मोरबी में मरने वालों की तादाद 141, क्या सस्पेंशन ब्रिज को मिला था फ़िटनेस सर्टिफिकेट?

सस्पेंशन ब्रिज

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गुजरात के मोरबी में माच्छू नदी पर बना एक सस्पेंशन ब्रिज गिरने से कम से कम 141 लोगों की मौत हो गई है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक इस घटना में कई बच्चों की भी मौत हुई है.

इस घटना के बाद मोरबी में प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है.

गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्रियों ने घटना में मारे गए और घायल हुए लोगों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है.

घटना के बाद सस्पेंशन ब्रिज को लेकर भी अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं. पुल को फिटनेस सर्टिफिकेट ना मिलने की बात भी कही जा रही है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिज को इसके इस्तेमाल के लिए ज़रूरी फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना खोला गया था.

कुछ रिपोर्टों से पता चला है कि संस्पेंशन ब्रिज कुछ दिनों पहले फिर से खोल दिया गया था. इस पुल की हाल ही में मरम्मत हुई थी. इसे दिवाली की छुट्टियों के कारण खोला गया और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आए थे.

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए चश्मदीद अमित पटेल और सुकरम ने बताया, 'दीपावली की छुट्टियों और वीकेंड की वजह से यहां कई लोग आए थे. पुल गिरा और फिर लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे."

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मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप झाला

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मरम्मत के बाद खुले पुल पर कैसे हो गई घटना?

मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप झाला ने दुर्घटना के बारे में बात करते हुए कहा, "पुल बेहद जर्जर स्थिति में था इसलिए इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए बंद कर दिया गया था. अजंता ओरेवा ग्रुप पुल की मरम्मत और रखरखाव के काम के लिए तैयार था."

उन्होंने आगे कहा, "कलेक्टर साहब ने भी इस मामले में बैठक की. मरम्मत की दर तय करने पर सहमति बनी और मरम्मत के बाद इसे फिर से खोलने का निर्णय लिया गया. इस संबंध में 7 मार्च को ओरेवा कंपनी के साथ ज़रूरी समझौते भी किए गए थे. इस समझौते के तहत 15 साल तक कंपनी को इसका रखरखाव करना था."

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए संदीप सिंह झाला ने कहा, "पुल मार्च में नवीनीकरण के लिए बंद कर दिया गया था. इसे 26 अक्टूबर को गुजरात नव वर्ष मनाने के लिए खोला गया था. लेकिन स्थानीय नगरपालिका ने नवीनीकरण के लिए कोई फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था."

संदीप झाला ने बताया, "कंपनी ने समझौते के अनुसार नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और इसके बारे में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट जारी की थी."

"लेकिन, फिलहाल ये जानकारी नहीं है कि पुल कैसे गिरा, इसकी क्षमता क्या थी, उन्होंने कोई फिटनेस प्रमाण पत्र लिया था या नहीं, इसमें किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था."

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अब तक क्या-क्या हुआ

  • गुजरात के मोरबी में नदी पर बना पुल गिरा. अब तक कम से कम 141 लोगों की मौत हुई है.
  • प्रधानमंत्री राहत कोष से मरने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हज़ार रुपये की राहत राशि की घोषणा.
  • अब भी हादसे की जगह पर राहत और बचाव कार्य जारी है.
  • क़रीब एक सदी पुराने इस पुल को मरम्मत के बाद हाल के दिनों में लोगों के लिए खोला गया था.
  • यह पुल 1.25 मीटर चौड़ा और 233 मीटर लंबा था. पुल का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया था.
  • पुल गिरने के कारणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है.
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पुल पर बड़ी संख्या में लोगों के जाने को लेकर संदीप झाला ने कहा, "उन्होंने पुल पर जितने लोग भेजने चाहिए थे उससे ज़्यादा को भेजा गया. हम मामले की जांच कर रहे हैं."

पुल की मरम्मत को लेकर उन्होंने बताया, "कंपनी ने इसकी मरम्मत के लिए एक और निजी कंपनी को काम सौंपा था. अब हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्होंने निजी तौर पर आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं. हम प्रतिनिधि से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. हम उनके कार्यालय से रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे."

घायलों के बचाव कार्यों को लेकर संदीप झाला ने कहा, ''नगर निगम की टीम लगातार बचाव अभियान में लगी हुई है. राजकोट नगर निगम की टीम भी हमारी मदद कर रही है. ध्रगंधा, हलवाड़ और मालिया से दमकल और बचाव दल लगातार इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं. निजी एंबुलेंस घायलों को बचाने के लिए तैनात की जा रही है लेकिन सेवा शुरू कर दी गई है."

मोरबी के ज़िला राहत आयुक्त हर्षद पटेल ने बीबीसी गुजराती को बताया, "घटना में मृतकों और घायलों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन राज्य प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है. अभी हमारी प्राथमिकता यह है कि हम घायलों को जल्द से जल्द उचित उपचार के लिए स्थानांतरित कर सकते हैं. राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां ​​इस घटना से संबंधित राहत और बचाव कार्यों में पूरा प्रयास कर रही हैं."

सस्पेंशन ब्रिज

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क्या होता है सस्पेंशन ब्रिज

सस्पेंशन ब्रिज को झूला पुल भी कहा जाता है क्योंकि इस तरह के पुल हवा में झूलते हुए अपने आप हिलते हैं. ये केबल तार से बने होते हैं. ये तार ऊपर से लोहे की जंजीरों से बंधे होते हैं. भारत में इस तह के पुल में लक्ष्मण झूला काफ़ी प्रसिद्ध है.

गुजरात पर्यटन विभाग और मोरबी शहर की सरकारी वेबसाइट के अनुसार 100 साल पहले बना यह सस्पेंशन ब्रिज एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो मोरबी के शासकों की प्रगतिशील और वैज्ञानिक प्रकृति को दर्शाता है.

सस्पेंशन ब्रिज 1.25 मीटर चौड़ा है और दरबारगढ़ पैलेस और लखधीरजी इंजीनियरिंग कॉलेज को जोड़ने वाली माच्छू नदी पर 233 मीटर की लंबाई में फैला हुआ है.

दिवाली के बाद गुजराती नव वर्ष पर इस पुल को खोला गया था.

मोरबी को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए यूरोप में उपलब्ध नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करके इस झूलते पूल को बनाया गया था.

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