पीएम मोदी बोले- 'गांधी' फ़िल्म बनने के बाद दुनिया ने महात्मा को जाना, विपक्ष ने खोला मोर्चा

पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में ये दावा किया कि रिचर्ड एटनबरो की फ़िल्म 'गांधी' के बनने के बाद दुनिया को उनमें दिलचस्पी हुई.

समाचार चैनल एबीपी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने 'गांधी के प्रचार-प्रसार' में पिछली सरकारों की नाकामी का ज़िक्र करते हुए ये सवाल उठाया कि "क्या इस 75 साल में हमारी जिम्मेवारी नहीं थी क्या कि पूरी दुनिया महात्मा गांधी को जानें" लेकिन "ऐसा हमने नहीं किया."

भारतीय समाज और संस्कृति के प्रति विपक्ष की समझ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "इन्होंने (विपक्ष) राजनीति के शॉर्टकट ढूंढे हैं. इसलिए वो वोटबैंक की राजनीति में फंस गए हैं. और वोटबैंक की राजनीति में फंसने के कारण वे लोग घोर सांप्रदायिक हो गए, घोर जातिवादी हो गए, घोर परिवारवादी हो गए."

विपक्ष पर ग़ुलामी की मानसिकता से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी ने कहा, "(विपक्ष) गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आए. वरना क्या कारण है कि 19वीं शताब्दी के कानून आज 21वीं शताब्दी में चेंज करने की नौबत आई. ये पहले होना चाहिए था. ये दुर्दशा रही है."

महात्मा गांधी पर पीएम मोदी ने वास्तव में क्या कहा

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इसी सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने महात्मा गांधी का ज़िक्र किया और कहा, "दुनिया में महात्मा गांधी एक बहुत बड़े महान आत्मा थे. क्या इस 75 साल में हमारी जिम्मेवारी नहीं थी क्या कि पूरी दुनिया महात्मा गांधी को जानें."

"कोई नहीं जानता है, माफ करना मुझे. पहली बार जब गांधी फ़िल्म बनी तब दुनिया में क्यूरिओसिटी हुई कि अच्छा ये कौन है? हमने नहीं किया जी. इस देश का काम था..."

"अगर मार्टिन लूथर किंग को दुनिया जानती है, अगर हमारे साउथ अफ्रीका के नेल्सन मंडेला जी को दुनिया जानती है, गांधी जी किसी से कम नहीं थे जी. ये मानना पड़ेगा जी. मैं दुनिया घूमने के बाद कह रहा हूं कि गांधी को और गांधी के माध्यम से भारत को तवज्जो मिलनी चाहिए थी."

"आज दुनिया की कई समस्याओं का समाधान गांधी हैं, लेकिन हम गांधी को... हमने अपना बहुत कुछ खोया है. आज स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी मैंने बनाया, दांडी मैंने बनाया. दांडी जाकर देखिए जी. मैंने बाबा साहेब आंबेडकर के पंच तीर्थ बनाए. आप जाकर देखिए. हमारे इतिहास को जीना चाहिए हमने. इतिहास से हमें जुड़े रहना चाहिए. उसमें सांस्कृतिक विरासत भी है."

विपक्ष की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, "सिर्फ 'एंटायर पॉलिटिकल साइंस' के छात्र को ही महात्मा गांधी के बारे में जानने के लिये फिल्म देखने की ज़रूरत रही होगी."

तृणमूल कांग्रेस की नेता और पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम मोदी के इस बयान वाला वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, "कोई गांधी को नहीं जानता था."

केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर महात्मा गांधी की 1930 के दशक में लंदन, पेरिस और स्विट्ज़रलैंड की यात्रा की तस्वीरें साझा की हैं.

केरल कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, "लंदन, स्विट्ज़रलैंड और पेरिस में गांधी जहां भी गए भीड़ ने उन्हें घेर लिया. अपने जीवनकाल में गांधी दुनिया में सबसे लोकप्रिय नेता थे. भारत को अब भी गांधी और नेहरू के नाम से जाना जाता है. गांधी अपने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के लिए जाने जाते थे. कम से कम जब बात गांधी की हो, तब तो सच बोलिए."

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा है, "पता नहीं निवर्तमान प्रधानमंत्री कौन सी दुनिया में रहते हैं जहां 1982 से पहले महात्मा गांधी दुनिया भर में नहीं माने जाते थे. यदि किसी ने महात्मा की विरासत को नष्ट किया है तो वह स्वयं निवर्तमान प्रधानमंत्री ही हैं."

"वाराणसी, दिल्ली और अहमदाबाद में उनकी ही सरकार ने गांधीवादी संस्थाओं को नष्ट किया है. यही आरएसएस कार्यकर्ताओं की पहचान होती है कि वे महात्मा गांधी के राष्ट्रवाद को नहीं जानते."

"उनकी विचारधारा ने जो माहौल बनाया था, उसी वजह से नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या की. 2024 का चुनाव महात्मा भक्त और गोडसे भक्त के बीच में हुआ है. निवर्तमान प्रधानमंत्री और उनके गोडसे भक्त साथियों की हार ज़ाहिर है."

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर तंज करते हुए कहा है, "क्योंकि राजा पढ़ा चौथी तक और गांधीजी का पाठ पाँचवीं में आया."

जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "एंटायर पोलिटिकल साइंस के विद्वान बता रहे हैं कि महात्मा गांधी को कोई नहीं जानता था दुनिया में, जब तक एक फ़िल्म उनके बारे में नहीं बनी."

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और पूर्व पत्रकार सागरिका घोष ने कहा, "इसमें हैरत की बात नहीं है.जो लोग नाथूराम गोडसे से प्रभावित हैं, वे गांधी के बारे में कुछ नहीं जानते हैं."

'गांधी' फ़िल्म जिसे दो ऑस्कर मिले थे

रिचर्ड एटनबरो की फ़िल्म गांधी में महात्मा गांधी का रोल बेन किंग्स्ले ने निभाया था. ये तस्वीर उसी फ़िल्म की शूटिंग के दौरान खींची गई थी.

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इमेज कैप्शन, रिचर्ड एटनबरो की फ़िल्म गांधी में महात्मा गांधी का रोल बेन किंग्स्ले ने निभाया था. ये तस्वीर उसी फ़िल्म की शूटिंग के दौरान खींची गई थी.

ब्रितानी निर्देशक रिचर्ड एटनबरो की फ़िल्म 'गांधी' को साल 1983 में दो श्रेणियों में ऑस्कर पुरस्कार मिला था. एटेनबरा को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड मिला था जबकि गांधी को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का.

एटेनबरा ने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद कहा था, "सही मायनों में इसके ज़रिये आपने गांधी को सम्मानित किया है. वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत थे. मुझे उनमें जो सबसे असाधारण बात लगती है वह यह है कि गांधी आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं. आपके महान नायक मार्टिन लूथर किंग जूनियर को भी महात्मा गांधी से ही प्रेरणा मिली थी."

ब्रितानी निदेशक ने कहा था, "पोलैंड के राष्ट्रवादी नेता लैक वलेसा ने जेल से निकलने के बाद कहा था कि वह पहले जो कुछ कर रहे थे उससे कुछ नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि मानवीय गरिमा और शांति पाने का एक ही रास्ता है और वह है गांधी का रास्ता. गांधी ने कहा था कि हमें उस तरीक़े के बारे में सोचना चाहिए जिसके माध्यम से हम अपनी समस्याएं सुलझाना चाहते हैं. 20वीं शताब्दी में हम जिस तरह से मानवीय गरिमा को तलाश कर रहे हैं उससे अंतत: हम एकदूसरे का सिर उड़ा देंगे."

रिचर्ड एटनबरो ने कहा था, "गांधी ने हमें इस तरीके पर पुनर्विचार करने को कहा था. उन्होंने कहा था कि अगर हम अहिंसा के रास्ते पर चलें तो समस्याएं सुलझाने का तरीका उससे अलग होगा जो हम आज अपना रहे हैं. मुझे लगता है कि उनके पास दुनिया में सभी के लिए कुछ न कुछ संदेश था."

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