इंस्टाग्राम क्या किसी व्यक्ति की हत्या का कारण बन सकता है?

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- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता

क्या इंस्टाग्राम पर किसके कितने फ़ॉलोअर्स हैं या उस पर की गई पोस्ट किसी को हत्या के लिए उकसा सकती है?
राजधानी दिल्ली में दो युवाओं की चाकू मारकर हत्या कर दी गई.
इस मामले में चार युवा पकड़े गए हैं जिनमें दो लड़कियां भी हैं.
पुलिस के अनुसार, इलाक़े में किसकी कितनी ज़्यादा महत्ता है और इंस्टाग्राम पर किसके ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं, ये दोनों वजहें हत्या की कारण बनीं.

मुकंदपुर इलाक़ा उत्तरी दिल्ली के बाहरी इलाके में पड़ता है और यहां की ज़्यादातर आबादी निम्न और निम्न-मध्यवर्ग की है.
पुलिस के अनुसार, मुकंदपुर की ये घटना पांच अक्तूबर को हुई.
पुलिस उपायुक्त (बाहरी दिल्ली) देवेश कुमार महला ने बीबीसी को बताया कि पुलिस को मौक़े पर पहुंचने के बाद पता चला कि दो नाबालिग़ों पर चाकू से हमला हुआ है और उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है.
इस मामले में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) का मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस के अनुसार, इस घटना के बाद चार युवाओं को पकड़ा गया है. इसमें भाई (बालिग़) और दो बहनें हैं और चौथा लड़का भी नाबालिग़ है.
हत्या का कारण?

लेकिन हत्या का कारण क्या है?
इसका जवाब देते हुए देवेश कुमार महला कहते हैं कि इन युवाओं में इलाक़े में अपनी महत्ता को लेकर, साथ ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ये एकदूसरे के मुक़ाबले से कितने प्रभावशाली हैं, इसे लेकर भी प्रतिस्पर्धा थी.
उनके अनुसार, "इस मामले में पूछताछ और जांच के बाद पता चला कि इलाक़े में किसकी महत्ता ज़्यादा है, इंस्टाग्राम पर किसके कितने फ़ॉलोअर्स हैं, कितने लाइक हैं, इसे लेकर भी इनके बीच में झगड़ा था."
पुलिस के अनुसार, इन युवाओं की एकदूसरे से जान-पहचान थी और ये सब एक सुनियोजित तरीक़े से किया गया क्योंकि कोई भी अपने साथ चाकू लेकर नहीं घूमता है.
पुलिस का कहना था कि "पूछताछ के दौरान अभियुक्त लड़की ने आरोप लगाया था कि उसके साथ छेड़छाड़ भी की गई थी और उसी ने फ़ोन करके दोनों लड़कों को इलाक़े की 14 नंबर गली में बुलाया था."
ये युवा एक ही मोहल्ले से हैं और इन सभी के घर भी आसपास हैं.
घटना की रात क्या हुआ?

इलाक़े में रह रहे लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से जब बीबीसी ने बात की तो उनका कहना था कि उस समय रात के क़रीब 11.30 बजे होंगे जब उन्होंने बाहर शोर सुना.
इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी सीमा ने बताया, "मेरे पति रेहड़ी लगाते हैं. वे लौटकर घर आए थे और में रोटी सेंक रही थी. मैंने उस वक्त बाहर से कुछ आवाज़ें सुनीं. पति को खाना देकर मैं बाहर आई तो देखा कि ये बच्चे झगड़ रहे थे.
इधर से गुड़िया भी आ गई और अपने बेटे और उसके दोस्त को समझाने लगी. बाद में बच्चे उस गली में चले गए. इसके बाद अचानक गुड़िया चिल्लाई मेरे बेटे को चाकू मार दिया. इसके बाद उन्होंने उसके दोस्त को चाकू मार दिया. हम बहुत घबरा गए."
गुड़िया पांडे और उनका परिवार फ़िलहाल मृत बेटे के लिए पूजा-पाठ करने के लिए गांव गया हुआ है.
हमारी मुलाक़ात मृतक की नानी, माया देवी से हुई जो घर के दरवाज़े के बाहर ही बैठी थीं.
उन्होंने रोते हुए कहा, "मुझे तो सुबह पता चला की मेरी नाती की हत्या हो गई है. मुझे दोषियों के लिए फांसी की सज़ा चाहिए."
मृत लड़के की मामी (सावित्री) और सीमा से जब हमने पूछा कि क्या उन्होंने कभी इंस्टाग्राम को लेकर बच्चों को चर्चा करते हुए सुना था?
दोनों का जवाब था, "कभी नहीं, हम इंस्टाग्राम और इस बारे में कुछ नहीं जानते."
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घटना के बाद लोगों का क्या कहना है
सीमा ये ज़रूर कहती हैं कि 'अगर इंस्टाग्राम को लेकर भी कोई झगड़ा था तो इस कारण कोई किसी का क़त्ल थोड़ी ही न कर देगा.'
मृत लड़के के दोस्त रज़ा (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि वे स्कूल में एक साथ पढ़ते थे.
वे बताते हैं, "ये सारे लोग जिनकी मौत हो चुकी है और जो पकड़े गए हैं, सभी इंस्टाग्राम पर थे और पोस्ट करते रहते थे. उनके बीच कभी लाइक्स या फ़ॉलोअर्स को लेकर झगड़ा हुआ हो, ऐसा मैंने नहीं सुना."
मृत लड़के के बड़े भाई विशाल पांडे ने गांव से बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत की. उन्होंने कहा, "इंस्टाग्राम मैं भी चलाता हूं, लेकिन इंस्टाग्राम का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. मुझे इस बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं है."
मयंक पांडे भी दोनों लड़कों को स्कूल के दिनों से जानते हैं.
वे कहते हैं, "आप इन सभी के इंस्टाग्राम पर अकाउंट देख लीजिए ये कैसे वीडियो बनाते थे. इनका मोटिव ये था कि उनका नाम हो. लेकिन चाकू किस कारण चला इसके बारे में मैं नहीं कह सकता."
इस मामले में पकड़े गए युवाओं के परिवार से भी बीबीसी ने बात करनी चाही, लेकिन उनके घर पर ताला लगा हुआ था.
पुलिस और आसपास के लोगों से बातचीत में पता चला कि मामले में दोनों मृत लड़कों और पकड़े गए युवाओं ने स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की थी.
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सोशल मीडिया का असर
सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम बनता जा रहा है जहां व्यक्ति कम वक्त में ज़ल्दी शोहरत हासिल कर सकता है. यहां फ़ॉलोअर्स और लाइक्स को लेकर होड़ नज़र आती है. यहां लोग अपनी भावनाओं को पेश करने में हिचकते नहीं है और वो इसे अपने निजी स्पेस की तरह ही देखते हैं.
दिल्ली स्थित सेंट स्टीफ़नअस्पताल में मनोचिकित्सक डॉक्टर रूपाली शिवलकर कहती हैं कि आमतौर पर आजकल बच्चों में गुस्सा ज़्यादा देखने को मिलता है, लेकिन दिल्ली में हुए ताज़ा मामले को देखें तो ये बच्चे समाज के निचले तबके से आते हैं जहां ज़्यादातर के माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं होते.
वो कहती हैं, "इन बच्चों के माता-पिता दिहाड़ी मज़दूर हैं और ये बच्चे स्कूली पढ़ाई भी पूरी नहीं करते. ऐसे में इनके आसपास हो रही घटनाओं से ये प्रभावित होते हैं.
वहां की असमाजिक गतिविधियों से गुज़रना इनके लिए रोज़ का काम होता है और ये इनके लिए असामान्य नहीं होता. ये जो देख रहे होते हैं वही सीखते हैं. उन्हें ये समझाने वाला कोई नहीं होता कि क्या ग़लत है और क्या सही है."

वो कहती हैं कि ऐसे में ये कहना कि इन बच्चों की ग़लती है, सही नहीं है क्योंकि यहां ये देखना होगा कि क्या ऐसे बच्चों को सही सलाह या मार्गदर्शन दिया गया था?
वो कहती हैं कि ''बच्चों में इतना गुस्सा आने के कई कारण हो सकते हैं. इसमें अपने आप से निराशा या फ़्रस्टेट होना प्रमुख है. वो किसी की तरह बनना चाहते हैं (रोल मॉडल) या कंडक्ट डिसऑर्डर की दिक़्क़त से गुज़र रहे होते हैं.''
मनोचिकित्सकों के अनुसार, कंडक्ट डिसऑर्डर का संबंध व्यवहार से है जिसमें बच्चा समाजिक नियमों के अनुसार व्यवहार नहीं करता. उसे अपने काम के लिए अपराध या आत्मग्लानि का बोध नहीं होता.
वो बताती हैं कि अगर ऐसे मामलों की जड़ में जाएं तो इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे ऐसे बच्चों में ध्यान की कमी, मादक पदार्थों का इस्तेमाल, या ये भी हो सकता है कि वो किसी सदमे से गुज़र रहे हों.
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भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल
इंस्टाग्राम पर 13 साल की उम्र के बाद कोई बच्चा अपना अकाउंट बना सकता है. यहां अगर किसी ने अपना अकाउंट प्राइवेट नहीं किया है तो उस व्यक्ति की पोस्ट सार्वजनिक होती है. कोई भी उसे देख सकता है और उस पर कॉमेंट कर सकता है.
केंद्र सरकार ने पिछले साल सोशल मीडिया कंपनियों को लेकर नए और सख़्त दिशानिर्देश जारी किए थे. इस दौरान केंद्रीय मंत्री रहे रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "भारत में व्हाट्सऐप के 53 करोड़ यूज़र हैं, यूट्यूब के 44.8 करोड़, फ़ेसबुक के 41 करोड़ और 21 करोड़ और ट्वीटर का इस्तेमाल 1.75 करोड़ लोग करते हैं."
जानकारों के मुताबिक़, हाल के दिनों में इंस्टाग्राम युवाओं में काफ़ी लोकप्रिय हुआ है.
जानकार मानते हैं कि तकनीक दोधारी तलवार की तरह होती है जिसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं. ऐसे में इसका संतुलित इस्तेमाल होना बेहद ज़रूरी है, जो अक्सर लोग भूल जाते हैं.
डॉक्टर रूपाली शिवलकर मानती हैं कि पिछले कुछ वर्षों ख़ासकर कोविड महामारी के दौरान स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. वो कहती हैं कि अब भारत में इंटरनेट डीएडिक्शन क्लीनिक खुल रहे हैं. वो कहती हैं कि ये उदाहरण है कि इसका इस्तेमाल कितना घातक हो रहा है.
वो कहती हैं, "हमें अपने बच्चों को ये बताने की ज़रूरत है कि सोशल मीडिया का संतुलित इस्तेमाल होना चाहिए ताकि इसकी लत न लगे."
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कैसे पहचानें कि बच्चा सोशल मीडिया की लत में पड़ रहा है?
- अगर आपका बच्चा लगातार या पूरा दिन फ़ोन पर रहे
- फ़ोन लेने पर चिड़चिड़ाने लगे, गुस्सा हो, चुनौती देने लगे कि फ़ोन क्यों वापस लिया?
- रोज़मर्रा के काम से ध्यान हटना
- सामाजिक दुनिया (दोस्तों)से नाता तोड़ ले

मनोचिकित्सक सलाह देते हैं कि अगर इस तरह के संकेत बच्चे में दिखाई देते हैं तो उन्हें तुरंत फ़ोन या ऐसे गैजट को हटा देना चाहिए और उसके स्थान पर रोज़मर्रा की चीज़ें बच्चों के जीवन में लानी चाहिए. उन्हें घर के छोटे-छोटे काम करने के लिए उत्साहित करना, बाहर खेलने और दोस्तों से मिलने के लिए प्रोत्साहित करना ज़रूरी है.
हो सकता है कि शुरुआत में अभिभावकों को इसमें दिक़्क़त पेश आए, लेकिन अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती है तो मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिकों की सलाह से गुरेज़ नहीं करना चाहिए.
वो सलाह देते हैं कि बच्चों के लिए स्कूलों में मेंटल हेल्थ कार्यक्रम चलाने चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर स्वंयसेवी संस्थाओं की मदद लेनी चाहिए. वहीं ऐसे इलाक़े जहां बच्चों ने स्कूल बीच में ही छोड़ दिया है वहां बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करना चाहिए.
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