पाकिस्तानी मॉडल एरिका: 'मिस यूनिवर्स' में जिनके हिस्सा लेने पर बरपा हंगामा

एरिका रॉबिन.

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इमेज कैप्शन, एरिका रॉबिन का कहना है कि वो घिसीपिटे ढर्रे को बदलना चाहती हैं.
    • Author, सहर बलोच
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

जमात-ए-इस्लामी के सीनेटर मुश्ताक़ अहमद ने इसे 'शर्मनाक' बताया है. कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक़ काकड़ ने जांच के आदेश दिए हैं. सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी मर्द तीखी टिप्पणी कर रहे हैं.

लेकिन यह आक्रोश किस वजह से भड़क रहा है?

वजह है, 24 साल की एक महिला.

कराची की रहने वाली एरिका रॉबिन ईसाई हैं. वो 'मिस यूनिवर्स' प्रतियोगिता में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी गई हैं.

मालदीव में आयोजित प्रतियोगिता में एरिका रॉबिन को 'मिस यूनिवर्स पाकिस्तान' चुना गया था. इस प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पांच प्रतियोगी पहुंची थीं.

इसका आयोजन दुबई के यूगेन समूह ने किया था. इस समूह के पास ही 'मिस यूनिवर्स बहरीन' और 'मिस यूनिवर्स मिस्र' के आयोजन की भी फ्रेंचाइजी है.

उसका कहना है कि 'मिस यूनिवर्स पाकिस्तान' प्रतियोगिता के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे.

'मिस यूनिवर्स' प्रतियोगिता का फ़ाइनल इस साल नवंबर में अल सल्वाडोर में होगा.

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मैं इस मानसिकता को बदलना चाहूंगी कि पाकिस्तान एक पिछड़ा देश है.
एरिक रॉबिन
'मिस यूनिवर्स पाकिस्तान'

मिस पाकिस्तान वर्ल्ड प्रतियोगिता

एरिका रॉबिन ने बीबीसी से कहा, ''पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करना बहुत अच्छा लगता है. लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये प्रतिक्रियाएं कहां से आ रही हैं. मुझे लगता है कि लोगों की समस्या यह है कि मैं पुरुषों से भरे कमरे में स्विमसूट पहनकर चलूंगी.''

एरिका रॉबिन के आलोचकों का कहना है कि वह एक ऐसे देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं जो प्रतिनिधित्व नहीं करना चाहता. मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में सौंदर्य प्रतियोगिताएं दुर्लभ हैं.

'मिस पाकिस्तान वर्ल्ड', दुनिया भर में रह रहीं पाकिस्तानी मूल की महिलाओं की सौंदर्य प्रतियोगिता है, जो शायद सबसे अधिक प्रसिद्ध है.

इसे पहली बार 2002 में टोरंटो में आयोजित किया गया था. इसे 2020 में लाहौर में आयोजित किया गया.

एरिका रॉबिन.

पाकिस्तान की पहली प्रतिनिधि

'मिस यूनिवर्स' प्रतियोगिता के 72 साल के इतिहास में पाकिस्तान ने कभी भी अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा.

एरिका रॉबिन ने बताया कि दूसरे दौर की चयन प्रतियोगिता जूम पर आयोजित की गई थी. इसमें उनसे उस एक चीज का नाम बताने के लिए कहा गया था जो वह अपने देश के लिए करना चाहती थीं.

इस पर एरिका रॉबिन ने जवाब दिया था, ''मैं इस मानसिकता को बदलना चाहूंगी कि पाकिस्तान एक पिछड़ा देश है."

उनके नामांकन पर आई कुछ प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह मुश्किल हो सकता है. इसके बाद भी कई मॉडलों, लेखकों और पत्रकारों ने एरिका रॉबिन को बधाई दी.

पत्रकार मारियाना बाबर ने सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर रॉबिन की 'सुंदरता और दिमाग' की तारीफ़ की थी.

पाकिस्तानी मॉडल वनीजा अहमद ने एरिका रॉबिन को मॉडलिंग के क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित किया था.

उन्होंने 'वॉयस ऑफ अमेरिका उर्दू' को बताया, "जब ये लोग 'मिस्टर पाकिस्तान' नामक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से सहमत हैं, तो उन्हें एक महिला की उपलब्धि से परेशानी क्यों है?"

एरिक रॉबिन.

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कराची में रहने वाले लेखक और टिप्पणीकार राफ़े महमूद ने बीबीसी को बताया, "हम कई विरोधाभासों वाला देश हैं और महिलाएँ और हाशिए का समाज हमें सबसे अधिक परेशान करता है."

वो कहते हैं, "बड़े पैमाने पर पाकिस्तान सर्वसत्तावादी राष्ट्र है और यह इसके कठोर पितृसत्तात्मक मूल्यों में दिखता है जिसे वह संस्थागत और सामाजिक रूप से थोपता है. एरिका रॉबिन और जिस किस्म की मॉरल पुलिसिंग का उन्होंने सामना किया है, वो उसी का विस्तार है."

अख़बार 'डॉन' की 1950 से 1970 के बीच की प्रतियां देखने से पता चलता है कि कराची के एलफिंस्टन स्ट्रीट पर स्थित एक क्लब में कैबरे और बैले डांसर परफ़ार्म किया करती थीं. इन नाइटक्लबों में एक्टिविस्ट, राजनयिक, राजनेता, एयर होस्टेस और युवा जाया करते थे.

कराची का ऐतिहासिक मेट्रोपोल होटल भी संगीत और जाज की प्रस्तुतियों की पसंदीदा जगह हुआ करती थी. लेकिन 1973 में पाकिस्तान की संसद ने एक संविधान बनाया, इसमें पाकिस्तान को एक इस्लामिक गणराज्य और इस्लाम को राजधर्म घोषित कर दिया गया.

इसके चार साल बाद सेनाध्यक्ष जनरल जिया उल हक़ ने प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट कर दिया.

इसके बाद के दशक में जो कुछ हुआ उसे कार्यकर्ताओं और क़ानून के जानकारों ने 'तानाशाही युग' क़रार दिया, क्योंकि इस दौरान इस्लामी क़ानून लागू किया गया था और पाकिस्तानी समाज नाटकीय रूप से बदलाव गया था.

जनरल ज़िया 1980 के दशक के मध्य तक इस्लामी कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारने की सज़ा को भी ज़िंदा कर दिया था.

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आज, नाइट क्लब और बार ख़त्म हो चुके हैं. मेट्रोपोल होटल ऐसा लगता है जैसे ढह जाएगा. सड़क के ठीक नीचे जिसे पहले कसीनो माना जाता था, वह अब सिर्फ ढांचा बचा है.

इसके बाद भी एक स्वतंत्र और अधिक सहिष्णु पाकिस्तान की उम्मीद दूर नहीं हुई है.

एरिका रॉबिन उन लोगों में से एक हैं जो इस बात की सीमाएं लांघ रही हैं कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं.

सेंट पैट्रिक हाई स्कूल और गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स की स्नातक इस बात पर अड़ी हुई हैं कि उन्होंने 'कुछ भी ग़लत नहीं किया है.'

वो कहती हैं, "अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करके मैं कोई क़ानून नहीं तोड़ रही हूं. मैं रूढ़िवादिता को खत्म करने के लिए अपनी ओर से थोड़ा प्रयास कर रही हूं."

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