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राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने एक-दूसरे पर सीधे हमले क्यों शुरू कर दिए हैं?
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली के सीलमपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के लिए पहली रैली के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रणनीति को बीजेपी जैसा बताया.
क्षेत्रीय स्तर पर कांग्रेस नेता अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं लेकिन ये पहला मौका था जब राहुल गांधी ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल पर वार किए. पिछले कई दिनों से दोनों ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बीजेपी से मिले होने का आरोप लगा रहे हैं.
इसपर अरविंद केजरीवाल ने भी पलटवार किया और कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें 'गाली दी'. केजरीवाल ने ये भी कहा है कि उन्होंने राहुल गांधी पर एक लाइन बोली लेकिन जवाब बीजेपी वालों की ओर से आ रहा है.
करीब सात महीने पहले ही दोनों पार्टियां लोकसभा चुनाव एक ही गठबंधन में रहकर लड़ी थीं. हालांकि, उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव दोनों अलग-अलग लड़े, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ऐसे ज़ुबानी हमले पहले सुनाई नहीं पड़े थे.
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केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा है, "क्या बात है..मैंने राहुल गांधी जी पर एक ही लाइन बोली और जवाब बीजेपी वालों से आ रहा है. बीजेपी को देखिए कितनी तकलीफ़ हो रही है.
"शायद दिल्ली का ये चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के बीच सालों से पर्दे के पीछे चल रही जुगलबंदी पर से पर्दा हटा देगा.. "
क्या दिल्ली चुनाव के बाद की है ये लड़ाई?
सीलमपुर में राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर कई आरोप लगाए.
राहुल गांधी ने कहा, "केजरीवाल जी आए और कहा कि दिल्ली साफ कर दूंगा, भ्रष्टाचार मिटा दूंगा, पेरिस बना दूंगा. अब हालात ऐसे हैं कि भयानक प्रदूषण है. लोग बीमार रहते हैं. लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. जैसे मोदी जी झूठे वादे और प्रचार करते हैं, वैसे ही झूठे वादे केजरीवाल करते हैं. इन दोनों में कोई फर्क नहीं है."
उन्होंने कहा, "जब मैं जातिगत जनगणना की बात करता हूं, तो नरेंद्र मोदी जी और केजरीवाल जी के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों चाहते हैं, देश में पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और माइनॉरिटीज को भागीदारी न मिले."
राहुल गांधी के इस बयान के कुछ देर बाद ही अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, "आज राहुल गांधी जी दिल्ली आए. उन्होंने मुझे बहुत गालियाँ दीं. पर मैं उनके बयानों पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगा. उनकी लड़ाई कांग्रेस बचाने की है, मेरी लड़ाई देश बचाने की है."
दोनों नेताओं के बीच इस वार-प्रतिवार में बीजेपी भी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूकी. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, "देश की चिंता बाद में करना, अभी नई दिल्ली की सीट बचा लो."
राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का एक-दूसरे पर सीधा हमला इसलिए अहम है क्योंकि दोनों ही दल इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं, जो केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ कई प्रमुख विपक्षी दलों का एक गठबंधन है.
कांग्रेस पार्टी की राजनीति को क़रीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "यह दिल्ली की लड़ाई दिखती है, लेकिन यह असल में साल 2029 में विपक्ष का नेता कौन होगा, उसकी लड़ाई है."
"कई सर्वे में पता चला है कि राहुल गांधी के बाद देश के स्तर पर केजरीवाल का ग्राफ़ सबसे ऊपर है. और अगर दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस लगातार तीसरी बार अपना खाता नहीं खोल पाती है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा."
कैसे रहे हैं आप और कांग्रेस के रिश्ते
सोमवार को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा, "आज से 10 साल पहले केंद्र और दिल्ली की सत्ता में आने के लिए दो लोगों ने हमें बहुत से सपने दिखाए. एक ने हमें कहा कि महंगाई कम होगी, लेकिन सिर्फ संविधान को कमजोर करने का काम किया."
"इसी तरह दिल्ली में भी एक सपनों का सौदागर आया उसने कहा- भ्रष्टाचार खत्म कर दूंगा, लोकपाल बिल लेकर आऊंगा..लेकिन सबने देखा है, इनके 25 विधायक, मंत्री और ख़ुद पूर्व मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के मामले में जेल गए."
उनके इस बयान को कांग्रेस पार्टी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर किया है, जो स्पष्ट तौर पर दोनों दलों के बिगड़ते संबंधों की तरफ इशारा करता है.
आम आदमी पार्टी में रह चुके वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष कहते हैं, "कांग्रेस और आप दिल्ली में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए दोनों एक-दूसरे पर हमला करेगी ही. इनका गठबंधन राष्ट्रीय राजनीति के लिए है. गोपाल राय ने तो घोषणा की थी कि दिल्ली में गठबंधन नहीं होगा."
आशुतोष का मानना है, "अब गठबंधन का स्वरूप बदल गया है. अब न तो एनडीए का कोई संयोजक है, न विपक्ष के गठबंधन का. एनडीए में सरकार चलाने का कोई साझा दस्तावेज़ नहीं है. दोनों ही गठबंधन की कोई बैठक नहीं होती है. अब गठबंधन परिस्थियों पर निर्भर करता है. साल 2029 के लोकसभा चुनाव आएंगे तब फिर इसपर बात होगी."
कांग्रेस के ख़िलाफ़ जन्म लेने वाली आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच केंद्र में साल 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद कई मुद्दों पर सहमति दिखी है.
इसका मूल मक़सद मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करना था. हालांकि किसी के विरोध के मुद्दे पर बनी इस सहमति में भी कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी आप और कांग्रेस के बीच दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर साझेदारी की कोशिश की गई थी, लेकिन यह साझेदारी नहीं हो पाई.
जून 2023 में भी पटना में हुए विपक्षी दलों के गठबंधन की पहली बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच दिल्ली के मुद्दे पर बड़ा तनाव देखने को मिला था. आप नेता दिल्ली से जुड़े केंद्र के अध्यादेश के ख़िलाफ़ कांग्रेस के समर्थन की मांग कर रहे थे और केजरीवाल समेत आप के अन्य नेता बैठक पूरी होने से पहले ही निकल गए थे.
आम आदमी पार्टी से कांग्रेस को कितना नुक़सान?
हालांकि दोनों दल पहली बार किसी बड़े चुनाव में मिलकर लड़े थे, तो वह साल 2024 का लोकसभा चुनाव था. इस चुनाव में दिल्ली और हरियाणा में दोनों दलों के बीच सीटों की साझेदारी भी हुई थी.
पिछले साल लोकसभा चुनावों के पहले दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ़्तार किया गया था, जिसका कांग्रेस के कई नेताओं ने विरोध किया था.
यहां तक कि काग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी इंडिया ब्लॉक की एक चुनावी सभा में अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल से साथ बैठी थीं.
आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले साल 2013 में कांग्रेस से दिल्ली की सत्ता छीन ली. जबकि साल 1993 के बाद बीजेपी कभी दिल्ली में कांग्रेस को हरा नहीं पाई थी. इसका सीधा सा अर्थ है कि दिल्ली में कांग्रेस को बीजेपी से ज़्यादा नुक़सान आम आदमी पार्टी ने पहुंचाया है.
कभी दिल्ली की एक मज़बूत राजनीतिक पार्टी रही कांग्रेस साल 2015 और साल 2020 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई.
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी कहते हैं, "दिल्ली में कांग्रेस और आप एक साथ रहें तो कांग्रेस को उसके अधीन रहना होगा और उसने यूपी या बिहार में किसी पार्टी के अधीन रहने पर इसका नुक़सान देखा है. कांग्रेस में अजय माकन जैसे नेता केजरीवाल के पुराने विरोधी रहे हैं और हो सकता है कि उन्होंने राहुल गांधी को केजरीवाल पर ऐसे हमले के लिए राजी कर लिया हो, क्योंकि दिल्ली में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी केजरीवाल को पसंद नहीं करते हैं."
राहुल और केजरीवाल क्यों हैं एक-दूसरे पर हमलावर
आम आदमी पार्टी ने साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हराकर अपनी सरकार बनाई थी.
आप ने न केवल दिल्ली और पंजाब में बल्कि गुजरात में भी कांग्रेस को बड़ा नुक़सान पहुंचाया है. साल 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को राज्य में क़रीब 43 फ़ीसदी वोट और 77 सीटें मिली थीं.
जबकि साल 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को महज़ 28 फ़ीसदी वोट और 17 सीटें ही मिलीं थीं. उन चुनावों में आप को क़रीब 13 फ़ीसदी वोट के साथ 5 सीटें मिली थीं.
आम आदमी पार्टी ने गुजरात में बीजेपी विरोधी वोटों में जो सेंध लगाई उसका सीधा लाभ बीजेपी को मिला.
प्रमोद जोशी का कहना है कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल के बीच ज़ुबानी हमले बीजेपी विरोधी वोटों के लिए हैं, क्योंकि ज़ाहिर है बीजेपी के वोटर इनके पास नहीं आएंगे.
प्रमोद जोशी कहते हैं, "राहुल गांधी ने सीलमपुर में पिछड़े, दलित और मुसलमानों की बात भी की है. राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों ने कांग्रेस के प्रति अपना झुकाव दिखाया है और अगर यही दिल्ली में हो जाएगा तो नतीजों में बहुत बड़ा फर्क आ जाएगा."
"मैं यह नहीं कहता कि इससे कांग्रेस दिल्ली में अपनी सरकार बना लेगी, लेकिन आम आदमी पार्टी के वोट कटे तो इसका नतीजों पर बड़ा असर होगा."
रशीद किदवई केजरीवाल और राहुल गांधी के बीच के इस संबंध को अलग नज़रिए से देखते हैं.
उनका कहना है कि केजरीवाल महत्वाकांक्षी नेता हैं और कई सर्वे में यह दिखा है कि केंद्र के स्तर पर वो राहुल गांधी के बाद दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता हैं.
"ममता बनर्जी, अखिलेश यादव या स्टालिन जैसे नेता अपने क्षेत्र तक सीमित हैं और साल 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के लिए केजरीवाल भी ख़तरा हैं, हो सकता है कि वो इन नेताओं के साथ मिलकर एक नया गठबंधन भी बना लें."
"केजरीवाल कांग्रेस के ख़िलाफ़ अपनी राजनीति में दिल्ली ही नहीं, पंजाब में भी कांग्रेस से सत्ता छीन चुके हैं. गोवा और गुजरात में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और इसका नुक़सान कांग्रेस को हुआ है."
इस लिहाज़ से केजरीवाल के लिए दिल्ली में अपनी सत्ता बचाकर रखना ज़रूरी है, जो उनकी राजनीति का केंद्र है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित