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संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और इसराइल आमने-सामने, वजह बना नेतन्याहू का वीडियो
- Author, सना आसिफ़ डार
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का वह वीडियो संदेश चर्चा में है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान और ओसामा बिन लादेन का ज़िक्र किया था.
उनके इस बयान पर बहस जारी ही थी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्तान और इसराइल के प्रतिनिधि आमने-सामने आ गए.
क़तर पर इसराइल के हमले को लेकर बुलाई गई सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ़्तिख़ार अहमद ने कहा, "इसराइल ने पाकिस्तान के बारे में झूठे बयान दिए, जिनका मक़सद अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन और अपनी ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई को सही ठहराना था."
बैठक में मौजूद इसराइल के प्रतिनिधि ने अहमद के बयान का तुरंत जवाब दिया और कहा कि इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की धरती पर मारा गया था.
इससे पहले इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिका में 9/11 हमले की 24वीं बरसी पर दिए गए संदेश में पाकिस्तान और ओसामा बिन लादेन का ज़िक्र किया था.
उन्होंने इसे क़तर में किए गए इसराइली हमले को सही ठहराने के तर्क के तौर पर इस्तेमाल किया.
मंगलवार को इसराइल ने क़तर की राजधानी दोहा में हमास के वरिष्ठ नेताओं पर हमला किया. इसराइली सेना का कहना है कि उसने 7 अक्तूबर के "वीभत्स जनसंहार के सीधे ज़िम्मेदार लोगों को निशाना बनाया."
जबकि हमास का कहना है कि वार्ता के लिए दोहा में मौजूद उसके प्रतिनिधिमंडल को निशाना बनाया गया, लेकिन वे इस हमले में सुरक्षित रहे.
इसराइल के इस हमले में क़तर के एक सुरक्षा अधिकारी समेत छह लोगों की मौत हो गई..
सुरक्षा परिषद की बैठक में क्या हुआ?
क़तर पर हुए इस हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई.
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में परिषद ने दोहा पर हुए हमले की निंदा तो की, लेकिन इसराइल का नाम नहीं लिया.
हालांकि बैठक में शामिल पाकिस्तान, क़तर और मिस्र सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने न केवल अपने संबोधन में दोहा पर इसराइली हमले की कड़ी निंदा की, बल्कि ग़ज़ा की स्थिति पर भी चिंता जताई.
बैठक में जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ़्तिख़ार अहमद को बोलने का मौका मिला, तो उन्होंने इसकी शुरुआत दोहा पर इसराइली हमले की निंदा से की और साथ ही ग़ज़ा की स्थिति के लिए भी इसराइल की आलोचना की.
अपने संबोधन में उन्होंने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि इसराइल ने एक असंबद्ध घटना को पाकिस्तान से जोड़कर सच्चाई के उलट बयान दिया, "जिसका मक़सद अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन और अपनी ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई को सही ठहराना था."
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रुख़ साफ़ है. "अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में पाकिस्तान की क़ुर्बानियों को अच्छी तरह जानता है. पूरी दुनिया जानती है कि हमारी आतंकवाद निरोधी कोशिशों की वजह से अलक़ायदा का सफ़ाया हुआ."
उन्होंने कहा, "हम किसी भी ग़ैर-ज़िम्मेदार देश के ऐसे बयानों को क़बूल नहीं करेंगे जो दशकों से ग़ज़ा और फ़लस्तीनी इलाक़ों में भयावह आतंकवाद का अपराधी हो...हम भी किसी ग़लत तुलना को रद्द करते हैं."
पाकिस्तान का संबोधन पूरा होने पर इसराइल के प्रतिनिधि ने तुरंत बोलने की अनुमति मांगी और जवाब दिया.
इसराइल के प्रतिनिधि डैनी डैनन ने कहा, "अगर पाकिस्तान से हमारे साथी बयान देना चाहते थे तो वह बैठक की शुरुआत में ऐसा कर सकते थे, लेकिन मैं आपके शब्दों का ही हवाला देना चाहता हूं. शायद आपको मेरे संबोधन के शब्द बुरे लगे और मैं इसके लिए माफ़ी चाहता हूं, लेकिन मेरा संबोधन सच्चाई पर आधारित था."
उन्होंने कहा, "और यह सच्चाई है कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में मारे गए और किसी ने भी इसके लिए अमेरिका की निंदा नहीं की. जब दूसरे देश आतंकवादियों को निशाना बनाते हैं तो कोई उनकी निंदा नहीं करता और यही दोहरा मापदंड है. जब आपका इसराइल के लिए अलग और अपने लिए अलग मापदंड है तो फिर यही समस्या है."
अपनी बात के आख़िरी में इसराइल के प्रतिनिधि ने कहा, "लेकिन मैं आपसे यह सवाल पूछता हूं कि जब आप हमारी आलोचना करते हैं और मुझे यक़ीन है कि आप भविष्य में भी हमें आलोचना का निशाना बनाते रहेंगे तो फिर दोहरे मापदंड के बारे में भी सोचें. वह मापदंड जो आप अपने देश पर लागू करते हैं और वह मापदंड जो आप इसराइल के लिए तय करते हैं."
नेतन्याहू ने अपने संदेश में क्या कहा था?
9/11 हमले को ध्यान में रखते हुए लगभग दो मिनट के संदेश में इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान और ओसामा बिन लादेन का ज़िक्र किया.
उन्होंने क़तर पर इसराइल के हमले को सही ठहराने के लिए तर्क देते हुए कहा कि अमेरिका ने भी अलक़ायदा का पीछा करते हुए ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मारा था.
इस दौरान उन्होंने क़तर समेत दूसरे देशों को चेतावनी दी कि वे चरमपंथियों को शरण न दें, वरना इसराइल अन्य देशों में भी ऐसे हमले करेगा.
ध्यान रहे, ओसामा बिन लादेन को 2 मई 2011 को अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में एक ऑपरेशन के दौरान मार दिया था.
10 सितंबर को इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी इस वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा, "कल 11 सितंबर है. हमें 11 सितंबर याद है. उस दिन इस्लामिस्ट आतंकवादियों ने अमेरिका की स्थापना के बाद अमेरिकी धरती पर सबसे भयानक कार्रवाई की थी."
उनका कहना था, "हमारा भी एक 11 सितंबर था. हमें 7 अक्तूबर याद है. उस दिन इस्लामिस्ट आतंकवादियों ने होलोकास्ट के बाद यहूदियों के ख़िलाफ़ सबसे भयानक कार्रवाई की."
अपनी बात जारी रखते हुए नेतन्याहू ने कहा, "अमेरिका ने 11 सितंबर के बाद क्या किया? उसने उस घिनौने अपराध के ज़िम्मेदार आतंकवादियों को पकड़ने का वादा किया, चाहे वह कहीं भी हों. दो हफ़्ते बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव भी पास हुआ, जिसमें कहा गया कि सरकारें आतंकवादियों को शरण नहीं दे सकतीं."
उन्होंने क़तर पर हमले का बचाव करते हुए कहा, "हमने इस पर अमल किया. हमने 7 अक्तूबर के मास्टरमाइंड आतंकवादियों का पीछा किया और हमने क़तर में ऐसा किया, जो आतंकवादियों को पनाह देता है. वह हमास की आर्थिक मदद करता है, उन्हें शानदार महल देता है, क़तर उन्हें सब कुछ देता है."
नेतन्याहू ने कहा , "तो हमने भी वही किया जो अमेरिका ने किया था. उसने अफ़ग़ानिस्तान में अलक़ायदा के आतंकवादियों का पीछा किया और उसके बाद उसने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार डाला."
क़तर पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से आने वाली तीखी प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री ने कहा था, "अब दुनिया के कई देश इसराइल की निंदा कर रहे हैं. उन्हें शर्म आनी चाहिए. अमेरिका के हाथों ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उन्होंने क्या किया था? क्या उन्होंने यह कहा कि ओह! अफ़ग़ानिस्तान या पाकिस्तान के साथ बहुत बुरा हुआ. नहीं, बल्कि उन्होंने तालियां बजाईं. उन देशों को अपनी ही नीतियों पर बने रहने और उन पर अमल करने के लिए इसराइल की प्रशंसा करनी चाहिए."
नेतन्याहू ने क़तर और दूसरे देशों को चेतावनी देते हुए यह भी कहा था, "मैं क़तर और आतंकवादियों को शरण देने वाले सभी देशों से कहता हूं कि या तो उन्हें अपने देश से निकाल दें या फिर उन्हें न्याय के कटघरे में लाएं क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हम करेंगे."
कतर के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
नेतन्याहू के इस वीडियो संदेश पर क़तर के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी. उसने नेतन्याहू की तुलना को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह बयान इसराइल के कायराना हमले को सही ठहराने और भविष्य में संप्रभुता उल्लंघन को जायज़ ठहराने की शर्मनाक कोशिश है.
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू इस बात से पूरी तरह अवगत हैं कि हमास के कार्यालय की मेज़बानी क़तर की मध्यस्थता की कोशिशों के फ़्रेमवर्क के तहत है, जिसके लिए अमेरिका और इसराइल ने अनुरोध किया था.
क़तर के विदेश मंत्रालय का कहना था, "नेतन्याहू का यह आरोप कि क़तर ने हमास के प्रतिनिधिमंडल को ख़ुफ़िया तौर पर शरण दी, एक ऐसे अपराध को तर्क देने की कोशिश है जिसकी पूरी दुनिया ने निंदा की."
बयान में कहा गया, अलक़ायदा का कोई वार्ता प्रतिनिधिमंडल नहीं था, जिसके साथ अमेरिका उस समय क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ वार्ता करता.
क़तर ने कहा कि उसकी साख को नुकसान पहुँचाने की कोशिशों के बावजूद वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय साझेदार के तौर पर काम करता रहेगा.
साथ ही क़तर ने दोहराया कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी उपाय करेगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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