रोहित के बाद अब विराट पर नज़र, लेकिन रणजी खेलने से क्यों बचते हैं स्टार खिलाड़ी

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- Author, सौरभ कुमार यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय क्रिकेट टीम के धुरंधरों को अपनी खोई लय हासिल करने के लिए रणजी ट्रॉफी में खेलना चाहिए. यह इन दिनों भारतीय क्रिकेट में बहस का नया मुद्दा बना हुआ है.
ख़राब फ़ॉर्म से गुजर रहे रोहित शर्मा रणजी ट्रॉफी में भी फॉर्म वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि विराट कोहली भी रणजी में खेलने के लिए अभ्यास में जुटे हैं.
पहले न्यूज़ीलैंड और बाद में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ गंवाने के बाद भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ियों का प्रदर्शन सवालों के घेरे में रहा है.
ऐसे में पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट खेलने पर भी ध्यान देना चाहिए.

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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत की हार के बाद भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने यहां तक कहा कि 'रणजी क्रिकेट शुरू हो रहा है. मैं देखना चाहता हूं कि कितने खिलाड़ी उसमें खेलते हैं.'
गंभीर ने खिलाड़ियों को रणजी क्रिकेट खेलने को क्यों कहा?

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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारतीय बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन निराशाज़नक रहा, ख़ास तौर से सीनियर खिलाड़ियों का. जिसके कारण भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में पहुंचने से चूक गई.
विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पांच टेस्ट मैचों में कुल 190 रन बनाए, जिसमें उनका एक शतक भी शामिल था, जबकि न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में कोहली ने छह पारियों में कुल 93 रन बनाए थे.
रोहित शर्मा ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी में तीन मैच खेले, जिसमें उन्होंने कुल मिलाकर 31 रन बनाए और उनका सर्वाधिक स्कोर 10 रन रहा. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में रोहित ने छह पारियों में महज 91 रन बनाए थे.
वहीं केएल राहुल ने न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कुल मिलाकर 12 पारियों में 284 रन बनाए हैं, जिसमें उनके दो अर्धशतक भी शामिल हैं.
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के अंतिम मैच के बाद प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने कहा था, "मैं हमेशा चाहता हूं कि सभी खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलें. अगर आप लाल गेंद से क्रिकेट खेलने के प्रति प्रतिबद्ध हैं तो घरेलू क्रिकेट खेलें. अगर आप घरेलू क्रिकेट को महत्व नहीं देते हैं तो आपको कभी भी मनचाहे परिणाम नहीं मिलेंगे जो आप टेस्ट क्रिकेट में चाहते हैं."
क्या बोले पूर्व क्रिकेटर और एक्सपर्ट

पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन का कहना है, "आप घर में न्यूज़ीलैंड से हार गए. आपने टर्निंग ट्रैक बनाए और आपके बैट्समैन ही नहीं खेल सके. हम ऑस्ट्रेलिया से बुरी तरह से मैच हारे. इसलिए घरेलू क्रिकेट की इतनी चर्चा हो रही है. जब भी हम कोई बड़ी सिरीज़ हारते हैं तो एक ही कारण बताया जाता है कि आप तो घरेलू क्रिकेट खेल नहीं रहे हैं."
वरिष्ठ खेल पत्रकार चंद्र शेखर लूथरा का कहना है, "घरेलू क्रिकेट के आधार पर ही चयन होना चाहिए. 2005-06 में जब दिलीप वेंगसकर टीम के मुख्य चयनकर्ता थे तब यह स्पष्ट निर्देश थे कि आपको घरेलू क्रिकेट खेलना ही होगा, यदि आप इंजर्ड होते हैं तो भी आपको घरेलू क्रिकेट में ही अपनी फिटनेस साबित करनी होती थी."
अतुल वासन कहते हैं, "मेरे हिसाब से चेतेश्वर पुजारा सबसे बेहतर खिलाड़ी हैं क्योंकि वह मैच को बचाते हैं. वह 50-100 गेंद खेलते हैं और 10 रन बनाते हैं क्योंकि यही टेस्ट क्रिकेट की ज़रूरत है. अगर आप ऐसे खिलाड़ी नहीं बनाएंगे तो टी20 के खिलाड़ियों का टेस्ट में यही हाल होगा. रहाणे और पुजारा जैसे खिलाड़ियों की हमारी इस सोसायटी में कीमत नहीं है."
वह कहते हैं कि घरेलू क्रिकेट खेलने से ये नहीं होगा कि समस्या का समाधान हो जाएगा. लेकिन एक संदेश ज़रूर जाएगा कि जिस क्रिकेट ने आपको स्टार बनाया है उसकी आप डिसरिस्पेक्ट नहीं करें, जब भी आप उपलब्ध हों, अपने स्टेट के लिए क्रिकेट खेलें.
चंद्र शेखर लूथरा का कहना है, "समस्या यह है कि अब टेस्ट क्रिकेट तीन-तीन दिन में खत्म हो रहे हैं. आईपीएल के आधार पर टेस्ट खिलाड़ियों का चयन नहीं होना चाहिए. अगर आप पुराने खिलाड़ी जैसे सुनील गावस्कर से पूछिए तो वह कहते थे अगर मैच को बचाना या जीतना है तो बॉल खेलने से ज्यादा बॉल छोड़ना आना चाहिए."
बड़े खिलाड़ी रणजी क्यों नहीं खेलना चाहते हैं?

भारतीय टीम के बड़े खिलाड़ी लंबे समय से घरेलू क्रिकेट खेलने से बचते रहे हैं. रोहित शर्मा जब जम्मू- कश्मीर के ख़िलाफ़ रणजी मैच खेलने उतरे तब पता चला कि रोहित शर्मा ने पिछला रणजी मैच नौ साल पहले खेला था.
भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली भी 30 जनवरी को रेलवे के ख़िलाफ़ रणजी मैच में खेलने उतरेंगे तो 13 साल बाद घरेलू क्रिकेट में वापसी करेंगे.
सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल ने पिछला रणजी मैच साल 2020 में खेला था. वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत ने अपना पिछला रणजी मैच साल 2017-18 में खेला था.
खेल पत्रकार चंद्र शेखर लूथरा का कहना है, "यह सिर्फ़ कोहली या रोहित की बात नहीं है. उनके सीनियर खिलाड़ी भी सालों बाद घरेलू क्रिकेट खेलते थे. पहले रणजी ट्रॉफ़ी में जाकर फिटनेस साबित करनी होती थी अब वह सिस्टम खत्म हो गया है."
पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन कहते हैं, "जितने भी इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं, जब वो स्टार बन जाते हैं तो उन्हें रणजी खेलना लोड लगने लगता है. खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अच्छा करके सोचते हैं कि घरेलू क्रिकेट से जान छूट गई है. इस तरह की सोच गलत है."
लूथरा कहते हैं, "होना तो यही चाहिए था कि आपको घरेलू क्रिकेट खेलनी ही पड़ेगी, लेकिन यह तय कौन करेगा. एक ऐसी कमिटी होनी चाहिए जो खिलाड़ियों के वर्क लोड को देखे. जब एक खिलाड़ी सारे फॉर्मेट मिलाकर साल के 220 दिन क्रिकेट खेल रहा है तो उस पर लोड तो बढ़ेगा ही. ऐसे में खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलने से बचते हैं, वह आराम करना चाहते हैं."
अतुल वासन कहते हैं, "घरेलू क्रिकेट खेलने में खिलाड़ियों को रिस्क लगता है, अगर वह वहां भी फेल हो जाएंगे तो लोग बात करेंगे, कहेंगे देखिए आप तो रणजी में भी रन नहीं बना पाए, लोग आपको जज करने लगते हैं."
क्या कम पैसा है घरेलू क्रिकेट न खेलने की वजह

बीसीसीआई से अनुबंध पाने वाले ए प्लस कैटेगरी के खिलाड़ी को 7 करोड़ रुपये मिलते हैं, जिसमें खिलाड़ियों की मैच शामिल नहीं है.
एक खिलाड़ी को एक वन-डे मैच खेलने के लिए छह लाख रुपये, एक टी20 मैच के लिए तीन लाख रुपये और एक टेस्ट मैच खेलने के लिए 15 लाख रुपये की फीस दी जाती है.
अगर इंडियन प्रीमियर लीग की बात करें तो साल 2025 के लिए हुई नीलामी में ऋषभ पंत को 27 करोड़, वेंकटेश अय्यर को 23 करोड़, केएल राहुल को 14 करोड़, मोहम्मद सिराज को सवा 12 करोड़ और युज़वेंद्र चहल को 18 करोड़ रुपए मिले हैं. आईपीएल में मिलने वाली मोटी रकम के कारण भी खिलाड़ियों का झुकाव आईपीएल खेलने की तरफ रहता है.
हैदराबाद टीम के लिए रणजी खेलने वाले खिलाड़ी और कई मैचों में हैदराबाद की टीम का नेतृत्व कर चुके राहुल गहलोत बताते हैं कि रणजी सीज़न के दौरान मैचों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों को अलग-अलग फीस दी जाती है.
वह बताते हैं कि 20 रणजी मैच खेलने वाले खिलाड़ी को प्रति दिन 40 हजार रुपये, 21 से 40 रणजी मैच खेलने वाले खिलाड़ी को प्रति दिन 50 हजार रुपये और 40 से अधिक रणजी मैच खेल चुके खिलाड़ियों को प्रति दिन 60 हजार रुपये फीस के रूप में मिलते हैं. बेंच पर रहने वाले खिलाड़ियों को कैटेगरी के हिसाब से मैच फीस का आधा पैसा मिलता है.
पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन कहते हैं कि जितने भी बड़े क्रिकेटर हैं वो इस स्तर पर पहुंच चुके हैं कि पैसे की बात तो जहन में भी नहीं आनी चाहिए. मुझे तो नहीं लगता है पैसा उनके दिमाग में आता भी होगा.
खेल पत्रकार चंद्र शेखर लूथरा का कहना है, "जब आप बीसीसीआई से अनुबंध प्राप्त खिलाड़ी हैं तो मैच फीस का सवाल ही नहीं उठता है. आपको अनुबंध में कई करोड़ रुपए इसीलिए दिए जाते हैं कि आप बीसीसीआई के टूर्नामेंट खेलेंगे. अगर खिलाड़ी को यह पता हो कि बिना रणजी मैच खेले उसे बीसीसीआई का अनुंबध नहीं मिलेगा तो वह रणजी ज़रूर खेलेगा."
वे खिलाड़ी जिन्हें अच्छे प्रदर्शन के बाद भी नहीं मिला मौका

घरेलू क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने प्रदेश और टीम को कई वर्षों तक सेवाएं दी, लेकिन उन्हें भारतीय टीम में चयनित नहीं किया गया. अगर किया भी गया तो उन्हें पर्याप्त मौके नहीं दिए गए. अगर हम इन नामों की चर्चा करें तो सबसे पहला नाम उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी आशीष विंस्टन ज़ैदी का आएगा.
आशीष विंस्टन ज़ैदी को उनके साथी 'अमर अकबर एंथनी भी बुलाते' थे. महज 17 साल की उम्र में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बतौर तेज़ गेंदबाज़ डेब्यू किया था.
साल 1991-92 में रणजी के दौरान हरियाणा के ख़िलाफ़ खेलते हुए जैदी ने 14 विकेट हासिल किए थे. उस वक्त हरियाणा की तरफ से कपिल देव भी खेल रहे थे.
आशीष जैदी का नाम साल 1992 वर्ल्ड कप के लिए संभावितों की सूची में भी था. साल 1988 में डेब्यू करने वाले आशीष विंस्टन जैदी ने उत्तर प्रदेश के लिए 18 साल क्रिकेट खेली. उन्होंने 110 मैचों में 378 प्रथम श्रेणी विकेट हासिल किए थे. उन्होंने 2006 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
इस सूची में पंजाब के गुरशरण सिंह का नाम भी शामिल है. उन्होंने साल 1992-1993 में पंजाब के रणजी ट्रॉफी जीतने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तब गुरशरण सिंह पंजाब टीम के कप्तान थे.
साल 1988-89 में गुरशरण सिंह ने रणजी के क्वॉर्टर फाइनल में पश्चिम बंगाल के खिलाफ़ खेलते हुए ईडन गार्डन के ऐतिहासिक मैदान पर 298 रनों की शानदार पारी खेली थी. गुरशरण सिंह को भारतीय टीम में सिर्फ एक टेस्ट मैच और एक वन-डे मैच खेलने का मौका मिला. उनका टीम में दोबारा चयन नहीं किया गया.
गुरशरण सिंह ने प्रथम श्रेणी के कुल 104 मैचों में 43.32 की औसत से कुल 5719 रन बनाए थे. साल 1994-95 में घरेलू क्रिकेट सीजन के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया.
जबकि दिल्ली के राजिंदर गोयल ने हरियाणा और उत्तर जोन की तरफ से खेलते हुए प्रथम श्रेणी के 157 मैचों में 750 विकेट चटकाए हैं. राजिंदर गोयल के नाम रणजी क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड है उन्होंने 637 विकेट चटकाए हैं.
कहा जाता है बिशन सिंह बेदी के भारतीय टीम में स्पिनर के तौर पर खेलते रहने के कारण राजिंदर गोयल को कभी भारतीय टीम में जगह नहीं मिल पाई. साल 1974-75 में राजिंदर गोयल को वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ के लिए चुना गया था लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाई थी.
आईपीएल को इतना महत्व क्यों

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तो इन नामों के बरक्श दूसरे उदाहरण भी हैं. आईपीएल में दमदार खेल दिखाकर खिलाड़ियों ने टीम इंडिया के दरवाज़े खोल लिए. इस सूची में जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, नितिश रेड्डी, संजू सैमसन, युजवेंद्र चहल, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और रिंकू सिंह जैसे कई खिलाड़ियों के नाम सामने आते हैं.
खेल पत्रकार चंद्र शेखर लूथरा कहते हैं, "रणजी वाले खिलाड़ियों को मालूम है कि अब हमारा चयन रणजी के जरिए नहीं हो रहा है. अब उनको आईपीएल में उल्टे सीधे शॉट खेलने हैं. अब आईपीएल के सेलेक्शन पर जोर है. रणजी खेलने वाले खिलाड़ी की अब स्टेट में कोई वैल्यू नहीं करता है, वहीं अगर वह आईपीएल खेल ले तो पूरे राज्य में उसकी इज्जत बढ़ जाती है."
सर्विसेस की टीम से रणजी खेलने वाले पूर्व खिलाड़ी देवेस पठानियां का कहना है, "खिलाड़ियों का झुकाव भी आईपीएल की तरफ हो रहा है. अगर घरेलू क्रिकेट से भी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बराबर का मौका मिले तो खिलाड़ी के दिमाग में रहेगा कि मैं कहीं से भी देश के लिए खेल सकता हूं. अगर मैं आईपीएल नहीं भी खेल रहा तो घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करके देश के लिए खेल लूंगा."
पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन कहते हैं कि 'आईपीएल में ग्लैमर है, मनोरंजन है, लोग फॉलो कर रहे हैं और क्रिकेट के साथ-साथ मनोरंजन भी हो रहा है. अनजान खिलाड़ी स्टार बन जा रहे हैं. ढेर सारे पैसे मिल रहे हैं. आईपीएल की पीछे सारी मशीनरी लगी हुई है.'
हालांकि अतुल वासन की मानें तो रणजी क्रिकेट, क्रिकेट के लिहाज से बेहतर है. वे कहते हैं, "आईपीएल क्रिकेट के लिहाज से अच्छा नहीं है. जो मेहनत वाली क्रिकेट है वो रणजी क्रिकेट है. भले ही खिलाड़ी के टैलेंट की पहचान आईपीएल के जरिए हो गई हो लेकिन उसके क्रिकेट की क्लास का आकलन रणजी से ही करना चाहिए. खिलाड़ी को बोलना चाहिए कि तुमने जो रणजी में दो तीन सीजन में क्रिकेट खेला है हमें वही क्रिकेट देखनी है."
क्या है रणजी क्रिकेट?

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रणजी ट्रॉफी भारत की घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता का नाम है. यह प्रथम श्रेणी क्रिकेट की चैंपियनशिप है. जो अलग-अलग राज्यों और सर्विसेस की टीमों की बीच खेली जाती है.
रणजी ट्रॉफ़ी का नाम भारत के पहले टेस्ट क्रिकेटरों में से एक रणजीत सिंह के नाम पर रखा गया है.
के. एस. रणजीत सिंह ने इंग्लैंड के लिए 1896 से 1902 के बीच 15 टेस्ट मैच खेले थे.
रणजी ट्राफ़ी की घोषणा 1934 में की गई थी और शुरुआती मुकाबले 1934-35 में खेले गए थे.
पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह ने रणजी की ट्रॉफी दान की थी.
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