अमेरिका ने पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के चार सप्लायर्स पर पाबंदी क्यों लगाई?

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    • Author, सहर बलोच
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद

अमेरिका ने चीन की तीन और बेलारूस की एक कंपनी पर पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम की तैयारी में मदद करने के आरोप में पाबंदी लगाने की घोषणा की है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इसको लेकर एक बयान जारी किया है.

इसमें कहा गया है कि अमेरिका उन चार कंपनियों को चिन्हित कर रहा है, जो बड़े पैमाने पर तबाही फैलाने वाले हथियारों और उनकी सप्लाई में शामिल रही हैं.

उनका कहना है कि अमेरिका विनाशकारी हथियारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता रहेगा.

ध्यान रहे कि अब तक ख़ुद अमेरिका ने इसराइल को ग़ज़ा में युद्ध के लिए तीन अरब डॉलर से अधिक के हथियार उपलब्ध कराए हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि इस्लामाबाद अमेरिका की हाल की कार्रवाई के बारे में नहीं जानता.

बयान में कहा गया है, ''अतीत में केवल शक के आधार पर सूची जारी की गई या फिर उनमें शामिल सामान कंट्रोल लिस्ट में भी शामिल नहीं था, मगर उन्हें संवेदनशील समझा गया.''

पाकिस्तान का कहना है कि वह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की नीति को रद्द करता है.

किन कंपनियों पर अमेरिका ने लगाए हैं आरोप?

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से एक फ़ैक्ट शीट भी जारी की गई है.

इस फ़ैक्ट शीट के अनुसार अमेरिका ने चीन स्थित शियान लौंगडे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड पर पाकिस्तान की लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल की तैयारी के लिए कल-पुर्ज़े देने का आरोप लगाया है. इसमें फ़िलामेंट वाइंडिंग मशीन भी शामिल है.

इस बयान में आरोप लगाया गया है कि फ़िलामेंट वाइंडिंग मशीन को रॉकेट मोटर केस तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

तिआनजिन क्रिएटिव इंटरनेशनल ट्रेड कंपनी लिमिटेड ने पाकिस्तान की लंबी दूरी तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को कल-पुर्ज़े उपलब्ध कराए हैं. इसमें 'स्टिर वेल्डिंग' का सामान भी शामिल है.

अमेरिका के मुताबिक़ स्टिर वेल्डिंग का सामान स्पेस लॉन्च व्हीकल में इस्तेमाल होने वाले प्रोपेलेंट टैंकों की तैयारी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस फ़ैक्ट शीट में चीन की ग्रानपेक्ट कंपनी लिमिटेड पर आरोप लगाया गया है कि इस कंपनी ने पाकिस्तान की अंतरिक्ष शोध संस्था टसुपार्को' (स्पेस एंड अपर एटमॉस्फ़ेयर रिसर्च कमीशन) को रॉकेट मोटरों की जांच-पड़ताल में सहायक उपकरण उपलब्ध कराए हैं.

यह आरोप भी लगाया गया है कि यही कंपनी पाकिस्तान को बड़े व्यास वाली रॉकेट मोटर के परीक्षण के लिए ज़रूरी कल-पुर्ज़े देती रही है.

ध्यान रहे कि पाकिस्तान में एमटीसीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम) कैटेगरी-1 बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण किया जाता है.

फ़ैक्ट शीट के मुताबिक़ बेलारूस की मिंस्क व्हील ट्रैक्टर प्लांट ने पाकिस्तान को बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के लिए विशेष गाड़ियों के शैसी (चेसिस) उपलब्ध कराए हैं.

बयान के अनुसार यह शैसी बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्च सपोर्ट प्रोग्राम में काम आता है. इसे पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) को उपलब्ध कराया गया था.

प्रतिबंध अब क्यों लगाए जा रहे हैं?

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय के बयान में इसका सीधा सा जवाब यह दिया गया है कि अमेरिका दुनिया भर में विनाशकारी हथियारों की रोकथाम करना चाहता है, इसीलिए यह क़दम उठाया गया है.

दूसरी ओर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ ज़ोहरा बलोच की ओर से इस बारे में दिए गए बयान में कहा गया कि पहले भी बिना सबूत दिए ऐसी निजी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं और साथ ही पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर आरोप भी लगाए गए हैं.

बयान में कहा गया है, ''हमें अमेरिका की ओर से की गई हाल की कार्रवाई की विशेष जानकारी नहीं है लेकिन अतीत में हमें ऐसे कई अवसरों पर देखने को मिला कि शक के आधार पर प्रतिबंध लगाए गए हैं."

"ऐसे मौके भी आए हैं जब कोई सामान कंट्रोल लिस्ट में नहीं था लेकिन उसे संवेदनशील बता कर प्रतिबंध लगाया जाता रहा है.''

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान निर्यात पर प्रतिबंध को राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की नीति को रद्द करता है.

बयान में कहा गया है, "यह भी सच्चाई है कि इन्हीं संस्थाओं ने, जो परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकने वाले नियमों का कड़ाई से पालन करने का दावा करती हैं, कुछ देशों की आधुनिक सैनिक टेक्नोलॉजी की लाइसेंसिंग की ज़रूरत को ख़त्म कर रखा है.''

''इसकी वजह से हथियारों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, क्षेत्र के देशों की शक्ति में असंतुलन बढ़ सकता है और परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकने का उद्देश्य और दुनिया भर की शांति और सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है.''

वो कहती हैं, ''हमने कई बार इस बात को सामने रखा है कि निर्यात पर प्रतिबंध मनमाने आधार पर न लगाए जाएं और ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाए जिससे आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए ज़रूरी टेक्नोलॉजी पर आधारहीन प्रतिबंध न लगे.''

''पाकिस्तान इस बात के लिए भी तैयार है कि किसी भी चीज़ के इस्तेमाल और इस्तेमाल के समय की पुष्टि की प्रक्रिया बनाने के लिए बातचीत की जाए ताकि व्यावसायिक उपभोक्ता इन भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों से प्रभावित न हों.''

दूसरी और रक्षा मामलों पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का विश्लेषण कुछ और बताता है.

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ सैयद मोहम्मद अली ने कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय क़ानून, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी तक पहुंच जिओ पॉलिटिक्स से प्रभावित रही है.

उन्होंने कहा, ''पश्चिमी देश चीन के आर्थिक विस्तार को रोकने या सीमित करने की कोशिश करते रहे हैं.''

उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद उन आरोपों को चुनौती देने, उनका जवाब देने या फिर इन मामलों में क़ानूनी राहत पाने की सभी ज़िम्मेदारी उन चीनी कंपनियों पर है जिन पर यह आरोप लगाए गए हैं.

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर पाकिस्तान का कई दशकों से यही जवाब रहा है कि उसके रणनीतिक कार्यक्रम स्थानीय संसाधनों से बनाए गए हैं.

अमेरिकी पाबंदियों का ईरान से संबंध

पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ ईरान के विदेश मंत्री

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अगर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी फ़ैक्ट शीट पर नज़र दौड़ाएं तो उसमें कठोर प्रतिबंध लगाते हुए दो टूक कहा गया है कि उन चारों कंपनियों के अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी लोगों के पास पाई जाने वाली उनकी सभी संपत्तियां फ़्रीज़ कर दी जाएंगी.

इसके साथ ही इन कंपनियों के मालिकों पर अमेरिका आने पर पाबंदी लगा दी जाएगी और अमेरिकी नागरिकों को उनके साथ कारोबार करने से रोक दिया जाएगा.

लेकिन पत्रकार और विश्लेषक एज़ाज़ सैयद ने बीबीसी को बताया कि इस प्रतिबंध की एक वजह इस साल फ़रवरी में सामने आने वाली एक ख़बर से भी जुड़ी है.

उन्होंने कहा कि चार पाकिस्तानी नागरिकों पर अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी मिसाइल के पुर्ज़े हूती विद्रोहियों तक पहुंचाने का आरोप लगाया था.

उनमें से एक मोहम्मद पहलवान नाम के शख़्श पर यह आरोप फ़रवरी में लगाया गया था जबकि उनकी गिरफ़्तारी जनवरी में एक ऑपरेशन के दौरान हुई थी.

अमेरिका की ओर से यह ऑपरेशन जनवरी की शुरुआत में किया गया था जिसके दौरान दो नेवी सेलर मारे गए थे.

इस घटना के बाद अमेरिका की फ़ेडरल कोर्ट में यह तर्क दिए गए थे कि पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद पहलवान को, जो इस घटना के महत्वपूर्ण मुलज़िम हैं, हथियार पहुंचाने पर बीस साल की सज़ा और कोस्ट गार्ड से झूठ बोलने पर पांच साल की और सज़ा हो सकती है.

ध्यान रहे कि अमेरिका यह आरोप लगाता रहा है कि हूती विद्रोहियों को कथित तौर पर ईरानी मिसाइल लाल सागर के ज़रिए मिलते रहे हैं.

अमेरिका के न्याय विभाग ने कहा है कि ये हथियार या मिसाइल कथित तौर पर अमेरिकी जहाज़ पर होने वाले हाल के हमले में इस्तेमाल होते रहे हैं. इसी वजह से अमेरिका ने इस साल जनवरी से इस ऑपरेशन को जारी रखा है ताकि हूती विद्रोहियों की किसी तरह की मदद न हो सके.

एज़ाज़ सैयद ने कहा, ''एक और समस्या अमेरिका को ईरान और पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों से भी है. यह समस्या ईरानी शिष्टमंडल के 22 अप्रैल को पाकिस्तान आने से भी जुड़ी है. इस दौरे का एजेंडा न केवल आपसी संबंधों को बेहतर बनाना है बल्कि क्षेत्र की पूरी स्थिति को देखते हुए संयुक्त रणनीति तैयार करना भी है. अमेरिका नहीं चाहता के पाकिस्तान के संबंध ईरान से किसी तरह नॉर्मलाइज़ हों.''

उन्होंने कहा कि यह पाबंदी एक चेतावनी भी है कि अभी तो केवल कंपनी पर पाबंदी लगाई है, इसके बाद देश पर भी लगा सकते हैं.

अमेरिका के परमाणु प्रतिबंधों का इतिहास

यमन के हूती लड़ाके

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यह पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने किसी देश पर इस तरह का प्रतिबंध लगाया हो.

इसके लिए अगर अतीत की कुछ घटनाओं पर नज़र दौड़ाएं तो पता चलता है कि इससे पहले भी अमेरिका की ओर से पाकिस्तान पर भी इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे.

सन 2021 में अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान की 13 कंपनियों पर यह आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिया था कि ये कंपनियां पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में कथित तौर पर मदद दे रही हैं.

उस समय उन कंपनियों के बारे में विश्लेषकों और शोधकर्ताओं ने कहा था कि उन कंपनियों का पाकिस्तान के परमाणु या मिसाइल प्रोग्राम से कोई संबंध दिखाई नहीं देता क्योंकि ये कंपनियां व्यापार, इंजीनियरिंग और आयात के कारोबार से जुड़ी हैं.

फिर सन 2023 में भी अमेरिका ने पाकिस्तान को बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के सामान उपलब्ध कराने के आरोप में चीन की तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे.

इस बार जिन कंपनियों पर आरोप लगाया गया है अब तक उनकी ओर से इन प्रतिबंधों पर बयान नहीं दिया गया है.

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