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यशस्वी जायसवाल का दूसरा दोहरा शतक, आक्रामकता और टेस्ट क्रिकेट वाला क्लास
- Author, संजय किशोर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
इंग्लैंड के ‘बैज़बॉल’ क्रिकेट का भारतीय जवाब है 'जैसबॉल’.
जी हाँ, भारत के बाएँ हाथ के युवा सलामी बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल ने मानो इंग्लैंड को उन्हीं की घुट्टी पिला कर आईसीयू में भेज दिया है जहां से मेहमान टीम की वापसी संभव नज़र नहीं आ रही है.
राजकोट टेस्ट के चौथे दिन यशस्वी जायसवाल ने दोहरा शतक जड़ दिया. ये लगातार दूसरे टेस्ट मैच में उनका दूसरा दोहरा शतक है. पिछले टेस्ट मैच की पहली पारी में जायसवाल ने 209 रन की पारी खेली थी.
आज के दौर में फटाफट क्रिकेट की आक्रामकता के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट वाला क्लास एक ही खिलाड़ी में कम ही देखने को मिलता है.
टेस्ट और टी-20 क्रिकेट के बीच इतने बेहतरीन तरीक़े से सामंजस्य बिठाने वाला विश्व क्रिकेट में आज यशस्वी जायसवाल जैसा शायद ही कोई दूसरा खिलाड़ी हो.
यशस्वी ने इंग्लैंड के विरुद्ध दूसरी पारी में शुरुआत संभल कर की और पहले 39 गेंद में सिर्फ़ नौ रन बनाए. लेकिन उसके बाद जल्दी ही लय पकड़ ली और पॉवर हिटिंग का ज़बरदस्त प्रदर्शन किया.
स्पिनर्स पर जमकर बरसे
22 लाल के जायसवाल ने इंग्लैंड के अनुभवी गेंदबाज़ जेम्स एंडरसन को निशाना बनाया.
27वें ओवर में एंडरसन की गेंद पर एक छक्का और दो चौके जड़े. स्पिनर टॉम हार्टले की गेंद पर लॉन्ग ऑन पर छक्का जड़ अपनी हाफ़ सेंचुरी पूरी की.
इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के लिए जायसवाल को रोकना मुश्किल साबित हुआ. जो रूट और रेहान अहमद भी यशस्वी जायसवाल की आक्रामकता से बच नहीं पाए.
जायसवाल ने दोनों की गेंद पर छक्के जमाए. भले ही उनकी आक्रामकता में टी-20 की झलक थी लेकिन उनके शॉट्स कॉपी-बुक वाले थे. बिल्कुल सधे हुए और नाप-तौल के साथ.
यशस्वी ने 122 गेंदों पर अपने टेस्ट करियर का तीसरा शतक बनाया और सीरीज़ में लगातार दूसरा. विशाखापत्तनम टेस्ट में उन्होंने 209 रनों की पारी खेली थी.
यशस्वी ने ख़ासकर इंग्लैंड के स्पिनर्स की खूब धुनाई की.
उनके रिवर्स स्वीप और स्वीप शॉट बेहद खूबसूरत थे. उनकी पारी देख पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर लिखा, “यशस्वी जायसवाल के लिए शतक के बाद शतक. स्पिनर्स को वैसा ही ट्रीट कर रहे, जैसा उन्हें किया जाना चाहिए. दे दना दन.”
छक्का लगाकर अर्धशतक, चौके से शतक
यशस्वी जायसवाल ने 39वें ओवर की आख़िरी बॉल पर चौका जमाकर शतक पूरा किया.
उन्होंने 104 रन बनाए. अपनी 133 गेंद की पारी में नौ चौके और पांच छक्के लगाए.
उनका स्ट्राइक रेट रहा 78.19. इसके बाद वे कमर में दर्द की वजह से मैदान से बाहर चले गए.
यशस्वी ने शतक बनाने के बाद हवा में उछलकर डेविड वॉर्नर की तरह जश्न मनाया था. शायद कमर दर्द की यही वजह रही.
तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन जायसवाल क्रीज़ पर उतरे और 231 गेंदों पर ये मुकाम हासिल किया. उनकी पारी में 14 चौके और 10 छक्के शामिल रहे. जायसवाल 214 रन बनाकर नाबाद रहे.
भारतीय टीम ने 430/4 के स्कोर पर पारी घोषित कर दी और इंग्लैंड को जीत के लिए 557 रनों का लक्ष्य दिया.
बहरहाल इस दौरान यशस्वी जयसवाल विराट कोहली के बाद इंग्लैंड के विरुद्ध सीरीज़ में 400 रन बनाने वाले दूसरे क्रिकेटर भी बन गए.
विराट ने 2018 में 593 रन बनाए थे जबकि रोहित शर्मा ने 2021 में 368 रन बनाए थे.
हैदराबाद में दिखाया ‘जैसबॉल’
हैदराबाद टेस्ट के पहले ही दिन जायसवाल ने 70 गेंदों पर 76 रन ठोक डाले थे.
कमेंट्री बॉक्स में इयॉन मॉर्गन, दिनेश कार्तिक और हर्षा भोगले इस बात की चर्चा कर रहे थे कि टेस्ट से टी-20 में स्विच करना मुश्किल है या टी-20 से टेस्ट में.
यशस्वी ने 12 जुलाई 2023 को टेस्ट में डेब्यू किया था.
उसके बाद से अब तक वह 13 पारियों में बल्लेबाज़ी कर चुके हैं.
वह टेस्ट में सबसे तेज़ी से तीन शतक लगाने के मामले में संयुक्त रूप से सातवें स्थान पर हैं.
इस मामले में उन्होंने भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग और संजय मांजरेकर की बराबरी कर ली.
आक्रामक बल्लेबाज़ की है छवि
यशस्वी जायसवाल ने घरेलू सफ़ेद गेंद क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाज़ की छवि बनाई है. साल 2019 में विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में दोहरा शतक लगाकर सुर्ख़ियों में आए.
जायसवाल ने 113, 22, 122, 203 और 60 रनों की पारियाँ खेली.
साल 2020 में दक्षिण अफ़्रीका में खेले गए अंडर-19 विश्व कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ शानदार शतक बनाया और प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट रहे.
आईपीएल में पहला सीज़न अच्छा नहीं रहा मगर धीरे-धीरे लय पकड़ते गए. राजस्थान रॉयल्स के लिए पिछले साल 163.61 की स्ट्राइक रेट से 625 रन बनाए.
जॉस बटलर के साथ उनकी सलामी जोड़ी टूर्नामेंट की सबसे ख़तरनाक मानी जाती है.
सिर्फ़ 13 गेंद पर अर्धशतक बना कर सबसे तेज़ हाफ़ सेंचुरी का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था.
यशस्वी ने साल 2019 में रणजी खेलना शुरू किया. 2021-22 में लगातार तीन शतक लगाकर मुंबई को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.
अब तक प्रथम श्रेणी की 37 पारियों में 73 की औसत से 2482 रन बना डाले हैं जिनमें 11 शतक और पाँच अर्धशतक शामिल हैं.
इसीलिए उन्हें वनडे और टी-20 के पहले टेस्ट कैप दिया गया.
गोल गप्पे बेचे, भूखे सोए
उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले के सुरियावां गांव से ताल्लुक़ रखने वाले यशस्वी जायसवाल के पिता एक छोटी सी हार्डवेयर की दुकान चलाते थे.
क्रिकेट में उनकी दीवानगी उन्हें 11 साल की उम्र में मुंबई खींच लाई. अकेले संघर्ष किया. यहाँ तक कि डेयरी में काम करना पड़ा.
बहुत साल तक यशस्वी मुंबई के आज़ाद मैदान के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब टेंट में भी रहे.
यहां पर वह रात को खाना बनाने का काम करते थे और दिन को क्रिकेट का अभ्यास करते थे. इसके अलावा गोल गप्पे भी बेचे.
इन सब के बीच कड़ी मेहनत जारी रखी. मेहनत का फल मिल रहा है. बाक़ी इतिहास है.
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