मंगलुरु और कोयंबटूर में हुए धमाकों का क्या आपस में कोई कनेक्शन है?

इमेज स्रोत, ANI
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरु से
कर्नाटक पुलिस मंगलुरु में हुए लो इंटेंसिटी ब्लास्ट और तमिलनाडु के कोयम्बटूर में अक्टूबर में हुए ब्लास्ट के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है.
पुलिस ने ये जांच अभियुक्त मोहम्मद शारिक के परिवार वालों से अस्पताल में पहचान सुनिश्चित करने और शारिक को गिरफ़्तार करने के बाद शुरू की है.
शनिवार को एक ऑटो रिक्शा में एक लो इंटेन्सिटी ब्लास्ट हुआ था जिसमें शारिक मौजूद था. डिवाइस एक प्रेशर कुकर में रखा गया था.
आरोप है कि शारिक इसे मंगलुरु में किसी प्रार्थना की जगह पर ले जा रहा था. इस ब्लास्ट में शारिक का शरीर 40 फ़ीसदी जल गया है. पुलिस पूछताछ के लिए शारिक के ठीक होने का इंतज़ार कर रही है.
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दोनों धमाकों के बीच समानता
इस मामले में कोयंबटूर का एंगल इसलिए सामने आया है क्योंकि 23 अक्तूबर को वहां के मंदिर के पास खड़ी एक गाड़ी में ऐसा ही ब्लास्ट हुआ था. उस ब्लास्ट में अभियुक्त मुबीन की मौत हो गई थी.
कोयंबटूर और मंगलुरु के धमाकों में फ़र्क ये है कि कोयंबटूर में ब्लास्ट गैस सिलिंडर से हुआ था और मंगलुरु का ब्लास्ट एक प्रेशर कुकर में हुआ था, एक ही तरह से सर्किट बोर्ड से.
हालांकि एक पुलिस अधिकारी ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि दोनों बम बनाने के तरीकों में समानता पाई गई है.
कर्नाटक के डीजीपी प्रवीण सूद ने बीबीसी से कहा, “हमें काफ़ी मटेरियल और बम बनाने से जुड़े दस्तावेज़ मैसूर के घर में मिले हैं जहां वो रह रहा था. इससे पहले वो कोयंबटूर और तमिलनाडु के दूसरे शहरों में कई जगहों पर गया था. उन्होंने घर को प्रेम राज के नाम पर किराए पर लिया था, इसी नाम का आधार कार्ड उसने मकान मालिक को दिया था.”
हुबली के प्रेम राज तुमाकुरू में काम करते हैं, और उनका आधार कार्ड उनसे छह महीने पहले खो गया था.
बताया जा रहा है कि इसी कार्ड का इस्तेमाल करके शारिक ने किराए पर घर लिया और खुद के बारे में कहा कि वो मोबाइल रिपेयरिंग का एक कोर्स कर रहा है.
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पहले भी लगे हैं शारिक पर आरोप
सूद के मुताबिक, “हम शारिक के दो दोस्तों से भी बात करेंगे जिनके बारे में भी कहा गया कि वो भी यही मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स कर रहे हैं.”
शारिक, जिसकी उम्र बीस साल से थोड़ी ज़्यादा है, पुलिस के मुताबिक वो “कट्टरवाद से बहुत प्रभावित” था. उस पर आरोप है कि वो दो बड़ी वारदातों से जुड़ा हुआ है, जो मंगलुरु और शिवमोगा में हुई थी.
साल 2020 में मंगलुरु में दीवार पर ग्रैफ़िटी बनाने के आरोप में शारिक को यूएपीए की धारा के तहत गिरफ़्तार किया गया था. ग्रैफ़िटी में लिखा था, “हमें एलईटी (लश्कर-ए-तैयबा) को बुलाने पर मजबूर न करें.” ये वारदात सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन के बाद की है. हालांकि कोर्ट ने शारिक को ज़मानत दे दी थी.
शारिक पर आरोप है कि कुछ महीनों पहले वो शिवमोगा में एक्टिव था, जब वीर सावरकर के एक बैनर को लेकर विवाद हुआ था. शारिक शिवमोगा ज़िले के तीर्थहल्ली का रहने वाला है.
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सूद के मुताबिक, “वो कोयंबटूर और तमिलनाडु और केरल के दूसरे शहरों से भागकर मैसूर में आ बसा, जहां उसने अपना नाम प्रेम राज बताया. हालांकि प्रेम राज निर्दोष हैं.”
इससे पहले सूद ने कहा था कि मंगलुरु का बम धमाका “भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया आतंकी हमला है.”
कर्नाटक का तटीय क्षेत्र, विशेष रूप से मंगलुरु, लंबे समय से सांप्रदायिक रूप से एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है. यहां चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े कुछ तार मिलते हैं.
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