महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह की तारीख़, समय और स्थान सब तय, पर कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

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- Author, दीपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
महाराष्ट्र विधानसभा के परिणाम 23 नवंबर को आ गए थे.
लेकिन जीत के बावजूद बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन ने अभी तक सरकार बनाने का दावा नहीं किया गया है और न ही नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की है.
एकनाथ शिंदे वर्तमान में कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं.
न तो शिंदे की शिव सेना की ओर से, न ही बीजेपी और न ही अजित पवार की एनसीपी की ओर से यह कहा गया है कि मुख्यमंत्री पद पर कौन बैठेगा.
जानकारों का कहना है कि अब खींचतान मंत्रालयों को लेकर हो रही है लेकिन एकनाथ शिंदे के अगले क़दम पर भी विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं.

इस बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट से महाराष्ट्र की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की जानकारी दी है.
बावनकुले के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह पांच दिसंबर को मुंबई के आज़ाद मैदान में होगा.
चंद्रशेखर बावनकुले ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, "महागठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में गुरुवार, पाँच दिसंबर को शाम पाँच बजे मुंबई के आज़ाद मैदान में होगा."
एकनाथ शिंदे ने दशहरा रैली के अपने भाषण में कहा था, "मुझे हल्के में मत लीजिए."
बेशक, उस वक़्त उनका इशारा भले ही उद्धव ठाकरे की ओर था लेकिन ये भी चर्चा थी कि उनकी चेतावनी सहयोगी पार्टियों के लिए भी थी.
अब एकनाथ शिंदे ने बताया है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फोन पर जानकारी दी कि 'आप ये मत सोचिए कि मेरी वजह से मुख्यमंत्री बनाने में कोई दिक्क़त है.'
महाराष्ट्र की राजनीति में ये बीता हफ़्ता सियासी गहमागहमी भरा रहा लेकिन मुख्यमंत्री पद के नाम पर सस्पेंस अब भी बरकरार है.
रविवार को एकनाथ शिंदे मुंबई में सहयोगी दलों के साथ बैठक रद्द कर अपने शहर सतारा के लिए रवाना हो गए और कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता जो फ़ैसला लेंगे, वे उसे स्वीकार करेंगे.
लेकिन सवाल है कि आख़िर कौन बनेगा मुख्यमंत्री
अब तक का घटनाक्रम क्या है?

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23 नवंबर: महाराष्ट्र में विधानसभा नतीजे. विधानसभा की 288 सीटों में से 240 सीटें जीतकर साफ हो गया कि महायुति को बहुमत मिल गया है. गठबंधन में बीजेपी ने 130, शिव सेना (शिंदे गुट) ने 57 और अजीत पवार की एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं.
24 नवंबर: महायुति में सहयोगी दलों में मुख्यमंत्री पद के लिए होड़ शुरू. बीजेपी नेताओं ने कहा कि चूंकि उन्होंने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं इसलिए सीएम बीजेपी से ही होगी. शिंदे की पार्टी शिव सेना के नेता भी एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बने रहने की मांग करने लगे.
25 नवंबर: शिवसेना कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, जन प्रतिनिधियों ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई. इसके लिए प्रदेश में जगह-जगह कार्यक्रम चलाये गये. कुछ शिवसेना नेताओं ने कहा कि बिहार पैटर्न को महाराष्ट्र में भी लागू किया जाए. इस बीच एकनाथ शिंदे चुप्पी साधे हुए थे.
26 नवंबर: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सरकार का कार्यकाल समाप्त होते ही राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. इस दिन भी उन्होंने मीडिया से किसी भी तरह की चर्चा या प्रतिक्रिया से परहेज किया.
27 नवंबर: नाराजगी की खबरों के बीच एकनाथ शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी नेताओं का फ़ैसला पार्टी को मंज़ूर होगा.
28 नवंबर: महायुति के तीन नेताओं एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी से मुलाकात की. खबर आई कि एकनाथ शिंदे ने गृह और वित्त मंत्रालय की मांग रखी है. इस मुलाकात की तस्वीर देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की. लेकिन शिंदे ने कोई फोटो पोस्ट नहीं की. हालांकि मीडिया से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि बैठक सकारात्मक रही.
29 नवंबर: मुंबई में महायुति नेताओं की बैठक अचानक रद्द कर दी गई. इसके बाद एकनाथ शिंदे तुरंत अपने गृहनगर सातारा के लिए रवाना हो गए.चर्चा थी कि वे मंत्रालय के बंटवारे को लेकर नाखुश हैं. इस बीच शिंदे के सहयोगी उदय सामंत ने बताया कि एकनाथ शिंदे की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए वो सातारा गए हैं.
30 नवंबर: बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की. पार्टी ने अभी तक अपने विधायक मंडल के नेता का चयन नहीं किया है.
गृह और वित्त की मांग

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समझा जाता है कि एकनाथ शिंदे ये प्रस्ताव रख रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद की जिद छोड़ने के बदले उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाए और मंत्रिमंडल में स्वतंत्र निर्णय लेने की अनुमति दी जाएगी.
लेकिन ख़बर है कि शिव सेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे इस बात से नाराज़ हैं कि बीजेपी अहम मंत्रालय छोड़ने को तैयार नहीं है और वित्त मंत्रालय अजित पवार के पास ही रहने देने की योजना है.
एकनाथ शिंदे के सहयोगी और विधायक संजय शिरसथ ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अगर मुख्यमंत्री का पद बीजेपी के पास जाता है तो गृह मंत्री पद के लिए हमारी ज़िद निश्चित होगी."
एकनाथ शिंदे ख़राब स्वास्थ्य का हवाला देकर शुक्रवार (29 नवंबर) को अपने गृहनगर सातारा के लिए रवाना हुए थे. वहाँ जाने के बाद भी अभी तक मीडिया से बातचीत नहीं की है.
वहीं संजय शिरसथ ने कहा, "अगर कोई महत्वपूर्ण फ़ैसला लेना हो तो एकनाथ शिंदे अपने गांव जाते हैं."
शिरसथ के इस जवाब के बाद एक नई चर्चा छिड़ गई है.
पिछले ढाई साल की गठबंधन सरकार के दौरान बीजेपी ने सिर्फ 40 विधायक होने के बावजूद एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा दिया. हालाँकि गृह मंत्री देवेन्द्र फडणवीस थे और अजित पवार के पास वित्त मंत्रालय था.
इससे यह पता चलता है कि अगर महागठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बीजेपी का है तो इन दोनों विभागों में से एक विभाग एकनाथ शिंदे को दिया जा सकता है
शिंदे की पार्टी के प्रवक्ता संजय शिरासाथ कहते हैं, "अगर मुख्यमंत्री का पद बीजेपी के पास जाता है तो हमारी ज़िद पक्की होगी कि गृह खाता हमारे पास रहे क्योंकि पिछली बार मुख्यमंत्री के पास गृह मंत्रालय नहीं था. वो उपमुख्यमंत्री के पास था."
मंत्रालयों को लेकर तो बयान सामने आ रहे हैं लेकिन सीएम कौन होगा इसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है.
एकनाथ शिंदे के सामने क्या हैं विकल्प?

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महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी अपने समर्थक निर्दलीयों के साथ 138 का आंकड़ा आसानी से पार कर जाएगी. वहीं अजित पवार के पास 41 सीटें हैं. ये बात तो सच है कि एकनाथ शिंदे के बिना भी राज्य में बीजेपी की सरकार बन सकती है.
हालांकि, विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस बात की कोई संभावना नहीं है कि बीजेपी एकनाथ शिंदे से अलग हो जाएगी. अगर बीजेपी ऐसा करती है तो पार्टी की छवि खराब होगी.
साथ ही इसका असर आगामी स्थानीय निकायों के चुनावों पर भी पड़ सकता है. इतना ही नहीं केंद्र की एनडीए सरकार में एकनाथ शिंदे के सात सांसद हैं.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मृणालिनी नानीवडेकर कहते हैं, "बीजेपी एकनाथ शिंदे को अपना मन बदलने के लिए समय दे रही है क्योंकि एकनाथ शिंदे के पास बातचीत की ज़्यादा गुंजाइश नहीं है. अगर पर्याप्त समय देने के बाद भी उन्हें स्थिति का एहसास नहीं हुआ तो बीजेपी उनके बिना भी सरकार बना सकती है.”
समझा जाता है कि एकनाथ शिंदे की गृह या वित्त विभाग के साथ विधानसभा अध्यक्ष पद की भी मांग है.
लेकिन क्या इनमें से कोई भी मांग न माने जाने पर एकनाथ शिंदे कोई बड़ा फ़ैसला ले सकते हैं?
ऐसी भी चर्चा है कि वे सरकार को बाहर से समर्थन देने पर भी विचार कर सकते हैं.
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं, "महाराष्ट्र की राजनीति की अनिश्चितता को देखते हुए कुछ भी असंभव नहीं है. इस वजह से अगर एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद के लिए तैयार नहीं होते हैं और उन्हें मनमुताबिक़ वजनदार ओहदा नहीं मिलता है तो वह गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे सकते हैं."
बीजेपी को मुख्यमंत्री घोषित करने में क्या दिक्क़त है?

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महागठबंधन की दो सहयोगी पार्टियों ने अपने-अपने ग्रुप के नेताओं का चयन कर लिया है.
शिव सेना ने विधायक दल की बैठक में अपने प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे को समूह नेता चुना और उन्हें निर्णय लेने की सभी शक्तियां दे दीं. वहीं अजित पवार को एनसीपी का ग्रुप लीडर भी चुना गया है.
लेकिन अभी तक बीजेपी विधायक दल की बैठक नहीं हुई है. इसकी वजह से बीजेपी खेमे में भी इसे लेकर बेचैनी है.
भले ही मुख्यमंत्री पद की रेस में देवेन्द्र फडणवीस का नाम सबसे आगे चल रहा है लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या बीजेपी चौंकाने वाली रणनीति अपनाकर नए चेहरे की घोषणा करेगी?
बीजेपी की प्रक्रिया के मुताबिक़ केंद्र से दो पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं. इनकी मौजूदगी में सभी विधायकों की बैठक होती है. इसी बैठक में नेता का चयन किया जाता है.
लेकिन इस बैठक के टलने और पिछले कुछ सालों में मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर लिए गए फ़ैसलों के कारण किसी चौंकाने वाले नाम से इनकार नहीं किया जा सकता.
इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर चौंका दिया था.
राजस्थान में भी नतीजों के बाद जहां वसुंधरा राजे और गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम चर्चा में थे, वहीं क़रीब नौ दिन बाद नए विधायक भजनलाल शर्मा को मौक़ा दिया गया.
छत्तीसगढ़ में भी जब कई दिग्गजों के नाम चर्चा में थे तो बीजेपी ने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर विष्णुदेव साय के नाम पर मुहर लगा दी.
इस बारे में बात करते हुए मृणालिनी नानीवाडेकर कहती हैं, "अच्छा होता अगर नेता का चुनाव नतीजे आने के बाद ही हो जाता लेकिन महाराष्ट्र में अक्सर ऐसी उलझन होती रहती है. पिछली गठबंधन सरकार में भी ऐसा हो चुका है. भाजपा की चौंकाने वाली रणनीति के उदाहरणों से फडणवीस के समर्थक बेचैन हो सकते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद पर फैसला कर लिया है."
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