

वो आरोप लगाती हैं कि ढुल्लू महतो अपनी सभाओं में सिर्फ़ अगड़े- पिछड़े की बात ही करते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, “ढुल्लू महतो पर ज़्यादातर मामले पिछड़े वर्ग को प्रताड़ित करने के लिए ही दर्ज हैं. मुझे अंदेशा है कि लोकसभा में उनकी दस्तक से कहीं ऐसा ना हो कि धनबाद में और मुक़दमे हों. ऐसा न हो कि इनके लोग यहां सिर्फ़ आतंक फैलाएं. मैं चाहती हूं कि जो हो रहा है, वो भी ख़त्म हो जाए.

कांग्रेस कहती है कि अनुपमा सिंह को धनबाद के मैदान से उतारना उसका मास्टरस्ट्रोक है क्योंकि वो महिला हैं और उन पर किसी भी तरह का मामला दर्ज नहीं हैं. साथ ही अनुपमा सिंह की व्यक्तिगत छवि पर कोई उंगली नहीं उठा सकता.

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अभिजीत राज, झारखंड युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं. वो कहते हैं कि अनुपमा सिंह तो महिला हैं ही साथ ही एक युवा महिला भी हैं.

उनका कहना था, “राहुल गांधी कहते हैं कि आधी आबादी को हम ताक़त देंगे. शक्ति देंगे. उसका एक उदहारण भी इस चुनाव में आपको देखने को मिल रहा है. एक बेहतर महिला हैं. पढ़ी लिखी महिला हैं. मैं समझता हूं कि भाजपा को अभी के वक़्त में ऐसे ही चुनौती दी जा सकती थी.”

आम लोग और सिविल सोसाइटी के लोग क्या कह रहे हैं?

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रत्याशियों के चयन ने धनबाद की सिविल सोसाइटी को निराश किया है. वो ख़ास तौर पर भाजपा के फ़ैसले से क्षुब्ध नज़र आए. कई जगह मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सिविल सोसाइटी के लोग भी सभाएं कर रहे हैं.

विजय झा, सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उन्होंने मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने के क्रम में सभाओं को संबोधित किया है.

बीबीसी से उनकी मुलाक़ात कतरासगढ़ में हुई. उनका तर्क है कि सिविल सोसाइटी भाजपा से इसलिए निराश है क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा के द्वारा राजनीति का शुद्धीकरण किया जाएगा. उनका कहना था, "भाजपा ने धनबाद में जो प्रत्याशी दिया है, उस पर 53 प्राथमिकी दर्ज हैं. इनमें चार मामले में उनको निचली अदालत से सज़ा हो भी चुकी है. इसलिए हम निराश से ज़्यादा चिंतित हैं.”

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धनबाद के चुनावी माहौल में उम्मीदवार और उनके समर्थक अपने-अपने दावे और वादे कर रहे हैं. लेकिन आम लोगों के मुद्दे क्या हैं? इस बात पर कोई भी प्रमुख राजनीतिक दल कुछ ज़्यादा नहीं कह रहा है.

लोदना कोलियरी में रहने वाले जाने माने मज़दूर नेता सत्येन्द्र चौहान का आरोप है कि सिर्फ़ चुनावों के समय नेता अपना चेहरा दिखाते हैं और फिर पांच सालों तक कभी वापस नहीं आते.

वो कहते हैं, “नेता वोट मांगकर कर और अपना चेहरा चमका कर बड़ी-बड़ी गाड़ियां दिखाकर निकल जाते हैं. किसी भी दल का नेता या कार्यकर्ता फिर ग़रीबों के इलाकों में नहीं आते. जो प्रत्याशी बनकर खड़ा होता है, उनकी हिम्मत ही नहीं हैं कि वो इन इलाक़ों में आएं.”

धनबाद लोकसभा सीट पर बड़े-बड़े नेता और बाहुबली अपने दावे ठोंक चुके हैं. इनमें से कई इस सीट पर काबिज़ भी हुए. लेकिन इस चुनावी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को क्या सच में कभी राहत मिलेगी?

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