कांग्रेस के साथ आए विपक्ष के कई दल लेकिन जेडीएस क्यों है दूर

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- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरू से
कांग्रेस के बुलावे पर बेंगलुरु में 26 विपक्षी पार्टियां बैठक कर रही हैं, लेकिन इस मीटिंग में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) नहीं होगी.
इस बीच राजनीतिक हलकों में ऐसे कायस लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए मंगलवार (18 जुलाई) की मीटिंग के लिए जेडीएस को दिल्ली बुला सकता है.
जेडीएस नेताओं ने कहा है कि अगर उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया जाता है तो वो उसमें हिस्सा लेने के बाद ही कोई फैसला लेंगे.
ये पूछे जाने पर कि कांग्रेस ने जेडीएस (जो कि उनके साथ गंठबंधन में रह चुके हैं), को बुलाया है या नहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "जिनमें एकजुट होकर संविधान के लिए लड़ने की हिम्मत है, वो हमारे साथ आएंगे. उन्हें किसी तरह के न्योते की ज़रूरत नहीं है."
हालांकि कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा, "उन्होंने हमारे बारे में नहीं सोचा है. हमें फ़र्क नहीं पड़ता कि वो हमें न्योता देते हैं या नहीं. चुनाव अभी आठ- नौ महीने दूर हैं और इस बारे में अभी तो सोचना जल्दबाज़ी है."

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क्या कह रही है कांग्रेस
कांग्रेस के प्रवक्ता जयराम रमेश ने पत्रकारों से कहा, "त्रिशंकु पार्टियों की हमारे सेटअप में कोई जगह नहीं है."
उधर, जेडीएस ने साफ़ कर दिया है कि उनके बीजेपी में विलय का सवाल नहीं है लेकिन वो कह रहे हैं, "हम गठबंधन के लिए तैयार हैं."
हालांकि कांग्रेस इस बात से खुश है कि उनके 2024 के 'बीजेपी हटाओ' कैंपेन में पटना में 15 पार्टियों का साथ मिला था, वहीं अब 26 पार्टियां बैठक में हिस्सा ले रही हैं.
दिलचस्प बात ये है कि 11 नई पार्टियों में से ज़्यादातर तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से आई हैं, जिसका कांग्रेस भी एक हिस्सा है. इनके अलावा केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की पार्टियां शामिल हैं.

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लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीबीसी से कहा, "कई पार्टियां हमारे साथ संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में हमसे जुड़ेंगे."
जेडीएस के बारे में उन्होंने कहा, "सभी के पास विकल्प हैं. वो देश और संविधान तोड़ने वालों के साथ हो सकते हैं या फिर वो उनके साथ हो सकते हैं जो कि देश और संविधान को मज़बूत रखना चाहते हैं."
कांग्रेस और जेडीएस के बीच बिगड़ते रिश्ते राजनीति का एक 'क्लासिक' उदाहरण हैं.
कांग्रेस ने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को 2018 में मुख्यमंत्री के पद का प्रस्ताव दिया था, ऐसे समय में जब कांग्रेस से पास 87 और जेडीएस के पास 37 सीटें थी. ये बीजेपी की 'कांग्रेस मुक्त' मुहिम को रोकने का एक तरीका था.
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कुमारस्वामी के बारे में क्या है चर्चा
ये गठबंधन 2019 के लोकसभा चुनावों तक ही रहा. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 28 में से 26 सीटों पर जीत हासिल कर ली थी. बची हुई सीटें कांग्रेस और जेडीएस के पास गईं. लेकिन बीजेपी के ऑपरेशन कमल के तहत दोनों पार्टियों के 17 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए.
दो महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में जेडीएस को 19 सीटें मिलीं, लेकिन पिछले दो हफ़्तों से बीजेपी ये भी फ़ैसला नहीं कर पाई है कि उनकी 65 सदस्यों की पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा.
इतिहास में पहली बार कर्नाटक विधानसभा में गवर्नर के भाषण और बजट सत्र में कोई नेता विपक्ष नहीं था.
इस खाली जगह का फ़ायदा कुमारस्वामी ने उठाया और कांग्रेस पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए. कुमारस्वामी के परफ़ॉरमेंस के बाद बीजेपी में ये बात चलने लगी है कि क्या नेता विपक्ष का पद उन्हें ही मिल जाना चाहिए.

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बीजेपी आलाकमान और जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा और कुमारस्वामी के बीच बातचीत किस नतीजे पर पहुंचती है, इससे आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के रिश्ते कैसे होंगे, इसका रास्ता साफ़ हो जाएगा.
एक कांग्रेस नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "कुमारस्वामी और उनके पिता कांग्रेस की 2004 में सरकार गिराने के बाद वापस वहीं आ गए हैं."
कांग्रेस जो गंठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है, उसके नेता कौन होगा, इसके जवाब में कांग्रेस के वेणुगोपाल ने कहा, "हमारे पास कई नेता हैं, नेताओं की चिंता न करें, मुद्दे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं."
जयराम रमेश ने कहा, "वो लीडरशिप (पीएम की ओर इशारा करते हुए) कहां है जिन्होंने मणिपुर पर एक शब्द नहीं कहा है."
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