भोपाल के हॉस्टल से लड़कियों के लापता होने का क्या है मामला जिसने राजनीतिक तूल पकड़ा

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, भोपाल से
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नज़दीक एक गांव तारासेवनिया में चल रहे हॉस्टल से गुम हुईं सभी लड़कियां मिल गई हैं. वे अपने परिवारों के साथ सुरक्षित हैं.
वहीं हॉस्टल संचालक के ख़िलाफ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है.
इस मामले में लापरवाही के आरोप के चलते परियोजना अधिकारी के साथ दो अन्य लोगों को सस्पेंड किया गया है.
मामले ने शनिवार को तब तूल पकड़ा जब यह बात सामने आई कि हॉस्टल में कुल 68 लड़कियों के नाम थे लेकिन 41 लड़कियां ही मौके पर मौजूद मिलीं.
26 लड़कियों के ग़ायब होने की सूचना मिलते ही पूरा प्रशासन सक्रिय हो गया और जांच शुरू की गई.
हॉस्टल संचालक ने बताया था कि इन लड़कियों को उनके माता-पिता को सौंप दिया गया है. पर वो इससे संबंधित कोई भी दस्तावेज़ नहीं दे पाए थे.
पुलिस प्रशासन क्या कह रहा है?

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पुलिस अधीक्षक (भोपाल ग्रामीण) प्रमोद कुमार सिन्हा ने बताया, "अभी तक जो जानकारी मिली है उससे पता चलता है कि यह 26 लड़कियां वहां पर नाम रजिस्टर कराकर अपने माता-पिता के पास रहने के लिए चली गई थीं. अभी इसकी जांच कराई जा रही है."
उन्होंने यह भी कहा कि सभी के बयान लिए जा रहे हैं और उसके बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि जो अभी तक जानकारी मिली है उसके अनुसार लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न और मारपीट जैसी कोई भी बात सामने नहीं आई है.
वहीं धर्मांतरण को लेकर भी मामले की जांच की जा रही है. आरोप लग रहे हैं कि इस पूरे मामले के पीछे धर्मांतरण भी वजह हो सकती है.
मामले ने कैसे तूल पकड़ा

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पुलिस की जानकारी के मुताबिक़, ‘आंचल’ नाम के इस हॉस्टल में कुल 68 लड़कियों के नाम थे लेकिन शुक्रवार को जब राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने यहां का निरीक्षण किया तो उस समय इनमें से सिर्फ 41 लड़कियां ही मौजूद थीं.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस मामले में एक पत्र लिखा और मुख्य सचिव वीरा राणा से सात दिन के भीतर मामले की रिपोर्ट देने को कहा.
आरोप है कि यह हॉस्टल बिना किसी अनुमति के चल रहा था.
कानूनगो ने अपने पत्र में लिखा है कि हॉस्टल में निरीक्षण के दौरान पता चला कि यह हॉस्टल न ही पंजीकृत है और न ही इसको मान्यता मिली है. जो लड़कियां रह रही हैं वो सभी बाल कल्याण समिति के आदेश के बिना ही रह रही हैं.
प्रियंक कानूनगो का आरोप है कि संचालक ने यह लड़कियां ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से रखी थींं. वहीं पाया गया कि इस हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन भी नहीं था.
वहीं हॉस्टल संचालक पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि हॉस्टल में कई धर्म की लड़कियां मौजूद थीं लेकिन इसके बावजूद जो प्रार्थना करवाई जाती थी वो ईसाई धर्म के अनुसार ही होती थी.
वहीं हॉस्टल में लड़कियों की सुरक्षा के लिए भी कोई इंतज़ाम नहीं मिले.
किस तरह का है ये हॉस्टल

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यह हॉस्टल ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित किया जाता है. इसके संचालक अनिल मैथ्यू है.
इसमें मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों की लड़कियां हैं. राज्य बाल आयोग की टीम के मुताबिक़, लड़कियों में ज़्यादातर हिंदू हैं और उसके अलावा ईसाई और मुसलमान भी कुछ लड़कियां हैं.
जानकारी के मुताबिक़, इस हॉस्टल को संचालित करने वाली संस्था पहले रेलवे चाइल्ड लाइन भी चलाती थी.
राज्य बाल आयोग की सदस्या निवेदिता शर्मा से जब अनियमितता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, "यह हॉस्टल जेजे एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के तहत रजिस्टर्ड नहीं था. संचालक ने पहले मना कर दिया था कि वहां पर कोई भी अनाथ बच्चे नहीं हैं लेकिन बच्चों से बातचीत में यह बात सामने आयी की वहां पर कुछ बच्चे थे जिनके मां-बाप नहीं हैं."
निवेदिता शर्मा ने बताया कि प्रार्थना सिर्फ़ ईसाई तरीक़े से ही कराई जा रही है जबकि वहां पर सिर्फ़ दो ईसाई और कुछ मुसलमान लड़कियां थीं जबकि बाक़ी हिंदू लड़कियां ही थीं.
निवेदिता ने बताया कि हमारी कोशिश है कि इन लड़कियों के माता-पिता से संपर्क किया जाए.
उन्होंने कहा, "अभी तक सबसे बड़ी बात यह है कि जो लड़कियां स्थानीय हैं उनके माता-पिता ने भी उनके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश नहीं की है."
ईसाई मिशनरी संस्थाएं निशाने पर?

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एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया है कि इस विषय पर जांच के बाद ही सही बात सामने आएगी.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित स्कूल और हॉस्टल राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के निशाने पर शुरू से हैं.
पिछले साल प्रदेश के सागर में ईसाई समाज के लोगों ने प्रदर्शन कर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.
सागर स्थित सेंट फ्रांसिस सेवाधाम संस्था पर आयोग के अध्यक्ष कानूनगो ने धर्मांतरण और अवैध गतिविधियों के आरोप लगाए थे.
संस्था ने इन आरोपों को निराधार बताया था.
इस मामले को लेकर राजनीति भी तेज़ हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले इस मामले पर कार्रवाई करने को सरकार को कहा है.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "भोपाल के परबलिया थाना क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित बाल गृह से 26 बालिकाओं के ग़ायब होने का मामला मेरे संज्ञान में आया है. मामले की गंभीरता तथा संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से संज्ञान लेने एवं त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं."
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इसके जवाब में विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है.
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया है कि जब-जब भाजपा की सरकार रहती है, इस तरह के अवैध बाल संरक्षण गृह तेज़ी से उभरते हैं.
उन्होंने कहा, "धर्मांतरण के साथ-साथ मानव तस्करी का घिनौना खेल होता है. अनैतिक कार्यों की भरमार होती है. धर्म के नाम पर राजनीति भाजपा करती है और उनके शासनकाल में ही ऐसी गतिविधियां होती हैं, यह शर्मनाक है."
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