पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के लिए नवाज़ नहीं शहबाज़ शरीफ़ होंगे गठबंधन के उम्मीदवार- पीएमएल(एन) प्रवक्ता

शहबाज़ शरीफ़

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पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने अपने छोटे भाई और पूर्व प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ को देश के नए प्रधानमंत्री और अपनी बेटी मरियम नवाज़ शरीफ़ को पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री पद के लिए नामांकित किया है.

पीएमएल-एन की तरफ से ये जानकारी सोशल मीडिया पर पार्टी की सूचना प्रभारी मरियम औरंगज़ेब ने दी है.

शहबाज़ शरीफ़ 2022 से 23 के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे.

पाकिस्तान में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने मंगलवार को कहा कि वह नवाज़ शरीफ़ की पार्टी को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन देगी.

मरियम औरंगज़ेब ने मंगलवार देर रात ट्वीट कर कहा, "पीएमएल-एन प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने पार्टी अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ को प्रधानमंत्री के पद के लिए नामित किया है. उन्होंने मरियम नवाज़ को पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री पद के लिए नामांकित किया है."

उन्होंने सोशल मीडिया पर देश के आम लोगों और अन्य राजनीतिक पार्टियों के समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके इन फ़ैसलों के बाद अब देश को महंगाई और आर्थिक मुश्किलों से राहत मिलेगी.

पाकिस्तान की कुल 264 सीटों में पीएमएल-एन को 80 सीटें और पीपीपी को 54 सीटों पर जीत मिली है. इन दोनों पार्टियों की सीटें मिला दें तो साधारण बहुमत के लिए पर्याप्त हैं. वहीं इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई समर्थित 92 उम्मीदवारों को जीत मिली है.

वहीं इमरान ख़ान की पार्टी में चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है और कहा है कि कुछ सीटों पर आए नतीजों के ख़िलाफ़ वो क़ानूनी क़दम उठाएगी.

देश की मौजूदा कार्यवाहक सरकार और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.

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छह पार्टियों का गठबंधन

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पाकिस्तान में अगली सरकार बनाने के लिए छह पार्टियों के बीच गठबंधन हुआ है, जिसका नाम पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) है.

सरकार बनाने के लिए नवाज़ शरीफ़ की पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो ज़रदारी की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच पहले ही सहमति बन गई थी.

बिलावल भुट्टो ने मंगलवार को कहा था कि सरकार का गठन सुनिश्चित करने के लिए उनकी पार्टी पीएमएल-एन के प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेगी.

इस घोषणा के लिए हुए संवाददाता सम्मेलन में पीपीपी के को-चेयरमैन आसिफ़ अली ज़रदारी पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन नेता शाहबाज़ शरीफ़, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू (पीएमएल-क्यू) नेता चौधरी शुजात हुसैन, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेन्ट (एमक्यूएम) नेता ख़ालिद मक़बूल सिद्दीक़ी शामिल थे.

इसके अलावा इश्तेख़ाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (आईपीपी) के अलीम ख़ान और बलूचिस्तान अवामी पार्टी के नेता सादिक़ संजरानी भी शामिल थे.

संवाददाता सम्मेलन के दौरान आसिफ़ अली ज़रदारी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ को भी सरकार में शामिल होने के न्योता दिया.

उन्होंने कहा, "हमने एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा है लेकिन अब हम सब मिलकर देश को मुश्किलों से बाहर निकालना है. देश की आर्थिक मुश्किलों से बाहर निकालने के लिए सभी को एकजुट होना होगा."

वहीं एमक्यूएम नेता ख़ालिद मक़बूल सिद्दीक़ी ने कहा, "देश संकट के दौर से गुजर रहा है. हम लोगों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश के बड़ा कुछ नहीं है. हम अपने हितों को किनारे रखकर देश के विकास के लिए काम करेंगे."

पाकिस्तान

कैबिनेट का हिस्सा नहीं होगी पीपीपी

संयुक्त संवाददाता सम्मेलन से पहले बिलावल भुट्टो ने कहा था कि उनकी पार्टी 'प्रधानमंत्री के चुनाव' जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वोट के मामले में पीडीएम का समर्थन करेगी लेकिन उनकी पार्टी कैबिनेट का हिस्सा नहीं होगी.

पार्टी की एक बैठक के बाद उन्होंने गठबंधन को समर्थन देने की बात की और कहा, "पीपीपी ने फ़ैसला किया है कि हम सरकार का हिस्सा बनने की स्थिति में नहीं हैं और न ही हम किसी मंत्रालय में महत्वपूर्ण पद चाहते हैं. लेकिन हम देश में और राजनीतिक अफरातफरी नहीं चाहते, हम देश में राजनीतिक संकट नहीं चाहते."

बिलावल भुट्टो

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शहबाज़ शरीफ़ चाहते थे कि नवाज़ बनें पीएम

शहबाज़ शरीफ़ ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वो नवाज़ शरीफ़ को एक फिर प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए न्योता देना चाहते हैं. हालांकि नवाज़ शरीफ़ ने इस पद के लिए शहबाज़ शरीफ़ का नाम आगे कर दिया.

बाद में जियो न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में मरियम नवाज़ ने कहा कि पार्टी प्रमुख नवाज़ शरीफ़ का मानना है कि वो पार्टी के मामलों में राय देकर शहबाज़ शरीफ़ और मरियम शरीफ़ की बेहतर मदद कर सकते हैं.

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क्या बोले शहबाज़ शरीफ़?

शहबाज़ शरीफ़ ने पीपीपी और दूसरी पार्टियों के समर्थन के लिए उनका शुक्रिया किया और कहा वक्त और आर्थिक संकट को देखते हुए वो इस फ़ैसले की सराहना करते हैं.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि, "हमारे सामने बड़ी आर्थिक चुनौती है, हमें पता है कि हमारे सामने क़र्ज़ संकट है, जिसे जल्द हल करना होगा. हमारे पास स्थिति को लेकर कुछ हद तक समझ है. चुनाव में हम विरोधी थे, लेकिन अब हमने देश हित में साथ आने का और बातचीत करने का फै़सला किया है."

उन्होंने कहा, "हमें देश की अर्थव्यवस्था के सुधार को प्राथमिकता देते हुए अपना ईगो किनारे करना होगा और क्रांतिकारी क़दम उठाने होंगे. मैं अर्थव्यवस्था के चार्टर पर काम करने के लिए सभी को आमंत्रित करना चाहता हूं. एक दूसरे को माफ़ कर, पिछली बातें भूलकर हमें आगे बढ़ना चाहिए."

24 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कई मुश्किलों से जूझ रही है.

अर्थव्यवस्था में विकास की गति धीमी है और लोग रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रहे हैं.

चर्चा के लंबे दौर के बाद बीते साल पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से तीन अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिला था, जिससे अर्थव्यवस्था पर गहरा रहे कर्ज़ संकट से बचने में उसे मदद मिली.

लेकिन इस मदद की मियाद इस साल मार्च तक ख़त्म हो जाएगी, जिसके बाद अगली सरकार के लिए इसे आगे बढ़ाने को लेकर चुनौती होगी.

विश्लेषकों का मानना था कि चुनावों के बाद इस दिशा में कोई समाधान तलाशने में मदद मिलेगी लेकिन चुनावों में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला.

बड़ी संख्या में इमरान ख़ान के समर्थन से उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों की मिली जीत और सेना के साथ पार्टी के मतभेदों ने स्थिर सरकार बनाने की उम्मीद पर पानी फेर दिया.

सरकार बनाने के लिए बने पीडीएम गठबंधन के पास नई संसद में दो तिहाई सीटें होंगी. शहबाज़ शरीफ़ का कहना है कि इससे सरकार को फ़ैसले लेने में और भरोसा मिलेगा.

नवाज़ शरीफ़

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