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मोहन भागवत के 'सच्ची आज़ादी' वाले बयान पर राहुल ने क्यों कही 'इंडियन स्टेट' से लड़ने की बात
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'सच्ची आजादी' वाले बयान पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि मोहन भागवत अगर किसी दूसरे देश में ऐसा बयान देते तो इसे देशद्रोह मान कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाता और मुकदमा चलाया जाता.
मोहन भागवत सोमवार को इंदौर में थे. वहां वो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार देने के लिए मौजूद थे.
इस पुरस्कार समारोह में भागवत ने कहा था कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा द्वादशी के तौर पर मनाया जाना चाहिए. इसे ही भारत का 'सच्चा स्वतंत्रता' दिवस मानना चाहिए.
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मोहन भागवत ने क्या कहा?
मोहन भागवत ने कहा था, ''प्रतिष्ठा द्वादशी, पौष शुक्ल द्वादशी का नया नामकरण हुआ. पहले हम कहते थे वैकुंठ एकादशी, वैकुंठ द्वादशी अब उसे प्रतिष्ठा द्वादशी कहना क्योंकि अनेक शतकों से परतंत्रता झेलने वाले भारत के सच्चे स्वतंत्रता की प्रतिष्ठा उसी दिन हो गई. स्वतंत्रता थी, प्रतिष्ठित नहीं हुई थी."
"भारत स्वतंत्र हुआ 15 अगस्त को राजनीतिक स्वतंत्रता आपको मिल गई. हमारा भाग्य निर्धारण करना हमारे हाथ में है. हमने एक संविधान भी बनाया, एक विशिष्ट दृष्टि जो भारत के अपने स्व से निकलती है, उसमें से वह संविधान दिग्दर्शित हुआ, लेकिन उसके जो भाव हैं, उसके अनुसार चला नहीं और इसलिए,- हो गए हैं स्वप्न सब साकार कैसे मान लें, टल गया सर से व्यथा का भार कैसे मान लें."
भागवत ने कहा, ऐसी परीस्थिति समाज की, क्योंकि जो आवश्यक स्वतंत्रता में स्व का अधिष्ठान होता है, वह लिखित रूप में संविधान से पाया है, लेकिन हमने अपने मन को उसकी पक्की नींव पर आरूढ़ नहीं किया है. हमारा स्व क्या है? राम, कृष्ण और शिव, यह क्या केवल देवी देवता हैं, या केवल विशिष्ट उनकी पूजा करने वालों के हैं? ऐसा नहीं है. राम उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ते हैं."
भागवत के बयान पर राहुल का जवाब
राहुल गांधी ने नई दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के मौके पर भागवत के इस बयान का जवाब दिया.
राहुल गांधी ने कहा, ''हमें ये मुख्यालय एक खास समय में मिला है. मेरा मानना है कि इसका प्रतीकात्मक महत्व है क्योंकि कल आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत 1947 में आज़ाद नहीं हुआ था. उन्होंने कहा कि भारत को सच्ची आज़ादी उस दिन मिली जब राम मंदिर बना. वो कहते हैं कि संविधान हमारी आज़ादी का प्रतीक नहीं है.''
राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत में ये दुस्साहस है कि हर दो-तीन दिन में वो देश को ये बताते रहते हैं कि आज़ादी के आंदोलन को लेकर वो क्या सोचते हैं.
राहुल गांधी ने कहा, ''मोहन भागवत ये कह रहे थे कि संविधान बेमानी है. उनके बयान का मतलब ये है कि ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ लड़कर हासिल की गई हर चीज़ बेमानी है और उनके अंदर इतना दुस्साहस है कि वो सार्वजनिक तौर पर ये बात कह रहे हैं. मोहन भागवत ने अगर ये बयान किसी और देश में दिया होता तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होती. ये देशद्रोह करार दिया जाता और वो गिरफ़्तार हो जाते. ''
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, ''भागवत कर रहे हैं कि भारत को 1947 में आजादी नहीं मिली. ऐसा कहना हर भारतीय का अपमान है. अब हमें इस तरह की बकवास को सुनना बंद कर देना चाहिए. हमें ऐसे लोगों के बकवास को सुनना बंद कर देना चाहिए जो ये सोचते हैं कि हम जो चाहें बोलते रहें और शोर मचाते रहें.''
राहुल गांधी ने कहा,'' आरएसएस की विचारधारा की तरह हमारी विचारधारा भी हजारों साल साल पुरानी है. हमारी विचारधारा हजारों साल से आरएसएस की विचारधारा से लड़ती आ रही है. ये मत समझिये हम एक ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसके नियम पारदर्शी हैं. इस लड़ाई में कोई पारदर्शिता नहीं है. अगर आप समझते हैं कि हम सिर्फ बीजेपी या आरएसएस जैसे राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं तो आप ये समझ नहीं पा रहे हैं आख़िर हो क्या रहा है. हम बीजेपी, आरएसएस और अब खुद इंडियन स्टेट से लड़ रहे हैं.''
'भागवत ने साधे एक तीर से दो निशाने'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहन भागवत ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन को 'सच्ची आज़ादी' का दिन बता कर अपनी गलती सुधारने की कोशिश की है.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शरद गुप्ता ने बीबीसी हिंदी को भागवत के इस बयान के मायने समझाते हुए कहा, "भागवत ने कुछ समय पहले कहा था अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोगों को ऐसा लगने लगा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर 'हिंदुओं के नेता' बन सकते हैं. इसके बाद उन्होंने कहा था कि हमें हर मस्जिद के नीचे मंदिर की खोज बंद कर देनी चाहिए. लेकिन अब मोहन भागवत ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन को सच्ची आज़ादी का दिन बता कर 'अपनी गलती सुधार' ली है.''
हालांकि शरद गुप्ता ये भी कहते हैं कि इस बयान से भागवत ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं.
उनका कहना है कि एक तरफ तो भागवत ने बीजेपी से संघ के कथित तनाव को कम करने की कोशिश की है तो दूसरी ओर हिंदुत्व समर्थकों को ये भी बता दिया है कि राम मंदिर के बाद आई सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की लहर की वजह से ही बीजेपी को चुनावी सफलता मिली है. इसलिए एक तरह से ये हिंदुत्व समर्थकों को ये भी बताना है कि अगर उन्हें इस देश में अपनी सरकार चाहिए तो वो इस लहर को धीमा न पड़ने दें और बीजेपी का समर्थन करते रहें.
राहुल ने क्यों कही 'इंडियन स्टेट' के ख़िलाफ़ लड़ाई की बात
राहुल गांधी ने अपने भाषण में 'इंडियन स्टेट' से लड़ने की बात कही. इसे लेकर उनकी आलोचना हो रही है. लोगों का कहना है कि राहुल गांधी भागवत पर देशद्रोह का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इंडियन स्टेट से लड़ने की बात कर वो खुद देश के ख़िलाफ़ बगावत की बात कर रहे हैं.
हालांकि वरिष्ठ पत्रकार लेखक रशीद किदवई ने बीबीसी हिंदी से कहा,'' राहुल के बयान को सही संदर्भ में समझने की ज़रूरत है. जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था तब भी विपक्ष के लोगों का कहना था कि कांग्रेस ने देश के सारे संस्थानों पर कब्जा कर लिया है. उस समय वो भी इंडियन स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ने की बात करते थे. क्योंकि उनका मानना था कि इंदिरा गांधी ने 'इंडियन स्टेट' की सारी ताकतों को खुद में समाहित कर लिया है. यही बात अब बीजेपी और आरएसएस के संदर्भ में राहुल गांधी कर रहे हैं.''
राहुल गांधी का 'इंडियन स्टेट' के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को गंभीर न बताते हुए राशिद किदवई कहते हैं कि ये राजनीतिक शब्दावली है. दरअसल, हर अपराध 'भारतीय राष्ट्र' के ख़िलाफ़ होता है. ऐसे में तो हर अपराध को राष्ट्र के ख़िलाफ़ बगावत मान लेना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है. आपातकाल के समय में विपक्ष भी इंडियन स्टेट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की बात कहता था. क्योंकि उसका मानना था कि इंदिरा गांधी ने इंडियन स्टेट के सारे उपकरणों पर कब्ज़ा कर लिया है.
' भागवत का देश में घूमना-फिरना मुश्किल हो जाएगा'
भागवत के बयान पर राहुल की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संघ प्रमुख पर निशाना साधा.
खड़गे ने पार्टी के नए मुख्यालय के उद्घाटन के मौके पर कहा, "मैंने पेपर में पढ़ा कि मोहन भागवत ने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता तब मिली जब राम मंदिर बना. पीएम मोदी और उन्होंने मिलकर इसका (राम मंदिर) उद्घाटन किया. पीएम मोदी समझते हैं कि उन्हें 2014 में आज़ादी मिली क्योंकि वो प्रधानमंत्री बने थे. आरएसएस के लोग राम मंदिर बनने के दिन को आज़ादी का दिन मानते हैं. ये शर्म की बात है."
खड़गे ने कहा, "आजादी मिलने के बाद भी वो इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो लड़े नहीं और जेल नहीं गए. इस कारण इन्हें याद नहीं रहता. मैं मोहन भागवत के बयान की निंदा करता हूँ और वो वह इसी तरह का बयान देते रहे तो देश में उनका घूमना-फिरना मुश्किल हो जाएगा."
'वो भारत को अपमानित करना चाहते हैं'
भागवत के बयान पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने भी तंज किया. जेपी नड्डा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''कांग्रेस का इतिहास उन सभी ताकतों को उत्साहित करने का रहा है जो कमजोर भारत चाहते हैं. सत्ता के लिए उनके लालच का मतलब देश की अखंडता से समझौता और लोगों के विश्वास को धोखा देना था."
उन्होंने कहा, "लेकिन भारत के लोग समझदार हैं. उन्होंने फैसला कर लिया है कि वह राहुल गांधी और उनकी सड़ी हुई विचारधारा को हमेशा ठुकराएंगे. अब कांग्रेस की घिनौनी सच्चाई किसी से छिपी नहीं है, अब उनके अपने नेता ने ही इसका पर्दाफाश कर दिया है."
नड्डा ने कहा, "मैं राहुल गांधी की इस बात के लिए 'प्रशंसा' करता हूं कि उन्होंने वह बात साफ-साफ कही जो देश जानता है. यह कोई रहस्य नहीं है कि गांधी और उनके तंत्र का शहरी नक्सलियों के साथ गहरा संबंध है, जो भारत को अपमानित और बदनाम करना चाहते हैं."
जेपी नड्डा ने कहा, "उन्होंने जो कुछ भी किया या कहा है वह भारत को तोड़ने और हमारे समाज को विभाजित करने की दिशा में है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित