सुनील सांगवान: जिनके जेलर रहते हुए गुरमीत राम रहीम छह बार जेल से निकले, वो बने बीजेपी उम्मीदवार

पूर्व जेलर सुनील सांगवान को बीजेपी ने चरखी दादरी से टिकट दिया

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इमेज कैप्शन, पूर्व जेलर सुनील सांगवान को बीजेपी ने चरखी दादरी से टिकट दिया. सुनील सांगवान (बाएं) और गुरमीत राम रहीम (दाएं)
    • Author, सत सिंह
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी के लिए

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूर्व जेलर सुनील सांगवान को चरखी दादरी से टिकट दिया है.

सुनील सांगवान सुर्ख़ियों में हैं क्योंकि उनके जेल अधीक्षक के कार्यकाल के दौरान गुरमीत राम रहीम को 6 बार पैरोल या फरलो मिली थी.

गुरमीत राम रहीम रेप और हत्या के दोषी हैं और रोहतक की सुनारिया जेल में क़ैद हैं.

बीबीसी से बातचीत में सुनील सांगवान ने गुरमीत राम रहीम को मिले पैरोल और फरलो पर उठते सवालों का जवाब दिया.

साथ ही राम रहीम के साथ अपने रिश्तों पर भी बात की.

सुनील सांगवान

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इमेज कैप्शन, सुनील सांगवान (बीच में) बीजेपी से जुड़े

वीआरएस लेकर चुनावी मैदान में हैं सुनील सांगवान

जेल अधीक्षक पद से वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद सुनील सांगवान बीते दिनों बीजेपी में शामिल हुए हैं. बीजेपी ने चरखी दादरी से उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है.

वीआरएस से पहले सुनील गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बतौर जेलर कार्यरत थे. इससे पहले सुनील पांच साल तक रोहतक जेल में अधीक्षक के तौर पर काम कर चुके हैं.

साल 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और सज़ा काटने के लिए रोहतक के सुनारिया जेल भेजा गया था.

उस समय सुनील सांगवान रोहतक जेल के जेलर थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर गुरुग्राम की भोंडसी जेल में हो गया था.

सुनील सांगवान को बीजेपी में शामिल कराने में इतनी जल्दी दिखाई गई कि हरियाणा सरकार ने रविवार यानी 1 सितंबर को ही गुरुग्राम जिला जेल के अधीक्षक पद से वीआरएस के उनके आवेदन को मंजूर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली.

जेल महानिदेशक (डीजी) ने 1 सितंबर को राज्य के सभी जेल अधीक्षकों को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने उसी दिन 'नो ड्यूज' प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया.

डीजी की तरफ़ से जारी पत्र में कहा गया, "सुनील सांगवान, अधीक्षक जेल, जिला जेल, गुरुग्राम ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अनुरोध किया है. इसलिए आग्रह है कि सुनील सांगवान, अधीक्षक जेल, गुरुग्राम के पक्ष में नो-ड्यूज प्रमाण पत्र शाम 4 बजे तक जारी कर दिया जाए.''

सुनील सांगवान

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इमेज कैप्शन, चरखी दादरी से सुनील सांगवान को बीजेपी ने चुनावी मैदान में उतारा है
गुरमीत राम रहीम

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इमेज कैप्शन, राम रहीम को कुल 10 बार पैरोल या फरलो मिली है

वो मौके जब सांगवान के कार्यकाल में राम रहीम को मिली पैरोल या फरलो

राम रहीम को कुल 10 बार पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर भेजा जा चुका है. इनमें से 6 बार ऐसा सुनील सांगवान के बतौर जेल अधीक्षक रहते हुआ.

सुनील सांगवान ने जेल विभाग में 22 साल से अधिक काम किया है. वो साल 2002 में हरियाणा जेल विभाग में शामिल हुए थे. उन्होंने राज्य की कई जेलों में बतौर जेल अधीक्षक काम किया है, इसमें रोहतक की सुनारिया जेल भी है जहां उन्होंने पांच साल तक अपनी सेवाएं दी हैं.

ये वो ही जेल है जहां राम रहीम सज़ा काट रहे हैं.

उनके कार्यकाल के दौरान ये वो मौके हैं जब राम रहीम को जेल से बाहर भेजा गया.

  • 24 अक्टूबर 2020 को एक दिन की आपातकालीन पैरोल
  • 21 मई 2021 को एक दिन की आपातकालीन पैरोल
  • 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 7 से 28 फरवरी तक 21 दिन की फरलो दी गई थी.
  • हरियाणा नगर निगम चुनाव 2022 से पहले 17 जून से 16 जुलाई तक 30 दिन की पैरोल
  • आदमपुर विधानसभा उपचुनाव 2022 से पहले 15 अक्टूबर से 25 नवंबर तक 40 दिन की पैरोल
  • 21 जनवरी से 3 मार्च, 2023 तक 40 दिन की पैरोल

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हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिज़नर्स (टेम्पररी रिलीज़) एक्ट, 2022 जेल अधीक्षक को कैदियों के पैरोल या फरलो के मामलों की सिफारिश करने का अधिकार देता है.

इस सिफारिश को जिला मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है. लेकिन रिहाई का आदेश केवल सक्षम अधिकारी जारी कर सकता है, जो कि सजा के आधार पर डिप्टी कमिश्नर या मंडलायुक्त हो सकता है.

बीजेपी से टिकट मिलने के बाद सुनील सांगवान की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना भी हो रही है.

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि कौन इतना नादान है जो इस खबर से हैरान है.

इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर्स गुरमीत राम रहीम को कई बार मिली पैरोल, सांगवान की उम्मीदवारी और बीजेपी के साथ उनके रिश्ते पर सवाल उठा रहे हैं.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में सुनील सांगवान इस बात को ख़ारिज़ करते हैं कि गुरमीत राम रहीम को उनकी वजह से 6 बार पैरोल या फरलो मिला.

वो कहते हैं, ''मुझे ट्रोल किया जा रहा है कि मेरे कार्यकाल में बाबा को छह बार पैरोल या फरलो मिली. इसमें पहली बात तो ये है कि पैरोल जेल अधीक्षक के हस्ताक्षर से नहीं मिलती. बल्कि इसकी अनुमति के लिए डिविजनल कमिश्नर के हस्ताक्षर की ज़रूरत होती है.''

वो आगे कहते हैं, ''मुझे तो इस बात के लिए सराहा जाना चाहिए कि मैंने बाबा राम रहीम की पैरोल को तीन बार रद्द कर दिया था. पहली बार 29 जुलाई 2019, दूसरी बार 30 अक्टूबर 2019 और तीसरी बार 20 अप्रैल 2020 को बाबा ने अपनी बीमार मां की देखभाल का हवाला देकर पैरोल की मांग की थी, जिसे मैंने अपने कलम से ख़ारिज़ किया था. जबकि कोई भी सामान्य कैदी अपनी सजा के एक साल बाद पैरोल का हक़दार हो जाता है. जबकि बाबा को तीन साल तक पैरोल नहीं मिली.''

सुनील सांगवान कहते हैं कि गुरमीत राम रहीम ने तीन बार इमरजेंसी पैरोल की मांग की थी, जिसे उन्होंने ख़ारिज़ कर दिया था, जिसका अधिकार जेल अधीक्षक के पास होता है.

वो कहते हैं, ''जो रूटीन पैरोल होती है वो डिविजनल कमिश्नर मंजूर करते हैं. बाबा जब भी आवेदन करते उन्हें कानूनी प्रक्रिया के जरिए पैरोल मिल जाती थी.''

सुनील सांगवान

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इमेज कैप्शन, सुनील सांगवान के पिता सतपाल सांगवान हरियाणा सरकार में मंत्री रहे हैं

पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं सुनील सांगवान?

सुनील सांगवान के पिता सतपाल सांगवान हरियाणा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. दो महीने पहले ही वो जेजेपी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे.

सुनील सांगवान के पिता सतपाल सांगवान भी 1996 में राजनीति में आने से पहले बीएसएनएल में सब डिविजनल अधिकारी (एसडीओ) के पद पर कार्यरत थे.

बाद में वो इस्तीफ़ा देकर राजनीति में उतरे.

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चरखी दादरी सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. बाद में उन्होंने और भी चुनाव लड़े.

साल 2009 में वो हरियाणा जनहित कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते और भूपेंद्र हुड्डा सरकार में मंत्री भी बने. साल 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए.

साल 2019 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का दामन थाम लिया और चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार मिली.

बीबीसी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, सुनील सांगवान जेल अधीक्षक का पद नहीं छोड़ना चाहते थे. लेकिन उनके पिता सतपाल सांगवान की बढ़ती उम्र की वजह से बीजेपी को दादरी में एक अपेक्षाकृत युवा चेहरे की तलाश थी, जो जाट समुदाय का वोट हासिल कर सके और जिसकी दादरी में अपनी राजनीतिक पहचान भी हो.

साल 2019 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा की चरखी दादरी सीट से बबीता फोगाट पार्टी की उम्मीदवार थीं, लेकिन वो तीसरे नंबर पर रही थीं, जबकि जेजेपी प्रत्याशी रहे सतपाल सांगवान दूसरे नंबर पर रहे. यहां से निर्दलीय प्रत्याशी सोमबीर ने बाजी मारी थी.

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