आंधी-तूफ़ान, बारिश... इस सिस्टम से मिलेगी गांव-शहर के मौसम की सटीक जानकारी

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इमेज कैप्शन, मौसम की नई पूर्वानुमान प्रणाली भारत फोरकास्ट सिस्टम छोटी जगह में भी सटीक पूर्वानुमान लगा सकेगी
    • Author, बीबीसी मराठी सेवा

आपके तालुके या गांव में कल का मौसम कैसा होगा? मौसम विभाग अब इसका ज्यादा सटीक अनुमान लगा सकेगा.

मौसम विभाग स्थानीय स्तर पर भी पहले से ज्यादा सही पूर्वानुमान कर पाएगा. इसके लिए देश में ही अब नई मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की गई है. इसका नाम है भारत फोरकास्ट सिस्टम यानी बीएफ़एस.

ये दुनिया का सबसे ज्यादा रेजॉल्यूशन वाला वेदर फोरकास्टिंग कंप्यूटर मॉडल होगा.

इसे तैयार करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मीटियोरोलॉजी (आईआईटीएम) के सुपर कंप्यूटरों 'अरका' और 'अरुणिका' का इस्तेमाल हुआ है.

पहले मौसम संबंधी पूर्वानुमान लगाने के लिए सभी सूचनाएं एकत्र करने और उन्हें प्रोसेस करने के लिए 'प्रत्यूषा' नाम के सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल होता था.

लेकिन नया सुपर कंप्यूटर ये काम सिर्फ़ चार घंटे में पूरा कर सकता है.

ये भारतीय मौसम पूर्वानुमान प्रणाली भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत विकसित की गई है.

भारत फोरकास्ट सिस्टम की ख़ासियत

जितेंद्र सिंह

इस सिस्टम के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस सिस्टम से ये साबित हुआ है कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की पूर्वानुमान प्रणाली लगातार आगे बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, ''अब ये देखने की बात है कि 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारतीय मौसम विभाग क्या योगदान कर सकता है. हमने भारतीय अर्थव्यवस्था को शिखर पर पहुंचाने के लिए भारतीय मौसम विभाग की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है. हम चाहते हैं कि सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली के जरिये अर्थव्यवस्था के संभावित नुक़सान को कम करें और इस सिस्टम से ज्यादा से ज्यादा लाभ लें. ऐसा सिस्टम अर्थव्यवस्था को फ़ायदा पहुंचाएगा.''

जितेंद्र सिंह ने कहा, ''हमारा लक्ष्य भारतीय मौसम विभाग के काम को ज़मीनी स्तर पर ले जाने का है.''

कितने घंटे तक के मौसम की जानकारी?

इंफोकार्ड

भारत फोरकास्ट को चलाने के लिए देश भर के 40 डॉप्लर मौसम रडार के नेटवर्क से डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा.

इससे मौसम विभाग को मौसम का स्थानीय पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिलेगी.

धीरे-धीरे डॉप्लर रडार बढ़कर 100 हो जाएंगे. इससे मौसम कार्यालय देश भर का अगले दो घंटों का मौसम पूर्वानुमान जारी कर सकेगा.

फिलहाल यूरोपीय, ब्रिटिश और अमेरिकी मौसम कार्यालयों की तरफ से संचालित वैश्विक पूर्वानुमान मॉडल का रेजॉल्यूशन 9 किलोमीटर से 14 किलोमीटर के बीच है.

पिछला पूर्वानुमान सिस्टम सिर्फ़ 12 किलोमीटर के दायरे में मौसम का अंदाजा लगा सकता था.

लेकिन ज्यादा रेजॉल्यूशन वाली नई प्रणाली छह किलोमीटर के इलाके में ज्यादा सटीक पूर्वानुमान लगा सकती है.

अब एक बेहद छोटे इलाके में जलवायु को ज्यादा अच्छी तरह समझा जा सकता है. स्थानीय स्तर पर देखें तो पंचायत या कुछ गांवों में भी मौसम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है.

भारत फोरकास्ट सिस्टम के फ़ायदे

सिस्टम चक्रवात के रास्ते और इसकी तीव्रता की भविष्यवाणी में भी ज्यादा सटीक हो गया है.

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भारत फोरकास्ट सिस्टम मौसम का ज्यादा सटीक पूर्वानुमान कर फसलों को नुक़सान से बचा सकता है.

इससे भारी बारिश और चक्रवात जैसी मौसम की भारी आपदाओं का भी सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. इस सटीक पूर्वानुमान का फ़ायदा आपदा प्रबंधन को मिलेगा.

सटीक पूर्वानुमान की वजह से आपदा प्रबंधन बेहतर होगा. जान-माल के नुक़सान को ज्यादा प्रभावी तरीके से रोका जा सकेगा.

भारत फोरकास्ट सिस्टम ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब मौसम में अनिश्चितता ज्यादा बढ़ गई है और जलवायु परिवर्तन ज्यादा तेज हो गया है.

भारत फोरकास्ट सिस्टम जैसी पूर्वानुमान प्रणाली के कारण मौसम के पूर्वानुमान में 30 फ़ीसदी तक सुधार हो सकता है. जलवायु परिवर्तन के नतीजों से निपटने के लिए ये ज़रूरी है.

भारत फोरकास्ट सिस्टम 2022 से ही पायलट प्रोजेक्ट तौर पर काम कर रहा है.

मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक़ इसके जरिये भारी बारिश की घटना की भविष्यवाणी करने में 30 फ़ीसदी का सुधार हुआ है.

ये सिस्टम चक्रवात के रास्ते और इसकी तीव्रता की भविष्यवाणी में भी ज्यादा सटीक हो गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित