किसानों ने दूसरी सर्द रात भी शंभू बॉर्डर पर ही काटी, सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया

हरियाणा और पंजाब के बीच शंभू बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं.
इमेज कैप्शन, हरियाणा और पंजाब के बीच शंभू बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं.
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शंभू बॉर्डर से

आंदोलनकारी किसानों ने पहली रात की तरह दूसरी सर्द रात भी हरियाणा पंजाब के बीच शंभू बॉर्डर पर काटी.

सरकार ने वार्ता का प्रस्ताव भेजा है लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि बिना कोई ठोस पहल के वार्ता के नतीजे नहीं निकलेंगे.

पहले दिन की तरह दूसरे दिन सुरक्षा बलों के साथ टकराव जैसी स्थिति नहीं थी.

हालांकि दूसरे दिन भी शंभू बॉर्डर की बैरिकेडिंग तोड़ने की किसानों की तरफ़ से कोशिश हुई लेकिन वे कामयाब नहीं हुए.

इस बीच हरियाणा की ओर तैनात सुरक्षा बलों की ओर से रुक रुक कर आँसू गैस के गोले दागे जाते रहे और किसानों ने इससे बचने के लिए कई तरीक़े अपनाए.

आँसू गैस के गोले गिराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक ड्रोन को किसानों ने पतंग में फंसा कर गिरा दिया.

इस बीच किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि बुधवार को केंद्र के किसी मंत्री के साथ बैठक नहीं हुई है, केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक गुरुवार को होनी है.

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि अब गुरुवार शाम को केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ अगली वार्ता होगी.

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के लिए क़ानून बनाने और स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशों को लागू करने की मांग को लेकर पंजाब के किसानों के जत्थों ने 13 फ़रवरी को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया था.

दूसरे दिन शंभू बॉर्डर का हाल

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शंभू बॉर्डर पर पंजाब की ओर ट्रैक्टर ट्रॉलियों की कई किलोमीटर लंबी क़तार दिख रही है, जिसमें किसान दिल्ली कूच का इंतज़ार कर रहे हैं.

दूसरे दिन, बुधवार को लोगों और ट्रॉलियों की संख्या बढ़ी दिखाई दी क्योंकि सुबह ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों की क़तार और लंबी दिखी.

सुरक्षा बलों की तरफ़ से दूसरे दिन भी रुक रुक कर आंसू गैस के गोले दागे जा रहे थे और पहले दिन की तरह आंसू गैस के गोले ड्रोन से गिराए गए.

हरियाणा पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं.

हालांकि आंसू गैस से बचने के लिए किसान पहले से अधिक सतर्क दिखाई दिए. उन्होंने पानी का टैंकर रखा हुआ है, जिससे वो रूमाल गीले कर चेहरे पर बांध रहे हैं.

इसके अलावा कई किसानों ने अपने चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी लगा ली है, जिससे त्वचा पर आंसू गैस का असर कम हो.

किसान नमक भी रखे हुए हैं क्योंकि जब गैस का असर होता है तो घबराहट होती है और ब्लड प्रेशर गिरता है. ऐसे में वे नमक का सेवन कर लेते हैं.

ज़्यादातर किसानों के हाथों में गीली बोरियां हैं और जैसे ही आंसू का गोला गिरता है वे उस पर गीली बोरी डाल देते हैं जिससे उसका धुआं वहीं ख़त्म हो जाता है.

वीडियो कैप्शन, किसानों पर ड्रोन से कैसे बरसाए गए आंसू गैस के गोले

हरियाणा की ओर से आने वाले ड्रोन को रोकने के लिए कुछ युवा किसान पतंग उड़ा रहे थे. वो पतंग को ड्रोन के पास ले जा रहे थे और कोशिश कर रहे थे कि कैसे उसे गिरा दें.

शाम पांच बजे के करीब इसी तरह की एक पतंग में फंस कर एक ड्रोन गिर गया. जैसे ही ड्रोन गिरा वहां मौजूद किसानों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी.

लेकिन दूसरे दिन पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के साथ पहले दिन जैसा बड़ा टकराव नहीं दिखा. रात आठ बजे 50-60 किसान बॉर्डर के दायरे में थे जबकि बाकी किसान पीछे कई किलोमीटर लंबे रेला में खड़े ट्रैक्टर ट्रॉलियों में आराम कर रहे थे.

पहले की तरह किसान अपने साथ राशन लेकर पहुंचे हैं और जगह-जगह पर लंगर चल रहा है.

13 फ़रवरी को पुलिस और किसानों के बीच तीखी झड़प हुई थी.

किसान शंभू बॉर्डर के नाके पर दिन में क़रीब दो बजे पहुंचे थे और हरियाणा की तरफ़ पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से उनका टकराव चला क्योंकि सीमा सील है.

इस दौरान सुरक्षा बलों की ओर से आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां दागी गईं. झड़प में कई किसान और सुरक्षा कर्मी घायल हो गए थे.

हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि मंगलवार को हुई झड़पों में पुलिस के 24 जवान घायल हुए हैं.

किसान नेताओं ने क्या कहा?

किसान नेता

इमेज स्रोत, ANI

उन्होंने कहा, “हम सभी युवाओं और किसान नेताओं से आह्वान करते हैं कि गुरुवार की बैठक होने तक सहयोग किया जाए और माहौल को ख़राब नहीं होने दिया जाए.”

प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने कहा, “कल रात हमें वार्ता का संदेश मिला था. हमने तय किया था कि आज (बुधवार) हम शांत रहेंगे और आगे नहीं बढ़ेंगे. सभी यूनियन ने तय किया था कि अगर सरकार वार्ता करना चाहती है तो हम वार्ता करेंगे, आगे नहीं बढ़ेंगे. हमारे ऊपर ड्रोन ने आज भी शेलिंग की, उसका मतलब था कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि हम वार्ता करें.”

नेताओं ने कहा, “हमारे नेता युवाओं को समझाते रहे, किसी को आगे नहीं जाने दिया लेकिन फिर भी केंद्र ने जानबूझकर हम पर बल प्रयोग किया. बुधवार को हमारी तरफ़ से कोई आगे नहीं बढ़ा, सुरक्षाबलों ने शेलिंग करके हमें उकसाया लेकिन हमारे 99 प्रतिशत प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक रहे.”

उन्होंने कहा, “अर्धसैनिक बल हमें रोकने के लिए लगाए गए हैं. आपात हालातों में अर्धसैनिक बल लगाए जाते हैं लेकिन केंद्र सरकार किसानों को दुश्मन समझ कर अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं. हमें एंटीनेशनल बताकर हमारे ट्विटर हैंडल बंद किए गए हैं."

"आज फिर से गिरफ़्तारियां हुई हैं, उत्तर प्रदेश में जिन यूनियनों ने हमारा समर्थन किया है, उसके नेता गिरफ़्तार किए गए हैं. हमारे कार्यकर्ताओं को थाने ले जाया जा रहा है. इन हालात में भी हम वार्ता से पीछे हटना नहीं चाहते, दिल्ली जाना हमारे सम्मान का सवाल नहीं है, हम अब भी वार्ता करना चाहते हैं. हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि जब हम शांतिपूर्ण बैठे हों तब हम पर गोले न छोड़े जाएं.”

हरियाणा दिल्ली के बीच सिंघु बॉर्डर पर सख़्त बैरिकेडिंग की गई है और भारी संख्या में पुलिस फ़ोर्स तैनात है.
इमेज कैप्शन, हरियाणा दिल्ली के बीच सिंघु बॉर्डर पर सख़्त बैरिकेडिंग की गई है और भारी संख्या में पुलिस फ़ोर्स तैनात है.

हरियाणा सरकार ने क्या कहा?

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है, "किसान दिल्ली जाकर सरकार के प्रतिनिधियों से बात करना चाहते हैं लेकिन जब सरकार के मंत्री चंडीगढ़ उनसे बात करने पहुंचे तो किसान नेताओं ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया."

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से बातचीत के प्रस्ताव को लेकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, "हम उन्हें ये कहने का मौक़ा नहीं देना चाहते हैं कि हमने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है. हमने अपने सहयोगियों से अनुमति ली है और अब हम सरकार के साथ वार्ता करेंगे. हमारी प्राथमिकता है कि वार्ता चंडीगढ़ या प्रदर्शन स्थल के क़रीब कहीं भी हो."

उधर हरियाणा से लगती दिल्ली की सीमा सिंघू बॉर्डर पर सख़्त बैरिकेडिंग की गई है और कंक्रीट के स्लैब को सीमेंट से जड़ दिया गया है.

यहां बड़ी संख्या में पुलिस और रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवानों को तैनात किया गया है. इलाक़े में धारा 144 लगा दी गई है.

किसान

प्रदर्शन से बाहर रहने वाली यूनियनों ने क्या कहा?

वहीं, शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे किसान संगठनों ने भी समर्थन में बयान जारी किया है.

पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक बीकेयू उगरहां ने गुरुवार को 12 से चार बजे तक चार घंटे के लिए रेल रोकने का आह्वान किया है.

संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब ने भी बुधवार को आपात बैठक बुलाई है.

संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक रहे और क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि किसानों पर बल प्रयोग की मोर्चा ने निंदा की है और बुधवार को आपात बैठक कर हालात पर की समीक्षा की गई.

उन्होंने कहा कि 16 फ़रवरी को ग्रामीण भारत बंद के दौरान पूरे देश में किसानों पर बल प्रयोग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया जाएगा.

वहीं, किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा है कि हरियाणा सरकार किसानों पर अत्याचार बंद करे.

उन्होंने कहा है कि किसानों की मांगे उचित हैं.

चढ़ूनी ने कहा, "हम सरकार से किसानों से बात करने का आह्वान करते हैं."

चढ़ूनी का किसान संगठन हरियाणा के सबसे बड़े संगठनों में से एक है और फिलहाल शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन में शामिल नहीं है.

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