कोहली के 'कमाल' से आरसीबी कैसे प्लेऑफ़ की रेस में बरक़रार

    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

बेंगलुरु ने आईपीएल में पिछले कई सीज़न की तरह इस साल भी बेहद खराब शुरुआत की. एक्सपर्ट्स और आरसीबी के फैंस को भी टीम से ज़्यादा उम्मीद नहीं बची थी कि टूर्नामेंट के दूसरे हाफ़ में उन्होंने अपना गियर बदल लिया.

गुरुवार रात पंजाब को 60 रनों से हराकर बेंगलुरु ने लगातार चौथी जीत दर्ज की और अंक तालिका में सबसे नीचे के पायदान से उठकर सातवें स्थान पर जगह बना ली है.

बेंगलुरु की जीत के हीरो रहे विराट कोहली जिन्होंने इस सीज़न का छठा अर्धशतक लगाया और तेज़ी से रन बनाकर आलोचना करने वालों को खामोश कर दिया.

धर्मशाला में पहले बैटिंग करते हुए बेंगलुरु ने 241 रन बनाए जिसके जबाव में पंजाब की टीम 181 रनों पर ऑल आउट हो गई.

रेस में बने रहने की रात

इस मैच से पहले आरसीबी के पास 11 मैचों में 8 अंक थे और उनका नेट रन रेट -0.05 था.

बेंगलुरु को टूर्नामेंट में बने रहने के लिए ना सिर्फ़ जीत की ज़रूरत थी, बल्कि एक बेहद बड़ी जीत की दरकार थी ताकि उनका रनरेट थोड़ा सुधर जाए. जैसा कि कमेंट्री में पॉमी मबांग्वा ने कहा, “ये रात रेस में बने रहने की रात है.” बेंगलुरु और पंजाब दोनों ही किसी भी कीमत पर जीतना चाहते थे.

पंजाब ने टॉस जीतकर आरसीबी को पहले बैटिंग करने का न्यौता दिया.

आरसीबी के लिए पहला मैच खेल रहे 25 साल के विद्वत कावेरप्पा ने अपनी स्विंग से बेंगलुरु के ओपनर्स को खासा परेशान किया. मैच के पहले ही ओवर में उनकी आउटस्विंगर गेंद पर विराट कोहली के बल्ले से गेंद प्वाइंट की दिशा में हवा में उठ गई. हालांकि आशुतोष शर्मा वहां तक पहुंच ज़रूर गए थे लेकिन एक मुश्किल सा कैच वो पकड़ नहीं पाए. कोहली का स्कोर तब शून्य था.

कावेरप्पा के दूसरे ओवर में कोहली को दूसरी बार जीवनदान मिला जब राइली रूसो भी कैच पूरा करने में असफल रहे. लेकिन कावेरप्पा ने दूसरे छोर पर बेंगलुरु के कप्तान फ़ाफ़ डुप्लेसी को आउट करने में सफलता पाई और बेंगलुरु की एक तेज शुरुआत करने की कोशिश को नाकाम किया.

कावेरप्पा को बेंगलुरु ने साल 2022 में अपनी टीम में शामिल किया था लेकिन उन्हें मैच खेलने का मौका तीन साल बाद गुरुवार को मिला था. वो इस मौके को ज़ाया नहीं करना चाहते थे. उन्होनें अपने तीसरे ओवर में ख़तरनाक विल जैक्स को 12 रनों पर आउट किया और अपने डेब्यू को यादगार बनाने में कामयाब रहे.

पाटीदार की चुस्त बल्लेबाज़ी

बेंगलुरु की पारी को चौथे नंबर पर रजत पाटीदार के आने से नई फुर्ती मिली. हालांकि कावेरप्पा की गेंद पर उनका भी कैच छूटा लेकिन पाटीदार ने रन बनाने में वक्त नहीं गंवाया.

पाटीदार ने बाउंड्रीज़ में खेलना शुरू किया और कोहली के साथ मिलकर 76 रनों की पार्टनरशिप की. पाटीदार 23 गेंदों पर 55 रन बनाकर आउट हुए. अपनी इस पारी में उन्होंने 3 चौके और 6 छक्के लगाए और 240 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग की.

विराट कोहली दूसरे छोर पर जमे हुए थे और दो जीवनदान का पूरा फायदा उठाने का मन बना चुके थे. लेकिन पाटीदार के आउट होने के तुरंत बाद बारिश ने मैच में खलल डाल दिया.

कोहली की छठी फ़िफ्टी

आसमान से गिरती बारिश जब रुकी तो फिर बेंगलुरु के बल्लेबाज़ों ने चौकों और छक्कों की बारिश कर दी. रनों की इस फ़ुहार को लीड कर रहे थे विराट कोहली जिन्होंने पलक झपकते ही अपना गियर बदल लिया था.

उन्होंने 23 गेंदो पर अपना अर्धशतक पूरा किया. ये इस सीज़न में उनका छठा अर्धशतक रहा. कोहली के स्ट्राइक रेट की हाल ही में काफ़ी आलोचना भी हुई थी लेकिन गुरुवार को उन्होंने ये मौका नहीं दिया.

उनके क्लासिकल कवर ड्राइव्स तो लग ही रहे थे, वो हवा में खेलने से भी नहीं घबरा रहे थे जिसकी मदद से उन्हें अपनी पारी में 6 छक्के मिले. कोहली आईपीएल की एक और सेंचुरी की तरफ़ तेजी से बढ़ते दिख रहे थे कि अर्शदीप सिंह की गेंद को वो बाउंड्री पार नहीं पंहुचा पाए और रूसो ने कैच लपक लिया. कोहली ने 47 गेंदो पर 92 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 195 का रहा.

कमेंट्री के दौरान पॉमी मबांग्वा ने कहा, “आज उनके बल्ले से अलग ही आवाज़ निकल रही थी. वो फील्ड में गैप को पकड़ पा रहे थे और हवा में खेलने से नहीं घबरा रहे थे.”

डैरेन गंगा ने कहा कि कोहली के बल्ले ने एक पल के लिए भी आराम नहीं किया. उन्होंने कहा, “आज उनका स्ट्राइक रेट 200 के पास रहा और खास बात ये थी कि वो अच्छी गेंदों पर भी तेज़ प्रहार कर रहे थे.”

वहीं अंजुम चोपड़ा ने कहा कि विराट की ये एक और स्पेशल पारी थी जिसमें उन्होंने मैच में सबसे ज़्यादा 6 छक्के लगाए.

मैच के बाद विराट कोहली ने कहा कि उनकी टीम ने शुरुआती हार के बाद फैसला किया कि वो निडर क्रिकेट खेलेंगे और अपने प्राइड के लिए खेलेंगे. उन्होंने कहा कि टीम का आत्मविश्वास लौट आया है लेकिन अगर ये एक हफ्ते पहले हो गया होता तो टीम आज इस हालत में नहीं होती कि उन्हें दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ता.

हर्षल पटेल ने हासिल किया पर्पल कैप

विराट कोहली के आउट होने के बाद कैमरन ग्रीन और दिनेश कार्तिक ने भी अपने हाथ खोले और बेंगलुरु ने 20 ओवरों में सात विकेट पर 241 रन बनाए.

बेंगलुरु का स्कोर 250 के पार भी जा सकता था लेकिन हर्षल पटेल ने शानदार 20वां ओवर डाला. इस ओवर में उन्होंने पेस को बदलकर ना सिर्फ़ रन बनाने में मुश्किल पैदा की बल्कि 3 विकेट भी अपने नाम किए.

पटेल के आखिरी ओवर में सिर्फ़ 3 रन बने और इसी ओवर में दिनेश कार्तिक, महिपाल लोमलोर और कैमरन ग्रीन आउट हुए. इस तरह हर्षल पटेल के पास इस सीज़न 20 विकेट आ गए हैं और उन्होंने पर्पल कैप हासिल कर लिया है. उन्होंने ये कैप जसप्रीत बुमराह से छीना है जिनके पास 18 विकेट हैं.

पंजाब की चुनौती

धर्मशाला में किसी भी टीम के लिए ये सर्वाधिक स्कोर था और पंजाब के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी थी.

लेकिन पंजाब ने हाल ही में किसी भी टी20 मैच में सबसे बड़ा रनचेज़ पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया था. कोलकाता के 261 रनों के जवाब में पंजाब ने जीत का लक्ष्य सिर्फ़ 2 विकेट गंवाकर 18.4 ओवर में पा लिया था. इसलिए जब पंजाब की टीम 241 रनों का पीछा करने मैदान पर उतरी, तब उनके हौसले बुलंद थे.

लेकिन पंजाब ने प्रभसिमरन सिंह का विकेट पहले ओवर में ही गंवा दिया. दूसरे विकेट के लिए जॉनी बेयरस्टो और राइली रूसो ने 31 गेंदों पर 65 रनों की साझेदारी की जब बेयरस्टो 277 रन बनाकर फ़र्ग्यूसन का शिकार बने.

हालांकि विकेट गर रहे थे लेकिन पंजाब के बल्लेबाज़ बढ़िया रनरेट बनाए हुए थे. पंजाब को बढ़िया आत्मविश्वास चौथे विकेट के लिए रूसो और शशांक सिंह की साझेदारी से मिला. लेकिन रूसो करन शर्मा की एक गेंद पढ़ नहीं पाए और 61 रनों पर पवेलियन लौट गए. शशांक सिंह भी 14वें ओवर में 37 रन बनाकर आउट हो गए और यहां से पंजाब की राह बेहद मुश्किल हो गई.

इसके बाद सिर्फ़ सैम करन दो अंको का स्कोर बना पाए और पंजाब की पारी 181 रनों पर सिमट गई. मिडिल ओवर्स में करन शर्मा और स्वप्निल सिंह ने विकेट निकालकर पंजाब की पारी में ब्रेक लगा दिए. इन दोनों को 2-2 सफलताएं मिली जबकि तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज को 3 और लॉकी फ़र्ग्यूसन को 2 विकेट हासिल हुए.

इस जीत के साथ बेंगलुरु प्लेऑफ़ की रेस में बनी हुई है. उनके पास 12 मैचों के बाद 10 अंक है. वहीं पंजाब की टीम इस हार के साथ प्लेऑफ़ की रेस से बाहर हो गई है. पिछली बार 10 साल पहले पंजाब की टीम ने प्लेऑफ़ में जगह बनाई थी और एक बार फिर निराश करने के बाद उनके लिए गंभीर आत्मचिंतन का वक्त आ गया है.

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