मोरबी हादसाः समय से पहले ही क्यों खोल दिया गया पुल?

टूटा हुआ पुल

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    • Author, पारस झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

मोरबी के ऐतिहासिक सस्पेंशन ब्रिज जिसके टूटने से 135 लोगों की जान चली गई, उसकी मरम्मत और रखरखाव का काम मोरबी के औद्योगिक घराने ओरेवा ग्रुप को सौंपा गया था. यह समूह अजंता ब्रांड की घड़ियों का निर्माण करता है. इसके अलावा बल्ब, लाइटें और घरेलू इस्तेमाल के अन्य उपकरण भी बनाता है.

इस समूह और मोरबी नगरपालिका के बीच 300 रुपये के स्टांप पेपर पर अनुबंध हुआ है.

इस चार पेज के अनुबंध समझौते में टिकट दरों के लिए जितना विवरण दिया है, उतनी स्पष्टता पुल के रख-रखाव की शर्तों के लिए नहीं मिलती है.

बीबीसी गुजराती के पास इस कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेन्ट की एक कॉपी है.

समझौते के मुताबिक़, दोनों पक्षों में, "पुल के प्रबंधन जैसे कि ओ एंड एम (ऑपरेशन और मेंटेनेंस), सिक्योरिटी, सफ़ाई, रख-रखाव, भुगतान संग्रह, स्टाफ़िंग आदि का अनुबंध हुआ है."

एग्रीमेन्ट में कलक्टर, नगर पालिका और ओरेवा समूह द्वारा पुल पर जाने की दर और 2027-28 तक उस दरों मे वार्षिक कितनी बढ़ोतरी की जाएगी, उसका विवरण भी दिया गया है. इसके अनुसार, वर्तमान टिकट दर 15 रुपए है जो वर्ष 2027-28 तक 25 रुपये तक बढ़ाया जाना है.

इस समझौते में यह भी लिखा गया है कि वर्ष 2027-28 के बाद प्रवेश शुल्क में हर साल दो रुपये की वृद्धि होगी.

अनुबंध में कुल नौ बिंदु हैं जिसमें टिकट की यह दर भी शामिल है. हालांकि अनुबंध में टिकट के अलावा किसी भी मुद्दे को विस्तार से नहीं बताया गया है और न ही कोई शर्त रखी गई है.

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मोरबी हादसा पुलिस ने क्या बताया

  • मोरबी पुल हादसे के बाद पुलिस ने रविवार को ही एफ़आईआर दर्ज की थी.
  • पुलिस ने सोमवार को 9 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की जानकारी दी.
  • इनमें दो पुल की देखरेख करने वाली कंपनी ओरेवा समूह के प्रबंधक हैं.
  • दो टिकट क्लर्क भी गिरफ़्तार किए गए हैं.
  • इसके मरम्मत का काम करने वाले दो ठेकेदार और तीन सिक्योरिटी गार्ड गिरफ़्तार किए गए हैं.
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बचाव कार्य

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अनुबंध में मरम्मत और रख-रखाव का कोई विवरण नहीं

समझौते के तीसरे खंड में एक वाक्य में कहा गया है कि ''पुल की मरम्मत और उसे चालू करने का सभी खर्च अजंता मैन्युफै़क्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ओरेवा ग्रुप) द्वारा वहन किया जाएगा."

पुल की मरम्मत की क्या ज़रूरतें हैं और इसकी मरम्मत कैसे की जाएगी, इस बारे में कोई विवरण नहीं है.

चौथे बिंदु में लिखा है, "इस समझौते के साथ, पुल को ओरेवा समूह द्वारा ठीक से पुनर्निर्मित कर जनता के लिए खोल दिया जाएगा. इस में समझौते की तारीख़ से लगभग 8 से 12 महीने लगेंगे."

पुल की मरम्मत में 8 से 12 महीने का समय लगना था, लेकिन इस समझौते के सातवें महीने में ही इसे खोल दिया गया.

पांचवें और छठे अंक में, ऑरेवा समूह को अपनी ब्रांडिंग और वाणिज्यिक गतिविधियों को करने की अनुमति है.

सातवां बिंदु यह निर्धारित करता है कि पुल के राजस्व और व्यय का भुगतान समझौते की अवधि के दौरान ओरेवा समूह को किया जाएगा.

पुल

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इसमें लिखा है, "सभी प्रशासनिक कार्य जैसे, कर्मचारियों की नियुक्ति, सफ़ाई, टिकट बुकिंग, रख-रखाव, संग्रह, व्यय खाते आदि को अजंता मैन्युफै़क्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ओरेवा ग्रुप) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा, चाहे वह सरकारी, ग़ैर-सरकारी, नगर पालिका, निगम या कोई भी हो. अन्य एजेंसी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा."

म्युनिसिपल चीफ़ ऑफ़िसर संदीप सिंह झाला ने बीबीसी गुजराती को बताया, "सात मार्च को हुए कॉन्ट्रेक्ट में ओरेवा ग्रुप को 15 साल के लिए इस ब्रिज के मेंटेनेंस और रेनोवेशन के लिए दिया गया था. इसके आधार पर ब्रिज का रेनोवेशन किया गया. नवीनीकरण पूरा होने पर, मंज़ूरी के साथ सभी दस्तावेज़ जमा कर इस पुल को खोलना होगा."

उन्होंने आगे कहा, "इस पुल पर हमेशा 20-25 के जत्थे में लोगों को भेजा जाना था. अब उन्होंने जीर्णोद्धार के लिए किस सामग्री का इस्तेमाल किया? इसकी भारवहन क्षमता क्या थी? यह जांच का विषय है. इसके लिए एक जांच आयोग है."

हालांकि, ओरेवा ग्रुप ने नगरपालिका के साथ समझौते में दर्शाई गई मरम्मत की अवधि से पहले ही पुल को जनता के लिए खोल दिया.

हालांकि पुल की मरम्मत में आठ से 12 महीने का समय लगने वाले था, लेकिन सात मार्च को कॉन्ट्रैक्ट के सातवें महीने में ही मेंटेनेंस पूरा कर के पुल को जनता के लिए खोल दिया गया.

बचाव कार्य

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यह त्रासदी कैसे हुई?

गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना पुल रविवार शाम क़रीब छह बजे ढह गया. पुलिस के मुताबिक मोरबी में पुल गिरने से अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है.

रात भर लोगों को पानी से बाहर निकालने का काम चलता रहा. पुल टूटने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह मंत्री हर्ष सांघवी मोरबी पहुंचे.

मृतकों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गई है. ज्ञात है कि बचाव कार्य में विभिन्न बलों के 200 से अधिक कर्मियों को नियोजित किया गया है.

पुलिस ने प्रेस कॉन्फ़्रेस कर बताया है कि इस मामले में नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और उनके ख़िलाफ़ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

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