बहरीन और सिंगापुर जैसे 29 देशों से भी बड़ा ये हिमखंड क्यों चर्चा में है

इमेज स्रोत, Rob Suisted/Reuters
- Author, जोनाथन एमॉस, एरवॉन रिवॉल्ट और केट गेनॉर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड सफ़र पर निकल पड़ा है.
इसके आकार की गंभीरता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये ग्रेटर लंदन के दोगुने से भी बड़ा है.
हालांकि हिमखंड का आकार हर दिन घट रहा है पर ये अब भी 3,800 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.
ये क्षेत्रफल बहरीन और सिंगापुर जैसे 29 देशों से भी बड़ा है.
अंटार्कटिका के सीमावर्ती क्षेत्रों में कुछ हफ़्तों तक धीमी रफ़्तार से चलने के बाद इसकी रफ़्तार अब तेज़ हो गई है.

इसे 'ए23ए' (A23a) के नाम से भी जाना जाता है. साल 1986 में ये अंटार्कटिका के तट से टूट कर अलग हो गया था. लेकिन हाल ही में अपने इलाके से दूरी बढ़ानी शुरू कर दी है.
तीस से अधिक बरसों से ये वेडेल सी में एक स्थिर हिम द्वीप के रूप में अटका हुआ रहा. इस हिम खंड के 350 मीटर लंबे निचले सिरे ने एक ज़माने तक अपनी जगह पर लंगर डाले रखा.
लेकिन गुजरते वक़्त के साथ-साथ ये पिघल भी रहा था और साल 2020 आते-आते हिम खंड के तैरने का रास्ता खुल गया और ये एक बार फिर से गतिशील हो गया.
हवाओं और पानी के बहाव के सामने शुरू में इसकी रफ़्तार धीमी थी. फिर इसने उत्तर की ओर गर्म हवा और पानी की लहरों की तरफ़ कूच करना शुरू किया.
'आइसबर्ग ऐले'

'ए23ए' अब ऐसे रास्ते पर आगे बढ़ रहा है जहां से होकर अंटार्कटिका के बहते हुए बर्फ़ का ज़्यादातर हिस्सा गुजरता है.
वैज्ञानिक इसे 'आइसबर्ग ऐले' या 'हिमखंडों की पगडंडी' भी कहते हैं.
किसी हिमखंड के लिए ये बर्बादी के रास्ते पर आगे बढ़ने की तरह है. ये बिखरने जा रहा है, पिघलने जा रहा है. इसका अस्तित्व ख़त्म होने जा रहा है और वो भी कुछ ही महीनों के भीतर.
फिलहाल ये हिमखंड विषुवत रेखा के उत्तर में 60 डिग्री समांतर दूरी पर तैर रहा है. ये इलाका साउथ ऑर्क्ने आईलैंड के क़रीब और अंटार्कटिका प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी सिरे से 700 किलोमीटर की दूरी पर है.

आस-पास से गुजरने वाले जहाजों और सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें इस हिमखंड के लगातार पिघलते जाने की पुष्टि कर रहे हैं.
हरेक दिन इस हिमखंड से बड़े-बड़े टुकड़े टूटकर समंदर में गिर रहे हैं.
'ए23ए' नाम का ये हिमखंड फ़ुटबॉल मैदान के आकार वाली कई बर्फीली चट्टानों से घिरा हुआ है.
'ए23ए' हिमखंड

इमेज स्रोत, CHRIS WALTON/BAS
आने वाले हफ़्तों में इसके प्रवाह को हवाएं, समुद्री तूफ़ान और पानी का बहाव तय करेगा.
लेकिन ब्रिटिश ओवरसीज़ टेरीटरी तक आते-आते ऐसे हिमखंड पिघलकर ख़त्म हो जाते हैं.
'ए23ए' हिमखंड का साइज़ पूरी तरह से मापना आसान नहीं है.
जब यूरोपीय स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों ने इस हिमखंड को मापना चाहा तो पाया कि इसकी ऊँचाई 920 फ़ुट है.

इमेज स्रोत, ASHLEY BENNISON/BAS
दिल्ली के क़ुतुब मीनार की ऊँचाई क़रीब 238 फुट है.
इससे अंदाज़ा लगा लीजिए की ये हिमखंड कितना बड़ा है.
हालांकि हिमखंड का आकार हर दिन घट रहा है पर ये अब भी 3,800 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.
ये क्षेत्रफल बहरीन और सिंगापुर जैसे 29 देशों से भी बड़ा है.

तेज़-तर्रार लहरें बर्फ़ की इस चट्टान का लगातार काट रही हैं.
इसकी वजह से हिमखंड में गुफानुमा जगहें बन रही हैं.
और बर्फ़ के कई टुकड़े समुद्र में गिरते जा रहे हैं.
ग्लेशियर का हिस्सा

इमेज स्रोत, ROB SUISTED/REUTERS

इमेज स्रोत, ROB SUISTED/REUTERS
गर्म हवा भी इस हिमखंड पर धीरे-धीरे असर डाल रही है.
पिघला हुआ पानी हिमखंड के ऊपर तैरना शुरू होगा और फिर वो दरारों के ज़रिए इसके अंदर दाख़िल हो जाएगा.
हो सकता है कि इस वर्ष के अंत तक ये हिमखंड पूरी तरह से पिघल जाए.

लेकिन A23a अपने पीछे एक विरासत छोड़ कर जाएगा.
सभी बड़े हिमखंडों की तरह इसके पिघलने से खनिज धूल बिखर जाएगी.
खनिजों की ये धूल हिमखंड के ग्लेशियर का हिस्सा होने के कारण इसकी बर्फ में फंस गई थी.
खुले समुद्र में, यह धूल उन जीवों के लिए पोषक तत्वों का एक स्रोत है जो समुद्री फूड चेन का आधार बनते हैं.
समुद्री के कई बड़े जीवों को हिमखंड के पूरी तरह से पिघलने का लाभ होगा.
प्राकृतिक प्रक्रिया

इमेज स्रोत, Getty Images
जब भी लोग ऐसे बड़े हिमखंडों के बारे में सुनते हैं तो उन्हें लगता है कि ये सब क्लाइमेट चेंज के कारण हो रहा है.
लेकिन सच्चाई थोड़ी जटिल है. अंटार्कटिका के जिस हिस्से से A23a आया है वहां अब भी काफ़ी ठंड है.
इसका उदगम फ़्लिंटर आइस शेल्फ़ में हुआ है. ये एक भीमकाय आइस शेल्फ़ है जो वेडेल सी में तैर रही है.
बर्फ की शेल्फों के अगले हिस्से का छिटक कर हिमखंड में तब्दील होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है.
वैज्ञानिक इसे काल्विंग कहते हैं. ये ठीक वैसे ही होता है जैसे कि गाय किसी बछड़े को जन्म दे रही हो.
एक शेल्फ संतुलन तभी संतुलित होगा जब इससे छिटकने वाली चट्टानें उतनी ही हों जितनी की बर्फबारी हो रही हो.
गर्म पानी की लहरों से शेल्फ़ के अगले हिस्से का संतुलन बिगड़ सकता है लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि फ़्लिंचर के साथ भी ऐसा ही हो रहा हो.

हालांकि महाद्वीप के अन्य हिस्सों में देखा गया है कि गर्म पानी के कारण पूरी की पूरी शेल्फ़ ही धराशाई हो गई है और इस कारण से कई हिमखंड अस्तित्व में आ गए हैं.
वैज्ञानिक पैटर्न में किसी भी बदलाव को समझने की कोशिश करने के लिए इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि बर्फ का दानव कहाँ और कितनी बार शेल्फ़ से छिटकता है.
वे इसे एतिहासिक संदर्भ में समझने का प्रयास करते हैं.
उपग्रहों से हमें सिर्फ़ बीते 50 वर्षों का ही लेखा जोखा मिलता है. ये रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं है.
समुद्र की तह में ड्रिलिंग

इमेज स्रोत, LIAM OBRIEN/BAS
इस सारी प्रक्रिया को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने हाल में समुद्र की तह में जाकर ड्रिलिंग की है. इस तरह से शोधकर्ताओं को नई जानकारियां मिली हैं.
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया के ज़रिए अतीत की घटनाओं का एक खाका खींचा है. उनका अनुमान है कि 12 लाख वर्ष पहले इस क्षेत्र में बहुत सारी बर्फ़ की चट्टानें शेल्फ़ से छिटक गई थीं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी वजह अतीत में हुई वार्मिंग रही होगी जिसकी वजह से पश्चिमी अंटार्कटिका के आइस शेल्फ़ टूटे होंगे.
दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां आप हिमखंड की गतिविधियों को नज़दीक से महसूस कर सकते हैं.
उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ़्रीका में, आप 30 करोड़ वर्ष पहले समुद्र के किनारे बर्फ के खंडों द्वारा छोड़े गए निशानों पर चल सकते हैं. उस ज़माने में ये क्षेत्र पानी के नीचे था और दक्षिणी ध्रुव के बहुत करीब था.

इमेज स्रोत, MARIE BUSFIELD
वेडेल सागर के तल पर, A23a नाम का इस हिमखंड ने भी ऐसे ही अपनी यात्रा शुरू की होगी.
और ये प्रक्रिया लाखों वर्षों तक ऐसे ही चलती रहेगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















