अहमदिया को ग़ैर मुस्लिम घोषित करने पर स्मृति इरानी के मंत्रालय का कड़ा जवाब- प्रेस रिव्यू

स्मृति इरानी

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, भारत के अहम मुस्लिम संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश वक़्फ बोर्ड के एक प्रस्ताव का समर्थन किया है.

इस प्रस्ताव में अहमदिया मुसलमानों को ग़ैर-मुस्लिम बताया गया है. जमीयत-ए-हिन्द ने बयान जारी कर कहा है कि आंध्र प्रदेश वक़्फ बोर्ड के प्रस्ताव से सभी मुसलमान सहमत हैं.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की अहमदिया मुसलमानों पर जो राय थी, जमीयत ने अपने बयान में उसका विरोध किया है.

21 जुलाई को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश की सरकार को एक कड़ा पत्र भेजा था, जिसमें लिखा था कि आंध्र प्रदेश वक़्फ बोर्ड का प्रस्ताव नफ़रत फैलाने का अभियान है और इससे देश भर में विभाजन बढ़ेगा. अल्पसंख्यक मंत्रालय अभी स्मृति इरानी के पास है.

मंत्रालय को 20 जुलाई को अहमदिया समुदाय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें बताया गया था कि कुछ वक़्फ बोर्ड अहमदिया समुदाय का विरोध कर रहे हैं और अवैध प्रस्ताव पास कर रहे हैं, जिसमें अहमदिया को ग़ैर-मुस्लिम घोषित कर रहे हैं.

अल्पसंख्यक मंत्रालय का कहना है कि ऐसे प्रस्तावों से अहमदिया समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ेगी और वक़्फ बोर्ड के पास यह अधिकार नहीं है किसी की धार्मिक पहचान तय करे और वह अहमदिया के साथ भी ऐसा नहीं कर सकता है.

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने यह पत्र आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव केएस जवाहर रेड्डी को भेजा है. मंत्रालय ने इस मामले में रेड्डी से हस्तक्षेप करने के लिए कहा है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद

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इमेज कैप्शन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अरशद धड़े) के प्रेसीडेंट मौलाना सैय्यद अरशद मदनी.

2012 में आंध्र प्रदेश स्टेट वक़्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें सभी अहमदिया समुदाय को ग़ैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था.

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इस प्रस्ताव को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी और अदालत ने इस प्रस्ताव को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया था.

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद वक़्फ बोर्ड ने दूसरी घोषणा इस साल फ़रवरी महीने में की थी कि जमीयत उलेमा के फ़तवा के परिणास्वरूप अहमदिया समुदाय को काफिर घोषित किया गया है और ये मुसलमान नहीं हैं.

अहमदिया सुन्नी मुस्लिम की एक उपजाति है और मुसलमानों के बीच इन्हें काफ़ी अत्याचार का सामना करना पड़ता है.

अहमदिया को पाकिस्तान में भी ग़ैर-मुस्लिम घोषित किया गया है.

मंगलवार को जमीयत ने एक बयान में कहा, “केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का एक अलग नज़रिए पर अड़े रहना अनुचित और अतार्किक है क्योंकि वक्फ़ एक्ट के अनुसार, वक्फ़ बोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य मुसलमानों के हितों की रक्षा करना है. इसलिए ऐसे समुदाय से जुड़ी संपत्ति और धार्मिक जगहें वक्फ़ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, जो मुस्लिम के तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है...इस्लाम धर्म दो बुनियादी विश्वासों पर टिका हैः तौहीद, अल्लाह एक है और दूसरा, पैग़म्बर मोहम्मद, अल्लाह के अंतिम संदेश वाहक हैं. ये दोनों धारणाएं इस्लाम के पांच बुनियादी आधार स्तम्भों की अनिवार्य घटक हैं.”

“इस्लाम के इन बुनियादी सिद्धांतों से उलट मिर्ज़ा गुलाम अहमद क़ादियानी ने पैग़म्बर के अंतिम दूत होने को चुनौती दी. इन सिद्धातों और तथ्यातमक मतभेदों को देखते हुए क़ादियांवाद को इस्लामिक पंथ मानने का कोई आधार नहीं बनता है और इस्लाम से जुड़ी सभी पंथ इस बात से सहमत हैं कि ये ग्रुप ग़ैर मुस्लिम है.”

देवगौड़ा

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जेडीएस 2024 में अकेले लड़ेगा चुनावः देवगौड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देव गौड़ा ने कहा है कि जनता दल (सेक्युलर) कर्नाटक में 2024 के आम चुनाव अपने दम पर लड़ेगा.

उन्होंने कहा, “हम किसी से भी गठबंधन नहीं करेंगे और अकेले चुनाव लड़ेंगे.”

हालांकि उन्होंने भविष्य में एनडीए या इंडिया के साथ गठबंधन किए जाने के विकल्प खुले रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए आगे का फैसला पार्टी में तय किया जाएगा.

पिछले हफ़्ते उनके बेटे और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा था कर्नाटक में उनकी पार्टी विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस के ख़िलाफ़ बीजेपी से मिलकर काम करेगी.

इसके बाद जेडीएस के एनडीए में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं.

अभी पिछले सप्ताह ही विधानसभा सत्र में 10 बीजेपी विधायकों के निलंबन को लेकर बीजेपी और जेडीएस ने सत्र का बहिष्कार किया था.

कुछ महीने पहले ही कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए थे जिसमें सत्तारूढ़ बीजेपी को हरा कर कांग्रेस ने सत्ता पर कब्ज़ा किया.

इस चुनाव में कांग्रेस ने जेडीएस के पारंपरिक आधार क्षेत्र में सेंध लगाई और अच्छा ख़ासा नुकसान पहुंचाया.

हालांकि इसके पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाई थी. कुछ महीनों बाद कांग्रेसी विधायकों के टूटकर बीजेपी के साथ जा मिलने पर ये सरकार गिर गई थी.

केंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल

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इमेज कैप्शन, केंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल

'सेक्सटॉर्शन कॉल' से केंद्रीय मंत्री भी नहीं बचे

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार, आजकल बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं को आ रहे 'सेक्सटॉर्शन' कॉल से जल शक्ति और फ़ूड प्रासेसिंग इंडस्ट्रीज़ राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी नहीं बच पाए.

इस मामले में राजस्थान से दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक मंत्री के निजी सचिव आलोक मोहन ने जूलन के आखिर में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी.

इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दो लोगों को गिरफ़्तार किया.

पुलिस के मुताबिक गिरफ़्तार किए गए लोग सेक्टॉर्शन रैकेट का हिस्सा हैं.

जिस समय ये कॉल आई उस समय वो मध्यप्रदेश में अपने गांव के दौरे पर थे.

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