राजकोट गेम ज़ोन हादसे में 27 मौतों पर ग़ुस्सा और लाचारी, परिजनों और चश्मदीदों ने क्या-क्या बताया?: ग्राउंड रिपोर्ट

राजकोट हादसे के बाद अस्पताल के बाहर पीड़ितों के रिश्तेदार

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, राजकोट हादसे के बाद अस्पताल के बाहर पीड़ितों के रिश्तेदार
    • Author, रॉक्सी गागेडकर छारा और तेजस वैद्य
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती संवाददाता,राजकोट से

मलबा, पुलिस की गाड़ियां, फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियां, लगातार बजते एंबुलेंस के सायरन, हवा में जले हुए शवों की गंध और अपनों की तलाश कर रहे लोगों की चीखें.

राजकोट के टीआरपी गेम ज़ोन का यही नज़ारा रविवार को पूरे दिन दिखा. शनिवार शाम राजकोट के नाना मावा रोड पर टीआरपी गेम ज़ोन में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत हुई है.

घटना में मारे गए लोग अपने बच्चों के साथ इस गेम ज़ोन में पहुंचे ताकि स्कूल की छुट्टियों का आनंद लिया जा सके,अब उनके परिवार वाले राजकोट सिविल अस्पताल परिसर में बेचैनी में दिखते हैं.

गेम ज़ोन राजकोट के पॉश इलाके कालावाड में बनाया गया था. इसके एक तरफ आलीशान फ्लैट, बंगले, गार्डन और मुख्य सड़क है तो दूसरी तरफ राजकोट का मशहूर सयाजी होटल है.

यह गेम ज़ोन पिछले कुछ सालों से इसी इलाक़े में चल रहा था. गेम ज़ोन में आने वाले पर्यटक अपने वाहन सामने खुले भूखंड में पार्क करते हैं और मुख्य द्वार से प्रवेश करते हैं.

गेम ज़ोन में प्रत्येक खेल को खेलने के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है.

गेम ज़ोन में बॉलिंग एली, गो कार्टिंग जैसे खेल खेलना बच्चों के लिए एक स्वाभाविक आकर्षण था.

अंदर जाने पर ईंट-सीमेंट की नींव पर लोहे की छड़ों और चादरों से बनी दो मंजिला इमारत थी, जिसमें तरह-तरह के खेल खेले जाते थे. इसके पीछे फूड ज़ोन बनाया गया.

इस गेम ज़ोन में प्रवेश के लिए अधिक शुल्क लिया जाता था, लेकिन छुट्टियों के दौरान एक विशेष योजना के तहत शुल्क दर घटाकर 99 रुपये कर दिया जाता है.

इसके चलते भी हादसे के दिन गेम ज़ोन में ज़्यादा भीड़ थी.

ध्रुव हादसे से 30 मिनट पहले गेम ज़ोन छोड़ चुके थे. उन्होंने बीबीसी को बताया कि जब वह गेम ज़ोन में थे, तो उन्होंने स्टील ढांचे के एक तरफ़ वेल्डिंग होते देखा. जिसकी चिंगारी को आसानी से नीचे गिरते हुए देखा जा सकता था.

वो कहते हैं, "मेरे जाने के आधे घंटे बाद मैंने काला धुआं देखा. जिससे मुझे यकीन हो गया कि आग लग गई है."

सीसीटीवी फुटेज से क्या पता चला?

राजकोट अग्निकांड
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

राजकोट के टीआरपी गेम जोन में आग लगने के कारण हुए हादसे के चार सीसीटीवी फुटेज बीबीसी गुजराती ने देखी है, जिनसे पता चलता है कि यह आग कैसे लगी?

सबसे पहली फुटेज शाम 5:33:30 बजे की है. इसमें दिखाई देता है कि गेम जोन के अंदर वेल्डिंग का काम चल रहा था. जहां यह वेल्डिंग की जा रही थी, ठीक उसके नीचे फोम शीट का एक बड़ा पैड रखा गया था. सबसे पहले वेल्डिंग से चिंगारी निकलकर इसी फोम शीट को अपनी चपेट में लेती है.

5:34:06 बजे इस फोन की चादर से हल्का धुआं निकलने लगता है. इसके तुरंत बाद चार से पांच लोग भागते हुए नजर आते हैं. ये लोग आग बुझाने की कोशिश करते हुए भी नजर आ रहे हैं.

5:34:55 तक वहां रखी हुई फोम की शीट जलने लगती हैं. जल्द ही वहां कई लोग जमा हो जाते हैं. कुछ लोग बची हुई फोम शीट को वहां से हटाने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिलती. देखते ही देखते आग बहुत तेजी से फैलने लगती है.

एक अन्य फुटेज में एक व्यक्ति फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाते हुए दिखाई देता है, लेकिन इससे भी कोई फायदा नहीं मिलता.

कुछ ही मिनटों में लोग इधर-उधर भागते हुए दिखाई देते हैं. एक बार फिर से फायर एक्सटिंग्विशर लाया जाता है, लेकिन आग बुझाने में लोग सफल नहीं हो पाते और एक मिनट के भीतर ही आग तेजी से फैलने लगती है.

'जले हुए मलबे और लाशों की गंध'

यही वो जगह है, जहां गेम ज़ोन था.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, यही वो जगह है, जहां गेम ज़ोन था.

इस त्रासदी में मरने वालों में युवा और बच्चे भी शामिल हैं. मोरबी सस्पेंशन पुल का हादसा और वडोदरा हरणी झील हादसे की तरह, सरकार ने भी घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है.

यह घटना के कारणों और गेम ज़ोन प्रमोटरों की कथित लापरवाही की जांच करेगी.

रविवार सुबह जब बीबीसी गुजराती की टीम मौके पर पहुंची तो शवों को निकालकर एंबुलेंस में राजकोट सिविल अस्पताल ले जाया जा रहा था.

आग में जलने की वजह से शवों की पहचान मुश्किल थी.

पानी के फव्वारे से बुझी आग और उसमें जले हुए मानव शरीरों की गंध एक ऐसा दृश्य बना रहे थे जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया.

फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियां, पुलिस फ़ोर्स और मीडिया की तैनाती के बीच घटनास्थल पर लोगों की भीड़ देखी गई.

रविवार सुबह देर रात गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल घटनास्थल पर पहुंचे.

रात में जब बचाव दल को लगा कि अंदर कोई और शव नहीं है तो उन्होंने छह बुलडोजरों की मदद से गेम ज़ोन से मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू की.

लेकिन इसके बाद जल्द ही फ़ायर ब्रिगेड कर्मियों ने बुलडोजर रोक दिया और मलबे के नीचे फंसे मानव शवों की तलाश करने लगे.

हालांकि मलबे में स्टील पाइप और शीट के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और मलबा हटाने के बाद केवल राख ही मिली.

राजकोट में सिविल अस्पताल के बाहर का माहौल

सिद्धराजभाई के परिवार के चार लोग अब तक नहीं मिले हैं
इमेज कैप्शन, सिद्धराजभाई के परिवार के चार लोग अब तक नहीं मिले हैं

राजकोट के सिविल अस्पताल में शनिवार शाम से ही लोगों की भीड़ देखी गई.

जो लोग गेम ज़ोन में गए और लापता हो गए, उनके परिजनों ने अस्पताल परिसर में इंतज़ार करते रात बिताई.

रविवार की सुबह भी लोग यहां अपने परिजनों के शवों का इंतजार कर रहे थे. राजकोट के सिविल अस्पताल के गेट पर निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.

अस्पताल ने शव की पहचान के लिए रिश्तेदारों से डीएनए परीक्षण के लिए नमूने प्राप्त किए हैं, जबकि शवों को उनके रिश्तेदारों को सौंपने का इंतज़ार हो रहा है. पोस्टमार्टम के लिए पुलिस का एक दस्ता तैनात किया गया है.

समय के साथ अस्पताल के बाहर जुटी परिजनों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती गई.

यहां अस्पताल में हम ऐसे लोगों से भी मिले जो अपनों की तलाश के लिए यहां शनिवार से ही भूखे प्यासे रुके हुए थे.

यहां के लोगों का एक ही मक़सद था, अपने लापता रिश्तेदारों की ख़बर पाना.

कुछ लोगों ने बताया, "हमारा डीएनए सैंपल ले लिया गया है और कहा गया है कि 24 घंटे के अंदर आपको कॉल करके जानकारी दे दी जाएगी."

कुछ लोगों ने यह भी कहा, "गेम ज़ोन में गए मेरे रिश्तेदार सिविल अस्पताल में हैं या किसी अन्य अस्पताल में, इस बारे में हमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है. हमारे रिश्तेदार अस्पताल में हैं या नहीं? और यदि हां, तो यह किस स्थिति में हैं? यह सवाल हमें लगातार परेशान कर रहा है, लेकिन हमें अस्पताल या किसी अन्य अथॉरिटी से इसका जवाब नहीं मिल रहा है."

चार शवों की पहचान- प्रशासन

राजकोट गेम ज़ोन हादसे में अभी तक चार शवों की पहचान हो पाई है.

राजकोट सिटी की एसपी राधिका भराई ने यह जानकारी दी.

राधिका भराई ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''डीएनए सैंपल के जरिए चार शवों की पहचान हुई है. इन शवों को परिजनों को सौंप दिया गया है.''

''हम परिजनों से संपर्क में हैं. जैसे जैसे शवों की पहचान होती जाएगी, हम परिजनों को शव सौंप देंगे.''

राधिका भराई ने कहा, ''हमारे पास सभी परिवारवालों के कान्टैक्ट नंबर्स हैं. एफ़एसएल से जैसे ही हमारे पास रिपोर्ट आती जाएंगी, हम उनसे संपर्क करेंगे.''

मंज़ूरी कैसे दी गई?

ये दक्ष हैं, जो घटनास्थल पर मौजूद थे. बताया जा रहा है कि जब आग लगी तो दक्ष ने कई लोगों को बचाया.
इमेज कैप्शन, ये दक्ष हैं, जो घटनास्थल पर मौजूद थे. बताया जा रहा है कि जब आग लगी तो दक्ष ने कई लोगों को बचाया.

सिविल अस्पताल में कुछ बुज़ुर्ग लगातार रोते नजर आए. उनके साथ आए रिश्तेदार भीगी आंखों से उन्हें सांत्वना दे रहे थे.

उधर, घटना की गंभीरता को देखते हुए गुजरात हाई कोर्ट की विशेष पीठ ने स्वत:संज्ञान लिया है. उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और राजकोट नगर निगम से रिपोर्ट मांगी कि ऐसे गेम ज़ोन को कैसे मंजूरी दी गई?

साथ ही, राजकोट तालुका पुलिस ने गेम ज़ोन के प्रबंधकों सहित छह लोगों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 308, 337, 338 और 114 के तहत मामला दर्ज किया और जांच की जा रही है.

अभियुक्तों में गेम ज़ोन के मैनेजर युवराज सोलंकी और मैनेजर नितिन जैन को गिरफ़्तार किया गया है.

दुर्घटना स्थल हो या राजकोट सिविल अस्पताल, दोनों ही जगहों की हवा में अपने परिजनों के शव पाने के लिए बेचैन खड़े लोगों का दुख घुला हुआ है.

यह गुस्सा मानवीय लापरवाही के कारण हुई त्रासदी में अपनों को खोने को लेकर है और यह भी चिंता है कि क्या इस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा मिल पाएगी.

हालांकि अब लोगों की नज़र इस बात पर होगी कि पूरे मामले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी पीड़ित परिवारों को कितनी जल्दी न्याय दिला पाएगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)