ईरान में विरोध प्रदर्शनों को रूस, चीन और इसराइल की मीडिया में कैसे देखा जा रहा है?

ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात विभिन्न शहरों में बड़े पैमाने पर आयोजित प्रदर्शनों के साथ 14वें दिन में प्रवेश कर गए.

दो मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सरकार विरोधी प्रदर्शनों में पिछले दो हफ्तों में देशभर में 48 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. ईरान के कई शहरों में इंटरनेट सेवा बंद है.

पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा को लेकर ईरानी सरकार की कार्रवाइयों की निंदा की है.

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ताज़ा टिप्पणी में ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वो प्रदर्शनकारियों को मारना शुरू करती है तो अमेरिका कार्रवाई करेगा.

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उन्होंने कहा, "हम उन्हें वहीं करारा प्रहार करेंगे जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होता है. और इसका मतलब (ईरान में) सैन्य उपस्थिति नहीं है, इसका मतलब है उन पर वहीं बहुत करारा प्रहार करना जहां उन्हें सबसे ज़्यादा तकलीफ़ होती है."

जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने इन प्रदर्शनों को 'ट्रंप को ख़ुश करने वाला' बताया और ट्रंप की तुलना एक तानाशाह से की है.

ईरान में जारी प्रदर्शनों की ख़बरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में है और इसराइल में इन प्रदर्शनों को बहुत दिलचस्पी से देखा जा रहा है.

विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइज़री जारी की है और ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को प्रदर्शनों वाली जगहों से दूर रहने और सावधानी बरतने को कहा है.

शुक्रवार को प्रेस ब्रीफ़िंग में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं. उस देश में हमारे करीब 10,000 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं."

इसराइल की मीडिया में क्या कहा जा रहा

ईरान के मौजूदा विरोध प्रदर्शनों पर इसराइली मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रिया है और उत्साह के बावजूद संयमित टिप्पणियां की जा रही हैं.

बीबीसी मॉनिटरिंग के अनुसार, दक्षिणपंथी अख़बार इसराइल हायोम और चैनल 12 न्यूज़ ने कहा कि ईरान 'उबाल के बिंदु' पर है.

चैनल 12 न्यूज़ ने प्रदर्शनों में तेज़ी को ईरान के आख़िरी शाह के निर्वासित बेटे रज़ा पहलवी की उस अपील से जोड़ा, जिसमें उन्होंने देश के नेतृत्व के खिलाफ़ प्रदर्शन करने का आह्वान किया था.

8 जनवरी को अपने कार्यक्रम में चैनल 12 के सैन्य संवाददाता निर ड्वोरी ने कहा कि इसराइली सेना ने ईरान में "असाधारण गतिविधि" देखी है. उन्होंने इसे इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के सैन्य अभ्यास से जोड़ा.

ड्वोरी ने कहा, "इसराइल को ग़लत आकलन की स्थिति का डर है, जिसमें इसराइल या ईरान एक-दूसरे के इरादों को सही तरीके से नहीं समझ पाएंगे और हालात बिगड़ जाएंगे."

ड्वोरी के मुताबिक़, इसराइल ने किसी भी संभावित हस्तक्षेप की स्थिति में "इंतज़ार करने" और अमेरिका को पहल लेने देने का फ़ैसला किया है.

इससे पहले आई इसराइली रिपोर्टों में कहा गया था कि ईरान घरेलू असंतोष का रुख़ मोड़ने के लिए इसराइल पर हमला करने पर विचार कर सकता है.

इसराइली सेना की ख़ुफ़िया शाखा के पूर्व प्रमुख तामीर हायमन ने चैनल 12 में लिखा कि "ग़लत आकलन" की संभावना के चलते ईरान के साथ युद्ध का ख़तरा बढ़ गया है.

हायमन ने कहा कि इसराइल को हालात को और बिगाड़ने से बचना चाहिए. उन्होंने लिखा, "इस वक्त ईरानियों के सामने किसी बाहरी ख़तरे को लाना ठीक नहीं है, और हमें हालात को अंदर से ही आगे बढ़ने देना चाहिए."

चीन की मीडिया में चुप्पी

चीन के अधिकारियों और देश के मीडिया ने ईरान में हो रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के प्रति बेहद सतर्क रुख़ अपनाया है. सरकारी मीडिया में भी विरोध प्रदर्शनों को बहुत सीमित कवरेज दी गई है.

बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, इन विरोध प्रदर्शनों की खबरें चाइना टेलीविजन के प्रमुख समाचार कार्यक्रम में नहीं दिखाई गई हैं.

एकमात्र आधिकारिक टिप्पणी को भी विदेश विभाग की वेबसाइट से हटा दिया गया है.

बीजिंग की ओर से अब तक की एकमात्र सार्वजनिक टिप्पणी 5 जनवरी को आई थी जिसमें चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "हम आशा करते हैं कि ईरानी सरकार और लोग मौजूदा कठिनाइयों को दूर कर राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रख सकेंगे."

बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, वेनेज़ुएला में निकोलस मादुरो की गिरफ़्तारी पर जिस तरह चीन के सरकारी मीडिया में ख़बरों की लहर थी, वैसा कुछ ईरान के विरोध प्रदर्शनों को लेकर नहीं दिख रहा है.

चीन के कुछ ब्लॉगरों ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणियां प्रकाशित की हैं और चीन को इससे दूर रहने की बात कही है.

कई चीनी सोशल मीडिया यूज़र्स ने पिछले साल जून में ईरान-इसराइल के बीच संघर्ष के दौरान ईरान पर नरम और कमज़ोर होने के आरोप लगाए.

एक ब्लॉग में वॉशिंगटन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया गया है और लिखा गया है, "मौजूदा शासन गिरे या न गिरे, ईरानी लोगों के लिए उज्ज्वल भविष्य की संभावना कम ही है."

एक अन्य लेख, जिसका शीर्षक था "ईरान को अपने पैरों पर खड़ा होना होगा; चीन की मदद के बारे में सोचना भी मत." इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि चीन को "किसी भी परिस्थिति में" तेहरान की सहायता के लिए नहीं आना चाहिए.

रूस की मीडिया में कवरेज

चीन की तरह ही रूस की मीडिया में भी ख़ास कवरेज नहीं है.

सरकारी मीडिया आरटी में आठ जनवरी को ईरान में इंटरनेट पाबंदी पर एक ख़बर प्रकाशित हुई.

ख़बर में कहा गया है कि महंगाई बढ़ने पर और ईरानी मुद्रा के कमज़ोर होने के ख़िलाफ़ पिछले महीने के अंत से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कई शहरों तक पहुंचा.

रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी तास में ईरान विरोध प्रदर्शनों को कवर किया जा रहा है. हालांकि इन प्रदर्शनों को ईरानी सरकार की तर्ज पर दंगा कहा जा रहा है.

हालांकि मुख्यधारा में ख़ास चर्चा नहीं होने के बावजूद ब्लॉग और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर अमेरिकी विरोधी नैरेटिव देखने को मिल रहा है.

रूस के एक टीवी प्रस्तोता और टिप्पणीकार रुस्लान ओस्ताश्को ने अपने टेलीग्राम चैनल पर चेतावनी दी कि वेनेज़ुएला के बाद ईरान और यहां तक ​​कि रूस भी "अमेरिकी तेल श्रृंखला" के अगले निशाने पर हो सकते हैं.

दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों का एक चार्ट प्रकाशित करते हुए, उन्होंने ईरानी विरोध प्रदर्शनों को घरेलू असंतोष की बजाय अमेरिका के लिए ईरान के तेल संसाधनों पर कब्ज़ा करने का एक अवसर बताया.

सैन्य और सुरक्षा मामलों पर रूस के लोकप्रिय टेलीग्राम चैनल रेबार ने दावा किया कि ईरानी सुरक्षा बल 'स्थिति पर समग्र नियंत्रण' में हैं, लेकिन अमेरिका और पश्चिमी मीडिया पर अशांति को भड़काने के लिए 'लक्षित दुष्प्रचार' का आरोप लगाया.

चैनल ने ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स में छपी उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पश्चिमी मनोवैज्ञानिक युद्ध के तहत ईरान छोड़कर मॉस्को जा सकते हैं.

ख़ामेनेई ने क्या कहा

ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी ऐसे उपद्रवी हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं.

सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को "दंगा करने वाले" और "बदमाशों का झुंड" कहा है. उन्होंने कहा है कि ये लोग केवल "अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने" की कोशिश कर रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हैं. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया, तो अमेरिका ईरान पर "जोरदार हमला" करेगा.

ख़ामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर सरकारी इमारतों को नष्ट करने का आरोप लगाया.

ईरान में 13 दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. ये प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था के बुरे हालात को लेकर शुरू हुए थे. अब यह बीते कई साल का सबसे बड़ा प्रदर्शन बन गया है.

इन प्रदर्शनों में ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक को ख़त्म करने की मांग उठ रही है और कुछ लोग राजशाही को फिर से बहाल करने की बात कर रहे हैं.

मानवाधिकार समूहों के अनुसार इन प्रदर्शनों में हुई हिंसा में कम से कम 48 प्रदर्शनकारी और 14 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. इसकी वजह से पूरे देश में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

'ट्रंप की तुलना तानाशाह और घमंडी शासकों से'

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना दुनिया के तानाशाह और घमंडी शासकों से की है.

ख़ामेनेई ने सोशल मीडिया एक्स पर कई पोस्ट के ज़रिए अपनी बात रखी है, जिसमें ट्रंप पर भी निशाना साधा गया है.

उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति जो पूरी दुनिया के बारे में घमंड से फैसले करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि दुनिया के तानाशाह और घमंडी शासक, जैसे फिरौन, निमरूद, मोहम्मद रज़ा पहलवी और ऐसे दूसरे शासकों का पतन तब हुआ जब उनका घमंड चरम पर था. उनका (ट्रंप) भी पतन होगा."

ख़ामेनेई ने दावा किया, "आज, ईरान क्रांति से पहले की तुलना में ज़्यादा सुसज्जित और हथियारों से लैस है. हमारी आध्यात्मिक ताकत और पारंपरिक हथियारों की तुलना पुराने समय से नहीं की जा सकती.

पहले की तरह आज भी अमेरिका ईरान के बारे में अपनी समझ में ग़लत है."

ख़ामेनेई ने कहा कि सभी को पता होना चाहिए कि ईरान जिसे लाखों सम्मानित लोगों के बलिदान से बनाया गया था, तबाही मचाने वालों के सामने पीछे नहीं हटेगा.

ख़ामेनेई ने कहा, "12-दिन के युद्ध में, हमारे देश के एक हज़ार से ज़्यादा नागरिक शहीद हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने इसका आदेश दिया था. तो, उन्होंने मान लिया कि ईरानियों का खून उनके हाथों पर है. अब वह कह रहे हैं कि वह ईरानी राष्ट्र के साथ हैं."

ख़ामेनेई ने वेनेज़ुएला की घटना को लेकर भी ट्रंप पर निशाना साधा है.

उन्होंने लिखा है, "आप देख सकते हैं कि उन्होंने लैटिन अमेरिका के एक देश को कैसे घेर लिया है और वहाँ कुछ कदम उठाए हैं. उन्हें शर्म भी नहीं आती और वे साफ-साफ कहते हैं कि यह तेल के लिए था.."

यूरोपीय देशों ने क्या कहा

फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या की निंदा की और ईरानी अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा से परहेज करने का आह्वान किया.

इससे पहले यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कजा कलास ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ किसी भी प्रकार की हिंसा को "अस्वीकार्य" बताया था.

बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने एक बयान में ईरानी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की मौत की "स्वतंत्र और पारदर्शी" जांच की मांग की. वोल्कर टर्क ने ईरान में इंटरनेट बंद होने पर भी चिंता व्यक्त की.

अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संघ ने एक बयान में ईरान में राष्ट्रव्यापी इंटरनेट बंद और सूचना के प्रवाह पर प्रतिबंध के बारे में चेतावनी दी है.

इस बीच पत्रकारों की सुरक्षा के गठित समिति (सीपीजे) ने ईरानी सरकार से इंटरनेट तक पूर्ण पहुंच को तुरंत बहाल करने का आह्वान किया.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा कि वह इंटरनेट बंद होने के बाद सुरक्षा बलों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर दमन की रिपोर्टों की जांच कर रहा है.

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