मुल्क जहां गर्मी की वजह से ब्रेड और दूध से महंगी बिक रही है बर्फ़

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    • Author, प्रिया सिप्पी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

ये गर्मियों का मौसम है और भारत ही नहीं दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग इससे परेशान हैं.

पश्चिमी अफ्रीका के देश माली में तो रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही जहां हालात इतने बिगड़ गए हैं कि आइस-क्यूब्स (बर्फ़ के टुकड़े) ब्रेड और दूध से महंगी बिक रही है.

माली की राजधानी बमाको में एक दुकान के बाहर मिली फातूमा यातारा ने बताया, "बहुत गर्मी पड़ रही है. मैं यहां बर्फ़ खरीदने आई हूं."

बिजली की भी दिक्कत है. पावर कट का ये आलम है कि लोगों के घरों में फ्रिज तक काम नहीं कर रहे हैं.

ऐसे में फातूमा को खाने की चीज़ें प्रिज़र्व करने और हीटवेव के दौरान ठंड बनाए रखने के लिए आइस क्यूब्स का सहारा लेना पड़ रहा है.

बमाको में इन दिनों पारा चढ़कर 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.

हालांकि इन हालात में आइस क्यूब्स एक हद तक ही मदद कर पाते हैं और इनकी क़ीमत जिस रफ़्तार से बढ़ रही है, उससे ज़िंदगी और मुश्किल होती दिख रही है.

फातूमा यातारा

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इमेज कैप्शन, फातूमा यातारा को खाने की चीज़ें प्रिज़र्व करने और हीटवेव के दौरान ठंड बनाए रखने के लिए आइस क्यूब्स का सहारा लेना पड़ रहा है

फातूमा बताती हैं, "कुछ जगहों पर एक थैली आइस क्यूब्स की क़ीमत 300 से 500 फ्रैंक्स सीएफए तक पहुंच गई है. ये बहुत महंगा है."

बमाको में आइस क्यूब्स की इस क़ीमत ने उसे ब्रेड से महंगा आइटम बना दिया है जिसकी आम तौर पर क़ीमत 250 फ्रैंक्स सीएफए तक रहती है.

नाना कोनाते त्राओरे के लिए ये गर्मी एक और बड़ी मुसीबत लेकर आई है. पहले वे हफ़्ते में कुछ एक बार ही खाना पकाते थे लेकिन अब उन्हें हर रोज़ ही रसोई बनानी पड़ रही है.

वो कहती हैं, "कभी-कभी तो पूरे दिन ही बिजली गुल रहती है. इस वजह से खाना ख़राब हो जाता है और आपको उसे फेंकना पड़ता है."

माली में बिजली की समस्या की शुरुआत लगभग साल भर पहले हुई थी.

सरकारी पावर कंपनी पर बीते सालों में करोड़ों डॉलर का कर्ज़ चढ़ गया है और वो मांग के मुताबिक़ बिजली की आपूर्ति करने में नाकाम रही है.

माली में एक बड़े तबके के पास जेनरेटर की सुविधा भी नहीं है क्योंकि उसमें डीज़ल या पेट्रोल भरना उनके बूते के बाहर है.

सौमैला मैगा बताते हैं कि रात में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है जो बर्दाश्त के बाहर है
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बिजली नहीं रहने का एक मतलब ये भी है कि रात को पंखे नहीं चल पाएंगे. इससे मजबूर होकर लोगों को घरों के बाहर सोना पड़ रहा है और इसका नतीज़ा उनकी सेहत पर पड़ रहा है.

बमाको के बाहरी इलाके में सौमैला मैगा नाम के एक नौजवान ने बताया, "हम लोग सचमुच बहुत परेशान हैं. रात में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है जो बर्दाश्त के बाहर है. गर्मी बढ़ने से मैं मूर्च्छित होने लगता हूं. खुद को शांत रखने के लिए मुझे अपने आप पर पानी छिड़कना पड़ता है."

मार्च से माली के कुछ हिस्सों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने लगा है. इस गर्मी में 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका ख़तरा ज़्यादा है.

बमाको के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रोफ़ेसर यकूबा टोलोबा ने बीबीसी को बताया, "मेरे यहां हर रोज़ लगभग 15 लोग भर्ती हो रहे हैं. बहुत से मरीज़ों को डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो गया है. लोगों को खांसी और सांस से जुड़ी अन्य तकलीफ़ों का सामना करना पड़ रहा है."

कुछ इलाकों में एहतियात के तौर पर स्कूलों को बंद कर दिया गया है.

मुस्लिम बहुल माली में रमज़ान के महीने के दौरान लोगों को रोज़े न रखने की सलाह दी गई थी.

माली

प्रोफ़ेसर टोलोबा बताते हैं, "ऐसे हालात से निपटने के लिए हमें और योजना बनाने की ज़रूरत है. शायद ऐसी स्थिति बार-बार आए. इस बार तो गर्मी ने चौंका ही दिया था."

ऐसा नहीं है कि गर्मी से केवल माली ही बेहाल है. पड़ोस के सेनेगल, गिनी, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, निगेर और चाड जैसे देशों का भी यही हाल है.

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इंसानी गतिविधियों की वजह से होने वाला जलवायु परिवर्तन इस भीषण गर्मी के लिए जिम्मेदार है.

संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इंसानों ने फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीज़ल, गैस जैसे जीवाश्म ईंधन) जलाकर इस धरती को गर्म नहीं किया होता माली बुर्किना फासो के इलाके का औसत तापमान 1.4 से 1.5 कम होता.

आने वाले हफ़्तों में बमाको का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने वाला है इसलिए लोग ऐसे हालात में खुद को ढाल रहे हैं.

जैसे ही राजधानी में सूर्यास्त शुरू होता है, कोनाते त्राओरे कई बड़े मैट लेकर आंगन की ओर जाती हैं और उन्हें सलीके से बिछा देती हैं.

वे कहती हैं, "गर्मी के कारण हम बाहर ही रहते हैं. गर्मी बढ़ जाती है तो मैं बीमार भी पड़ जाती हूँ. ज़िंदगी इतना आरामदायक भी नहीं है."

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