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आईपीएल प्लेऑफ़ में आरसीबी, क्या ट्रॉफ़ी जीतने का भी रखती है दम?
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
आख़िर वो हो ना सका. महेंद्र सिंह धोनी के आईपीएल करियर को शायद वो पटकथा वाला अंतिम लम्हा नहीं मिला.
धोनी जब बल्लेबाज़ी करने के लिए मैदान में उतरे तो चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए 219 रनों के लक्ष्य का पीछा करना लगभग अंसभव दिख रहा था लेकिन प्लेऑफ़ में पहुंचने के लिए जो समीकरण थे वो मुमकिन थे.
यश दयाल की पहली गेंद पर धोनी ने जो छक्का मारा उससे लगा कि वाक़ई में चेन्नई के पूर्व कप्तान एक यादगार जीत दिलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा क़दम उठा चुके हैं. लेकिन, इसकी ठीक अगली ही गेंद पर युवा दयाल ने शायद अपनी ज़िंदगी का सबसे अहम विकेट झटका.
धोनी के वापस लौटते ही आरसीबी को एहसास हो गया कि अब लगातार छठी जीत के साथ इस टीम ने प्लेऑफ़ के लए अपनी जगह सुरक्षित कर ली है.
यश दयाल को कप्तान ने बताया मैन ऑफ़ द मैच
मैच ख़त्म होने के बाद बेंगलुरु के कप्तान फ़ाफ़ डूप्लेसी ने अपने मैन ऑफ़ द मैच पुरस्कार का असली हकदार दयाल को बताया. कप्तान की ये तारीफ़ दिखाती है कि इस युवा गेंदबाज़ ने बेहद दबाव वाले मौक़े पर किस तरह से अपना सब्र बनाये रखा.
अगर आपको याद नहीं हो तो पिछले साल कोलकाता के रिंकू सिंह एक ओवर में 5 छक्के लगाकर हीरो बने थे तो उस वक़्त दुर्भाग्यशाली गेंदबाज़ दयाल थे.
वक़्त ने करवट ली और दयाल ने धोनी और जडेजा जैसे धुरंधरों को भी आख़िरी ओवर में आज़ादी लेने नहीं दी.
आख़िरी दो गेंद पर जडेजा के सामने एक छक्का और एक चौका लगाने की चुनौती थी लेकिन वो पिछले साल के हैरतअंगेज़ कमाल (फ़ाइनल में आख़िरी दो गेंद पर चौका-छक्का लगाकर जीत) को दोहरा नहीं पाये.
लेकिन, दयाल की गेंदबाज़ी से ज़्यादा बड़ा निर्णायक लम्हा मैच में रहा कप्तान डूप्लेसी का अविश्वसनीय कैच. जिस तरह से चीते जैसी फ़ुर्ती दिखाते हुए डूप्लेसी ने हवा में उछलकर चौके के लिए बाहर जाने वाली गेंद को ना सिर्फ़ रोका बल्कि उसे कैच में तब्दील कर दिया.
मेज़बान टीम के समर्थकों में ख़ुशी की लहर ऐसी दौड़ी की बाउंड्री लाइन से दौड़ते हुए कोहली जब अपने कप्तान के पास गले लगाने पहुंचे तो उन्होंने अपना बंधुत्व वाला प्यार भी बिखेरा.
चेन्नई इस मोर्चे पर रही नाकाम
मैच में अगर एक फ़ेज़ की बात की जाए जहां पर चेन्नई को बेंगलुरु ने पूरी तरह से परास्त किया तो वो रहा मिडिल ओवर्स में बल्लेबाज़ी.
7 से 15 ओवर के बीच में अगर बेंगलुरु ने 91 रन सिर्फ़ 2 विकेट के नुक़सान पर बनाए तो चेन्नई ने सिर्फ़ 71 रन जोड़ने में ही 4 विकेट गंवा दिए.
इस दौरान मेज़बान बेंगलुरु ने 6-6 चौके और छक्के जड़े तो चेन्नई के लिए ये आंकड़ा आधा यानी कि सिर्फ़ 3 चौके और 3 छक्के का रहा.
पहले 8 मैचों में 7 हार और अंक-तालिका में सबसे निचले पायदान पर रहने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए आईपीएल 2024 के प्लेऑफ़ में पहुंचने की संभावना के बारे में चर्चा करना भी हास्यास्पद मुद्दा हो सकता था.
लेकिन, 2016 में भी तो कमोबेश ऐसे ही हालात थे. पहले 7 मैचों में सिर्फ़ 2 जीत हासिल करने वाली कोहली की कप्तानी में उस वक़्त बेंगलुरु ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए फ़ाइनल तक का सफ़र तय किया था और ट्रॉफ़ी जीतने के बेहद क़रीब भी पहुंचे थे.
कोहली की भूमिका
इस सीज़न में कोहली भले ही कप्तान नहीं हैं लेकिन जिस अंदाज़ में उन्होंने बल्लेबाज़ी की है (सबसे ज़्यादा रन टूर्नामेंट में कोहली के ही हैं.) उन्होंने स्ट्राइक रेट वाली बहस को ख़त्म कर दिया है.
इससे ये साफ़ है कि वर्ल्ड कप से पहले पूर्व कप्तान हर हाल में अपनी फ़्रैंचाइजी को एक आईपीएल ट्रॉफ़ी जिताने के लिए बेक़ररार हैं.
इसे अजीब इत्तेफ़ाक कहा जायेगा कि पिछले साल इसी मैदान पर कोहली की टीम को प्लेऑफ़ में पहुंचने के लिए जीत की ज़रूरत थी और कोहली ने शतक बनाया था. लेकिन वो शतक जीत के लिए काफ़ी साबित नहीं हुआ लेकिन इस मैच में कोहली ने अर्धशतक भी नहीं बनाया लेकिन उनकी पारी (29 गेंद में 47 रन) का योगदान कीमती रहा.
अगर कप्तान डूप्लेसी ने बेंगलुरु की पारी का इकौलता अर्धशतक (39 गेंद में 54 रन ) बनाया तो मिडिल ऑर्डर में रजत पाटीदार (23 गेंदों पर 41 रन), कैमरुन ग्रीन (17 गेंदों पर 38 रन) और दिनेश कार्तिक-ग्लेन मैक्सवेल की जोड़ी (दोनों ने साझे तौर पर 11 गेंदों में 30 रन बनाये) ने निचले क्रम में तेज़ बल्लेबाज़ी को बनाये रखा.
इसी के चलते स्पिन गेंदबाज़ों के लिए मददगार दिख रही पिच पर भी मेज़बान ने 218 रनों का एक बढ़िया स्कोर खड़ा कर लिया.
मैक्सवेल ने 4 ओवर की गेंदबाज़ी में सिर्फ़ 25 रन दिये और विरोधी कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को बिना खाता खोले वापस पवेलियन भेजा.
आईपीएल ट्रॉफ़ी जीत पाएगी आरसीबी?
चेन्नई के लिए राचिन रविंद्र ने अर्धशतक (37 गेंदों पर 61 रन) बनाया और रहाणे ने अगर 22 गेंदों पर 33 रन बनाये तो जडेजा ने उतनी ही गेंदों पर 42 रन जोड़ें.
आख़िरी लम्हों में धोनी ने भी 13 गेंदों पर 25 रनों की एक शानदार पारी खेलने की कोशिश तो की लेकिन किस्मत शायद शनिवार की देर रात को उनके साथ नहीं थी.
अगर वाक़ई में ये धोनी का आख़िरी मैच साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जिस तरह से धोनी ने आख़िरी टेस्ट और आख़िरी वनडे में हार का मुंह देखा, तो उसी तरह आईपीएल के 17 सालों के असाधारण सफ़र का अंत भी उसी मायूसी वाले नतीजे से ही हुआ.
बहरहाल, अब हर किसी के ज़ेहन में सिर्फ़ यही सवाल कि क्या कोहली और उनके साथियों में लगातार 3 मैच और जीतने का माद्दा है जिससे कि वो पहली बार ट्रॉफ़ी जीतने के बारे में सपने देख सकते हैं?
इस टीम के जूनन, उत्साह, विश्वास और जीत के लिए भूख देखकर ऐसी उम्मीद तो एक और हफ़्ते के लिए लगाई ही जा सकती है.
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